Connect with us

छत्तीसगढ़

“स्व. प्रकाश चितलांग्या स्मृति”  द्वितीय छत्तीसगढ़ राज्य रैंकिंग टेबल टेनिस प्रतियोगिता 2026

Published

on

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ के तत्वावधान में राजनांदगांव जिला टेबल टेनिस संघ द्वारा दिनांक 02 से 04 अक्टूबर, 2026 तक “स्व. प्रकाश चितलांग्या स्मृति”  द्वितीय छत्तीसगढ़ राज्य रैंकिंग टेबल टेनिस प्रतियोगिता-2026 का आयोजन बास्केट बाल हाल, दिग्विजय स्टेडियम, राजनांदगांव (छ.ग.) में किया जा रहा है ।  उक्त प्रतियोगिता के सम्बन्ध में छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ के सचिव सार्थक शुक्ला ने जानकारी दी कि दिनांक 02/10/2026 को यूथ UNDER-19 (यूथ) एवं यूथ UNDER-15 (सब जुनियर) एकल वर्ग (बालक/बालिका), दिनांक  03/10/2026 को सीनियर (पुरुष/महिला) एवं यूथ UNDER-11 (होप्स) एकल वर्ग (बालक/बालिका) तथा दिनांक  04/10/2026 को यूथ UNDER-17 (जुनियर), यूथ UNDER-13 (कैडेट) एकल वर्ग (बालक/बालिका) एवं सीनियर (पुरुष) एकल वर्ग की प्रतियोगिता होगी ।   

            प्रतियोगिता में राज्य के सभी जिलों से कुल मिलाकर लगभग 250 पुरुष एवं महिला खिलाडियों के भाग लेने की संभावना है। यह प्रतियोगिता एकल इवेंट्स में  सीनियर पुरुष एकल, सीनियर महिला एकल,  यूथ UNDER-19 (यूथ) बालक एकल, यूथ UNDER-19 (यूथ) बालिका एकल, यूथ UNDER-17 (जुनियर) बालक एकल, यूथ UNDER-17 (जुनियर) बालिका एकल, यूथ UNDER-15 (सब जुनियर) बालक एकल, यूथ UNDER-15 (सब जुनियर) बालिका एकल, यूथ UNDER-13 (कैडेट) बालक एकल, यूथ UNDER-13 (कैडेट) बालिका एकल, यूथ UNDER-11 (होप्स) बालक एकल तथा यूथ UNDER-11 (होप्स) बालिका एकल हेतु कुल मिलाकर 12 वर्गों में आयोजित की जायेगी। 

            इस प्रतियोगिता में विभिन्न जिलों के पंजीकृत खिलाड़ी ही भाग ले सकेंगे तथा प्रतियोगिता हेतु प्रविष्टि कि अंतिम तिथि 25.09.2026 है। 

उपरोक्त जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ के उपाध्यक्ष विनय बैसवाड़े ने दी।

Continue Reading

कोरबा

ACB समूह की वाशरियों व पावर प्लांटों के कोयला लिंकेज और वित्तीय अनियमितताओं की हो CBI/SIT जांच — भारतीय जनाधिकार पार्टी

Published

on

23 सितंबर को SECL मुख्यालय बिलासपुर के सामने होगा विशाल शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन

वर्ष 1999 से वर्तमान तक हुए अरबों-खरबों रुपये के कोयला आफरा-तफरी, डिजिटल हेरफेर और कोल लेवी के खेल की हो स्वतंत्र जांच

महामहिम राष्ट्रपति प्रधानमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री और केंद्रीय कोयला मंत्री के नाम CMD को सौंपा जाएगा ज्ञापन

बिलासपुर/कोरबा/दीपका। भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ द्वारा ACB समूह की दीपका, गेवरा, कुसमुंडा, चाकाबुड़ा, रतिजा, रेंकी, बिंझारी तथा संबद्ध कोयला वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन एवं रेलवे साइडिंग से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर वर्ष 1999 से वर्तमान तक सीबीआई (CBI) उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT), बहु-विभागीय न्यायिक व तकनीकी जांच वित्तीय-डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट तथा भौतिक सत्यापन की पुरजोर मांग की गई है ।

