Connect with us

छत्तीसगढ़

शराब घोटाला, रामगोपाल अग्रवाल के घर ED की रेड:रायपुर-धमतरी में कार्रवाई, धरने पर बैठे कांग्रेसी, दुर्ग में रिद्धि-सिद्धि बिल्डर्स के घर दबिश

Published

on

धमतरी, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला मामले में ED की रेड पड़ी है। रायपुर, दुर्ग-भिलाई और धमतरी में सुबह ED के अफसरों ने दबिश दी। अलग-अलग ठिकानों पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई।

रायपुर में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के अनुपम नगर स्थित निवास और धमतरी में सिहावा रोड स्थित उनके घर पर 9 घंटे तक कार्रवाई चली। टीम अपने साथ कुछ अहम दस्तावेज लेकर गई है। रामगोपाल अग्रवाल को शराब, कोल और कस्टम मिलिंग घोटाले में आरोपी बनाया गया है। 8 दिन पहले ही ED ने उन्हें गिरफ्तार कर रायपुर कोर्ट में पेश किया था।

धमतरी में रामगोपाल अग्रवाल के घर ED की कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। कार्यकर्ताओं ने ED और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मौके पर विधायक, जिलाध्यक्ष समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

रायपुर के रवि नगर स्थित कारोबारी अनूप अग्रवाल के घर पर भी ED की टीम पहुंची है। अनूप अग्रवाल रामगोपाल अग्रवाल के करीबी माने जाते हैं। टीम घर के अंदर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

वहीं, दुर्ग में बिल्डर सजल जैन और विश्वास गुप्ता के घर पर सुबह करीब 6 बजे ED की टीम पहुंची। करीब 7 अफसरों की टीम दोनों ठिकानों पर जांच कर रही है। कार्रवाई फिलहाल जारी है। जैन और विश्वास गुप्ता कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के करीबी माने जाते हैं।

ऐसी चर्चा है कि कई अधिकारियों का पैसा भी दोनों के रियल एस्टेट कारोबार में लगा हुआ है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

धमतरी में सुरक्षा बल के जवान मौके पर तैनात रहे।

धमतरी में सुरक्षा बल के जवान मौके पर तैनात रहे।

दो गाड़ियों में ईडी की टीम रेड कार्रवाई करने पहुंची।

दो गाड़ियों में ईडी की टीम रेड कार्रवाई करने पहुंची।

धमतरी में कांग्रेसियों का धरना

धमतरी में रामगोपाल अग्रवाल के घर ED की दबिश के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। ED और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि रामगोपाल पहले से ED की हिरासत में हैं, ऐसे में उनके परिवार के घर छापा मारकर परिजनों को परेशान करना गलत है। कार्रवाई से कांग्रेस और व्यापारी वर्ग में नाराजगी है।

विधायक ओंकार साहू ने कहा कि परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस पूरे प्रदेश में इस कार्रवाई का विरोध करेगी। जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्रीय एजेंसी का दुरुपयोग कर रही है। कांग्रेस इसका जवाब आंदोलन के जरिए देगी।

रायपुर के रवि नगर स्थित रामगोपाल अग्रवाल के करीबी अनूप अग्रवाल के घर पर जांच।

रायपुर के रवि नगर स्थित रामगोपाल अग्रवाल के करीबी अनूप अग्रवाल के घर पर जांच।

धमतरी में रामगोपाल अग्रवाल के घर दबिश के बाद बाहर कांग्रेस नेता जुटे।

धमतरी में रामगोपाल अग्रवाल के घर दबिश के बाद बाहर कांग्रेस नेता जुटे।

दुर्ग में सजल जैन और विश्वास गुप्ता के ठिकानों पर जांच

जानकारी के मुताबिक ED की टीम सुबह दुर्ग के गांधी चौक स्थित जय आनंद परिसर, जैन गली और डॉक्टर ताम्रकार के समीप सजल जैन से जुड़े परिसरों में पहुंची। इसके अलावा शनिचरी बाजार स्थित श्रीराम हार्डवेयर में भी विश्वास गुप्ता से जुड़े ठिकाने पर जांच की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि टीम अलग-अलग कार्यालयों और आवासीय परिसरों में दस्तावेज, कारोबारी लेन-देन और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है। सजल जैन का संबंध रिद्धि-सिद्धि बिल्डर्स से बताया जाता है, जबकि विश्वास गुप्ता भी इसी बिल्डर समूह से जुड़े पार्टनर रहे हैं।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ईडी की कार्रवाई किस मामले में और किन वित्तीय लेन-देन को लेकर की जा रही है। एजेंसी की ओर से भी अभी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

