रायपुर,एजेंसी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका पर अब सुनवाई 11 अगस्त को होगी। मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 44 को चुनौती दी गई थी। भूपेश बघेल की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। अब यह मामला सोमवार को दोबारा सुना जाएगा।
इस केस की सुनवाई कर रही पीठ में जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भूइयां और जस्टिस एनके सिंह शामिल हैं।
पहले प्राथमिक आपत्तियों पर होगी बहस, फिर मेरिट पर
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि- “हम पहले प्रारंभिक आपत्तियों (preliminary objections) को सुनेंगे। इसके बाद उन पर जवाब (response) सुना जाएगा और फिर हम मेरिट्स (मामले के गुण-दोष) पर आएंगे। सभी चरणों को पूरा करेंगे।”
कपिल सिब्बल ने जताई चिंता- ‘केस दो दिन का तय था’
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से अपील करते हुए कहा कि यदि सुनवाई कल तक टलती है, तो यह केस समय पर खत्म नहीं हो पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में धारा 44A से जुड़ा मुद्दा भी गंभीर है और उसकी भी सुनवाई होनी जरूरी है।
कोर्ट का जवाब- सोमवार को होगी सुनवाई
इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत सोमवार को पहले कुछ बेल मामलों को सुनेगी और फिर सुबह 11 बजे PMLA रिव्यू पर सुनवाई शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि “हम इस मामले को सोमवार को सुनेंगे ताकि पूरा समय मिल सके।”
भूपेश बघेल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी।
बिना कोर्ट अनुमति के कैसे हो रही जांच?- भूपेश
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने मंगलवार (5 अगस्त) को मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि ईडी की कार्यशैली और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
साथ ही डिप्टी सीएम विजय शर्मा के सुप्रीम कोर्ट जाने वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि विजय शर्मा ED के प्रवक्ता बन गए है। अगर किसी व्यक्ति पर कार्रवाई हो रही है, तो उसे अपने बचाव का अधिकार है।
बघेल ने बताया कि हम सुप्रीम कोर्ट में गए, वह 3 धाराओं को लेकर गए थे। विशेष रूप से धारा 44 को चुनौती दी गई है। अगर एक बार किसी मामले में चालान पेश हो जाता है, तो दोबारा जांच करने के लिए कोर्ट की अनुमति अनिवार्य होती है।
लेकिन आज तक ईडी ने किसी मामले में कोर्ट से ऐसी कोई अनुमति नहीं ली है। उन्होंने आगे कहा कि धारा 50 के तहत जिस व्यक्ति पर आरोप है, उसी से गवाही लेने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। ये न्याय प्रक्रिया के विपरीत है। कोई खुद के खिलाफ कैसे गवाही देगा?
20 जुलाई को भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया था।
जिसके खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट, वो खुला घूम रहा- भूपेश
भूपेश बघेल ने बताया कि ईडी बार-बार पुराने मामलों में पूछताछ कर रही है। अगर कार्रवाई करनी थी तो पहले कर लेते। जिसके खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट जारी है, वे खुलेआम घूम रहे हैं, उनके बयान के आधार पर मेरे बेटे की गिरफ्तारी हो जाती है ये कौन सी प्रक्रिया है?