भारतीय जनाधिकार पार्टी के पदाधिकारियों संयोजक अध्यक्ष दीपक दुबे उपाध्यक्ष/महामंत्री (संगठन) संजय सिंह, महामंत्री (प्रशासनिक) शैलेन्द्र कुमार गोपाल, सचिव दिनेश यादव तथा युवा मोर्चा संयोजक अध्यक्ष संजय रत्नाकर एवं हेमंत पैगवार ने संयुक्त रूप से प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि पूर्व में 18 अगस्त को इन मांगों को लेकर एसईसीएल दीपका में धरना-प्रदर्शन किया गया था। शासन-प्रशासन द्वारा अग्रिम ठोस कार्रवाई न किए जाने के कारण चरणबद्ध आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 23 सितंबर 2026 को प्रातः 11:00 बजे एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के समक्ष एक विशाल एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है ।

प्रदर्शन के पश्चात एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (CMD) के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय कोयला मंत्री, कैबिनेट सचिव CBI ACB EOW एवं संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपा जाएगा ।

उठाए गए प्रमुख बिंदु एवं मांगें

  1. अरबों-खरबों रुपये के कोयला विचलन की व्यापक जांच:- यह मामला केवल किसी एक वाशरी या प्रदूषण की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि कोयला खरीद वाशरी संचालन कच्चे एवं रिजेक्ट कोयले के परिवहन, कोयला लेखांकन, रेलवे साइडिंग, तौल कांटा, ताप विद्युत संयंत्रों में ईंधन उपयोग राख एवं गाद निस्तारण जल दोहन औद्योगिक डीजल-बायोडीजल कर लाभ तथा डिजिटल अभिलेखों की पूरी व्यवस्था की जांच का विषय है ।
  2. 1 करोड़ टन कच्चे/रिजेक्ट कोयले के स्रोत का हिसाब:- उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार प्रतिवर्ष 1 करोड़ टन से अधिक कच्चे/रिजेक्ट कोयले का परिवहन पावर प्लांटों में दर्शाया जाता है, जब ACB के सभी पावर प्लांट रिजेक्ट कोल से चलाने की अनुमति है, तो डीओ शक्ति के 1 करोड़ टन कोयले का वास्तविक स्रोत क्या है? प्रत्येक टन कोयले के स्रोत प्रसंस्करण परिवहन और अंतिम उपयोग का CBI/SIT द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाए ।
  3. डिजिटल साक्ष्य और डेटा को तत्काल सील करने की मांग:- तौल कांटा सर्वर जीपीएस (GPS) फास्टैग (Fastag) आरएफआईडी (RFID) एएनपीआर (ANPR) सीसीटीवी (CCTV) ओसीईएमएस/सीईएमएस ईआरपी/एसएपी (ERP/SAP) ईंधन अभिलेख रेलवे रिकॉर्ड एवं वित्तीय डिजिटल डेटा को तत्काल सुरक्षित रखने के कड़े निर्देश दिए जाएं, ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न की जा सके ।
  4. ताप विद्युत संयंत्रों एवं डिजिटल तौल प्रणाली का फोरेंसिक ऑडिट:- संयंत्रों में घोषित ईंधन व्यवस्था वास्तविक कोयला प्राप्ति भट्ठी में ईंधन उपयोग बिजली उत्पादन और राख उत्पादन का स्वतंत्र फोरेंसिक मिलान कराया जाए, साथ ही फर्जी वाहन पंजी दोहरी प्रविष्टि और काल्पनिक यात्राओं की डिजिटल जांच हो ।
  5. पर्यावरण पेसा (PESA) कानून एवं नदियां (खोलार व अहिरन) का संरक्षण:– खोलार एवं अहिरन नदी सहित आसपास के जल स्रोतों में औद्योगिक अपशिष्ट बहाए जाने की स्वतंत्र प्रयोगशाला से वैज्ञानिक जांच कराई जाए प्रभावित 10 किमी क्षेत्र में वायु धूल राख शोर भूजल एवं जनस्वास्थ्य सर्वेक्षण कराया जाए, पेसा/ग्रामसभा प्रावधानों का उल्लंघन कर हुए अनधिकृत विस्तार की भी जांच हो ।
  6. 2015 से औद्योगिक डीजल/बायोडीजल कर छूट एवं SECL कोल लेवी जांच:- वर्ष 2015 से औद्योगिक डीजल/बायोडीजल खरीद, भंडारण व अन्य राज्यों से मंगाए जाने की शिकायतों की जांच हो। कंपनियों को मिली कर छूट/प्रोत्साहन का वर्षवार परीक्षण कराया जाए, इसके साथ ही एसईसीएल की सभी 13 खदानों में 2018 से जारी कोल लेवी के खेल (जो रू.25 से बढ़कर रू.50 हो गया है) CSR मद सामग्री खरीदी-बिक्री तथा ओबी (OB) कार्य के भुगतानों की निष्पक्ष जांच की जाए ।
  7. नियमन अधिकारियों एवं कंपनियों की संयुक्त जवाबदेही तय हो:- वर्षों से संचालित इन गतिविधियों पर आँखें मूँदे बैठे एसईसीएल पर्यावरण संरक्षण मंडल खनन, राजस्व, वन, श्रम एवं जल संसाधन विभाग के संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए, श्रमिकों के न्यूनतम वेतन ईएसआई पीएफ व सुरक्षा उपकरणों की भी विस्तृत जांच हो ।

