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Good News! Petrol-Diesel और LPG की कीमतों में आने वाली है बड़ी गिरावट, हो गई भविष्यवाणी

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मुंबई, एजेंसी। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में आने वाले समय में बड़ी राहत मिल सकती है। JP Morgan ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2027 तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें 30 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह होगा कि वैश्विक तेल सप्लाई मांग से कहीं ज्यादा हो जाएगी। भारत जैसे देशों के लिए यह बड़ी राहत है, जो अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है।

सप्लाई डिमांड से कई गुना ज्यादा बढ़ेगी

JP Morgan के अनुसार अगले तीन साल में तेल की खपत बढ़ेगी लेकिन सप्लाई इससे भी ज्यादा तेज रफ्तार से बढ़ेगी। नॉन-OPEC+ देश बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ा रहे हैं।

  • दुनिया में तेल की मांग 2025 में 0.9 मिलियन बैरल/दिन बढ़कर 105.5 मिलियन बैरल/दिन तक पहुंच सकती है।
  • 2026 और 2027 में भी मांग बढ़ेगी लेकिन सप्लाई उससे तीन गुना तेज बढ़ने का अनुमान है।

इस असंतुलन की मुख्य वजह है—गहरे समुद्र से तेल उत्पादन की सस्ती और भरोसेमंद तकनीक और शेल ऑयल का बढ़ता उत्पादन।

2027 तक सप्लाई बढ़ोतरी का आधा हिस्सा नॉन-OPEC+ देशों से

JP Morgan का कहना है कि सप्लाई में होने वाली कुल बढ़ोतरी का 50% हिस्सा नॉन-OPEC+ देशों से आएगा। गहरे समुद्र में तेल निकालने वाली नई तकनीकें उत्पादन को और सस्ता और आसान बना रही हैं। 2029 तक के लिए तेल उत्पादन जहाजों की अधिकांश बुकिंग भी फाइनल हो चुकी है।

तेल की कीमत कितनी गिरेगी?

JP Morgan के मुताबिक….

  • 2026 में ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर से नीचे आ सकता है।
  • साल के अंतिम महीनों में यह 50 डॉलर शुरुआती स्तर तक पहुंच सकता है।
  • साल के अंत तक कीमतें 40 डॉलर तक गिरने की संभावना।
  • 2027 में औसत कीमत 42 डॉलर रह सकती है और
  • साल के अंत तक यह 30 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकती है।
  • फिलहाल ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा ऊपर चल रहा है।

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जन गण मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम:सभी 6 पैरा गाना जरूरी, स्कूलों में राष्ट्रगीत के बाद शुरू होगी पढ़ाई, सिनेमाघरों को छूट

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नई दिल्ली,एजेंसी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

आदेश के मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद ही होगी। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।

हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है किन-किन मौकों पर राष्ट्रगीत गाया जा सकता है, इसकी पूरी लिस्ट देना संभव नहीं है। यह पहली बार है जब राष्ट्रगीत के गायन को लेकर डिटेल में प्रोटोकॉल जारी किए गए हैं। केंद्र इस समय वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम मना रहा है।

राष्ट्रपति के आगमन और झंडारोहण जैसे कार्यक्रमों में गाया जाएगा

नई गाइडलाइन के अनुसार, तिरंगा फहराने, किसी कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्र के नाम उनके भाषणों और संबोधनों से पहले और बाद में, और राज्यपालों के आगमन और भाषणों से पहले और बाद में सहित कई आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा।

मंत्रियों या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की मौजूदगी वाले गैर-औपचारिक लेकिन जरूरी कार्यक्रमों में भी राष्ट्रगीत सामूहिक रूप से गाया जा सकता है, बशर्ते इसे पूरा सम्मान और शिष्टाचार के साथ पेश किया जाए।

10 पेजों के आदेश में, सिविलियन पुरस्कार समारोहों, जैसे कि पद्म पुरस्कार समारोह या ऐसे किसी भी कार्यक्रम में जहां राष्ट्रपति उपस्थित हों, वहां भी वन्दे मातरम बजाया जाएगा।

सिनेमा हॉल में लागू नहीं होंगे नए नियम

हालांकि, सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा।

वहीं अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में खड़े होने से प्रदर्शन में व्यवधान और अव्यवस्था हो सकती है।

मंत्रालय ने कहा है कि अब से राष्ट्रगीत का आधिकारिक संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा और इसे सामूहिक गायन के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।

बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।

1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।

‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम की झांकी निकली थी

दिल्ली में कर्तव्य पथ पर मुख्य परेड में इस साल 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड की थीम वंदे मातरम रखी गई थी। परेड में संस्कृति मंत्रालय ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाली झांकी निकाली थी। इस झांकी को मंत्रालयों और विभागों की कैटेगरी में बेस्ट झांकी का अवॉर्ड मिला।

संस्कृति मंत्रालय की ‘वंदे मातरम: एक राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ थीम पर आधारित झांकी में बंकिम चंद्र चटर्जी के गीत की रचना, एक प्रसिद्ध मराठी गायक द्वारा औपनिवेशिक काल की रिकॉर्डिंग और Gen Z का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह द्वारा इसका गायन दिखाया गया था।

झांकी के आगे के भाग में वंदे मातरम की पांडुलिपि बनाते हुए दिखाया गया था। इसके निचले हिस्से में एक पैनल पर चटर्जी की एक छवि दिखाई गई थी। मध्य भाग में पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों का एक समूह था जिसने भारत की लोक विविधता को दर्शाया।

26 जनवरी 2026 को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संस्कृति मंत्रालय की झांकी की तस्वीर।

26 जनवरी 2026 को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संस्कृति मंत्रालय की झांकी की तस्वीर।

शीतकालीन सत्र के दौरान हुआ था विवाद

केंद्र सरकार ने पिछले साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विशेष चर्चा का आयोजन किया था। लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राष्ट्रगीत को मुद्दा बना रही है।

वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम के हिस्से काटने का आरोप लगाया था। भाजपा ने 1937 में देश के पहले PM जवाहरलाल नेहरू की एक चिट्ठी शेयर की थी, जो उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को लिखी थी।

भाजपा ने आरोप लगाया था कि चिट्ठी में नेहरू ने संकेत दिया था कि वंदे मातरम की कुछ लाइनें मुसलमानों को असहज कर सकती हैं। संसद में बहस के दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के समान दर्जा दिया जाना चाहिए।

8 दिंसबर 2025: PM बोले- कांग्रेस ने वंदे मातरम के टुकड़े किए

पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम पर बहस की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी एक घंटे की स्पीच में कहा था, ‘कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए और वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए। नेहरू को लगता था कि इससे मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है।’

पीएम ने कहा, ‘वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। वो कौन सी ताकत थी, जिसकी इच्छा पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी। पीएम मोदी ने एक घंटे की स्पीच में 121 बार वंदे मातरम कहा था।’

वंदे मातरम के चार छंद क्यों हटाए गए थे?

सव्यसाची भट्टाचार्य की किताब ‘वंदे मातरम: द बायोग्राफी ऑफ ए सॉन्ग’ के मुताबिक, 20 अक्टूबर 1937 को सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी में नेहरू ने लिखा था कि वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और भाषा मुसलमानों को असहज करती है और इसकी भाषा इतनी कठिन है कि बिना डिक्शनरी के समझना मुश्किल है।

उस समय वंदे मातरम को लेकर देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा था। जवाहरलाल नेहरू को यह विवाद एक संगठित साजिश का हिस्सा लगता था। इसी मुद्दे पर उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह लेने की बात भी लिखी।

22 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मूल गीत के छह पैरा में चार पैरा हटाने का फैसला लिया था। इस बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

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अब रूस नहीं, अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा भारत:दावा- सरकारी कंपनियों को अमेरिकी क्रूड लेने को कहा, ट्रेड डील के बाद फैसला

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारत सरकार ने देश की सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों से कहा है कि वे अब अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने पर विचार करें। अमेरिकी मीडिया ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील के बाद भारत सरकार ने यह अनुरोध किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रेड डील के ऐलान के दौरान कहा था कि भारत ने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है।

प्राइवेट डील के जरिए क्रूड मंगाने की तैयारी

सरकार ने कंपनियों से कहा है कि जब भी टेंडर के जरिए स्पॉट मार्केट से तेल खरीदें, तो अमेरिकी तेल को प्राथमिकता दें। सरकार ने वेनेजुएला के कच्चे तेल को लेकर भी ऐसा अनुरोध किया है। हालांकि वेनेजुएला का तेल व्यापारियों के साथ प्राइवेट बातचीत से मंगाया जाएगा।

सरकार बोली- देश की ऊर्जा सुरक्षा पहले

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि भारत व्यापार समझौते के हिस्से के रूप में रूसी कच्चा तेल लेना बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने अब तक सार्वजनिक रूप से इस दावे पर सीधा कोई जवाब नहीं दिया है। भारत का कहना रहा है कि वह अपने तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है और देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

अमेरिकी तेल मंगाने में 2 बड़ी चुनौतियां

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरीज के लिए अमेरिकी और वेनेजुएला का तेल बड़े पैमाने पर लेना इतना आसान नहीं है। इसकी दो मुख्य वजहें हैं:

  • रिफाइनिंग क्षमता: भारत की ज्यादातर रिफाइनरीज ‘मीडियम क्रूड’ के हिसाब से बनी हैं, जबकि अमेरिकी तेल ‘लाइट और स्वीट’ यानी कम सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना भारतीय यूनिट्स के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है।
  • लागत और मालभाड़ा: अमेरिका से भारत की दूरी बहुत ज्यादा है। बढ़ते फ्रेट रेट्स (मालभाड़ा) के कारण वहां से तेल मंगाना महंगा पड़ता है। इसकी तुलना में कजाकिस्तान और पश्चिम अफ्रीका से तेल मंगाना सस्ता और नजदीक पड़ता है।

सरकारी कंपनियों ने 40 लाख बैरल क्रूड मंगाया

हाल ही में सरकारी कंपनियों जैसे IOC, BPCL और HPCL ने वेनेजुएला से करीब 40 लाख बैरल तेल खरीदा है। निकोलस मादुरो सरकार पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद अब विटोल और ट्रेफिगुरा जैसी बड़ी कंपनियां वेनेजुएला के तेल की मार्केटिंग कर रही हैं। निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रिलायंस ने भी 2025 के मध्य के बाद पहली बार वेनेजुएला से तेल की खेप खरीदी है।

अमेरिका से तेल का आयात लगभग दोगुना करने का लक्ष्य

भारतीय रिफाइनर हर साल अमेरिका से करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ले सकते हैं। यह पिछले साल के 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।

हालांकि, ये कीमत और रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों पर टिका है। फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों ने इस मामले में आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

भारत ने 2019 के बाद वेनेजुएला से तेल लेना बंद कर दिया था

अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर सेंक्शंस लगा दिए थे। इस वजह से भारत समेत कई देशों ने वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद कर दिया था। वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक सप्लाई का करीब 1% ही देता है।

भारत ने 2024 में दोबारा वेनेजुएलाई तेल खरीदना शुरू किया

अमेरिका ने कुछ समय के लिए (2023-2024 में) वेनेजुएला पर आंशिक रूप से सेंक्शंस ढीले किए, जिससे भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदा।

  • 2024 में भारत का आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।
  • 2025 में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
  • मई 2025 में अमेरिका ने एक बार फिर से वेनेजुएला के तेल पर सख्ती बढ़ा दी।

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लोकसभा में रिजिजू बोले-PM पर आरोप लगाया, सबूत दें:राहुल ने कहा- अभी दे रहा, स्पीकर ने रोका, नेता विपक्ष के खिलाफ नोटिस देगी सरकार

