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खड़गे बोले- मोदी ट्रम्प के आगे क्यों झुक रहे:उन्हें सिर हिलाने के लिए PM नहीं चुना

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वेनेजुएला में बने हालात ठीक नहीं

नई दिल्ली,एजेंसी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों को लेकर सोमवार को पीएम मोदी पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा- मैं नहीं समझ पा रहा कि मोदी ट्रंप के सामने क्यों झुक रहे हैं। यह देश के लिए ठीक नहीं है। आपको देश के लिए खड़ा होना चाहिए। देश ने आपको प्रधानमंत्री सिर हिलाने के लिए नहीं चुना।

दरअसल खड़गे का बयान ट्रम्प के दावे पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि रूस से तेल आयात पर अमेरिकी नाराजगी के बाद भारत ने तेल खरीद घटाई, क्योंकि मोदी मुझे (ट्रम्प) खुश करना चाहते थे।

खड़गे ने वेनेजुएला की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा- वहां बन रहे हालात दुनिया के लिए अच्छे नहीं हैं। डराने और विस्तारवादी नीति ज्यादा समय तक नहीं चलती। हिटलर और मुसोलिनी जैसे लोग इतिहास बन चुके हैं। वैश्विक शांति बिगाड़ने वाली सोच ठीक नहीं है।

कांग्रेस के 3 सवाल…

  • क्या भारत की विदेश नीति अब अमेरिका तय कर रहा है?
  • क्या रूस से तेल आयात घटाने का फैसला ट्रम्प को खुश करने के लिए लिया गया?
  • ट्रम्प की धमकियों और दावों पर मोदी चुप क्यों हैं?

भारत-पाक शांति दावे पर तंज

खड़गे ने ट्रम्प के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें वे बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने की बात कहते हैं। खड़गे बोले- ट्रम्प कम से कम 70 बार कह चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाक के बीच शांति कराई। क्या इसका मतलब है कि दुनिया उनके आगे झुक जाए? दुनिया नहीं झुकेगी।

5 जनवरी: रूस से भारत का तेल आयात घटने पर ट्रम्प बोले- मोदी जानते थे मैं नाखुश था

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के रूस से तेल आयात कम करने को लेकर बयान दिया। ट्रम्प ने कहा- भारत ने यह फैसला उन्हें खुश करने के लिए लिया। वे मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वह जानते थे कि मैं खुश नहीं था, इसलिए मुझे खुश करना जरूरी था। हम व्यापार करते हैं और उन पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।

दरअसल, यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन पर हो रहे हमलों को फंड कर रहा है। इसे लेकर ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर 25% टैरिफ भी लगाया था।

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व्यंग्य – हार का झटका, नागपुर-वाराणसी पे अटका!

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चुनाव में हार-जीत तो लगी रहती है, लेकिन जब जीत का घोड़ा दौड़ते-दौड़ते अचानक ठोकर खा जाए तो सवार को भी अपनी सवारी पर शक होने लगता है। चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों में सत्तापक्ष को मिले झटकों ने कुछ ऐसा ही माहौल बना दिया है। खासकर नागपुर में विपक्ष की जीत ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यानी एक ही तीर वह भी बड़ा गंभीर। जैसे सत्ता पक्ष के दिल पर चोट कर दी हो।

नागपुर कोई साधारण जगह नहीं है। इसे संघ का मुख्यालय होने का गौरव प्राप्त है। ऐसे में वहां विपक्ष की जीत होना सत्तापक्ष के लिए किसी राजनीतिक पहेली से कम नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि जब घर के आसपास ही मतदाताओं का मिजाज बदलने लगे तो चुनावी रणनीतिकार आखिर किस दिशा में रणनीति बना रहे हैं? 

प्रधानमंत्री ने विपक्ष की सीटों को लेकर सोशल मीडिया पर तंज कसा, लेकिन प्रकृति का न्याय देखिए कि कुछ ही समय बाद नागपुर ने ऐसा जवाब दिया कि राजनीतिक व्यंग्य का विषय ही बदल गया। लगता है मतदाता भी अब सोशल मीडिया की पोस्ट पढ़कर नहीं, अपनी पसंद से वोट डालने लगे हैं। इससे यह भी साबित होता है कि सोशल मीडिया पर जल्दबाजी में पोस्ट करना कितना भारी पड़ सकता है। इधर झट से पोस्ट की और उधर नुकसान हो गया।

उधर वाराणसी में भी सायकलवालों की जीत ने सत्तापक्ष को सोचने पर मजबूर कर दिया। अब इसे विपक्ष की किस्मत कहें या मतदाताओं की नाराजगी, लेकिन लोकतंत्र में जनता का फैसला सबसे ऊपर होता है।

वैसे चुनाव हारने के बाद आत्ममंथन करने की परंपरा बड़ी दिलचस्प है। हर पार्टी आत्ममंथन का ऐलान करती है, बैठकें होती हैं, रिपोर्ट बनती है और फिर अगले चुनाव में वही पुराने चेहरे, वही पुराने वादे और वही पुराने भाषण मैदान में उतर आते हैं। वैसे ही जैसे आते-जाते लहरों की तरह।

सच तो यह है कि लोकतंत्र में कोई भी पार्टी स्थायी विजेता नहीं होती। कुर्सी का तकिया कितना भी मुलायम क्यों न हो, जनता जब करवट बदलती है तो सत्तापक्ष की नींद उड़ ही जाती है। इसलिए बेहतर है कि नेता जनता की आवाज सुनें, वरना ईवीएम से पहले मतदाता ही राजनीतिक नींद का अलार्म बजा देते हैं!

