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जानिए किस मंत्री का कटेगा पत्ता और किसे मिलेगा मौका? मानसून सत्र से पहले मोदी कैबिनेट में फेरबदल के संकेत

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नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की मंत्रिपरिषद में जल्द फेरबदल होने की संभावना प्रतीत हो रही है और सत्तारूढ़ दल के शीर्ष स्तर से मिल रहे संकेतों के अनुसार, यह फेरबदल अब कभी भी- संभवतः संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले किया जा सकता है। इस संबंधी विचार-विमर्श की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी की नयी टीम की घोषणा के साथ किया जाएगा। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पदाधिकारियों की सूची को अंतिम रूप दे चुका है और ‘नितिन नवीन की टीम’ की घोषणा जल्द होने की संभावना है। पार्टी के युवा चेहरों को संगठन में प्रमुख पदों की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है।

नई टीम विचार-विमर्श जारी 
सूत्रों के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष ने पिछले सप्ताह कुछ केंद्रीय राज्य मंत्रियों के साथ भी विचार-विमर्श किया था। इस बात की प्रबल संभावना है कि कुछ केंद्रीय मंत्रियों को भाजपा में संगठनात्मक भूमिकाएं संभालने के लिए भेजा जाएगा और पार्टी के पदाधिकारियों को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जाने की भी अटकलें हैं। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में अनियमितताओं सहित मंत्रालय से जुड़े कई विवादों के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। सूत्रों ने संकेत दिया कि अगर फेरबदल होता है तो यह जुलाई में कभी भी हो सकता है। संसद का मानसून सत्र आम तौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है।

तीन दिवसीय यात्रा पर हैं पीएम मोदी 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उनके छह से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने की भी संभावना है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भी एक से तीन जुलाई तक नयी दिल्ली की यात्रा का कार्यक्रम है। सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं। दो केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः भाजपा की उत्तर प्रदेश और दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी है। इस बात की प्रबल संभावना है कि भाजपा ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के अपने नियम का पालन करेगी जिसके कारण दोनों को सरकार से हटना पड़ सकता है। दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के लिए भाजपा ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। उच्च सदन में उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया।

अन्य पार्टियों के बागी सांसदों को बीजेपी बना सकती है मंत्री 
कुरियन अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं जबकि बिट्टू अब भी मंत्री हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व ने बिट्टू को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है। कांग्रेस के पूर्व नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र बिट्टू प्रभावशाली जाट सिख समुदाय का प्रमुख चेहरा हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए इन तीन राज्यों के और प्रतिनिधियों को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी गुटों के कुछ प्रतिनिधियों को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है। ऐसी भी संभावना है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सदस्यों में से एक या दो को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अमित शाह ने की मुलाकात
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बागी गुटों के सदस्यों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने का कोई भी फैसला लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा। दोनों के मूल दलों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। प्रधानमंत्री मोदी की 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के इतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गईं। इसके दो दिन बाद 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात से इन अटकलों को और बल मिला। 

दो केंद्रीय मंत्रियों का राज्यसभा में कार्यकाल नवंबर में समाप्त होगा
अधिकारियों ने इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि दोनों नेता नियमित अंतराल पर राष्ट्रपति से मिलते रहते हैं। हालांकि, इस बात की प्रबल संभावना है कि प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में फेरबदल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई होगी। दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बी एल वर्मा का राज्यसभा में कार्यकाल नवंबर में समाप्त होगा। अब यह देखना होगा कि उच्च सदन के लिए उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाए जाने के संबंध में शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है। 

कुछ मंत्रियों को राज्यपाल पद की मिल सकती है जिम्मेदारी 
तीन राज्यपालों-कर्नाटक के थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगुभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह-का कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है। गहलोत और पटेल का कार्यकाल जुलाई में तथा सिंह का कार्यकाल सितंबर में पूरा होगा। सरकार से हटाए जाने वाले कुछ मंत्रियों को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दिए जाने की भी संभावना है। हालांकि, जानकार हलकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बड़े फैसलों को अंतिम समय तक गोपनीय रखते हैं और औपचारिक घोषणा होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। 