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नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को बजट सत्र के दौरान भाषण दिया। राहुल ने एपस्टीन फाइल्स और अडाणी पर अमेरिका में चल रहे केस का जिक्र किया। राहुल ने कहा कि अडाणी पर चल रहा केस, दरअसल मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। इसके जरिए भाजपा का फाइनेंसियल स्ट्रक्चर टूटेगा।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल को तुरंत टोका। उन्होंने कहा- आपने जो भी कहा है उसे साबित करिए, नहीं तो आपकी बात सदन के रिकॉर्ड पर नहीं जानी चाहिए।

इस पर कांग्रेस नेता ने जवाब दिया- अभी देता हूं। तुरंत सारे सबूत देता हूं। हालांकि, स्पीकर ने राहुल को टोक दिया। उन्होंने कहा- मैंने तो सबूत मांगा ही नहीं है। आप बोलते रहिए। बाद में साबित कर दीजिएगा।

वहीं, किरेन रिजिजू ने कहा कि हम राहुल गांधी के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार का नोटिस पेश करेंगे। इसपर राहुल गांधी को जवाब देना होगा। रिजिजू ने कहा कि राहुल को 5 बजे वित्त मंत्री का जवाब जरूर सुनना चाहिए।

राहुल गांधी के भाषण की खास बातें…

  1. आपने (केंद्र सरकार) भारत को बेच दिया है। आपने हमारी मां, भारत माता को बेच दिया है। अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे. हमारा फैसला प्रधानमंत्री नहीं करेंगे।
  2. दुनिया में जियोपॉलिटिकल टकराव बढ़ रहा है। यह युद्ध का दौर है। गाजा, यूक्रेन को देख लीजिए। ऑपरेशन सिंदूर भी चल रहा है। भारत की सभी IT कंपनियां संघर्ष कर रही हैं।
  3. अनिल अंबानी को जेल क्यों नहीं हुई? क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है। मैं जानता हूं कि उनको एपस्टीन से किसने मिलवाया था। हरदीप पुरी भी जानते हैं कि किसने मिलवाया था।
  4. अमेरिका और चीन की नजर भारत के डेटा पर है। AI के दौर में डेटा पेट्रोल की तरह है। हमारी सरकार ने बजट में डेटा पर विदेशी कंपनियों को 20 साल का टैक्स हॉलीडे दे दिया है।
  5. अगर हम अमेरिका से डील करते तो ट्रम्प से कहते कि आप भारतीयों के डेटा चाहते हैं तो बराबरी पर बात होगी। हम आपके नौकर नहीं हैं। अमेरिका तय नहीं करेगा कि हमें क्या करना है।

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खुशखबरी! तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ओपेक+ के एक फैसले ने सस्ता कर दिया पेट्रोल-डीजल

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नई दिल्ली,एजेंसी। देशवासियों के लिए राहत भरी खबर है! अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इसके पीछे है तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ का ताजा फैसला, जिसमें सितंबर से उत्पादन में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। इस फैसले से वैश्विक सप्लाई बढ़ गई है, जिससे तेल के दाम नीचे आ गए हैं। इसका सीधा असर अब भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दिखने लगा है। आने वाले दिनों में आम आदमी को ईंधन की कीमतों में और राहत मिल सकती है।

सोमवार को एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट OPEC+ द्वारा सितंबर महीने के लिए एक और बड़ी उत्पादन बढ़ोतरी के फैसले के बाद आई है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 43 सेंट या 0.62% गिरकर $69.24 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 39 सेंट या 0.58% की गिरावट के साथ $66.94 प्रति बैरल पर पहुंच गया। शुक्रवार को दोनों अनुबंध लगभग $2 प्रति बैरल गिरे थे।

OPEC+ ने रविवार को सितंबर के लिए तेल उत्पादन में 5,47,000 बैरल प्रतिदिन (bpd) की बढ़ोतरी का फैसला किया। यह फैसला रूस से संबंधित संभावित आपूर्ति संकट की चिंताओं के बीच बाज़ार में हिस्सेदारी वापस पाने की रणनीति का हिस्सा है।

यह बढ़ोतरी OPEC+ द्वारा पूर्व में किए गए सबसे बड़े उत्पादन कटौती की पूरी और समय से पहले वापसी को दर्शाती है। साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात के लिए एक अलग वृद्धि को भी शामिल किया गया है, जिससे कुल मिलाकर लगभग 2.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन या वैश्विक मांग का लगभग 2.4% उत्पादन बढ़ेगा।

OPEC+ के 8 सदस्य देशों ने एक संक्षिप्त वर्चुअल बैठक की। यह बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीद को रोकने के लिए दबाव बढ़ाया है। अमेरिका की यह कोशिश रूस को यूक्रेन के साथ शांति वार्ता की मेज़ पर लाने की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे चाहते हैं कि यह वार्ता 8 अगस्त तक शुरू हो। बैठक के बाद जारी बयान में OPEC+ ने कहा कि मज़बूत अर्थव्यवस्था और कम भंडार (स्टॉक्स) को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

एनर्जी ऐस्पेक्ट्स की सह-संस्थापक अमृता सेन ने कहा, “तेल की कीमतें लगभग $70 के आसपास बनी हुई हैं, जो OPEC+ को बाज़ार की स्थिति को लेकर आत्मविश्वास देती हैं।  उन्होंने आगे कहा कि बाज़ार की संरचना भी कम स्टॉक्स की ओर इशारा कर रही है। ये 8 देश अब फिर से 7 सितंबर को बैठक करेंगे, जहां वे 1.65 मिलियन बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त कटौती को फिर से लागू करने पर विचार कर सकते हैं। ये कटौती फिलहाल 2026 के अंत तक प्रभावी है।

