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₹23,211 महंगा हो चुका है सोना, जानें साल के अंत तक कहां जाएगी कीमत

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मुंबई, एजेंसी। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और महंगाई के डर के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर से सोने की ओर बढ़ा है। इसी के चलते आज यानी 16 जून को सोने की कीमत ने नया कीर्तिमान बना दिया। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोना रू.315 की तेजी के साथ रू.99,373 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इससे पहले 13 जून को यह रू.99,170 के रिकॉर्ड स्तर पर था।

1 जनवरी से अब तक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 76,162 रुपए से 23,211 रुपए बढ़कर 99,373 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी का भाव भी 86,017 रुपए प्रति किलो से 20,683 रुपए बढ़कर 1,06,700 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं पिछले साल यानी 2024 में सोना 12,810 रुपए महंगा हुआ था।

इन 4 महीनगरों में 10 ग्राम सोने की कीमत

  • दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत रू.1,01,660 और 22 कैरेट सोने की कीमत रू.93,200
  • मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत रू.1,01,510 और 22 कैरेट सोने की कीमत रू.93,050
  • कोलकाता में 24 कैरेट सोने की कीमत रू.1,01,510 और 22 कैरेट सोने की कीमत रू.93,050
  • चेन्नई में 24 कैरेट सोने की कीमत रू.1,01,510 और 22 कैरेट सोने की कीमत रू.93,050

क्या ₹1.25 लाख तक जाएगा सोना?

बैंक ऑफ अमेरिका (BoFA) का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत $4,000 प्रति औंस तक जा सकती है।
गोल्डमैन सैक्स ने भी कहा है कि केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और वैश्विक अस्थिरता के चलते सोना 2025 के अंत तक $3,700 और 2026 के मध्य तक $4,000 प्रति औंस पर पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बनी रही तो भारत में सोने की कीमत अगले 12 महीनों में ₹1.20 लाख से ₹1.25 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकती है। हालांकि, यह निर्भर करेगा कि डॉलर की दिशा, ब्याज दरों की नीति और कच्चे तेल की आपूर्ति पर क्या असर पड़ता है।

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अमिताभ बच्चन का बंगला उड़ाने की धमकी:15 दिन में दूसरा ईमेल, स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे हाईकोर्ट में भी ब्लास्ट की बात लिखी

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मुंबई, एजेंसी। अमिताभ बच्चन के बंगले ‘जलसा’ को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल मिला है। इसके बाद मुंबई में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है।

ईमेल में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), वर्ली रेसकोर्स और बॉम्बे हाईकोर्ट को भी उड़ाने की धमकी दी गई है। ईमेल मिलने के बाद मुंबई पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

इससे पहले 23 अक्टूबर को मुंबई की मेयर रितु तावड़े को एक धमकी भरा ई-मेल आया था। इसमें भी बच्चन के बंगले को बम से उड़ाने की बात लिखी गई थी।

23 अक्टूबर को धमकी- ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेंगे

23 अक्टूबर को भेजे गए ईमेल में अमिताभ बच्चन और सिंगर दिलजीत दोसांझ को मारने की धमकी दी गई थी।

23 अक्टूबर को भेजे गए ईमेल में अमिताभ बच्चन और सिंगर दिलजीत दोसांझ को मारने की धमकी दी गई थी।

23 अक्टूबर को मुंबई मेयर को भेजे ईमेल में अमिताभ बच्चन और सिंगर दिलजीत दोसांझ जान से मारने की धमकी दी गई थी। कहा गया था- 31 अक्टूबर से 27 नवंबर के बीच कभी भी बंगले को निशाना बनाया जा सकता है। हमला 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का बदला होगा। इस मेल में खालिस्तान समर्थक नारे भी लिखे थे।

‘दिलजीत ने अमिताभ के पैर छुए, इसलिए उसे भी मारेंगे’

23 अक्टूबर को किए ईमेल में 1984 के सिख-विरोधी दंगों का भी जिक्र है। इसमें कहा गया था- ‘दिलजीत ने अमिताभ बच्चन के पैर छुए थे, इसलिए उस पर हमला किया जाएगा। 27 नवंबर को दिलजीत को महालक्ष्मी रेस कोर्स में आत्मघाती हमले में मारना है।’

धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद मुंबई पुलिस, पुलिस की डॉग स्क्वॉड और बम स्क्वॉड की टीमें बीएमसी मुख्यालय पहुंचीं। मेयर और डिप्टी मेयर कार्यालय सहित विभिन्न चैंबर्स की भी तलाशी ली।

18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग हुई थी

मुंबई में 18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना हुई। टाइगर फुटबॉल खेलने के बाद जुहू इलाके से निकल रहे थे, तभी उनकी कार पर गोलियां चलाई गईं। इस घटना में टाइगर को गोली नहीं लगी, लेकिन उनका ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए थे। इस मामले में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

मुंबई में टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग करते आरोपी।

मुंबई में टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग करते आरोपी।

टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे उनसे मिलने पहुंचे थे।

टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे उनसे मिलने पहुंचे थे।

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व्यंग्य – त्योहारों में मिठास कम, मिलावट भरती दम!

