ओडिशा में सोने के बिस्किट बेचे, पैसे से कार खरीदी, बर्थडे पार्टी में उड़ाए 5 लाख
जशपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में डीटीओ (जिला परिवहन अधिकारी) के घर चोरी हुई है। अफसर की भतीजी ने पति और अपने साथियों के साथ मिलकर 5 करोड़ रुपए की चोरी की है। उन्होंने सोने के बिस्किट, जेवरात और कैश पर हाथ साफ किया। चोरी की रकम से कार भी खरीदी और पार्टियां की। मामला नारायणपुर थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के मुताबिक, डीटीओ अधिकारी विजय निकुंज ग्राम केराडीह की रहने वाले हैं। मास्टरमाइंड मिनल निकुंज (21) ने सबसे पहले आईफोन खरीदने के लालच में चोरी की शुरुआत की। जब किसी को इसकी भनक नहीं लगी, तो उसने सोने के बिस्किट और बड़ी मात्रा में नकदी भी गायब कर दी।
आरोपियों ने सोने की बिस्किट बेचने के लिए ओडिशा के राउरकेला गए। जहां से मिले पैसों से कार खरीदी। मिलन ने स्वीकार किया कि उसने अलग-अलग समय पर चोरी की और कुल रकम करीब 5 करोड़ रुपए हो गई। यह पैसा उसने दोस्तों और पति के साथ मिलकर महंगी शराब, पार्टियों और मौज-मस्ती में खर्च कर दिया।
उन्होंने मिनल की बर्थडे पर तीन दिनों के पार्टी में 5 लाख रुपए उड़ा दिए। इस मामले में नारायणपुर पुलिस ने 5 आरोपियों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया है। जबकि अन्य आरोपी फरार चल रहे हैं। जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
मास्टरमाइंड समेत 5 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने सोने के बिस्किट, सोने का कड़ा कैश जब्त किया है।
पुलिस ने आईफोन भी बरामद किया है।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, डीटीओ अधिकारी विजय निकुंज रिश्ते में मिनल के बड़े पिता हैं। जशपुर में पढ़ाई के दौरान वह किराए के मकान में रहती थी। अक्सर बड़े पिता के घर आती-जाती थी। इस दौरान उनकी पहचान अनिल प्रधान (25) से हुई। जो कि प्राइवेट फाइनेंस कंपनी करता है। दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे।
इस बीच मिनल ने आईफोन खरीदना चाहा, लेकिन उसके पास उतने पैसे नहीं थे। ऐसे में मिनल ने पहले 2 लाख रुपए कैश चुराए। जिससे उसने आईफोन लिया। फिर बर्थडे के लिए 3 लाख रुपए निकाले। जब किसी को इस बारे पता नहीं चला तो उसने सोने की बिस्किट और बड़ी मात्रा में नगदी पर हाथ साफ किया।
आईफोन के लालच में शुरू हुई चोरी
बाद में दोनों ने शादी कर ली। इस बीच विजय निकुंज और परिवार के अन्य सदस्यों को दीवान में रखे अटैची से पैसे, सोने के बिस्किट गायब मिले। 6 दिसंबर 2025 को पत्नी सुषमा ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि पुराने घर का घर के कमरे का कुंडा टूटा हुआ था। दीवान में रखी अटैची से करीब 15 लाख रुपए कैश, सोने की बिस्किट और अन्य जेवरात गायब थे।
रांची के होटल से दंपती को हिरासत में लिया
चोरी गए माल की अनुमानित कीमत 35 लाख रुपए से अधिक बताई गई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि मिनल जशपुर में पढ़ाई के दौरान किराए के मकान में रहती थी। वारदात के पहले अक्सर घर आती-जाती थी। पुलिस पर उस पर संदेह हुआ। 14 दिसंबर 2025 को पुलिस ने रांची के एक होटल से मिनल और अनिल को हिरासत में लिया। पूछताछ दोनों जुर्म स्वीकार किया।
आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पैसा महंगी शराब, पार्टियों उड़ाया
मिलन ने स्वीकार किया कि उसने अलग-अलग समय पर चोरी की और कुल रकम करीब 5 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। यह पैसा उसने दोस्तों और पति के साथ मिलकर महंगी शराब, पार्टियों और ऐशो-आराम में खर्च कर दिया। इसके बाद अभिषेक इंद्रवार (28), लंकेश्वर बड़ाईक (35 ) और अलीशा भगत (29) को भी अलग-अलग तारीख में गिरफ्तार किया गया।
51 लाख से अधिक का माल जब्त
पुलिस ने आरोपियों के पास हरियर कार, 86,300 रुपए कैश, 100-50-20 ग्राम की सोने की बिस्किट, सोने का कड़ा-मंगलसूत्र, 1 आईफोन और 4 एंड्रॉयड मोबाइल बरामद किया है। जब्त किए गए माल की कुल कीमत करीब 51 लाख 82 हजार 300 रुपए आंकी गई है।
रायपुर-भिलाई में पार्टी, राउरकेला में बेचा सोना
आरोपी अनिल प्रधान ने बताया कि मिलन चोरी कर लाई गई नगदी और सोने से आईफोन खरीदा गया। इसके बाद सभी आरोपी रायपुर और भिलाई गए। जहां करीब तीन दिनों तक पार्टी चली और लगभग 5 लाख रुपए खर्च किए गए।इसके बाद सोने की बिस्किट बेचने के लिए ओडिशा के राउरकेला गए, जहां से मिले पैसों से नगद में कार खरीदी गई।
