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विदेश

नेपाल में फिर से बाढ़-लैंडस्लाइड, 6 की मौत:घर-पुल बहे, हाईवे बंद, एक महीने पहले आई बाढ़ में 1453 मौतें, 5500 से ज्यादा लापता

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काठमांडू, एजेंसी। नेपाल में लगातार बारिश के बीच बाढ़ और भूस्खलन से हालात बिगड़ गए हैं। अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। बागलुंग जिले में भूस्खलन से एक घर मलबे में दब गया। हादसे में एक महिला और उसके तीन बेटों की मौत हो गई। पाल्पा जिले में 2 लोग मारे गए हैं।

वहीं, बाढ़ और भूस्खलन से कई घर और पुल बह गए हैं। कई जगह हाईवे बंद होने से आवाजाही प्रभावित हुई है। बुटवल में बाढ़ प्रभावित इलाकों से 1,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ में 1453 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।

भारी बारिश के बाद नारायणी नदी में बाढ़ आ गई है।

भारी बारिश के बाद नारायणी नदी में बाढ़ आ गई है।

चितवन जिले में नारायणी नदी का पानी घाट पर बनी बुद्ध की मूर्ति को छू रहा है।

चितवन जिले में नारायणी नदी का पानी घाट पर बनी बुद्ध की मूर्ति को छू रहा है।

नारायणी नदी में पानी बढ़ने से कई घर बह गए हैं।

नारायणी नदी में पानी बढ़ने से कई घर बह गए हैं।

खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर बह रही नारायणी नदी

लगातार बारिश के कारण नेपाल की कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। देवघाट में नारायणी नदी रविवार सुबह 7:45 बजे 11 मीटर पर बह रही थी। यह खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर है। अधिकारियों ने नदी का जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई थी।

बुटवल में बाढ़ के खतरे को देखते हुए करीब 200 परिवारों को उनके घरों से हटाया गया। कई इलाकों में बाढ़ का पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बंद, फसलों को नुकसान

बाढ़ का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन रोकना पड़ा है। इनमें 140 मेगावाट का कालीगंडकी, 25 मेगावाट का अपर मादी, 44 मेगावाट का सुपर मादी, 20 मेगावाट का नामार्जुन मादी और 40 मेगावाट का सेती रिवर प्रोजेक्ट शामिल हैं।

220 किलोवोल्ट की कालीगंडकी कॉरिडोर ट्रांसमिशन लाइन के दो टावर गिर गए हैं। कई जगहों पर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों को भी नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है।

मनांग जिले में हिमस्खलन से 10 लापता

नेपाल के मनांग जिले के नार-फू क्षेत्र में 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल पर हिमस्खलन हुआ है। इसके बाद पर्वतारोहियों और सपोर्ट स्टाफ समेत 10 लोगों का पता नहीं चल रहा है।

एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन नेपाल के महासचिव ऋषि भंडारी ने रविवार को घटना की पुष्टि की। भंडारी के मुताबिक, लापता लोगों में 2 इमेजिन नेपाल प्राइवेट लिमिटेड से और 8 हिमालयन हॉलीडेज नेपाल से जुड़े हैं।

नेपाल के पर्यटन विभाग के महानिदेशक रामकृष्ण लामिछाने ने बताया कि विभाग स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है। अधिकारी घटना से जुड़ी ज्यादा जानकारी जुटा रहे हैं और लापता लोगों का पता लगाने तथा उन्हें बचाने के प्रयासों की जानकारी ले रहे हैं।

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विदेश

ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया:बोले- वे मुश्किल में, तभी होर्मुज खोलना चाहते, ईरान बोला- बातचीत से ही निकलेगा हल

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न्यूयॉर्क, एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि ईरान मुश्किल में है, इसलिए वह तुरंत होर्मुज खोलना चाहता है।

ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, क्योंकि वह बुरी तरह हार रहा है और उसके पास पैसा नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि ईरान की कमाई होर्मुज से होने वाले कारोबार पर निर्भर है।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने इस समुद्री रास्ते पर सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकेबंदी की है, जो लोहे की दीवार जैसी है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि युद्ध का हल सिर्फ बातचीत से निकल सकता है।

ईरान ने 7 दिन में होर्मुज खोलने का प्लान दिया था

ईरान ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के जरिए कतर के जरिए अमेरिका को 7 दिन का रोडमैप भेजा था। इसमें लड़ाई रोकने और शर्तें पूरी होने पर होर्मुज खोलने की बात कही गई थी।

इस प्रस्ताव के तहत पहले लड़ाई रोकने और ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने की मांग की गई थी। इसके बाद सातवें दिन होर्मुज को दोबारा खोलने और फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत दूसरे मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की योजना थी।

ईरान ने अमेरिका से अपने बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और विदेशों में फ्रीज की गई करीब 12 अरब डॉलर की संपत्ति जारी करने की मांग भी की थी। प्रस्ताव में लेबनान और यमन समेत पूरे क्षेत्र में संघर्ष-विराम की बात शामिल थी।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पजशकियान ने कहा था कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

पजशकियान UN महासभा में 23 सितंबर को भाषण देने पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की भी तस्वीर दिखाई।

पजशकियान UN महासभा में 23 सितंबर को भाषण देने पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की भी तस्वीर दिखाई।

रिपोर्ट- ट्रम्प चुनाव के बाद फिर शुरू कर सकते हैं बमबारी

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू कर सकते हैं। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू करने की संभावना पर चर्चा की है।

अल जजीरा के पत्रकार माइक हाना ने भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत को लेकर ट्रम्प प्रशासन के बयानों में लगातार बदलाव दिख रहा है। कभी ट्रम्प बातचीत अच्छी चलने की बात करते हैं, तो कभी ईरान को तबाह करने की धमकी देते हैं।

हाना के मुताबिक, ट्रम्प फिलहाल इस गतिरोध को जारी रखने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। वहीं, अमेरिका में भी चिंता है कि ईरान के साथ संघर्ष एक और लंबे समय तक चलने वाली जंग में बदल सकता है।

अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था

अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 2 आबादी से दूर इलाकों में गिरीं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा था कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसी के जवाब में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया।

इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 10 जहाजों पर हमले की बात की थी। इनमें 2 अमेरिकी जहाज और 8 तेल टैंकर शामिल थे। इसी दौरान ईरान ने एक अमेरिकी सबमरीन ड्रोन भी पकड़ा था।

28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है।

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देश

जयशंकर बोले- आतंकवाद के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति:सीमा पार कोई सरकार इसमें शामिल तो उसे जिम्मेदार ठहराना होगा, यह पूरी दुनिया के लिए चुनौती

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न्यूयॉर्क, एजेंसी। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी।

सीमा पार कोई सरकार इसमें शामिल तो उसे जिम्मेदार ठहराना होगा। यह पूरी दुनिया के लिए चुनौती है।

आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के भारत के अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा। आतंकवाद और दोस्ती-सद्भावना साथ नहीं चल सकते। आतंकवाद फैलाने वाले को अपना रवैया बदलना होगा।

जयशंकर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सेशन को संबोधित कर रहे थे।

जयशंकर ने फिलिस्तीन के लिए अलग देश बनाने का समर्थन किया

जयशंकर ने फिलिस्तीन के लिए अलग देश बनाने का समर्थन किया। उन्होंने टू-नेशन सॉल्यूशन यानी दो-राष्ट्र समाधान की बात कही। इसके तहत इजराइल और फिलिस्तीन, दोनों के लिए अलग-अलग स्वतंत्र देश बनाने का प्रस्ताव है, ताकि दोनों के लोग शांति और सुरक्षा के साथ रह सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत प्रयासों में योगदान दे रहा है। जयशंकर के इस भाषण का वीडियो फिलिस्तीन भी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया।