उन्होंने बताया कि 4 अगस्त को सुनवाई को दौरान सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में आधे घंटे की बहस हुई। ऐसा ही मामला चैतन्य से जुड़ा हुआ भी था, जहां पुराने मामलों को दोबारा उठाकर नए तरीके से पूछताछ की गई और गिरफ्तार कर लिया गया। भूपेश बघेल ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट में जाने की लिबर्टी दी है।
रायपुर, एजेंसी। 6 हजार करोड़ के महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को CBI ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लेकर आई है। सोमवार को उसे दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया।
कोर्ट ने 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड पर CBI को सौंपने का आदेश दिया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 या उससे पहले रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाए।
बता दें कि महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामलों की जांच CBI कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से जुड़ी 13 FIR जांच के लिए CBI को सौंपी थीं। इनमें से 2 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
इसके अलावा ED भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है और सौरभ के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर CBI को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसका बड़ा खुलासा होगा।
CBI ने अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर सौरभ चंद्राकर को ओमान में पकड़ा।
प्रत्यर्पण को लेकर आरोपी के वकील ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के वकील ने ओमान की अदालत के आदेश का हवाला देते हुए CBI की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि भारत की ओर से ओमान को प्रत्यर्पण के लिए जो अनुरोध भेजा गया था, उसमें ED के मामले को मंजूरी मिली थी, जबकि CBI के मामले को मंजूरी नहीं दी गई थी।
वकील ने दलील दी कि प्रत्यर्पण की शर्तों के मुताबिक सौरभ पर उन्हीं मामलों में कार्रवाई की जा सकती है, जिनके आधार पर उसे भारत लाया गया है। उन्होंने इसे प्रत्यर्पण के नियमों का उल्लंघन बताया और कहा कि CBI उसे अपने मामले में रिमांड पर नहीं ले सकती।
CBI ने कहा- गिरफ्तारी पर रायपुर कोर्ट फैसला करेगी
CBI की ओर से कहा गया कि आरोपी के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत ने पहले ही ओपन एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी किया था। ओमान सरकार से मिली जानकारी के आधार पर उसे भारत लाया गया है।
CBI ने यह भी कहा कि ED और CBI के मामले एक-दूसरे से जुड़े हैं। फिलहाल दिल्ली कोर्ट को सिर्फ यह तय करना है कि आरोपी को रायपुर की अदालत तक ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड दी जाए या नहीं। प्रत्यर्पण की शर्तों और मुकदमा चलाने के अधिकार से जुड़े सवालों पर फैसला रायपुर की विशेष अदालत करेगी।
2022 में दर्ज FIR से जुड़ा है मामला
CBI के मुताबिक, महादेव बुक ऐप को सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर प्रमोट किया था। आरोप है कि ऑनलाइन सट्टे के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म और पैनल बनाए गए थे। इनके जरिए सट्टा संचालित किया जाता था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सट्टे से मिलने वाली रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए इकट्ठा किया जाता था। इसके बाद यह पैसा UAE तक पहुंचाया जाता था। सौरभ और उसके सहयोगियों पर दुबई से इस नेटवर्क को संचालित करने का भी आरोप है। इस नेटवर्क में छत्तीसगढ़ के कई युवाओं को कर्मचारी और मैनेजर के तौर पर काम पर रखने की बात भी जांच में सामने आई है।
अब आगे क्या होगा ?
सौरभ चंद्राकर को 4 नवंबर तक रायपुर की CBI विशेष अदालत में पेश किया जाना है। प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत CBI के मामले में उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है या नहीं, इस पर फैसला रायपुर की विशेष अदालत करेगी।
CBI की टीम मस्कट से सौरभ चंद्राकर को लेकर भारत आई।
116 दिन बाद ओमान से भारत लाया गया
CBI के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार था। वह 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था।
गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और UAE से ओमान पहुंच गया।
दैनिक भास्कर को उसके कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट की जानकारी मिली थी। इसमें उसकी फोटो थी, लेकिन नाम ‘अजंता मेंडिस’ लिखा था, जो श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस से मिलता-जुलता है।
पासपोर्ट में जन्मतिथि भी दूसरे दस्तावेजों से अलग थी। खुफिया जानकारी और रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
इसके बाद CBI और ED ने भारत सरकार के जरिए ओमान को प्रत्यर्पण का औपचारिक प्रस्ताव भेजा और सबूत सौंपे।
भारत सरकार की एजेंसियों, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद प्रत्यर्पण को मंजूरी मिली। इसके बाद CBI की टीम मस्कट पहुंची और 1 नवंबर को उसे भारत लेकर आई।
भारत आने के बाद अब क्या होगा?