संजय एम तराणेकर 

(कवि, लेखक व समीक्षक)

इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)

मो. 98260 25986

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग कार्यक्रम कल होगा:राहुल गांधी बोले- यह संविधान बचाने की लड़ाई, 1 नवंबर को SIR के खिलाफ रामलीला मैदान में रैली

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नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आज होने वाला ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम शनिवार को होगा। राहुल गांधी ने यह जानकारी शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

राहुल ने कहा, ‘हमने आज का कार्यक्रम बारिश के कारण कल करने का फैसला किया है। उसके बाद अगले दिन हम रामलीला मैदान पर मार्च करेंगे। हमने इसमें राजनीतिक, छात्र संगठनों और सभी लोगों से आने की अपील है।’

‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाया जाएगा। पब्लिक महाभियोग में जनता या राजनीतिक दल किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ विरोध जताते हैं।

विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली करेगा।

सपा ने कहा- एमएलसी चुनाव भाजपा ने बेईमानी से जीता

  • सपा नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा, ‘पूरा विपक्ष जो लड़ाई लड़ रहा है उसे देश के लोग अब समझ गए हैं। वे समर्थन कर रहे हैं। यूपी में एमएलसी चुनाव में यह भाजपा को अहसास कराया कि वे कितना पीछे हैं। जो सीट वो जीते हैं वो जुगाड़ बेईमानी से जीते हैं। सभी सीटों पर पढ़े लिखे लोगों ने सपा को मजबूत किया।
  • TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, ‘मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं। हम सभी इस लड़ाई में साथ हैं। यह राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी लड़ाई है। हम सब मिलकर लड़ेंगे और जीतेंगे।’
INDIA ब्लॉक नेताओं ने मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर बैठक की।

INDIA ब्लॉक नेताओं ने मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर बैठक की।

CTI ने रैली स्थगित करने सोनिया गांधी को लेटर लिखा

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने शुक्रवार को फिर कांग्रेस से 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की मेगा रैली स्थगित करने की अपील की है। इस बार नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखा। CTI ने इससे पहले तीन बार राहुल गांधी को लेटर लिखा था।

CTI के मुताबिक, रैली से 20 बाजारों में 10,000-12,000 करोड़ रुपए के कारोबार पर असर पड़ सकता है। साथ ही, भारी ट्रैफिक जाम की आशंका जताते हुए संगठन ने रैली को दिवाली के बाद कराने या बुराड़ी ग्राउंड में स्थानांतरित करने की मांग की है।

दिल्ली में CAPF की तैनाती 16 नवंबर तक बढ़ी

केंद्र सरकार ने इस रैली, संभावित प्रदर्शनों और त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली में CAPF की 270 कंपनियों की तैनाती 16 नवंबर तक बढ़ा दी है। इनकी तैनाती की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस संभालेगी।

तैनात बलों में CRPF की 125, BSF की 46, ITBP की 39, SSB की 31, RAF की 20 और CISF की 12 कंपनियां शामिल हैं। इन्हें पहले CJP के प्रदर्शनों के मद्देनजर तैनात किया गया था।

विपक्ष की SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 6 बैठकें-प्रदर्शन

INDIA ब्लॉक के नेता SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 6 से 13 अक्टूबर के बीच 8 बार प्रदर्शन कर चुके हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी और लेफ्ट ने भी 10 अक्टूबर को इसी मुद्दे पर प्रदर्शन बुलाया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी। इस दौरान शहर में बैरिकेडिंग की गई थी, 45 मेट्रो स्टेशन बंद रहे और 7 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

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इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग:दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंज से 20 मिनट में रू.60,000 करोड़ चोरी; दावा- इसमें नॉर्थ कोरिया का हाथ

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नई दिल्ली, एजेंसी। दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस हैक हो गया है। इसे इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग माना जा रहा है। कंपनी ने निकासी पर रोक लगा दी है। यानी, सुरक्षा जांच पूरी होने तक बाइनेंस अकाउंट में मौजूद पैसा या क्रिप्टो बाहर निकाला जा सकता है।

इस हैकिंग में साइबर हमलावरों ने बाइनेंस के ट्रांजैक्शन वॉलेट्स से महज 20 मिनट में 6.3 बिलियन डॉलर यानी करीब 60,000 करोड़ रुपए के क्रिप्टो एसेट्स चुरा लिए। घटना के बाद बिटकॉइन समेत कुछ अन्य क्रिप्टो में 5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।

ब्लॉकचेन रिसर्च फर्म TRM लैब्स के मुताबिक इस हैकिंग के पीछे नॉर्थ कोरिया का हाथ है। क्रिप्टोकरेंसी एक तरह का डिजिटल पैसा है, जिसे ऑनलाइन खरीदा-बेचा जा सकता है। इसे कोई सरकार या बैंक जारी नहीं करता, बल्कि यह ब्लॉकचेन तकनीक से चलता है।

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