बिल्डर्स के ठिकानों पर पहले भी पड़ चुकी है रेड

दुर्ग में इससे पहले भी ACB दोनों के ठिकानों पर कार्रवाई कर चुकी है। फिलहाल, सुरक्षा के मद्देनजर कार्रवाई स्थल पर CRPF के जवान तैनात हैं। ED की टीम ने दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी कार्रवाई की जानकारी दी है।

दुर्ग में बिल्डर सजल जैन के घर पर भी जांच चल रही है।

दुर्ग में बिल्डर सजल जैन के घर पर भी जांच चल रही है।

दुर्ग में बिल्डर विश्वास गुप्ता के घर पर कार्रवाई।

दुर्ग में बिल्डर विश्वास गुप्ता के घर पर कार्रवाई।

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे बड़े आर्थिक मामलों में से एक माना जाता है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की जांच के अनुसार, साल 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब 3,200 करोड़ रुपए का अवैध घोटाला हुआ। मामले में कई आईएएस अधिकारी, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है।

वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबार में अवैध वसूली के आरोपों से जुड़ा है।

वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबार में अवैध वसूली के आरोपों से जुड़ा है।

क्या है छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाला?

छत्तीसगढ़ का कथित कोल लेवी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबार में अवैध वसूली के आरोपों से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के अनुसार, कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि अवैध रूप से वसूली गई।

जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपए की अवैध लेवी वसूली गई। मामले में कई आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, बिचौलियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच और सुनवाई जारी है।

कस्टम घोटाले का आरोप इन अफसरों, कारोबारियों और राजनेताओं पर लगा है।

कस्टम घोटाले का आरोप इन अफसरों, कारोबारियों और राजनेताओं पर लगा है।

क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला?

छत्तीसगढ़ का कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला धान की मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला है।

आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और उसके भुगतान में नियमों का उल्लंघन कर चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में करीब 127 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ।

मामले में तत्कालीन अधिकारियों, राइस मिलर्स और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

Continue Reading

छत्तीसगढ़

झीरम घाटी में नक्सली हमले के 10 दोषियों को मृत्युदंड:2013 में छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला हुआ था, 29 मारे गए थे

Published

on

जगदलपुर/ रायपुर, एजेंसी। 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या के मामले में जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इनमें 2 महिला और 8 पुरुष शामिल हैं।

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। इसमें कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।

करीब 13 साल चली सुनवाई में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज दर्ज किए गए। यह सजा हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही लागू होगी। तब तक सभी दोषी केंद्रीय जेल जगदलपुर में रहेंगे। 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। अभियोजन पक्ष ने फांसी की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने दलील में सजा कम करने की मांग की थी।

परिजन बोले- कोसा नक्सली नहीं था

दोषी ठहराए गए कोसा के ममेरे भाई ने कहा कि कोसा नक्सली नहीं था। क्या नक्सली गांव में रहते हैं। जिस समय कोसा को पकड़ा गया, वह घर में खाना बना रहा था। मौत की सजा की जानकारी मिली है। वकील ने बताया है कि 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट जाना पड़ेगा।

NIA के दिए दस्तावेज कोर्ट ने सही पाए

वहीं अभियोजन पक्ष के वकील ने परिजनों के आरोपों पर कहा कि कोर्ट आरोपों से नहीं सबूतों से चलती है। NIA के दिए दस्तावेजों को कोर्ट ने सही पाया, इसलिए मौत की सजा सुनाई गई है। 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे।