भारतीय जनाधिकार पार्टी ने आम जनता श्रमिकों एवं पर्यावरण प्रेमियों से 23 सितंबर को प्रातः 11:00 बजे एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर पहुँचकर इस राष्ट्रहित और जनहित के आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है l

Continue Reading

छत्तीसगढ़

रायपुर : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से वीसी द्वारा की वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन पर की चर्चा

Published

on

375 अनुमेय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का करें चयन- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से वीसी द्वारा की वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन पर की चर्चा

रायपुर, 22 सितंबर 2026। विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों से संवाद किया। बैठक में योजनांतर्गत जिलों में स्वीकृत कार्यों, प्रगति तथा योजना के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। 

       उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से बारी-बारी संवाद करते हुए योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली तथा उनके सुझाव और जमीनी स्तर पर आ रही कठिनाइयों को जाना। उन्होंने सभी को वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अब 375 प्रकार के अनुमय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का चयन एवं स्वीकृति के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में पर्याप्त संख्या में कार्य स्वीकृत किए गए है, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ग्राम सभा के माध्यम से नए कार्य भी लिए जा सकते हैं।

     उन्होंने बताया कि योजना में मजदूरी एवं सामग्री का 60रू40 अनुपात बनाए रखते हुए तथा जल संरक्षण से संबंधित कम से कम 30 प्रतिशत कार्यों को प्राथमिकता देते हुए ग्राम सभाएं आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कार्य स्वीकृत कर सकती हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजना का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कार्यों का चयन करने पर जोर दिया।

     बैठक में अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती ऋचा शर्मा ने पंचायतों में स्वीकृत कार्यों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किए जाएंगे, जिससे निर्माण कार्यों की प्रभावी निगरानी की जा सकेगी।

      आयुक्त, विकसित भारतदृजीरामजी तारन प्रकाश सिन्हा ने जिला पंचायत सदस्यों के योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीकी समस्याओं से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों तथा किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खेत सड़क और धरसा को भी अनुमय कार्यों में शामिल किया गया है। प्रदेश में बालिका शौचालय, मुक्तिधाम शेड तथा डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज जैसे कार्यों को प्राथमिकता से लिया जा रहा है। ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकता के अनुसार इन कार्यों का चयन कर सकती हैं। श्री सिन्हा ने बताया कि विभिन्न योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) से संबंधित भारत सरकार का नोटिफिकेशन जल्द जारी होने की प्रक्रिया में है। वहीं मनरेगा के शेष लंबित भुगतान के संबंध में भारत सरकार को पत्र प्रेषित किया गया है।

       वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 175 पदों पर भर्ती की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें कार्यक्रम अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर एवं लेखापाल के पद शामिल हैं तथा भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। इसके अतिरिक्त बस्तर, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों में 63 रोजगार सहायक पदों पर भर्ती की अनुमति भी प्रदान की गई है।

      बैठक में जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव साझा किए तथा मैदानी स्तर पर आ रही विभिन्न कठिनाइयों से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों एवं समस्याओं को आवश्यक कार्रवाई हेतु संकलित किया गया है।

Continue Reading

छत्तीसगढ़

टाटा पावर को बिजली लाइसेंस देने के खिलाफ याचिका:पूर्व विधायक ने निजी-कंपनी को 25 साल के लिए लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर जताई आपत्ति

Published

on

रायपुर, एजेंसी। रायपुर जिले के चार इलाकों में टाटा पावर को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के प्रस्ताव का कांग्रेस ने विरोध किया है। पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने इसके खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर करने की बात कही है।

