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कोरबा

कोरबा के ग्रीन जोन में कब्जे का आरोप:पेड़ काटकर हो रही प्लाटिंग, निगम कर्मचारी पर मिलीभगत के भी आरोप

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कोरबा। कोरबा के मुड़ापार स्थित अंबेडकर भवन के पास नगर निगम के ग्रीन जोन में अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि कई एकड़ शासकीय जमीन पर हरे-भरे पेड़ काटकर अवैध प्लाटिंग की जा रही है। इस अवैध कब्जे में आम लोगों के साथ नगर निगम के एक कर्मचारी की संलिप्तता भी बताई जा रही है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार अंबेडकर भवन से सटी यह सरकारी जमीन ग्रीन जोन के रूप में चिन्हित है। पिछले कुछ दिनों से यहां लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं। जमीन को समतल कर टेंट और तिरपाल लगाकर अवैध प्लाटिंग की तैयारी की जा रही है। नागरिकों ने नगर निगम के कर्मचारी मनोज बक्सेल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

निगम कर्मचारी पर मिलीभगत के आरोप

उनका कहना है कि बक्सेल ने इसी शासकीय जमीन पर अपना मकान बना लिया है। शिकायत के बाद मौके पर जेसीबी भेजी गई थी, लेकिन उनके मकान पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। लोगों ने प्रशासन पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया है। अवैध कब्जे की शिकायत मिलने पर नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची थी।

अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई का दावा

टीम ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध प्लाटिंग का काम अब भी जारी है। पेड़ काटना और जमीन की नपाई नहीं रुकी है। वहीं इस मामले पर नगर निगम के जोन कमिश्नर पवन वर्मा ने बताया कि अवैध कब्जे और प्लाटिंग की शिकायत मिली थी, जिस पर मौके पर कार्रवाई की गई है। अन्य लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि निगम कर्मचारी की संलिप्तता के आरोपों पर विभागीय जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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पुलिस को चकमा देकर फरार हुआ आरोपी:बाथरूम का बहाना बनाकर भागा, पसान थाना में केस दर्ज, नाकाबंदी कर तलाश जारी

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कोरबा। कोरबा जिले के पसान थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत से एक आरोपी के फरार होने का मामला सामने आया है। युवती से छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार किया गया आरोपी बाथरूम जाने का बहाना बनाकर पुलिस को चकमा देकर भाग गया।

फरार आरोपी की पहचान खीरचंद के रूप में हुई है। उसके खिलाफ युवती से छेड़छाड़ के मामले में धारा 354 के तहत केस दर्ज था। वह लंबे समय से फरार चल रहा था। कोर्ट ने उसके खिलाफ स्थायी वारंट भी जारी किया था।

सूचना पर पुलिस ने पकड़ा था आरोपी

कटघोरा एसडीओपी विजय राजपूत ने बताया कि खीरचंद धारा 354 के पुराने मामले का स्थायी वारंटी था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इसी दौरान उसके बारे में सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस टीम ने उसे पकड़ लिया।

पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी। इसी दौरान उसने बाथरूम जाने की बात कही। पुलिसकर्मियों ने उसे बाथरूम जाने दिया। इसी का फायदा उठाकर आरोपी मौके से भाग निकला।

नाकाबंदी कर तलाश शुरू

आरोपी के भागने की जानकारी मिलते ही थाने में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई और पुलिस ने आसपास के इलाकों में नाकाबंदी कर दी। आरोपी की तलाश में कई जगह दबिश दी जा रही है।

पुलिस ने फरार आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 265 के तहत भी मामला दर्ज किया है। अब उसके खिलाफ पुराने छेड़छाड़ के मामले के साथ पुलिस हिरासत से फरार होने का नया केस भी दर्ज हो गया है।

एसडीओपी विजय राजपूत ने बताया कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं। उसके संभावित ठिकानों पर भी दबिश दी जा रही है।

घटना के बाद पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और आरोपी को हिरासत में रखने के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं।

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कोरबा

पार्षद के बयान से दादर खुर्द के ग्रामीण नाराज:भू-विस्थापित न मानने पर विवाद, CGM और कलेक्टर को ज्ञापन, उग्र आंदोलन की चेतावनी