जयशंकर की स्पीच की बड़ी बातें, कहा- समुद्र में जहाजों को निशाना बनाया जाना स्वीकार नहीं

संघर्ष और टकराव हमारी सबसे बड़ी चिंता

संघर्ष और टकराव हमारी सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं। शांति बनाए रखने में असमर्थता न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि प्रगति के लिए खतरा पैदा कर रही है। पूरी दुनिया में इसका असर देखा जा सकता है।

जहाजों को निशाना बनाया जाना स्वीकार नहीं

इस साल हम खाड़ी क्षेत्र में एक संघर्ष देख रहे हैं, जो पहले से ही कठिन स्थिति को और गंभीर बना रहा है। हम आपस में जारी इस लड़ाई को लेकर बेहद चिंतित हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों और समुद्री यात्रियों को निशाना बनाया जाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।

दुनिया लगातार खतरों का सामना कर रही

भारत इस स्थिति को सुधारने के लिए हरसंभव प्रयास करने को तैयार है, खासकर खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के संबंध में। हमें यह समझना होगा कि शांति का मतलब केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है। यदि दुनिया लगातार खतरों और दबावों का सामना करती रहेगी, तो हम वास्तव में एक खाई के किनारे खड़े होंगे।

पिछले 3 महीने में 7 भारतीयों की मौत, 1 लापता

8 जुलाई- ब्लैक सी में MV ओमोर्फी पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर की मौत हुई।

19 जुलाई- MV गोल्डन लियो पर हमले में चार भारतीय नाविक मारे गए।

9 सितंबर- होर्मुज स्ट्रेट में एल गैया टैंकर पर हमला हुआ, जिसके बाद एक भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गया।

17 सितंबर- ओमान की खाड़ी में MV केप डाओ पर हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हुई।

जयशंकर ने एक दिन पहले पाकिस्तानी पत्रकार को फटकारा था

जयशंकर ने कहा, कल आतंकवाद के समर्थक देश से जुड़े एक व्यक्ति ने इस महासभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से बचने के लिए तर्क दिए गए, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के भारत के अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा। आतंकवाद और दोस्ती-सद्भावना साथ नहीं चल सकते। इसलिए आतंकवाद के आधार पर बनी किसी भी समझ की समीक्षा स्वाभाविक रूप से होगी। आतंकवाद फैलाने वाले को अपना रवैया बदलना होगा।

दरअसल शुक्रवार को एक पाकिस्तानी रिपोर्टर ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

इस पर जयशंकर ने कहा, एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। रिपोर्टर के सवाल का जवाब देने के बाद वे मुस्कुराए और वहां से निकल गए।

भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद बड़ा विवाद

भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है। दोनों देशों के बीच आतंकवाद का मुद्दा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठता रहा है।

भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में मौजूद या वहां से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों और आतंकवाद की फंडिंग का मुद्दा भी उठाया है। वहीं, पाकिस्तान भारत के आरोपों को खारिज करता रहा है।

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विदेश

सिर्फ अमेरिका नहीं पूरी दुनिया से चीन की ट्रेड वॉर, भारत से लेकर यूरोप तक ड्रैगन की व्यापार नीति पर उठे सवाल

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बीजिंग, एजेंसी। चीन और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक तनातनी को अक्सर दो महाशक्तियों की सीधी लड़ाई के तौर पर देखा जाता है, लेकिन एक नए विश्लेषण में इससे कहीं बड़ी तस्वीर सामने रखी गई है। दावा है कि मामला केवल वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच टैरिफ युद्ध का नहीं है, बल्कि चीन की व्यापार नीतियों को लेकर दुनिया के कई देश अलग-अलग स्तर पर चिंता जता रहे हैं। चीन के विशाल व्यापार अधिशेष, सरकारी सहायता और सस्ते निर्यात को लेकर भारत से लेकर अमेरिका और यूरोप तक कई अर्थव्यवस्थाएं अपने कदम सख्त कर रही हैं।  ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू में प्रकाशित रॉस बैबेज के विश्लेषण में तर्क दिया गया है कि चीन की मौजूदा व्यापार रणनीति को केवल अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संघर्ष के रूप में देखना अधूरा होगा। उनके मुताबिक, चीन और दुनिया की कई दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार असंतुलन अब व्यापक बहस का विषय बन चुका है।

