गंभीर ब्रेन स्ट्रोक के बाद बंद हो गई थी आवाज, शरीर का बायां हिस्सा पड़ गया था सुन्न, समय पर उपचार और पुनर्वास से लौटी जिंदगी की रफ्तार
डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम के प्रयास और फिजियोथेरेपी से मिली नई उम्मीद
कोरबा। कभी-कभी जिंदगी अचानक ऐसी परीक्षा लेती है कि परिवार की खुशियां पलभर में चिंता और डर में बदल जाती हैं। आंखों के सामने अपना प्रियजन असहाय हो जाए, बोलना बंद कर दे और शरीर का एक हिस्सा काम करना छोड़ दे, तो परिवार के लिए हर पल किसी सदमे से कम नहीं होता। लेकिन ऐसे कठिन समय में सही फैसला, समय पर चिकित्सा और अपनों का हौसला उम्मीद की नई किरण बन सकता है।
कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में सामने आई 63 वर्षीय श्रीमती लक्ष्मी सोरी की कहानी कुछ ऐसी ही है। 14 मई 2026 की सुबह अचानक तेज चक्कर, उल्टियां और बेहोशी ने उनके परिवार को चिंता में डाल दिया। शरीर का बायां हिस्सा सुन्न और कमजोर पड़ गया था। बोलने की क्षमता प्रभावित हो गई थी और याददाश्त पर भी असर दिखाई दे रहा था। परिवार ने बिना देर किए उन्हें न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल पहुंचाया। जांच में गंभीर इस्कीमिक ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति सामने आई।
परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी अपने प्रियजन को इस गंभीर संकट से बाहर निकालना। ऐसे समय में हर मिनट की अहमियत थी और तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी थी।
डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में शुरू हुआ उपचार
शिवाय हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन एवं डायरेक्टर डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने तत्काल आपातकालीन उपचार शुरू किया। मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बाधित होने से उत्पन्न गंभीर स्थिति को देखते हुए मरीज की चिकित्सा देखभाल पर विशेष ध्यान दिया गया।
स्ट्रोक के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना और शीघ्र चिकित्सकीय मूल्यांकन बेहद महत्वपूर्ण होता है। लक्ष्मी सोनी के परिवार ने बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचकर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
उस समय परिवार के मन में कई सवाल थे, लेकिन डॉक्टरों की देखरेख और उपचार की प्रक्रिया के साथ उम्मीद कायम रही कि हालात बेहतर हो सकते हैं।
इलाज के बाद पुनर्वास ने बढ़ाई स्वस्थ होने की उम्मीद
गंभीर स्थिति के बाद मरीज को दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटाना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। लक्ष्मी सोरी की रिकवरी में चिकित्सा देखभाल के साथ फिजियोथेरेपी की भूमिका रही। फिजियोथेरेपिस्ट अमन श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में कमजोर अंगों की कार्यक्षमता और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार के लिए प्रयास किए गए।
इसके साथ स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के समन्वय से बोलने तथा याददाश्त से जुड़ी परेशानियों में सुधार की दिशा में काम किया गया। लगातार देखभाल, पुनर्वास और परिवार के सहयोग ने उनकी रिकवरी के सफर को आगे बढ़ाने में मदद की।
यह सफर केवल बीमारी से उबरने का नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सुधारों के साथ आत्मविश्वास दोबारा हासिल करने का भी था। परिवार के लिए लक्ष्मी जी की बेहतर होती स्थिति राहत और खुशी का कारण बनती गई।
गंभीर हालत से स्वस्थ होकर घर वापसी, परिवार के लिए भावुक पल
जिस लक्ष्मी सोरी को परिवार गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचा था, उपचार और पुनर्वास के बाद वह होश में आईं, सामान्य रूप से बातचीत करने लगीं और अपने पैरों पर चलने की स्थिति में स्वस्थ होकर घर लौटीं।
यह परिवार के लिए भावुक कर देने वाला पल था। जिस घर में कभी अनहोनी की आशंका ने चिंता बढ़ा दी थी, वहां फिर से मुस्कान और राहत लौट आई। लक्ष्मी सोनी की रिकवरी ने उनके परिजनों को नई उम्मीद दी और इस बात को रेखांकित किया कि गंभीर बीमारी के बाद भी उचित चिकित्सा और पुनर्वास से सुधार की संभावनाएं बनी रहती हैं।
शिवाय हॉस्पिटल के लिए चिकित्सा सेवा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