OPEC+ में कुल मिलाकर 10 गैर-OPEC देश शामिल हैं, जिनमें प्रमुख रूप से रूस और कज़ाखस्तान हैं। यह समूह दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा करता है। OPEC+ कई वर्षों से तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए उत्पादन में कटौती कर रहा था, लेकिन इस साल समूह ने अपना रुख बदल दिया और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया। इसका एक कारण ट्रंप प्रशासन की ओर से उत्पादन बढ़ाने का दबाव भी रहा।

इन 8 देशों ने अप्रैल में 1,38,000 बैरल प्रतिदिन की छोटी वृद्धि से शुरुआत की थी, इसके बाद मई, जून और जुलाई में 4,11,000 बैरल, अगस्त में 5,48,000 बैरल और अब सितंबर में 5,47,000 बैरल प्रतिदिन की वृद्धि की गई है।

UBS के जियोवानी स्टावोनो ने कहा, अब तक बाज़ार ने इन अतिरिक्त बैरल्स को अच्छी तरह से संभाल लिया है, खासकर चीन में स्टॉकपाइलिंग (भंडारण) की वजह से। उन्होंने कहा कि अब सबकी निगाहें ट्रंप के शुक्रवार को रूस पर लिए जाने वाले फैसले पर हैं।  इन 8 देशों की स्वयंसेवक कटौती के अलावा, OPEC+ के सभी सदस्यों पर कुल 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त कटौती भी लागू है, जो 2026 के अंत तक प्रभावी रहेगी।

रिस्टैड एनर्जी के जॉर्ज लिऑन, जो पूर्व OPEC अधिकारी भी हैं, ने कहा कि OPEC+ ने अपनी सबसे बड़ी कटौती को बिना कीमतों को गिराए पूरी तरह से वापस लेकर पहली परीक्षा पास कर ली है।  उन्होंने कहा,  लेकिन अगली चुनौती और भी कठिन होगी — यह तय करना कि शेष 1.66 मिलियन बैरल की कटौती को कब और कैसे हटाया जाए, जबकि उन्हें भू-राजनीतिक तनावों के बीच समूह की एकता भी बनाए रखनी है। 

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जन गण मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम:सभी 6 पैरा गाना जरूरी, स्कूलों में राष्ट्रगीत के बाद शुरू होगी पढ़ाई, सिनेमाघरों को छूट

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नई दिल्ली,एजेंसी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

आदेश के मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद ही होगी। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।

हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है किन-किन मौकों पर राष्ट्रगीत गाया जा सकता है, इसकी पूरी लिस्ट देना संभव नहीं है। यह पहली बार है जब राष्ट्रगीत के गायन को लेकर डिटेल में प्रोटोकॉल जारी किए गए हैं। केंद्र इस समय वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम मना रहा है।

राष्ट्रपति के आगमन और झंडारोहण जैसे कार्यक्रमों में गाया जाएगा

नई गाइडलाइन के अनुसार, तिरंगा फहराने, किसी कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्र के नाम उनके भाषणों और संबोधनों से पहले और बाद में, और राज्यपालों के आगमन और भाषणों से पहले और बाद में सहित कई आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा।

मंत्रियों या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की मौजूदगी वाले गैर-औपचारिक लेकिन जरूरी कार्यक्रमों में भी राष्ट्रगीत सामूहिक रूप से गाया जा सकता है, बशर्ते इसे पूरा सम्मान और शिष्टाचार के साथ पेश किया जाए।

10 पेजों के आदेश में, सिविलियन पुरस्कार समारोहों, जैसे कि पद्म पुरस्कार समारोह या ऐसे किसी भी कार्यक्रम में जहां राष्ट्रपति उपस्थित हों, वहां भी वन्दे मातरम बजाया जाएगा।

सिनेमा हॉल में लागू नहीं होंगे नए नियम

हालांकि, सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा।

वहीं अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में खड़े होने से प्रदर्शन में व्यवधान और अव्यवस्था हो सकती है।

मंत्रालय ने कहा है कि अब से राष्ट्रगीत का आधिकारिक संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा और इसे सामूहिक गायन के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।

बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।

1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।

‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम की झांकी निकली थी

दिल्ली में कर्तव्य पथ पर मुख्य परेड में इस साल 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड की थीम वंदे मातरम रखी गई थी। परेड में संस्कृति मंत्रालय ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाली झांकी निकाली थी। इस झांकी को मंत्रालयों और विभागों की कैटेगरी में बेस्ट झांकी का अवॉर्ड मिला।

संस्कृति मंत्रालय की ‘वंदे मातरम: एक राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ थीम पर आधारित झांकी में बंकिम चंद्र चटर्जी के गीत की रचना, एक प्रसिद्ध मराठी गायक द्वारा औपनिवेशिक काल की रिकॉर्डिंग और Gen Z का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह द्वारा इसका गायन दिखाया गया था।

झांकी के आगे के भाग में वंदे मातरम की पांडुलिपि बनाते हुए दिखाया गया था। इसके निचले हिस्से में एक पैनल पर चटर्जी की एक छवि दिखाई गई थी। मध्य भाग में पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों का एक समूह था जिसने भारत की लोक विविधता को दर्शाया।

26 जनवरी 2026 को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संस्कृति मंत्रालय की झांकी की तस्वीर।

26 जनवरी 2026 को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संस्कृति मंत्रालय की झांकी की तस्वीर।

शीतकालीन सत्र के दौरान हुआ था विवाद

केंद्र सरकार ने पिछले साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विशेष चर्चा का आयोजन किया था। लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राष्ट्रगीत को मुद्दा बना रही है।

वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम के हिस्से काटने का आरोप लगाया था। भाजपा ने 1937 में देश के पहले PM जवाहरलाल नेहरू की एक चिट्ठी शेयर की थी, जो उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को लिखी थी।

भाजपा ने आरोप लगाया था कि चिट्ठी में नेहरू ने संकेत दिया था कि वंदे मातरम की कुछ लाइनें मुसलमानों को असहज कर सकती हैं। संसद में बहस के दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के समान दर्जा दिया जाना चाहिए।

8 दिंसबर 2025: PM बोले- कांग्रेस ने वंदे मातरम के टुकड़े किए

पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम पर बहस की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी एक घंटे की स्पीच में कहा था, ‘कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए और वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए। नेहरू को लगता था कि इससे मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है।’

पीएम ने कहा, ‘वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। वो कौन सी ताकत थी, जिसकी इच्छा पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी। पीएम मोदी ने एक घंटे की स्पीच में 121 बार वंदे मातरम कहा था।’

वंदे मातरम के चार छंद क्यों हटाए गए थे?