विश्लेषण में चीन के विनिर्माण क्षेत्र की तेजी का उदाहरण दिया गया है। इसके अनुसार, वर्ष 2004 में चीन का विनिर्माण उत्पादन अमेरिका के करीब आधे स्तर पर था, जबकि लगभग दो दशक बाद यह अमेरिकी स्तर के करीब दोगुने तक पहुंच गया। बैबेज इस बदलाव के पीछे चार प्रमुख संरचनात्मक कारण बताते हैं। पहला, करीब 1.4 अरब लोगों का विशाल घरेलू बाजार, जिसने चीनी कंपनियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन करने का अवसर दिया। दूसरा, सरकारी सहायता और सब्सिडी, जिनके स्तर को लेकर आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच बड़े अंतर की बात कही है।तीसरा मुद्दा चीन की मुद्रा का मूल्यांकन है। विश्लेषण में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आकलन का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि चीनी मुद्रा अपने वास्तविक मूल्य से 20 से 40 प्रतिशत तक कम आंकी गई हो सकती है। इससे चीनी निर्यात अपेक्षाकृत सस्ता और विदेशी वस्तुओं का चीन में प्रवेश महंगा हो सकता है।

चौथा आरोप चीन के व्यापक सरकारी तंत्र से जुड़ा है। विश्लेषण में औद्योगिक खुफिया गतिविधियों, बौद्धिक संपदा की चोरी, साइबर गतिविधियों, सूचना अभियानों और विदेशों में प्रभाव बढ़ाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों का उल्लेख किया गया है। इन दावों की प्रकृति को लेकर अलग-अलग देशों और संस्थानों के आकलन अलग हो सकते हैं। इस पूरी तस्वीर का सबसे बड़ा आर्थिक आंकड़ा चीन का व्यापार अधिशेष बताया गया है। विश्लेषण के अनुसार, यह करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसे ऐतिहासिक रूप से किसी एक देश का सबसे बड़ा वार्षिक व्यापार अधिशेष बताया गया है। चीन की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के बढ़ते निर्यात ने कई देशों को अपनी व्यापार नीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। विश्लेषण में अमेरिका, भारत, थाईलैंड, पाकिस्तान, मिस्र, कनाडा और इंडोनेशिया सहित कई देशों में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगाए गए या प्रस्तावित शुल्क और प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है। यूरोपीय संघ में भी चीन से इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते आयात को लेकर चिंता है। विश्लेषण के मुताबिक, दो वर्षों में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों के यूरोपीय निर्यात में लगभग दस गुना वृद्धि हुई है। इसके बाद यूरोप में शुल्क और आयात सीमा जैसे उपायों पर चर्चा तेज हुई है।

विश्लेषण में हाल की G20 वित्त मंत्रियों की बैठक का भी उल्लेख किया गया है। इसमें अत्यधिक और लगातार बने रहने वाले बाहरी व्यापार अधिशेष वाले देशों से उन नीतिगत विकृतियों को हटाने का आह्वान करने वाले संयुक्त बयान का प्रस्ताव रखा गया था। दावे के मुताबिक, 19 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि चीन ने अकेले इसका विरोध किया। यह घटनाक्रम वैश्विक व्यापार असंतुलन को लेकर चीन और कई दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूद मतभेद को दिखाता है। चीन की व्यापार नीति का असर केवल अमेरिका और यूरोप तक सीमित नहीं है। विश्लेषण में ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि महामारी के दौरान चीन द्वारा ऑस्ट्रेलियाई उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने व्यापारिक निर्भरता से पैदा होने वाले दबाव को सामने ला दिया था।

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