न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी
इस मामले में एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि डीटीओ अधिकारी के घर हुई चोरी के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से नगद, सोना, मोबाइल और कार सहित 51 लाख रुपए से अधिक का माल बरामद किया गया है। सभी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
कोरबा। आज दिनांक 04/09/2026 को 06:00 AM बजे से मिनीमाता बांगो बांध का जलस्तर 358.70M एवं 94.24% होने पर 8:00 AM बजे निम्नानुसार गेटों को कम कर बाढ़ के पानी को नियंत्रित किया जा रहा है गेट न.1 nil गेट न.2 nil गेट न.3 nil गेट न.4 nil गेट न.5 को 0.10M गेट न.6 को 0.30M गेट न.7 को 0.10M गेट न.8 n गेट न.9 nil गेट न.10 nil गेट न.11 nil (Total Gate opening 0.50mtr) कुल Radial गेट से 3017 Cusec तथा पॉवर प्लांट हाइडल के द्वारा 9000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है इस प्रकार बांध से कुल 12017 Cusec पानी हसदेव नदी में छोड़ा जा रहा है तथा Inflow 14992 Cusec दर्ज की गयी है |
अनियमितता मिलने पर कई विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस, महेश राम कृषि केंद्र में कीटनाशक बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध
कोरबा, 04 सितंबर 2026। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक एवं कीटनाशक दवाएं उपलब्ध कराने तथा कृषि आदानों की बिक्री में अनियमितता, कालाबाजारी एवं ओवर-रेटिंग पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से जिला स्तरीय निरीक्षण दल द्वारा आज विकासखंड कटघोरा एवं पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र में उर्वरक एवं कीटनाशक विक्रय प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान दुकानों में उपलब्ध उर्वरक एवं कीटनाशकों के स्टॉक, मूल्य सूची, विक्रय अभिलेख, लाइसेंस एवं भंडारण व्यवस्था की बारीकी से जांच की गई। जांच के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में अनियमितताएं एवं कमियां पाए जाने पर कृषि विभाग द्वारा नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की गई।
सर्वमंगला खाद भंडार सहित कई दुकानों को नोटिस
निरीक्षण के दौरान सर्वमंगला खाद भंडार, बाकी मोगरा में अनियमितताएं पाए जाने पर संचालक को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसी प्रकार सोनी कृषि केंद्र, शिव बीज भंडार एवं अंसारी कृषि केंद्र, कसनियां, पोड़ी उपरोड़ा में भी निरीक्षण के दौरान कमियां पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
दो कार्यदिवस में सुधार नहीं होने पर लाइसेंस निरस्तीकरण की चेतावनी
सोनी कृषि केंद्र कसनियां, शिव बीज भंडार कसनियां एवं अंसारी कृषि केंद्र कसनियां को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निरीक्षण के दौरान पाई गई अनियमितताओं में दो कार्यदिवस के भीतर सुधार सुनिश्चित करें। निर्धारित अवधि में कमियों का निराकरण नहीं किए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विक्रय लाइसेंस निरस्त करने की नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
महेश राम कृषि केंद्र में कीटनाशक बिक्री पर प्रतिबंध
महेश राम कृषि केंद्र, रंजना में निरीक्षण के दौरान पाई गई खामियों को गंभीरता से लेते हुए उक्त प्रतिष्ठान से कीटनाशकों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इसके अलावा निरीक्षण अभियान के तहत राजू कृषि केंद्र, रंजना में भी उर्वरक एवं कीटनाशकों के स्टॉक तथा संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की गई।
किसानों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उर्वरक एवं कीटनाशकों की कालाबाजारी, ओवर-रेटिंग, अनियमित बिक्री तथा अमानक कृषि आदानों के विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिले में निरीक्षण की कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।
विभाग द्वारा कृषि आदान विक्रेताओं को नियमानुसार स्टॉक एवं विक्रय अभिलेख संधारित करने, निर्धारित मूल्य पर सामग्री का विक्रय करने तथा किसानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में नक्सलमुक्त क्षेत्रों में स्कूलों में बजने लगी घंटी
धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