सव्यसाची भट्टाचार्य की किताब ‘वंदे मातरम: द बायोग्राफी ऑफ ए सॉन्ग’ के मुताबिक, 20 अक्टूबर 1937 को सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी में नेहरू ने लिखा था कि वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और भाषा मुसलमानों को असहज करती है और इसकी भाषा इतनी कठिन है कि बिना डिक्शनरी के समझना मुश्किल है।

उस समय वंदे मातरम को लेकर देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा था। जवाहरलाल नेहरू को यह विवाद एक संगठित साजिश का हिस्सा लगता था। इसी मुद्दे पर उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह लेने की बात भी लिखी।

22 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मूल गीत के छह पैरा में चार पैरा हटाने का फैसला लिया था। इस बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

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देश

अब रूस नहीं, अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा भारत:दावा- सरकारी कंपनियों को अमेरिकी क्रूड लेने को कहा, ट्रेड डील के बाद फैसला

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारत सरकार ने देश की सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों से कहा है कि वे अब अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने पर विचार करें। अमेरिकी मीडिया ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील के बाद भारत सरकार ने यह अनुरोध किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रेड डील के ऐलान के दौरान कहा था कि भारत ने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है।

प्राइवेट डील के जरिए क्रूड मंगाने की तैयारी

सरकार ने कंपनियों से कहा है कि जब भी टेंडर के जरिए स्पॉट मार्केट से तेल खरीदें, तो अमेरिकी तेल को प्राथमिकता दें। सरकार ने वेनेजुएला के कच्चे तेल को लेकर भी ऐसा अनुरोध किया है। हालांकि वेनेजुएला का तेल व्यापारियों के साथ प्राइवेट बातचीत से मंगाया जाएगा।

सरकार बोली- देश की ऊर्जा सुरक्षा पहले

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि भारत व्यापार समझौते के हिस्से के रूप में रूसी कच्चा तेल लेना बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने अब तक सार्वजनिक रूप से इस दावे पर सीधा कोई जवाब नहीं दिया है। भारत का कहना रहा है कि वह अपने तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है और देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

अमेरिकी तेल मंगाने में 2 बड़ी चुनौतियां

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरीज के लिए अमेरिकी और वेनेजुएला का तेल बड़े पैमाने पर लेना इतना आसान नहीं है। इसकी दो मुख्य वजहें हैं:

  • रिफाइनिंग क्षमता: भारत की ज्यादातर रिफाइनरीज ‘मीडियम क्रूड’ के हिसाब से बनी हैं, जबकि अमेरिकी तेल ‘लाइट और स्वीट’ यानी कम सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना भारतीय यूनिट्स के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है।
  • लागत और मालभाड़ा: अमेरिका से भारत की दूरी बहुत ज्यादा है। बढ़ते फ्रेट रेट्स (मालभाड़ा) के कारण वहां से तेल मंगाना महंगा पड़ता है। इसकी तुलना में कजाकिस्तान और पश्चिम अफ्रीका से तेल मंगाना सस्ता और नजदीक पड़ता है।

सरकारी कंपनियों ने 40 लाख बैरल क्रूड मंगाया

हाल ही में सरकारी कंपनियों जैसे IOC, BPCL और HPCL ने वेनेजुएला से करीब 40 लाख बैरल तेल खरीदा है। निकोलस मादुरो सरकार पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद अब विटोल और ट्रेफिगुरा जैसी बड़ी कंपनियां वेनेजुएला के तेल की मार्केटिंग कर रही हैं। निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रिलायंस ने भी 2025 के मध्य के बाद पहली बार वेनेजुएला से तेल की खेप खरीदी है।

अमेरिका से तेल का आयात लगभग दोगुना करने का लक्ष्य

भारतीय रिफाइनर हर साल अमेरिका से करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ले सकते हैं। यह पिछले साल के 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।

हालांकि, ये कीमत और रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों पर टिका है। फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों ने इस मामले में आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

भारत ने 2019 के बाद वेनेजुएला से तेल लेना बंद कर दिया था

अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर सेंक्शंस लगा दिए थे। इस वजह से भारत समेत कई देशों ने वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद कर दिया था। वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक सप्लाई का करीब 1% ही देता है।

भारत ने 2024 में दोबारा वेनेजुएलाई तेल खरीदना शुरू किया

अमेरिका ने कुछ समय के लिए (2023-2024 में) वेनेजुएला पर आंशिक रूप से सेंक्शंस ढीले किए, जिससे भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदा।

  • 2024 में भारत का आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।
  • 2025 में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
  • मई 2025 में अमेरिका ने एक बार फिर से वेनेजुएला के तेल पर सख्ती बढ़ा दी।

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देश

लोकसभा में रिजिजू बोले-PM पर आरोप लगाया, सबूत दें:राहुल ने कहा- अभी दे रहा, स्पीकर ने रोका, नेता विपक्ष के खिलाफ नोटिस देगी सरकार

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नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को बजट सत्र के दौरान भाषण दिया। राहुल ने एपस्टीन फाइल्स और अडाणी पर अमेरिका में चल रहे केस का जिक्र किया। राहुल ने कहा कि अडाणी पर चल रहा केस, दरअसल मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। इसके जरिए भाजपा का फाइनेंसियल स्ट्रक्चर टूटेगा।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल को तुरंत टोका। उन्होंने कहा- आपने जो भी कहा है उसे साबित करिए, नहीं तो आपकी बात सदन के रिकॉर्ड पर नहीं जानी चाहिए।