FIR में और बहुत सारे लोगों के नाम थे। उनमें अज्ञात और नामजद लोग भी हैं। उनकी पहचान की जाएगी। 11 लोग पकड़े गए थे। ट्रायल के दौरान एक की मौत हो गई। 10 लोगों की सजा सुनाई गई है।

25 मई 2013 को हुआ था झीरम नक्सली हमला

13 साल पहले बस्तर में कांग्रेस अपनी परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी। 25 मई 2013 की शाम यह यात्रा सुकमा की ओर से लौट रही थी। काफिला जब दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था, तभी माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया।

हमले की शुरुआत IED विस्फोट से हुई। इसके बाद सड़क पर पेड़ गिराकर रास्ता बंद किया गया और जंगल से काफिले पर गोलियां बरसाई गई। कुछ ही देर में पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा। नक्सलियों ने नेताओं और सुरक्षाकर्मियों को अलग-अलग किया।

माओवादियों का खास निशाना महेंद्र कर्मा थे। नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कई अन्य लोगों की भी हत्या कर दी गई। एक ही हमले में कांग्रेस की उस समय की प्रदेश की शीर्ष नेतृत्व पंक्ति लगभग खत्म हो गई थी।

2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।

2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।

जान गंवाने वाले कांग्रेस नेताओं के नाम

नंदकुमार पटेल (तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष) महेंद्र कर्मा (पूर्व नेता प्रतिपक्ष), विद्याचरण शुक्ल (पूर्व केंद्रीय मंत्री), दिनेश पटेल, उदय मुदलियार, भागीरथी पालिया, राजकुमार, गोपीचंद माधवानी, अल्लानूर, योगेंद्र शर्मा, राजेश चंद्राकर, मनोज जोशी, अभिषेक गोलचा, गनपथ नाग, सदा सिंह, चंद्रहास ध्रुव, दीपक उपाध्याय, तरुण देशमुख, प्रहलाद, चंदर राम मांझी, पैतृक खलखो, पवन कोंद्रा, सियाराम सिंह, पुलिसकर्मी- प्रधान आरक्षक प्रफुल्ल शुक्ला, अशोक कुमार, राहुल प्रताप सिंह और इमैनुअल केरकेट्टा।

हमला खत्म करने के बाद हथियार भी लूटकर ले गए

नक्सलियों ने काफिले की गाड़ियों और मारे गए सुरक्षाकर्मियों के हथियारों को भी अपने कब्जे में लिया था। 25 सितंबर 2014 को NIA की चार्जशीट के मुताबिक हमले के बाद एक 9 एमएम पिस्टल के साथ 2 मैगजीन और 20 कारतूस, दो AK-47 राइफलें, 14 मैगजीन और 455 कारतूस और 10 हैंड ग्रेनेड और वॉकी टॉकी और अन्य डिवाइस लूटे थे।

इसके साथ ही घटनास्थल से मिले विस्फोटकों की फोरेंसिक जांच में अमोनियम नाइट्रेट, PETN और अमाटोल जैसे पदार्थों का इस्तेमाल सामने आया था।

भूपेश बघेल ने कहा था- मेरी जेब में साजिश के सबूत

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लंबे समय से इसे सिर्फ नक्सली हमला नहीं, बल्कि बड़ी साजिश बताते रहे हैं। वे यह भी कहते रहे हैं कि झीरम की साजिश के सबूत उनकी जेब में हैं। सीनियर जर्नलिस्ट सुनील कुमार इसी सवाल को सबसे अहम मानते हैं।

उनका कहना है कि भूपेश बघेल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और मुख्यमंत्री भी रहे हैं। जिस पार्टी ने झीरम में अपनी पूरी टॉप लीडरशिप का बड़ा हिस्सा खो दिया, उस पार्टी के एक जिम्मेदार नेता के तौर पर अगर उनके पास साजिश के सबूत हैं तो उन्हें सामने रखना चाहिए।

क्या 10 लोवर कैडर ही पूरी साजिश के जिम्मेदार थे?