लक्ष्मी सोरी की रिकवरी शिवाय हॉस्पिटल, कोरबा की चिकित्सा टीम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है। गंभीर स्ट्रोक के उपचार से लेकर आगे की देखभाल और पुनर्वास तक, इस मामले में चिकित्सा सेवाओं के समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा देखभाल, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के प्रयासों ने मरीज को स्वस्थ जीवन की ओर लौटने में सहयोग दिया। यह कहानी अस्पताल में उपलब्ध उपचार सेवाओं के साथ-साथ स्ट्रोक के बाद पुनर्वास की अहमियत भी सामने लाती है।
विश्व स्ट्रोक दिवस पर शिवाय हॉस्पिटल का संदेश: लक्षण दिखें तो देर न करें
ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसके लक्षणों को पहचानकर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है। अचानक चेहरा टेढ़ा होना, एक हाथ या पैर में कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने या समझने में परेशानी और अचानक संतुलन बिगड़ना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत एंबुलेंस या आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें। स्ट्रोक के उपचार में देरी से मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
शिवाय हॉस्पिटल, न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर, कोरबा की ओर से संदेश है कि जागरूकता, समय पर उपचार और उचित पुनर्वास मरीज की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लक्ष्मी सोरी की कहानी एक परिवार की चिंता से राहत तक के सफर की कहानी है। यह उस उम्मीद की कहानी है, जो मुश्किल समय में भी बनी रहती है। और यह संदेश भी कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानकर समय पर उठाया गया कदम किसी की जिंदगी में फिर से मुस्कान लौटाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कोरबा। कोरबा शहर के ट्रांसपोर्ट नगर मुख्य मार्ग पर सड़क हादसे का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है। वीडियो में कार से टक्कर के बाद बाइक सवार युवक हवा में उछलकर डिवाइडर पार करते हुए सड़क की दूसरी लेन में गिरता दिखाई दे रहा है।
इसके बाद वह वहां से गुजर रहे एक अन्य दोपहिया वाहन से भी टकरा गया। हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
कार से टक्कर के बाद डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में गिरा
घटना सीएसईबी चौकी क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, देर शाम रिमझिम बारिश के दौरान बाइक सवार युवक मुख्य मार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान सामने से आ रही कार से उसकी बाइक की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के कारण युवक उछलकर डिवाइडर पार कर सड़क की दूसरी लेन में जा गिरा।
इसी दौरान दूसरी लेन से गुजर रहे एक अन्य दोपहिया वाहन से भी उसकी टक्कर हो गई। उस वाहन पर एक दंपती सवार थे। अचानक हुए हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों ने घायल युवक को संभाला और पुलिस को सूचना दी।
हेलमेट नहीं पहनने से सिर में गंभीर चोट
जानकारी के मुताबिक, बाइक सवार युवक ने हेलमेट नहीं पहना था। हादसे में उसके सिर में गंभीर चोट आई है। उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
पुलिस ने वाहन जब्त कर शुरू की जांच
सीएसईबी चौकी पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। दोनों वाहनों को जब्त कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
घटना के बाद ट्रांसपोर्ट नगर मुख्य मार्ग पर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मार्ग पर स्पीड ब्रेकर और सुरक्षा संकेतक लगाने की मांग की है। बारिश के दौरान सड़क पर फिसलन की आशंका को देखते हुए वाहन चालकों से गति नियंत्रित रखने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की गई है।
कुर्मी समाज मनाएगा भारत रत्न सरदार पटेल की 151वीं जयंती, सुबह 10:30 बजे होगा गरिमामय आयोजन
कोरबा। देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकीकरण के महान शिल्पकार, भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर 2026, शनिवार को कोरबा में कुर्मी समाज द्वारा सादगीपूर्ण एवं गरिमामय जयंती समारोह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे तुलसी नगर चौक के पास, पंप हाउस रोड, कोरबा में आयोजित होगा। इस अवसर पर सरदार पटेल के राष्ट्रनिर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय इतिहास के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और दूरदर्शी नेतृत्व से देश की एकता को नई मजबूती प्रदान की। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका ने उन्हें ‘लौह पुरुष’ के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जीवन राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है।
