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दीपका

ब्रेकिंग – दीपका गंगा नगर रेलवे ट्रैक पर एक युवक ने की आत्महत्या। देखे पूरी खबर

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दीपका :– जिला कोरबा के थाना दीपका क्षेत्र अंतर्गत गंगानगर रेलवे फाटक के पास एक युवक ने जान दे दी।

प्रत्यक्षदर्शी से मिली जानकारी अनुसार लगभग 35 वर्षीय एक युवक ने रेलवे फाटक के पास ही पटरी पर आकर आत्महत्या कर ली है, मृतक युवक आसपास ग्राम का ही होने की आशंका।

अभी कुछ देर पहले लगभग 5 बजे की घटना।

दीपका पुलिस को घटना की जानकारी दे दी गई है, जिनके आने के बाद शव का पंचनामा कर आगे की करवाई की जाएगी।

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कोरबा

रेलवे लाइन विस्तार से संकट में वार्ड 07 की बुनियादी सुविधाएं, कृष्ण नगर वासियों ने कलेक्टर से लगाई सड़क नाली और मंदिर बचाने की गुहार

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कोरबा/दीपका। नगर पालिका परिषद दीपका के वार्ड क्रमांक 07 कृष्ण नगर के निवासियों ने क्षेत्र में चल रहे रेलवे लाइन विस्तार कार्य के कारण उत्पन्न हो रही समस्याओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। वार्डवासियों ने जिला कलेक्टर कोरबा को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपकर रेलवे लाइन के किनारे सड़क, नाली निर्माण और धार्मिक स्थल के विस्थापन को लेकर चार प्रमुख मांगें रखी हैं ।

प्रमुख समस्याएँ और माँगें:-

स्थानीय निवासियों का कहना है कि रेलवे के इस नए प्रोजेक्ट से वार्ड की वर्षों पुरानी मुख्य सड़क बाधित हो जाएगी जिससे स्कूल, अस्पताल और बाजार जाने का मार्ग पूरी तरह बंद होने की कगार पर है। वार्डवासियों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है:-

  1. वैकल्पिक मार्ग का निर्माण:- कृष्ण नगर के दक्षिण में वर्तमान मुख्य सड़क के बाधित होने से पहले निवासियों के लिए स्कूल और अस्पताल पहुँचने हेतु वैकल्पिक पक्की सड़क बनाई जाए ।
  2. जलभराव की समस्या:- वार्ड के पश्चिम दिशा में दो पुलियों के बीच सड़क और नाली का निर्माण अनिवार्य है। वर्तमान स्थिति में पुलिया नीचे होने के कारण बारिश में वहाँ जलभराव और कीचड़ की समस्या पैदा होगी, जिससे आवागमन ठप हो जाएगा ।
  3. हनुमान मंदिर का विस्थापन:- रेलवे लाइन की जद में आ रहे पूर्व दिशा स्थित हनुमान मंदिर को हटाने से पहले उसे श्रद्धा भाव के साथ किसी दूसरे स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए ।
  4. मुख्य मार्ग से जुड़ाव:- वार्ड के पूर्व दिशा में संचालित सड़क को मुख्य मार्ग से जोड़ने की मांग की गई है, ताकि कनेक्टिविटी बनी रहे ।

जनता की चेतावनी

वार्डवासियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी इन बुनियादी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक रेलवे लाइन का कार्य आगे बढ़ाना उनके हितों के साथ खिलवाड़ होगा। इस संबंध में उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (कटघोरा), तहसीलदार, नगर पालिका अधिकारी और रेलवे प्रबंधन को भी प्रतिलिपि भेजकर उचित कार्रवाई की मांग की है ।

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कोरबा

एसईसीएल की लापरवाही ने ली ग्रामीण की जान, सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर हो रही हैवी ब्लास्टिंग के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

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ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति ने की 50 लाख मुआवजा और स्थायी नौकरी की मांग

दोषियों पर एफआईआर दर्ज किया जाए -कुलदीप

कोरबा/​दीपका। एसईसीएल दीपका परियोजना अंतर्गत सुवाभोंडी फेस कोयला खदान में आज दोपहर प्रबंधन और सुरक्षा अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण एक हृदयविदारक घटना घटित हुई। खदान में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर की जा रही हैवी ब्लास्टिंग के कारण सड़क पर चल रहे ग्रामीण लखन पटेल के ऊपर पत्थर छिटककर आ गिरा, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई ।

​इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने एसईसीएल प्रबंधन और खान सुरक्षा निदेशालय (DGMS) को आड़े हाथों लिया है ।

​सपुरन कुलदीप ने कहा कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि प्रबंधन द्वारा की गई हत्या है। खदानों में ब्लास्टिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों (SOP) का पालन नहीं किया जा रहा है। रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक सड़कों के इतने करीब बिना उचित घेराबंदी और सुरक्षा चेतावनी के हैवी ब्लास्टिंग करना सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है ।

​समिति की प्रमुख मांगें:-

  1. खान सुरक्षा निदेशालय (DGMS) और एसईसीएल के संबंधित लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्यवाही और एफआईआर दर्ज की जाए ।
  2. मृतक लखन पटेल के परिजनों को तत्काल 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाए ।
  3. परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार एसईसीएल में स्थायी नौकरी दी जाए ।
    दीपका क्षेत्र में चल रही ब्लास्टिंग की तत्काल समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो ।
  4. ​अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने चेतावनी देते हुए कहा एसईसीएल कोयला उत्पादन की अंधी दौड़ में स्थानीय भूविस्थापितों और ग्रामीणों की जान की कीमत भूल चुका है, यदि प्रबंधन और प्रशासन जल्द ही हमारी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेते तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी ।

​समिति ने मांग की है कि घटना स्थल का निरीक्षण कर उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की जाए और जब तक न्याय नहीं मिलता सुवाभोंड़ी फेस का कार्य बंद रखा जाए ।

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कोरबा

SECL दीपका में CISF जवानों की तानाशाही, ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार और खदान में संरक्षित चोरी का आरोप

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​कोरबा/दीपका । एसईसीएल (SECL) दीपका क्षेत्र में तैनात सीआईएसएफ (CISF) के जवानों की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर जहां श्रमिक चौक पर आम ग्रामीणों के साथ जवानों द्वारा बदसलूकी और ‘गुंडागर्दी’ की जा रही है, वहीं दूसरी ओर खदान के भीतर करोड़ों की सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में भारी सेंधमारी हो रही है।

​आम रास्ते पर जवानों की गुंडागर्दी

​श्रमिक चौक, जो रेंकी सुवाभोड़ी चैनपुर हरदीबाजार सहित दर्जनों गांवों को जोड़ने´ वाला मुख्य मार्ग है, वहां से गुजरने वाले ग्रामीणों को CISF जवानों द्वारा बेवजह परेशान किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जवान आम नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करते हैं और गाली-गलौज व दुर्व्यवहार अब आम बात हो गई है। आवागमन बाधित होने से स्कूली बच्चों मरीजों और कामगारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है ।

​खदान में सुरक्षा तार-तार, कबाड़ और डीजल का गोरखधंधा

​चौंकाने वाली बात यह है कि जो जवान आम जनता पर अपनी ताकत दिखाते हैं, वही खदान के भीतर सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं ।

दीपका खदान से बड़े पैमाने पर

डीजल चोरी:- मशीनों और टैंकों से लगातार डीजल निकाला जा रहा है ।
​कबाड़ तस्करी:- मशीनी कबाड़ और लोहे की सामग्री खुलेआम पार की जा रही है ।
अन्य सामग्री:- कीमती उपकरणों और अन्य सामग्रियों की चोरी बदस्तूर जारी है ।

​क्या जवानों का है ‘मौन समर्थन’?

​ग्रामीणों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि बिना किसी मिलीभगत के इतनी बड़ी मात्रा में चोरी होना संभव नहीं है। यह आशंका गहरा रही है कि सीआईएसएफ जवानों के संरक्षण में ही यह पूरा गोरखधंधा फल-फूल रहा है। सुरक्षा के नाम पर तैनात बल अब भ्रष्टाचार और आम जनता के उत्पीड़न का पर्याय बनता जा रहा है ।

​मांग:-

क्षेत्र की जनता ने SECL प्रबंधन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:-

  1. ​श्रमिक चौक पर ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले जवानों पर कड़ी कार्रवाई हो ।
  2. ​खदान के भीतर हो रही संगठित चोरी की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ।
  3. ​आम रास्ते पर आवागमन सुचारू रूप से बहाल किया जाए ।

​यदि प्रबंधन और प्रशासन जल्द ही इस तानाशाही और भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाता तो क्षेत्र के ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे ।

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