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कोरबा। कोरबा के दादर खुर्द गांव के भू-विस्थापितों और ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधि के बयानों और रोजगार में कथित पक्षपात का विरोध किया है। ग्रामीणों ने SECL मानिकपुर क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) और कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले में स्थिति स्पष्ट करने और स्थानीय प्रभावित युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वार्ड नंबर 10 भिलाई खुर्द के पार्षद उपेंद्र पटेल ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि दादर खुर्द के ग्रामीण भू-विस्थापित नहीं हैं। ग्रामीणों ने इस बयान को असत्य और उनके लंबे संघर्ष का अपमान बताया है।

पार्षद के बयान को बताया संघर्ष का अपमान

उनका कहना है कि उनके पूर्वजों और ग्रामीणों की जमीनें SECL की खदानों के विस्तार और औद्योगिक कार्यों के लिए अधिग्रहित की गई थीं। इसके राजस्व रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, किसी बाहरी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि को उनके विस्थापन की श्रेणी को खारिज करने का अधिकार नहीं है।

ठेका कंपनियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने का आरोप

ज्ञापन में ग्रामीणों ने मानिकपुर खदान के तहत संचालित निजी ठेका कंपनियों, कोयला ट्रांसपोर्टिंग और अन्य कामों में स्थानीय प्रभावित युवाओं को रोजगार नहीं मिलने का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय युवाओं की मांगों को दबाकर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे प्रभावित परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन इस पूरे मामले पर चुप है और विस्थापितों के हक में रोजगार नीति को सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा।

ग्रामीणों ने SECL मानिकपुर CGM और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

ग्रामीणों ने SECL मानिकपुर CGM और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

दादर खुर्द के विस्थापन की स्थिति साफ करने की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि दादर खुर्द के भू-विस्थापितों की स्थिति स्पष्ट की जाए और गलत प्रचार करने वालों को चेतावनी दी जाए। उन्होंने खदान क्षेत्र में होने वाले स्थानीय कार्यों और ठेका कंपनियों में दादर खुर्द समेत वास्तविक विस्थापित गांवों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की मांग की है।

रोजगार नहीं मिला तो खदान बंद कराने की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि रोजगार में रुकावट डालना बंद नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और खदान का काम बंद कर देंगे। ग्रामीणों ने कहा है कि ऐसी स्थिति की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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कोरबा

गेवरा खदान में तेज बारिश से रेस्ट सेल्टर बहा:खदान की खाई में गिरा, हादसे के वक्त कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था

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कोरबा। कोरबा जिले की गेवरा कोयला खदान में सोमवार को तेज बारिश हुई। करीब एक घंटे की बारिश में माइनिंग स्टाफ के लिए बना रेस्ट सेल्टर बहकर खदान की खाई में जा गिरा। अच्छी बात यह रही कि हादसे के समय सेल्टर में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था।

यह घटना गेवरा खदान के गणेश सर्कल के पास हुई। सोमवार दोपहर करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई। बारिश के कारण खदान में ऊपर से नीचे की ओर पानी का तेज बहाव शुरू हो गया। इसी बहाव की चपेट में आकर कर्मचारियों का टिन शेड वाला रेस्ट सेल्टर अपनी जगह से उखड़ गया और खदान की गहराई में जा गिरा।

पानी के साथ पूरा स्ट्रक्चर बह गया

इस रेस्ट सेल्टर का उपयोग खदान में काम करने वाले शिफ्टिंग इंचार्ज, माइनिंग सरदार और ओवरमैन धूप और बारिश से बचने के लिए करते थे। खदान के अंदर काम के दौरान यह उनके आराम करने की जगह होती थी। जिस जगह पर यह सेल्टर बना था, वहां पानी निकासी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं थी। इसी वजह से पानी के साथ पूरा स्ट्रक्चर बह गया।

इस पूरे हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे तेज पानी के बहाव में पूरा सेल्टर बहता हुआ खाई में गिर रहा है।

खदान जैसी जगह पर अस्थायी और कमजोर स्ट्रक्चर बनाकर कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर हादसे के वक्त अंदर कोई कर्मचारी होता, तो बड़ा नुकसान हो सकता था।

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