कुर्मी समाज द्वारा आयोजित इस जयंती समारोह का उद्देश्य महान राष्ट्रनायक के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज में एकता, आपसी सद्भाव, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करना है। सरदार पटेल का जीवन संदेश देता है कि सामूहिक एकजुटता, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
समाज की ओर से जयंती समारोह को सादगी और गरिमा के साथ संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है। कुर्मी समाज के समस्त सम्माननीय पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समाजबंधुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।
कार्यक्रम की जानकारी
आयोजन: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती दिनांक: 31 अक्टूबर 2026, शनिवार समय: सुबह 10:30 बजे स्थान: तुलसी नगर चौक के पास, पंप हाउस रोड, कोरबा, छत्तीसगढ़
आर. के. वर्मा अध्यक्ष, कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति
पवन सिन्हा मीडिया प्रभारी, कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति
कोरबा। कोरबा जिला मुख्यालय से करीब 96 किमी दूर स्थित अमलडीहा पंचायत के वनांचल गांव बलसेंधा और मालीकछार आज भी पक्की सड़क की बाट जोह रहे हैं।
वर्ष 2024-25 में जिला खनिज न्यास संस्थान (डीएमएफ) मद से 8.6 किमी सड़क निर्माण के लिए 9 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। चूंकि मार्ग वन क्षेत्र से होकर गुजरता है, इसलिए निर्माण का जिम्मा कोरबा वन मंडल को सौंपा गया।
विभाग ने पूरी परियोजना को 13 अलग-अलग कार्यों में बांटकर 5 करोड़ 60 लाख 23 हजार रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति ली। पहली किस्त के रूप में 2.24 करोड़ रुपए जारी भी हो गए, लेकिन दो साल बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस है।
सड़क के नाम पर जंगल की मिट्टी और मुरुम बिछा दी गई, जो पहली ही बारिश में बह गई। नाले पर बनी पाइप-पुलिया भी पानी में समा गई और काटनखर्रा नाले पर प्रस्तावित आरसीसी पुलिया का काम शुरू तक नहीं हो सका। अब ग्रामीण श्रमदान कर मिट्टी डालकर रास्ता बनाने को मजबूर हैं।
615 की आबादी, बारिश में बाइक निकालना भी दूभर; एम्बुलेंस भी नहीं पहुंचती
रायगढ़ और सरगुजा जिले की सीमा से लगे बलसेंधा (आबादी 305) और मालीकछार (आबादी 310) के ग्रामीण सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं। दोनों में केवल प्राथमिक शालाएं हैं; आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को अमलडीहा जाना पड़ता है।
अमलडीहा के उपसरपंच ननकी राम राठिया और स्थानीय निवासी संजय राठिया व भारत सिंह ने बताया कि सड़क के नाम पर गिट्टी और मुरुम बिछाकर छोड़ दिया गया था, जो बारिश में बह गई।
मालीकछार में सीसी रोड का काम भी अधूरा रह गया। आलम यह है कि बारिश में दोपहिया वाहन चलाना भी जोखिम भरा हो जाता है। गांव में किसी के बीमार पड़ने पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती और मरीजों को खाट पर लादकर श्यांग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ता है।
कार्यक्षेत्र कुदमुरा का, बजट का हिसाब नहीं
परियोजना में प्रशासनिक विसंगति भी सामने आई है। अमलडीहा पंचायत कुदमुरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आती है, पर निर्माण की जिम्मेदारी पसरखेत के रेंजर देवदत्त खांडे को सौंपी गई। जब उनसे अब तक खर्च हुई राशि और खरीदे गए सीमेंट-गिट्टी का ब्यौरा मांगा गया, तो वे कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
वन विभाग को यह काम लेना ही नहीं चाहिए था। किसी तकनीकी निर्माण एजेंसी को जिम्मेदारी मिलती तो बेहतर होता। अब तक करीब 700 मीटर सड़क बनी है, शेष कार्य भी पूरा कराया जाएगा।
-प्रेमलता यादव, डीएफओ, कोरबा वन मंडल
सड़क निर्माण की स्वीकृति काफी पहले दी गई थी। यदि राशि जारी होने के बाद भी सड़क नहीं बनी है, तो मैं स्वयं मौके पर जाकर वस्तुस्थिति देखूंगा। संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।