शराब-घोटाला-केस…3100 पन्नों का चालान पेश:IAS निरंजन समेत 29 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस, EOW ने कहा-हर महीने 400 ट्रक शराब की सप्लाई, 3200 करोड़ का स्कैम
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में EOW ने सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में 29 आबकारी अफसरों के खिलाफ 29 बंडल दस्तावेजों में 3100 पन्नों का चालान पेश किया। शराब घोटाला मामले में इन सभी अफसरों को आरोपी बनाया गया है। इनकी कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है।
कोर्ट ने सभी आरोपी कर्मचारियों और अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 20 अगस्त को पेश होने को कहा है। शराब घोटाले में शामिल 29 में से 22 अधिकारी आबकारी विभाग में पदस्थ हैं, जबकि 7 अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। EOW के मुताबिक अफसरों ने नेताओं के इशारे पर गड़बड़ियां की है।
EOW के मुताबिक तात्कालीन आबकारी आयुक्त IAS निरंजन दास, तत्कालीन रायपुर जिला सहायक आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव समेत 29 अधिकारी-कर्मचारियों के नाम हैं। हर महीने 400 ट्रक शराब की सप्लाई होती थी। 3 साल में 60 लाख से ज्यादा शराब की पेटियां अवैध रूप से बेची गई।
3200 करोड़ से ज्यादा का घोटाला
EOW ने बताया है कि इस पूरे गड़बड़झाले की जांच के बाद शराब घोटाले की रकम जो अब तक करीब 2161 करोड़ मानी जा रही थी, जो बढ़ती जा रही है। ईओडब्ल्यू का दावा है कि गहन जांच के आधार पर घोटाले की कुल रकम 3200 करोड़ से ज्यादा लग रही है।
विदेशी शराब पर सिंडिकेट द्वारा लिए गए कमीशन का विश्लेषण किया जा रहा है। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, विजय भाटिया समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अधिकारियों की निगरानी में दुकानों में पहुंचती थी शराब- EOW
EOW का दावा है कि, यह शराब घोटाला 2019 से 2023 तक हुआ है। इस दौरान डिस्टलरी से जिलों में पदस्थ आबकारी अधिकारियों की निगरानी में डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर अवैध शराब डिस्टलरी से निकलकर सीधे दुकान तक जाता था।
तत्कालीन सहायक आयुक्त जनार्दन कौरव की निगरानी में डुप्लीकेट होलोग्राम प्रिंट होकर अमित सिंह, दीपक दुआरी और प्रकाश शर्मा के माध्यम से तीनों डिस्टलरी में जाती थी। वहां होलोग्राम लगाकर अवैध शराब सीधे दुकान पहुंचता था। डुप्लीकेट होलोग्राम लगी शराब की बिक्री से अरुणपति त्रिपाठी को 20 करोड़ रुपए का कमीशन मिला है।
EOW ने क्या दावा किया है ?
जांच एजेंसी ने चार्जशीट में बताया है कि फरवरी 2019 से आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार शुरू हुआ। शुरुआत में हर महीने 800 पेटी शराब से भरी 200 ट्रक डिस्टलरी से हर माह निकलती थी। एक पेटी को 2840 रुपए में बेचा जाता था।
इसके बाद हर माह 400 ट्रक शराब की सप्लाई शुरू हो गई। प्रति पेटी शराब 3880 रुपए में बेचा जाने लगा। ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि तीन साल में 60 लाख से ज्यादा शराब की पेटियां अवैध रूप से बेची गई।
2019 से 2023 तक शराब सप्लायरों से जिला आबकारी अधिकारियों ने 319 करोड़ रुपए की वसूली की है। यह पैसा सिंडिकेट को पहुंचाया गया। अप्रैल 2019 से जून 2022 तक अवैध शराब बेचकर 280 करोड़ रुपए वसूले गए।
हर साल 70 करोड़ से ज्यादा की वसूली का टारगेट था। जिला आबकारी अधिकारियों ने इस दौरान 2174.60 करोड़ की 60 लाख पेटी अवैध शराब बेची।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री कवासी लखमा की गिरफ्तारी के दौरान की तस्वीर।
जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।
A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला
A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन
2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।
B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना
डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई।
खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी।
शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिले शॉर्ट लिस्टेड किए गए
शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी।
डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है।
C: डिस्टलरीज की सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना
देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में विभाजित किया। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नई सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा।
एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके। इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा। EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है।
रायपुर, एजेंसी। दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को हुई INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के बड़े नेता शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इनके साथ ही कांग्रेस विधायक, पूर्व विधायक, जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता भी दिल्ली पहुंचे।
रैली में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ से 25 बसों में कांग्रेस कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे। इसके अलावा कई नेता और कार्यकर्ता ट्रेन और फ्लाइट से भी गए। रायपुर के अलावा कोरबा, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बालोद और राजनांदगांव से भी कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
राहुल गांधी के साथ विपक्ष के बड़े नेता भी शामिल
रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत INDIA गठबंधन के कई बड़े नेता शामिल हुए।
रैली से पहले विपक्षी नेताओं ने मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत कई नेता खुले वाहन में सवार होकर पहुंचे। रास्ते में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक भी मार्च में शामिल हुए।
SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन
रैली में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