उनका कहना है कि रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर जैसे इलाकों में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण की अनुमति मिलने से सरकारी वितरण कंपनी सीएसपीडीसीएल पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।

टाटा पावर ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका क्रमांक 89/2026 के जरिए इन क्षेत्रों में 25 साल के लिए वितरण लाइसेंस मांगा है। आयोग ने इस प्रस्ताव पर आम लोगों, स्थानीय निकायों और अन्य संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। इस मामले में 1 अक्टूबर को सार्वजनिक सुनवाई भी प्रस्तावित है।

विकास उपाध्याय की आपत्ति क्या है?

उपाध्याय का कहना है कि टाटा पावर ने आवेदन में शुरुआती पांच साल में करीब 435 करोड़ रुपए निवेश कर नेटवर्क तैयार करने की बात कही है। उनका दावा है कि इतने निवेश से प्रस्तावित क्षेत्र में नए 33 और 11 केवी सब-स्टेशन और लाइनें खड़ी करना संभव नहीं होगा। उनका आरोप है कि बाद में निजी कंपनी को सीएसपीडीसीएल के मौजूदा ग्रिड का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

हालांकि यह कंपनी की ओर से दाखिल आवेदन और नियामक प्रक्रिया का हिस्सा है। उपाध्याय की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर अंतिम फैसला नियामक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

‘मलाईदार इलाका निजी कंपनी के पास चला जाएगा’

विकास उपाध्याय की सबसे बड़ी आपत्ति प्रस्तावित क्षेत्र को लेकर है। उनका कहना है कि रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर में औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की संख्या ज्यादा है, इसलिए ये सीएसपीडीसीएल के लिए ज्यादा राजस्व वाले इलाके हैं।

उनका तर्क है कि अगर निजी कंपनी को इन्हीं इलाकों में वितरण का लाइसेंस मिलता है तो सरकारी कंपनी के पास कम राजस्व वाले ग्रामीण, कृषि और बीपीएल उपभोक्ता ज्यादा रह सकते हैं। इससे किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को दी जाने वाली क्रॉस-सब्सिडी की व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका उन्होंने जताई है।

निजी कंपनी आने से बिजली महंगी होने का दावा

उपाध्याय ने निजी वितरण कंपनियों के मॉडल पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि भविष्य में व्हीलिंग चार्ज और दूसरे शुल्क के कारण उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है। उन्होंने महाराष्ट्र और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में निजी बिजली वितरण के अनुभवों का भी हवाला दिया है।

यह फिलहाल उपाध्याय का राजनीतिक और नीतिगत तर्क है। टाटा पावर को लाइसेंस मिलने के बाद बिजली दर कितनी होंगी, यह अभी तय नहीं है। दरों और संबंधित शुल्क पर नियामक प्रक्रिया लागू होगी।

स्मार्ट मीटर और ‘पीएम सूर्य घर’ योजना भी मुद्दा

उपाध्याय ने स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनका दावा है कि स्मार्ट मीटर के बाद बिजली बिलों में 15 से 20% तक बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने ‘पीएम सूर्य घर’ योजना को लेकर भी सरकार की आलोचना की और इसे उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं बताया।

उद्योगों पर असर की आशंका

रायपुर, धरसींवा और अभनपुर को औद्योगिक क्षेत्र बताते हुए उपाध्याय ने कहा कि यहां पहले से ही बिजली की लागत और दूसरी समस्याओं के कारण छोटे-बड़े उद्योग दबाव में हैं। उनके मुताबिक निजी वितरण कंपनी के आने के बाद यदि औद्योगिक बिजली की लागत बढ़ती है तो इसका असर स्थानीय उद्योगों और रोजगार पर पड़ सकता है।

सरकार से लाइसेंस आवेदन खारिज करने की मांग

विकास उपाध्याय ने सीएसईआरसी में दाखिल टाटा पावर की याचिका को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने निजी कंपनी को लाइसेंस देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई तो कांग्रेस सड़क से विधानसभा तक आंदोलन करेगी।

अब मामला नियामक प्रक्रिया में है। टाटा पावर के प्रस्ताव पर आपत्तियां और सुझाव लिए जा रहे हैं और 1 अक्टूबर की सार्वजनिक सुनवाई में संबंधित पक्ष अपना पक्ष रख सकेंगे।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677