इस पर कांग्रेस नेता ने जवाब दिया- अभी देता हूं। तुरंत सारे सबूत देता हूं। हालांकि, स्पीकर ने राहुल को टोक दिया। उन्होंने कहा- मैंने तो सबूत मांगा ही नहीं है। आप बोलते रहिए। बाद में साबित कर दीजिएगा।

वहीं, किरेन रिजिजू ने कहा कि हम राहुल गांधी के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार का नोटिस पेश करेंगे। इसपर राहुल गांधी को जवाब देना होगा। रिजिजू ने कहा कि राहुल को 5 बजे वित्त मंत्री का जवाब जरूर सुनना चाहिए।

राहुल गांधी के भाषण की खास बातें…

  1. आपने (केंद्र सरकार) भारत को बेच दिया है। आपने हमारी मां, भारत माता को बेच दिया है। अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे. हमारा फैसला प्रधानमंत्री नहीं करेंगे।
  2. दुनिया में जियोपॉलिटिकल टकराव बढ़ रहा है। यह युद्ध का दौर है। गाजा, यूक्रेन को देख लीजिए। ऑपरेशन सिंदूर भी चल रहा है। भारत की सभी IT कंपनियां संघर्ष कर रही हैं।
  3. अनिल अंबानी को जेल क्यों नहीं हुई? क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है। मैं जानता हूं कि उनको एपस्टीन से किसने मिलवाया था। हरदीप पुरी भी जानते हैं कि किसने मिलवाया था।
  4. अमेरिका और चीन की नजर भारत के डेटा पर है। AI के दौर में डेटा पेट्रोल की तरह है। हमारी सरकार ने बजट में डेटा पर विदेशी कंपनियों को 20 साल का टैक्स हॉलीडे दे दिया है।
  5. अगर हम अमेरिका से डील करते तो ट्रम्प से कहते कि आप भारतीयों के डेटा चाहते हैं तो बराबरी पर बात होगी। हम आपके नौकर नहीं हैं। अमेरिका तय नहीं करेगा कि हमें क्या करना है।

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खुशखबरी! रोज सिर्फ ₹100 बचाकर आप भी बन सकते हैं करोड़पति, जानें अमीर बनने का ये आसान फॉर्मूला

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मुंबई, एजेंसी। हर कोई अमीर बनना चाहता है। लखपति, करोड़पति और अरबपति बनने का सपना हर किसी का होता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अमीर बनने का कोई शॉर्टकट नहीं है इसके लिए धैर्य और लंबा समय लगता है। हालांकि आज के डिजिटल दौर में पैसा बनाना जितना आसान है उतना पहले कभी नहीं था। अब आप अपने मोबाइल पर सिर्फ एक क्लिक से शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड, ईटीएफ, गोल्ड आदि में निवेश कर सकते हैं। अगर आप रोज़ थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाएं और उसे सही जगह निवेश करें तो एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। यानि कि अगर आप रोज रू.100 बचाते हैं तो आप भी करोड़पति बन सकतें हैं। अगर आप शेयर मार्केट में सीधे पैसा लगाने का बड़ा जोखिम नहीं लेना चाहते तो म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। यहाँ सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए आप अपनी छोटी-छोटी बचत को भी निवेश कर सकते हैं।

रोज़ रू.100 बचाकर ऐसे बनें करोड़पति

अगर आप करोड़पति बनना चाहते हैं तो आपको बहुत ज्यादा कुछ करने की ज़रूरत नहीं है। आपको सिर्फ रोज रू.100 बचाने हैं और उसे SIP के ज़रिए म्यूचुअल फंड में निवेश करना है। वेल्थ मैनेजर्स के अनुसार म्यूचुअल फंड का औसत रिटर्न 12 फ़ीसदी होता है। हालांकि म्यूचुअल फंड के रिटर्न में उतार-चढ़ाव आता रहता है लेकिन अगर आप लंबे समय तक म्यूचुअल फंड प्लान में निवेश करते हैं तो आप आसानी से करोड़पति बन सकते हैं। रोज सिर्फ रू.100 बचाकर भी आप कुछ वर्षों में खुद को करोड़पति की श्रेणी में ला सकते हैं।

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रू.100 की बचत से करोड़पति बनने का गणित

आइए जानते हैं कि रोज़ रू.100 बचाने से आप कैसे करोड़पति बन सकते हैं।

➤ अगर आप रोज़ रू.100 बचाते हैं तो एक महीने में यह रकम रू.3,000 हो जाती है।

➤ आपको इस पैसे को SIP के ज़रिए म्यूचुअल फंड में डालना है।

➤ यह प्रक्रिया आपको 30 साल तक करनी है। यानी रोज़ रू.100 बचाकर महीनेभर बाद रू.3,000 म्यूचुअल फंड SIP में डालने हैं।

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SIP कैलकुलेटर के अनुसार

➤ इस तरह आप 30 साल में कुल रू.10,80,000 निवेश करेंगे।

➤ अगर 12 फ़ीसदी का औसत रिटर्न मिलता है तो आपको अपने निवेश पर लगभग रू.95,09,741 का रिटर्न मिलेगा।

➤ इस तरह 30 साल में आपका कुल फंड रू.1,05,89,741 का बन जाएगा और आप करोड़पति बन जाएंगे।

फिलहाल थोड़ी सी नियमित बचत और सही निवेश की रणनीति आपको कैसे करोड़पति बना सकती है।

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जन गण मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम:सभी 6 पैरा गाना जरूरी, स्कूलों में राष्ट्रगीत के बाद शुरू होगी पढ़ाई, सिनेमाघरों को छूट

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नई दिल्ली,एजेंसी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

आदेश के मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद ही होगी। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।

हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है किन-किन मौकों पर राष्ट्रगीत गाया जा सकता है, इसकी पूरी लिस्ट देना संभव नहीं है। यह पहली बार है जब राष्ट्रगीत के गायन को लेकर डिटेल में प्रोटोकॉल जारी किए गए हैं। केंद्र इस समय वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम मना रहा है।

राष्ट्रपति के आगमन और झंडारोहण जैसे कार्यक्रमों में गाया जाएगा

नई गाइडलाइन के अनुसार, तिरंगा फहराने, किसी कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्र के नाम उनके भाषणों और संबोधनों से पहले और बाद में, और राज्यपालों के आगमन और भाषणों से पहले और बाद में सहित कई आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा।

मंत्रियों या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की मौजूदगी वाले गैर-औपचारिक लेकिन जरूरी कार्यक्रमों में भी राष्ट्रगीत सामूहिक रूप से गाया जा सकता है, बशर्ते इसे पूरा सम्मान और शिष्टाचार के साथ पेश किया जाए।

10 पेजों के आदेश में, सिविलियन पुरस्कार समारोहों, जैसे कि पद्म पुरस्कार समारोह या ऐसे किसी भी कार्यक्रम में जहां राष्ट्रपति उपस्थित हों, वहां भी वन्दे मातरम बजाया जाएगा।

सिनेमा हॉल में लागू नहीं होंगे नए नियम

हालांकि, सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा।

वहीं अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में खड़े होने से प्रदर्शन में व्यवधान और अव्यवस्था हो सकती है।

मंत्रालय ने कहा है कि अब से राष्ट्रगीत का आधिकारिक संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा और इसे सामूहिक गायन के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।

बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।

1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।

‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम की झांकी निकली थी

दिल्ली में कर्तव्य पथ पर मुख्य परेड में इस साल 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड की थीम वंदे मातरम रखी गई थी। परेड में संस्कृति मंत्रालय ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाली झांकी निकाली थी। इस झांकी को मंत्रालयों और विभागों की कैटेगरी में बेस्ट झांकी का अवॉर्ड मिला।

संस्कृति मंत्रालय की ‘वंदे मातरम: एक राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ थीम पर आधारित झांकी में बंकिम चंद्र चटर्जी के गीत की रचना, एक प्रसिद्ध मराठी गायक द्वारा औपनिवेशिक काल की रिकॉर्डिंग और Gen Z का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह द्वारा इसका गायन दिखाया गया था।

झांकी के आगे के भाग में वंदे मातरम की पांडुलिपि बनाते हुए दिखाया गया था। इसके निचले हिस्से में एक पैनल पर चटर्जी की एक छवि दिखाई गई थी। मध्य भाग में पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों का एक समूह था जिसने भारत की लोक विविधता को दर्शाया।

26 जनवरी 2026 को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संस्कृति मंत्रालय की झांकी की तस्वीर।

26 जनवरी 2026 को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संस्कृति मंत्रालय की झांकी की तस्वीर।

शीतकालीन सत्र के दौरान हुआ था विवाद

केंद्र सरकार ने पिछले साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विशेष चर्चा का आयोजन किया था। लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राष्ट्रगीत को मुद्दा बना रही है।

वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम के हिस्से काटने का आरोप लगाया था। भाजपा ने 1937 में देश के पहले PM जवाहरलाल नेहरू की एक चिट्ठी शेयर की थी, जो उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को लिखी थी।

भाजपा ने आरोप लगाया था कि चिट्ठी में नेहरू ने संकेत दिया था कि वंदे मातरम की कुछ लाइनें मुसलमानों को असहज कर सकती हैं। संसद में बहस के दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के समान दर्जा दिया जाना चाहिए।

8 दिंसबर 2025: PM बोले- कांग्रेस ने वंदे मातरम के टुकड़े किए

पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम पर बहस की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी एक घंटे की स्पीच में कहा था, ‘कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए और वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए। नेहरू को लगता था कि इससे मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है।’

पीएम ने कहा, ‘वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। वो कौन सी ताकत थी, जिसकी इच्छा पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी। पीएम मोदी ने एक घंटे की स्पीच में 121 बार वंदे मातरम कहा था।’

वंदे मातरम के चार छंद क्यों हटाए गए थे?

सव्यसाची भट्टाचार्य की किताब ‘वंदे मातरम: द बायोग्राफी ऑफ ए सॉन्ग’ के मुताबिक, 20 अक्टूबर 1937 को सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी में नेहरू ने लिखा था कि वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और भाषा मुसलमानों को असहज करती है और इसकी भाषा इतनी कठिन है कि बिना डिक्शनरी के समझना मुश्किल है।

उस समय वंदे मातरम को लेकर देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा था। जवाहरलाल नेहरू को यह विवाद एक संगठित साजिश का हिस्सा लगता था। इसी मुद्दे पर उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह लेने की बात भी लिखी।

22 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मूल गीत के छह पैरा में चार पैरा हटाने का फैसला लिया था। इस बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

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अब रूस नहीं, अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा भारत:दावा- सरकारी कंपनियों को अमेरिकी क्रूड लेने को कहा, ट्रेड डील के बाद फैसला

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारत सरकार ने देश की सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों से कहा है कि वे अब अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने पर विचार करें। अमेरिकी मीडिया ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील के बाद भारत सरकार ने यह अनुरोध किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रेड डील के ऐलान के दौरान कहा था कि भारत ने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है।

प्राइवेट डील के जरिए क्रूड मंगाने की तैयारी

सरकार ने कंपनियों से कहा है कि जब भी टेंडर के जरिए स्पॉट मार्केट से तेल खरीदें, तो अमेरिकी तेल को प्राथमिकता दें। सरकार ने वेनेजुएला के कच्चे तेल को लेकर भी ऐसा अनुरोध किया है। हालांकि वेनेजुएला का तेल व्यापारियों के साथ प्राइवेट बातचीत से मंगाया जाएगा।