झीरम का हमला कोई सामान्य नक्सली वारदात नहीं थी। निशाना कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा थी और हमले में प्रदेश कांग्रेस की शीर्ष राजनीतिक लीडरशिप खत्म हो गई। ऐसे में दूसरा बड़ा सवाल है कि क्या इतने बड़े हमले की पूरी योजना सिर्फ उन 10 लोगों तक सीमित थी, जिन्हें कोर्ट ने दोषी ठहराया है?

सीनियर जर्नलिस्ट सुदीप ठाकुर का कहना है कि पहली नजर में जिन 10 लोगों को दोषी ठहराया गया है, वे नक्सली संगठन के लोअर कैडर के लोग दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े राजनीतिक हमले की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के पीछे इससे बड़ा नेटवर्क था या नहीं?

मास्टर प्लान किस स्तर पर बना था? किसने टारगेट तय किया?

अगर हमला इतना बड़ा था तो स्वाभाविक सवाल है कि इसका मास्टर प्लान किस स्तर पर बना था? किसने टारगेट तय किया? काफिले की जानकारी कैसे मिली? इतने बड़े नेताओं की मौजूदगी की सूचना नक्सलियों तक कैसे पहुंची? हमले की पूरी तैयारी किस स्तर पर हुई?

NIA ने मामले में प्रतिबंधित CPI (माओवादी) के अलग-अलग कैडर और सैन्य इकाइयों की भूमिका की जांच की थी। लेकिन मौजूदा फैसला ट्रायल में शामिल 10 आरोपियों की दोषसिद्धि तक पहुंचा है। यहीं से सवाल उठता है कि क्या हमले के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने आई है?

इंटेलिजेंस सिस्टम कहां फेल हुआ?

वरिष्ठ पत्रकार सुदीप ठाकुर के मुताबिक झीरम मामले में सिर्फ नक्सलियों की भूमिका देखना पर्याप्त नहीं है। एक बड़ा सवाल इंटेलिजेंस फेलियर और सिस्टम की जिम्मेदारी का भी है।

इतना बड़ा राजनीतिक काफिला बस्तर के बेहद संवेदनशील इलाके से गुजर रहा था। नक्सलियों ने इतनी बड़ी संख्या में हमला किया। ऐसे में सवाल है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई? क्या पहले से कोई इनपुट था? अगर था तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अगर इनपुट नहीं था तो इंटेलिजेंस सिस्टम कहां फेल हुआ? जो फैसला आया है उससे यह कही भी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं हई है?

सुदीप ठाकुर का कहना है कि मौजूदा फैसला सिस्टम के लैप्स और उसकी जिम्मेदारी की तस्वीर साफ नहीं करता है।

बड़े नक्सली नेताओं नहीं हुई पूछताछ

झीरम में मारे गए महेंद्र कर्मा के परिवार की ओर से भी जांच को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सीनियर जर्नलिस्ट सुदीप ठाकुर के कहा कि महेंद्र कर्मा की बेटी ने भी सवाल उठाया है कि घटना के सबसे पहले वे घटनास्थल पर पहुंची थी। लेकिन NIA ने उनसे भी पूछताछ नहीं की है। इसके साथ ही कई ऐसे लोगों को और गवाह थे जिनसे जांच के दौरान NIA ने पूछताछ के लिए कभी बुलाया ही नहीं।

4,184 पेज की जांच आयोग की रिपोर्ट, अब तक सार्वजनिक नहीं

झीरम की कहानी में सबसे दिलचस्प और अब तक अनसुलझे अध्यायों में से एक है न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट। 2013 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाया था। आयोग ने कई साल तक सुनवाई की। 2021 में करीब 4,184 पेज की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी गई।

लेकिन रिपोर्ट पेश होने के बाद नया विवाद शुरू हो गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि रिपोर्ट अधूरी है, इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

इसके बाद आयोग को नए अध्यक्ष और सदस्य के साथ आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। जस्टिस सतीश के. अग्निहोत्री को नया अध्यक्ष और जस्टिस जी. मिन्हाजुद्दीन को सदस्य बनाया गया। जांच के दायरे में नए बिंदु भी जोड़े गए। लेकिन इसके खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंच गया।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2022 में पुनर्गठित जांच आयोग के कामकाज पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी। यानी झीरम की एक जांच NIA के स्तर पर चली, दूसरी न्यायिक आयोग के स्तर पर। दोनों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी चलते रहे। लेकिन आम लोगों के सामने पूरी तस्वीर अब भी साफ नहीं है।