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चुनाव आयुक्तों ने शिकायत की, लेकिन अफसर पर एक्शन नहीं:RTI दस्तावेज में खुलासा, आरोप- डिप्टी कमिश्नर ने आयोग को बिना बताए अधिकारियों का कामकाज बदला

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नई दिल्ली, एजेंसी। चुनाव आयोग के अफसर मनीष गर्ग के कामकाज के विवाद पर अब नई जानकारी सामने आई है। RTI से खुलासा हुआ है कि दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग लेटर लिखकर उनके कामकाज की शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

RTI जवाब में बताया गया, कैबिनेट सचिवालय ने ये शिकायतें चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक नहीं मानीं। सचिवालय का मानना था कि इस स्तर पर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। इसे संवैधानिक संस्था के काम में दखल माना जा सकता है।

यह जानकारी RTI एक्टिविस्ट लोकेश के. बत्रा को दी गई। गर्ग पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए बिना वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज को बदलने वाला आदेश जारी किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने उनके आदेश को पलट दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों ने मनीष गर्ग के काम के बंटवारे से जुड़ा आदेश रद्द कर दिया। साथ ही, निर्देश दिया कि आयोग में किसी बदलाव पर सहमति बनने तक पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी।

गर्ग 2024 में चुनाव आयुक्त में नियुक्त हुए

मनीष गर्ग 1996 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। अगस्त 2024 में केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (एसीसी) ने उन्हें चुनाव आयोग में उप चुनाव आयुक्त बनाने की मंजूरी दी थी। उन्होंने 2 सितंबर 2024 को पद संभाला। इससे पहले वे हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी थे।

पहले भी विवादों में आया मनीष गर्ग का नाम

मनीष गर्ग का नाम मतदाता सूची के आईटी सिस्टम के संचालन और अधिकारियों को उसकी पहुंच मिलने से जुड़े विवाद में भी सामने आया था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने ERONet सॉफ्टवेयर पर निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि कई निर्वाचन अधिकारियों को सिस्टम का पूरा एक्सेस नहीं मिल रहा था, जिससे मतदाता सूची से जुड़े उनके वैधानिक काम प्रभावित हो सकते थे।

दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई थी

25 सितंबर: इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी। इसमें मतदाता सूची के डेटा पर नियंत्रण और अधिकारियों को जानकारी नहीं दिए जाने के मुद्दे भी शामिल थे।

26 सितंबर: चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि मनीष गर्ग के काम के बंटवारे संबंधी आदेश लागू नहीं किए गए थे और IT विभाग की निगरानी वास्तव में नहीं हटाई गई थी।

3 अक्टूबर: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मनीष गर्ग की भूमिका और आयोग के IT सिस्टम से जुड़े कामकाज पर सवाल उठाए थे।

21 अक्टूबर: RTI से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों आयुक्तों के पत्र कैबिनेट सचिवालय पहुंचे थे और आगे संबंधित अधिकारियों को भेजे गए। पत्रों में क्या था, यह सामने नहीं आया था।

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अमिताभ बच्चन का बंगला उड़ाने की धमकी:दिलजीत दोसांझ को जान से मारने का मेल; 5 दिन पहले टाइगर श्रॉफ पर हुई थी फायरिंग

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मुंबई, एजेंसी। अमिताभ बच्चन और पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ को शुक्रवार को जान से मारने की धमकी दी गई है। मुंबई की मेयर रितु तावड़े को यह धमकी भरा ई-मेल भेजा गया।

इसमें अमिताभ बच्चन के बंगले ‘जलसा’ को बम से उड़ाने की बात लिखी गई। कहा गया कि 31 अक्टूबर से 27 नवंबर के बीच कभी भी बंगले को निशाना बनाया जा सकता है। हमला 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का बदला होगा।

इसी मेल में गायक दिलजीत दोसांझ को भी आत्मघाती हमले में मारने की धमकी दी गई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। यह मेल तब आया है, जब 5 दिन पहले रविवार को एक्टर टाइगर श्रॉफ पर मुंबई में फायरिंग की गई। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली थी।