छत्तीसगढ़ के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद स्कूलों में घंटियां बजने लगी हैं, जो इस शिक्षक दिवस पर बस्तर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक बदलाव का प्रतीक है। जहाँ कभी बारूद की गंध और बंदूक की आवाजें हुआ करती थीं, वहाँ अब बच्चे राष्ट्रगान गा रहे हैं।
5 सितंबर को देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर ‘शिक्षक दिवस’ की धूमधाम रहेगी। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का बस्तर और अन्य दूरस्थ अंचल एक नई उम्मीद के साथ मुस्कुरा रहा है। कभी बंदूक के साए और नक्सली खौफ के कारण दशक भर से बंद पड़े स्कूल आज फिर से गुलजार हो चुके हैं। दूर-दराज के गांवों में जब वर्षों बाद फिर से स्कूल की घंटी बजती है, तो वह केवल पढ़ाई की शुरुआत नहीं होती, बल्कि उस क्षेत्र में लौटते लोकतंत्र, शांति और सुरक्षा की गूंज होती है।
बंद पड़े स्कूल फिर से हुए संचालित
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास, सुरक्षा और जन कल्याणकारी नीतियों (‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं) के प्रभाव से दक्षिण बस्तर के सुदूर नक्सल प्रभावित इलाकों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में लगभग दो से ढाई दशकों से बंद पड़े 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जिला प्रशासन और पुलिस बल के सहयोग से दोबारा खोल दिया गया है। जो इमारतें कभी नक्सलियों द्वारा ध्वस्त कर दी गई थीं या सुरक्षा बलों के कैंप के लिए इस्तेमाल होती थीं, उन्हें फिर से संवारकर बाल-सुलभ रूप दिया गया है।
शिक्षकों का अदम्य साहस और समर्पण
नक्सलमुक्त होते क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाने का वास्तविक श्रेय उन स्थानीय शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने विपरीत और भयावह परिस्थितियों के बावजूद अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा।
• स्थानीय भाषा में अध्यापन: दूरस्थ वनांचल में नियुक्त शिक्षक न केवल बच्चों को बुनियादी अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि गोंडी, हलबी और डोरली जैसी स्थानीय बोलियों में संवाद कर बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत कर रहे हैं।
• समुदाय से संवाद: शिक्षकों ने ग्रामीणों और नक्सलियों के डर से सहमे अभिभावकों के बीच जाकर उनका विश्वास जीता, जिससे आज सैकड़ों बच्चे वापस ब्लैकबोर्ड और किताबों से जुड़ चुके हैं।
तकनीक और नवाचार से जुड़ रहा बस्तर का बचपन
बस्तर संभाग के बीजापुर (जैसे पीड़िया, गंपूर, तमोड़ी गांव) और सुकमा के कई अंदरूनी इलाकों में सालों से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोला गया है। नक्सलियों द्वारा जिन पक्के स्कूल भवनों को आईईडी से उड़ा दिया गया था, वहाँ ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ मिलकर अस्थायी बांस और तिरपाल की झोपड़ियां (छप्पर) तैयार की हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई न रुके। स्थानीय भाषाओं (जैसे गोंडी, हल्बी) की चुनौती से निपटने और बच्चों में विश्वास जगाने के लिए स्थानीय शिक्षित युवाओं को शिक्षा दूत के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस शिक्षक दिवस के असली नायक हैं। पुनः संचालित हो रहे स्कूलों में अब केवल पुरानी लीक पर पढ़ाई नहीं हो रही है। राज्य शासन द्वारा इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं:
• स्मार्ट क्लासेस और टैबलेट: कई वनांचल स्कूलों में डिजिटल कंटेंट और टैबलेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
• खेलकूद और न्योता भोजन: स्कूलों में मध्याह्न भोजन (न्योता भोजन) के साथ-साथ खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी उछाल आया है।
• सुरक्षित माहौल: नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत कैंपों के आसपास सुरक्षा का दायरा बढ़ने से शिक्षक बिना किसी खौफ के रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं।
शिक्षक दिवस पर संदेश
छत्तीसगढ़ में इस बार का शिक्षक दिवस उन शिक्षकों को समर्पित है जो राज्य के सबसे कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में ‘शिक्षादूत’ बनकर कार्य कर रहे हैं। बंदूक की आवाज को दबाकर जब कलम और किताब की ताकत आगे बढ़ती है, तो समाज की नई तस्वीर बनती है। छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त इलाकों मं। गूंजती स्कूलों की घंटी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि शिक्षा ही बदलाव और शांति की सबसे मजबूत नींव है।