सरकार बोली- देश की ऊर्जा सुरक्षा पहले

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि भारत व्यापार समझौते के हिस्से के रूप में रूसी कच्चा तेल लेना बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने अब तक सार्वजनिक रूप से इस दावे पर सीधा कोई जवाब नहीं दिया है। भारत का कहना रहा है कि वह अपने तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है और देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

अमेरिकी तेल मंगाने में 2 बड़ी चुनौतियां

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरीज के लिए अमेरिकी और वेनेजुएला का तेल बड़े पैमाने पर लेना इतना आसान नहीं है। इसकी दो मुख्य वजहें हैं:

  • रिफाइनिंग क्षमता: भारत की ज्यादातर रिफाइनरीज ‘मीडियम क्रूड’ के हिसाब से बनी हैं, जबकि अमेरिकी तेल ‘लाइट और स्वीट’ यानी कम सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना भारतीय यूनिट्स के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है।
  • लागत और मालभाड़ा: अमेरिका से भारत की दूरी बहुत ज्यादा है। बढ़ते फ्रेट रेट्स (मालभाड़ा) के कारण वहां से तेल मंगाना महंगा पड़ता है। इसकी तुलना में कजाकिस्तान और पश्चिम अफ्रीका से तेल मंगाना सस्ता और नजदीक पड़ता है।

सरकारी कंपनियों ने 40 लाख बैरल क्रूड मंगाया

हाल ही में सरकारी कंपनियों जैसे IOC, BPCL और HPCL ने वेनेजुएला से करीब 40 लाख बैरल तेल खरीदा है। निकोलस मादुरो सरकार पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद अब विटोल और ट्रेफिगुरा जैसी बड़ी कंपनियां वेनेजुएला के तेल की मार्केटिंग कर रही हैं। निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रिलायंस ने भी 2025 के मध्य के बाद पहली बार वेनेजुएला से तेल की खेप खरीदी है।

अमेरिका से तेल का आयात लगभग दोगुना करने का लक्ष्य

भारतीय रिफाइनर हर साल अमेरिका से करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ले सकते हैं। यह पिछले साल के 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।

हालांकि, ये कीमत और रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों पर टिका है। फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों ने इस मामले में आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

भारत ने 2019 के बाद वेनेजुएला से तेल लेना बंद कर दिया था

अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर सेंक्शंस लगा दिए थे। इस वजह से भारत समेत कई देशों ने वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद कर दिया था। वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक सप्लाई का करीब 1% ही देता है।

भारत ने 2024 में दोबारा वेनेजुएलाई तेल खरीदना शुरू किया

अमेरिका ने कुछ समय के लिए (2023-2024 में) वेनेजुएला पर आंशिक रूप से सेंक्शंस ढीले किए, जिससे भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदा।

  • 2024 में भारत का आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।
  • 2025 में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
  • मई 2025 में अमेरिका ने एक बार फिर से वेनेजुएला के तेल पर सख्ती बढ़ा दी।

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देश

लोकसभा में रिजिजू बोले-PM पर आरोप लगाया, सबूत दें:राहुल ने कहा- अभी दे रहा, स्पीकर ने रोका, नेता विपक्ष के खिलाफ नोटिस देगी सरकार

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नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को बजट सत्र के दौरान भाषण दिया। राहुल ने एपस्टीन फाइल्स और अडाणी पर अमेरिका में चल रहे केस का जिक्र किया। राहुल ने कहा कि अडाणी पर चल रहा केस, दरअसल मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। इसके जरिए भाजपा का फाइनेंसियल स्ट्रक्चर टूटेगा।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल को तुरंत टोका। उन्होंने कहा- आपने जो भी कहा है उसे साबित करिए, नहीं तो आपकी बात सदन के रिकॉर्ड पर नहीं जानी चाहिए।

इस पर कांग्रेस नेता ने जवाब दिया- अभी देता हूं। तुरंत सारे सबूत देता हूं। हालांकि, स्पीकर ने राहुल को टोक दिया। उन्होंने कहा- मैंने तो सबूत मांगा ही नहीं है। आप बोलते रहिए। बाद में साबित कर दीजिएगा।

वहीं, किरेन रिजिजू ने कहा कि हम राहुल गांधी के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार का नोटिस पेश करेंगे। इसपर राहुल गांधी को जवाब देना होगा। रिजिजू ने कहा कि राहुल को 5 बजे वित्त मंत्री का जवाब जरूर सुनना चाहिए।

राहुल गांधी के भाषण की खास बातें…

  1. आपने (केंद्र सरकार) भारत को बेच दिया है। आपने हमारी मां, भारत माता को बेच दिया है। अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे. हमारा फैसला प्रधानमंत्री नहीं करेंगे।
  2. दुनिया में जियोपॉलिटिकल टकराव बढ़ रहा है। यह युद्ध का दौर है। गाजा, यूक्रेन को देख लीजिए। ऑपरेशन सिंदूर भी चल रहा है। भारत की सभी IT कंपनियां संघर्ष कर रही हैं।
  3. अनिल अंबानी को जेल क्यों नहीं हुई? क्योंकि उनका नाम एपस्टीन फाइल्स में है। मैं जानता हूं कि उनको एपस्टीन से किसने मिलवाया था। हरदीप पुरी भी जानते हैं कि किसने मिलवाया था।
  4. अमेरिका और चीन की नजर भारत के डेटा पर है। AI के दौर में डेटा पेट्रोल की तरह है। हमारी सरकार ने बजट में डेटा पर विदेशी कंपनियों को 20 साल का टैक्स हॉलीडे दे दिया है।
  5. अगर हम अमेरिका से डील करते तो ट्रम्प से कहते कि आप भारतीयों के डेटा चाहते हैं तो बराबरी पर बात होगी। हम आपके नौकर नहीं हैं। अमेरिका तय नहीं करेगा कि हमें क्या करना है।

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