कांग्रेस की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना, SIR के तहत हटाए गए मतदाताओं के नामों की प्रक्रिया रद्द करना और चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान कराना शामिल है।
छत्तीसगढ़ से 25 बसों में पहुंचे कार्यकर्ता
बता दें कि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने 30 अक्टूबर को रायपुर के बीटीआई मैदान से कार्यकर्ताओं की बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। प्रदेशभर से कुल 25 बसें दिल्ली भेजी गई थीं। कांग्रेस के मुताबिक, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक ने इस प्रदर्शन में भाग लिया।
रायपुर, एजेंसी। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को CBI ने गिरफ्तार कर लिया है। CBI ने अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर उसे ओमान में पकड़ा और भारत लाया गया है। अब उसे रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा।
महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामलों की जांच CBI कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से जुड़ी 13 FIR जांच के लिए CBI को सौंपी थीं। इसके अलावा ED के मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की गई है।
CBI ने अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर सौरभ चंद्राकर को ओमान में पकड़ा।
रेड कॉर्नर नोटिस में ओमान में पकड़ाया
CBI के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इसके आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे पकड़ लिया था। इसके बाद CBI और ED ने भारत सरकार के माध्यम से ओमान को उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजा। इसमें आरोपी के खिलाफ जुटाए गए सबूत भी दिए गए थे।
भारत सरकार की एजेंसियों, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी मिली। इसके बाद CBI की टीम मस्कट पहुंची और उसे लेकर भारत आई।
CBI की टीम मस्कट से सौरभ चंद्राकर को लेकर भारत आई।
देशभर में फैला था सट्टेबाजी का नेटवर्क
CBI की जांच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में शामिल था। इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।
इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी की तरह पैनल और ब्रांच बनाई गई थीं। इनके जरिए लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे पैसे जमा कराए जाते थे।
सौरभ चंद्राकर को कल रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा।
हवाला से विदेश भेजे जाते थे पैसे
जांच एजेंसी के मुताबिक, सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम कई बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इन खातों के जरिए अलग-अलग लेनदेन कर पैसे को छिपाया जाता था और हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।
CBI की जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क को बिना रुकावट चलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी जाती थी।
CBI ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, IPC की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के साथ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की है। वहीं ED भारत और विदेश में कई संपत्तियां अटैच कर चुकी है।
मेडिकल जांच के बाद रायपुर लाया जाएगा
CBI के मुताबिक, भारत पहुंचने के बाद सौरभ चंद्राकर का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड लेकर उसे रायपुर ले जाया जाएगा। 2 नवंबर को उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा।
देशभर में फैला ऑनलाइन बेटिंग का नेटवर्क
सीबीआई ने बताया कि महादेव ऐप देश में पकड़े गए सबसे बड़े गैर-कानूनी बेटिंग सिंडिकेट में से एक है, जिसे भारत के बाहर से चलाया जाता है। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों यूजर्स तक पहुंचने वाला एक देशव्यापी नेटवर्क बनाया।
रायपुर, एजेंसी। रायपुर में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए कीमत का प्रतिबंधित गुटखा जब्त किया है। पुलिस ने मुखबिर से मिले इनपुट के बाद संबंधित ठिकानों पर छापा मारा। मौके से बड़ी मात्रा में गुटखा बरामद किया गया है।
GST विभाग को दी सूचना
गुटखा मिलने के बाद पुलिस ने इसकी सूचना राज्य और केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग को दी है। पुलिस अब पता लगा रही है कि इस कारोबार के पीछे कौन लोग हैं और गुटखे की सप्लाई कहां-कहां की जा रही थी।
वहीं, गुटखे के भंडारण और परिवहन में टैक्स चोरी हुई है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। फिलहाल विभाग की टीम मामले की जांच कर रही है। यह कार्रवाई खमतराई थाना क्षेत्र में की गई।
सितंबर में भी DGGI ने की थी छापेमारी
इससे पहले 26 सितंबर 2026 में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम ने रायपुर के शदाणी दरबार मार्केट स्थित एक गोदाम में छापा मारा था। महाराष्ट्र से मिले इनपुट के बाद तीन गाड़ियों में अधिकारी कारोबारी के ठिकाने पर पहुंचे थे।
टीम को गोदाम में 50 से ज्यादा बोरे सितार गुटखा मिले थे। अधिकारियों ने गुटखे के स्टॉक और दस्तावेजों की जांच की थी। गोदाम मालिक समेत कुछ लोगों को बुलाकर पूछताछ भी की गई थी। पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई थी।
गुटखा कारोबारी बंटी से जुड़े थे तार
DGGI सूत्रों के मुताबिक, सितंबर में जिस गोदाम में छापेमारी हुई थी, वह गुटखा कारोबारी बंटी का बताया गया था। उसके दुर्ग में भी एक पार्टनर होने की जानकारी सामने आई थी।
बताया गया था कि महाराष्ट्र के कल्याण के पास फैक्ट्री से गुटखा बनवाकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मुंबई और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में सप्लाई किया जा रहा है।
दुर्ग में भी पकड़ी गई थी गुटखा बनाने की फैक्ट्री
रायपुर की कार्रवाई से पहले दुर्ग जिले के कुम्हारी में सेंट्रल GST इंटेलिजेंस की टीम ने एक फैक्ट्री में छापा मारा था। स्टेशन चौक इलाके में स्थित इस फैक्ट्री में सितार कंपनी का गुटखा बनाया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान टीम ने गुटखा बनाने वाली दो मशीनें और करीब 30 बोरे गुटखा जब्त किए थे।