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त्योहार आते ही बाजार में रौनक बढ़ जाती है। मिठाई की दुकानों पर ऐसी सजावट होती है, मानो मिठाइयां नहीं, खुशियों के पैकेट बिक रहे हों। दुकानदार भी ग्राहकों का स्वागत ऐसे करते हैं जैसे बरसों से उनकी सेहत की चिंता में दुबले हुए जा रहे हों। लेकिन इस मिठास के पीछे मिलावट का जो कड़वा सच छिपा है, वह किसी से छिपा नहीं है।

पहले त्योहारों पर घरों में मावे की मिठाइयां बनती थीं। अब जमाना बदल गया है। घर में मिठाई बनाने की फुर्सत किसे है? बाजार में सब कुछ रेडीमेड उपलब्ध है। बस जेब में पैसा और दुकानदार पर भरोसा होना चाहिए। हालांकि भरोसे का बाजार भी अब मिलावट की गिरफ्त में है।

मजे की बात यह है कि मिठाई खरीदते समय ग्राहक शुद्धता की गारंटी मांगता है और दुकानदार मुस्कुराकर कहता है, बिल्कुल शुद्ध है! बेचारा ग्राहक भी उसकी बात पर भरोसा कर लेता है। उसे क्या मालूम कि मिठाई में मावे से ज्यादा मिलावट का अनुभव घुला हुआ है। कहीं दूध में पानी, कहीं घी में दूसरा तेल और कहीं पनीर में ऐसी सामग्री कि प्रयोगशाला भी सोच में पड़ जाए।

सरकारी विभाग भी त्योहारों से पहले अचानक जाग उठते हैं। छापेमारी होती है, नमूने लिए जाते हैं, मिलावटी सामान पकड़ा जाता है और अखबारों में बड़ी-बड़ी खबरें छप जाती हैं। जनता खुश हो जाती है कि अब मिठाइयां शुद्ध मिलेंगी। लेकिन त्योहार बीतते ही यह अभियान भी सरकारी फाइलों में मिठास घोलने चला जाता है। साथ ही जीभ भी लपालप हो जाती हैं।

सवाल यह है कि जब हर साल मिलावट पकड़ी जाती है, तो मिलावटखोरों का कारोबार बंद क्यों नहीं होता? आखिर कानून की सख्ती दुकानदारों तक पहुंचते-पहुंचते इतनी नरम कैसे पड़ जाती है?

त्योहार खुशियां बांटने के लिए हैं, बीमारियां बांटने के लिए नहीं। सरकार को भी चाहिए कि मिठाई में मिठास और व्यवस्था में सख्ती रखे। वरना आने वाले समय में लोग मिठाई खाने से पहले स्वाद नहीं, उसकी प्रयोगशाला रिपोर्ट पूछेंगे!

संजय एम तराणेकर

(कवि, लेखक व समीक्षक)

इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)

मो. 98260 25986

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बाजारों में रौनक और शुभ-लाभ के भाव!

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बाजारों में रौनक आई, दीपों का त्योहार है,

शुभ-लाभ और स्वागत के बढ़ गए भाव हैं।

कभी दस रुपये में मिलें थे, मंगल के संदेश,

कीमत सुन सोच रहा, आम आदमी विशेष।

स्वागत करना महँगा, शुभ-लाभ भी महँगा,

महँगाई ने कर दिया है, हर उत्सव को तंगा!

लक्ष्मीजी के चरणों का हैं, बढ़ गया बाजार,

पूजा से पहले जेब टटोले, हरेक दुकानदार।

शंख, स्वास्तिक व कलश, सभी के दाम बढ़े,

खुशियों के इस पर्व में, बजट के पहिए अड़े।

तीन दिनों का बाजार हुआ, 5 दिनों से कम,

खरीदार की जेब में पैसा, दुकानदार को गम।

तीस फीसदी दाम बढ़े हैं, ग्राहक हुआ उदास,

बिक्री की उम्मीदों पर भी, पड़ने लगी है घास।

शुभ-लाभ के खेल में, लाभ किसे मिल पाए?

शुभ की आशा लें ग्राहक, खाली हाथ न जाए।

लक्ष्मी पूजा तभी सफल, जब मन में हो प्यार,

अब मंगल के प्रतीकों को ना बनाओं व्यापार।

दीप जलें हर घर-आँगन, खुशियों की बरसात,

महँगे शुभ-लाभ से बेहतर, ‘सस्ती’ हो सौगात।

संजय एम तराणेकर 

(कवि, लेखक व समीक्षक)

इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)

मो. 98260 25986

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