सौरभ के खिलाफ CBI दो मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी उसके खिलाफ चार्जशीट दायर की है।
अब दोनों एजेंसियां पहले से जुटाए गए सबूतों के आधार पर उससे पूछताछ कर सकती हैं। पहले CBI उससे पूछताछ करेगी। इसके बाद ED भी रिमांड लेकर उससे सवाल-जवाब कर सकती है।
सीबीआई की टीम 1 नवंबर को सौरभ चंद्राकर को मस्कट से भारत लेकर पहुंची।
भारत आने से पहले सौरभ ने जान का खतरा बताया था
ओमान में हिरासत के दौरान सौरभ चंद्राकर ने भारत की जेल में अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी। उसने अपने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी।
सौरभ का दावा था कि महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उसने पूछताछ के दौरान सुरक्षा देने और बिना दबाव के अपना पक्ष रखने का मौका देने की मांग की थी।
सट्टा नेटवर्क के राज खोलने की बात कही थी
सौरभ चंद्राकर ने ओमान में भारतीय जांच एजेंसियों को महादेव सट्टा नेटवर्क के राजनीतिक कनेक्शन, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों की जानकारी देने की बात कही थी।
उसने भारत आकर जांच एजेंसियों और कोर्ट में बयान देने की तैयारी जताई थी। इसके बदले उसने अपनी और परिवार की सुरक्षा मांगी थी। साथ ही नेटवर्क से जुड़े लोगों से अलग रखने की मांग की थी, ताकि बिना दबाव के बयान दे सके।
देशभर में फैला था सट्टेबाजी का नेटवर्क
CBI की जांच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में शामिल था। इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।
इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी की तरह पैनल और ब्रांच बनाई गई थीं। इनके जरिए लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे पैसे जमा कराए जाते थे।
सौरभ चंद्राकर को जल्द रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा।
हवाला से विदेश भेजे जाते थे पैसे
जांच एजेंसी के मुताबिक, सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम कई बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इन खातों के जरिए अलग-अलग लेनदेन कर पैसे को छिपाया जाता था और हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।
CBI की जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क को बिना रुकावट चलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी जाती थी।
CBI ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, IPC की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के साथ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की है। वहीं ED भारत और विदेश में कई संपत्तियां अटैच कर चुकी है।
देशभर में फैला ऑनलाइन बेटिंग का नेटवर्क
सीबीआई ने बताया कि महादेव ऐप देश में पकड़े गए सबसे बड़े गैर-कानूनी बेटिंग सिंडिकेट में से एक है, जिसे भारत के बाहर से चलाया जाता है।
सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों यूजर्स तक पहुंचने वाला एक देशव्यापी नेटवर्क बनाया।
रायपुर में आयोजित स्टार रेटिंग पुरस्कार समारोह 2026 में सुरक्षित, कुशल एवं पर्यावरण अनुकूल खनन की उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों को मिला सम्मान
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने पुरस्कार वितरित करने के बाद अपने संबोधन में जिम्मेदार एवं सतत खनन पर दिया जोर
रायपुर, 2 नवंबर 2026। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा आज रायपुर, छत्तीसगढ़ स्थित मेफेयर लेक रिसॉर्ट में स्टार रेटिंग पुरस्कार समारोह 2026 का आयोजन किया गया। समारोह में वित्त वर्ष 2024-25 के मूल्यांकन के आधार पर कोयला एवं लिग्नाइट खनन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली देश की कुल 50 पांच सितारा खदानों को सम्मानित किया गया। इनमें 15 भूमिगत (अंडरग्राउंड) तथा 35 ओपनकास्ट खदानें शामिल हैं। इन पुरस्कारों के माध्यम से सुरक्षित, कुशल, वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल खनन की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली खदानों के योगदान को मान्यता दी गई।
समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने पुरस्कार वितरित किए। पुरस्कार वितरण के पश्चात अपने संबोधन में उन्होंने कोयला क्षेत्र में उत्कृष्टता, सुरक्षित खनन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जिम्मेदार एवं सतत खनन पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय के अपर सचिव सानोज कुमार झा, कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष बी. साईराम, कोयला नियंत्रक संगठन (CCO), नई दिल्ली के कोयला नियंत्रक सतीश कुमार सहित कोयला मंत्रालय एवं विभिन्न कोयला कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में देश की विभिन्न कोयला कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
छत्तीसगढ़ के लिए भी यह समारोह विशेष उपलब्धि का अवसर रहा। पांच सितारा रेटिंग प्राप्त खदानों की सूची में दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की तीन भूमिगत खदानें—बंगवार अंडरग्राउंड माइन, खैराहा UG माइन और बहेराबांध UG माइन—शामिल हैं। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड की गेरे पेलमा सेक्टर-III कोल माइन तथा पारसा केंटे कोलियरीज लिमिटेड की पारसा ईस्ट एंड कांटा बासन ओपनकास्ट कोल माइन को भी पांच सितारा रेटिंग प्राप्त हुई है।
कोयला मंत्रालय की स्टार रेटिंग नीति के अंतर्गत कोयला एवं लिग्नाइट खदानों के प्रदर्शन का विभिन्न निर्धारित मानकों पर व्यापक मूल्यांकन किया जाता है। इनमें परिचालन दक्षता, उत्पादन एवं उत्पादकता, तकनीकी नवाचार, व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, पर्यावरण प्रबंधन, सतत विकास तथा स्थानीय समुदायों के कल्याण से जुड़े पहलू शामिल हैं। मूल्यांकन एवं सत्यापन की प्रक्रिया कोयला नियंत्रक संगठन द्वारा नियुक्त समीक्षकों के माध्यम से की जाती है।
स्टार रेटिंग प्रणाली का उद्देश्य खदानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना तथा उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रेरित करना है। यह पहल देश के कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित कार्यसंस्कृति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ वैज्ञानिक, सुरक्षित एवं सतत खनन को प्रोत्साहित करती है।
कोयला मंत्रालय की यह पहल देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में कोयला क्षेत्र के योगदान को मजबूत करने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
कोरबा 02 नवम्बर 2026। कोरबा शहर के घन्टाघर चौक स्थित डॉ भीमराव अंबेडकर ओपन आडिटोरियम परिसर में तीन दिवसीय राज्योत्सव का आयोजन किया गया। यहाँ विभिन्न विभागों द्वारा शासन की कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी और योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
इसी कड़ी में जनसंपर्क विभाग द्वारा स्टॉल लगाकर शासन की योजनाओं के संबंध में जानकारी दी गई। जिले के विकास प्रगति तथा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी भी प्रदर्शित की गई। जिले के हितग्राहियों को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, युक्तियुक्त करण एवं अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार, जल जीवन मिशन अंतर्गत लगे नल, पहाड़ी कोरवाओं के युवा बेरोजगारों को मिली नौकरी के बाद जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास एवं अन्य योजनाओं के लाभ से जीवन में आए बदलाव को बताया गया।
स्टॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका जनमन सहित अन्य ब्रोसर,पाम्पलेट व पत्रिकाओं का वितरण भी आमनागरिको को किया गया। यहाँ से शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर युवाओं द्वारा बताया गया कि जनमन जैसी पत्रिका उनके लिए बहुत उपयोगी है। पत्रिका में शासन द्वारा संचालित सभी योजनाओं की जानकारी होती है। जो कि प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में काम आती है। साथ ही आमजनों को स्टॉल में लगी फोटो प्रदर्शनी के माध्यम अनेक विभागीय योजनाओं की भी जानकारी प्राप्त हुई। जिससे वे उन योजनाओं से जुड़कर निश्चित ही लाभांवित होंगे। राज्योस्थल पर महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, आदिम जाति विकास, वन, कृषि, मछली पालन, क्रेडा स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्योग, रेशम, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सहित अन्य विभागों द्वारा अपने स्टॉल के माध्यम से विभागीय योजनाओं, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी जा रही है। नागरिक इन स्टॉलों का अवलोकन कर योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।