ई-मेल में खालिस्तान समर्थक नारे लिखे

मुंबई मेयर को भेजे गए मेल में खालिस्तान समर्थक नारे लिखे गए हैं। इसमें 1984 के सिख-विरोधी दंगों का भी जिक्र है। मेल में कहा गया कि दिलजीत ने अमिताभ बच्चन के पैर छूए थे इसलिए उस पर हमला किया जाएगा। मेल में लिखा है कि 27 नवंबर को दिलजीत को महालक्ष्मी रेस कोर्स में आत्मघाती हमले में मारना है। धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद मुंबई पुलिस, पुलिस की डॉग स्क्वॉड और बम स्क्वॉड की टीमें बीएमसी मुख्यालय पहुंचीं। मेयर और डिप्टी मेयर कार्यालय सहित विभिन्न चैंबर्स की भी तलाशी ली। मुंबई पुलिस और साइबर सेल ईमेल की जांच में जुटे हैं।

बीएमसी में मेयर के ऑफिस की जांच करती हुईं जांच टीमें ।

बीएमसी में मेयर के ऑफिस की जांच करती हुईं जांच टीमें ।

रविवार को टाइगर श्रॉफ पर हुई थी फायरिंग

शूटर्स ने टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर 5 राउंड फायरिंग की थी।

शूटर्स ने टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर 5 राउंड फायरिंग की थी।

मुंबई में 18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना हुई। टाइगर फुटबॉल खेलने के बाद जुहू इलाके से निकल रहे थे, तभी उनकी कार पर गोलियां चलाई गईं। इस घटना में टाइगर को गोली नहीं लगी, लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए थे।

इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें हरियाणा के 7 आरोपी, उत्तर प्रदेश की दो महिलाएं और बिहार का एक युवक शामिल है।

मुंबई के कई स्कूलों को भी मिले धमकी भरे मेल

इसके साथ ही मुंबई के दादर स्थित कई प्रमुख स्कूलों को भी धमकी भरे ईमेल मिले हैं। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह दादर के करीब 4 स्कूलों को ये ईमेल मिले। सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस ने तुरंत स्कूलों की तलाशी ली।

तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। हालांकि, इन धमकी भरे ईमेल के कारण कुछ समय के लिए स्कूल परिसर में तनाव का माहौल रहा। पुलिस फिलहाल ईमेल भेजने वालों की तलाश कर रही है और मामले की जांच जारी है।

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बिहार की पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट,पति-पत्नी समेत 7 की मौत:मकान के बाहर बिखरे शव, डेढ़ घंटे तक होते रहे धमाके

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सीवान, एजेंसी। बिहार के सीवान में पटाखा बनाने के दौरान हुए ब्लास्ट में पति-पत्नी और उनकी बेटी समेत 7 की मौत हो गई।

जामो थाना क्षेत्र के अलमापुर गांव के एक मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक धमाके होने लगे। इस धमाके में पूरा मकान उड़ गया। लोगों के शव सड़क पर बिखर गए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुककर धमाके होते रहे।

धमाके के बाद क्षतिग्रस्त मकान।

धमाके के बाद क्षतिग्रस्त मकान।

दमकल की गाड़ियां की मदद से आग बुझाने की कोशिश

घटना की सूचना मिलने के बाद सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता, महाराजगंज एसडीपीओ अमन और बड़हरिया, जामो, गोरेयाकोठी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची है। अधिकारी घटनास्थल की जायजा ले रहे हैं।

एसडीपीओ ने बताया कि दमकल की गाड़ियां की मदद से आग बुझाने की कोशिश की जा रही है। आग पर काबू पाने के बाद मामले की जांच की जाएगी।

एसपी भारत सोनी ने बताया कि अब तक शवों की पहचान नहीं हो सकी है। जिस मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे, वह घनी आबादी वाले इलाके में है।

हादसे की तस्वीरें

धमाके के बाद मकान के बाहर बिखरे शव।

धमाके के बाद मकान के बाहर बिखरे शव।

धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलने के बाद DM और SP मौके पर पहुंचे।

घटना की सूचना मिलने के बाद DM और SP मौके पर पहुंचे।

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