10 को सजा, लेकिन 33 अब भी फरार

कोर्ट ने प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा पुनेम, मोडियम मुक्का, मंडवी कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयाता मरकाम, मड़ाकामी देवा, जोगा मड़ाकामी, बंजामी सन्ना उर्फ चामरू उर्फ डेंगा और महादेव नाग को दोषी माना है।

मामले में नामजद कई अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। करीब 33 आरोपी अदालत की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे आरोपी भी हैं, जिन्होंने बाद में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में सरेंडर कर दिया।

जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी घटना के समय माओवादी संगठन की क्षेत्रीय कमान (SRUC) में सीनियर कमांडर था। वहीं, बारसे सुक्का उर्फ देवा दरभा डिवीजन कमेटी का सचिव रहा और बाद में बटालियन-1 का कमांडर बना। जांच में दोनों की भूमिका झीरम हमले से जुड़ी बताई गई है।

NIA ने 23 दिसंबर 2023 को जारी वांटेड इश्तहार में देवजी और देवा समेत 19 नक्सलियों की जानकारी सार्वजनिक की थी। इसमें देवजी का नाम और फोटो भी शामिल था। देवजी ने 24 फरवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया, जबकि देवा ने 2 जनवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया। सरेंडर के बाद थिप्पिरी तिरुपति देवजी ने मई में इंटरमीडिएट सेकंड ईयर की तेलुगु परीक्षा भी दी थी। आरोप है कि इस मामले में पुलिस ने अब तक उससे पूछताछ नहीं की है।

मई 2026 में देवजी ने 12वीं की परीक्षा दी थी।

मई 2026 में देवजी ने 12वीं की परीक्षा दी थी।

इस मामले में कट्कम सुदर्शन को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन 2023 में उसकी मौत हो गई। वहीं, सबसे बड़ा वांछित आरोपी मुपल्ला लक्ष्मणा राव उर्फ गणपति अब तक पकड़ से बाहर है। घटना के समय वह CPI (माओवादी) का महासचिव था।

Continue Reading

कोरबा

संकल्प से शिखर तक की यात्रा

Published

on

17 सितम्बर:प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर विशेष लेख


देश में जितने भी महान व्यक्तित्व हुए हैं, उनका जन्म कहीं न कहीं से शुभ नक्षत्र और देवपुरूषों की जयंती से जुड़ा हुआ है। 17 सितम्बर को आदिशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती होती है। 17 सितम्बर को ही देश को सशक्त नेतृत्व देने वाले सक्षम प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर भाई मोदी का भी जन्मदिन है। पूरे भारतवर्ष में भाजपा 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक एक माह तक सेवा संकल्प अभियान के तहत विभिन्न रचनात्मक कार्यों को अंजाम देगा। प्रथम दिन 17 सितम्बर को संध्या गोधूली बेला में भाजपा कार्यकर्ता देश के कोने-कोने में आशीर्वाद का दीया जलाएंगे। यह शाम ऐतिहासिक होगी और दिवाली की तरह यह शाम भी जगमग होगी।
17 सितम्बर 1950 में गुजरात के वडनगर में दामोदर दास मोदी-हीरा बेन के घर में एक बालक का जन्म हुआ, जो आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बना।
संघर्षों से रहा नाता
नरेन्द्र दामोदर भाई मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में जनता ने यूं ही राजतिलक नहीं किया, बल्कि उनका बचपन से लेकर युवा कार्यकाल तक का काल संघर्षों से भरा रहा। रेलवे स्टेशन में चाय बेचने वाले परिवार से निकल कर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक और भाजपा संगठन में बतौर कार्यकर्ता के रूप में मोदी जी ने राजनीति के गुर सीखे और संघर्षों का रास्ता तय करते हुए माँ भारती की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया और आज एक साथ सबसे लम्बे समय तक प्रधानमंत्री बनने वाले प्रथम व्यक्ति बन गए। 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने गुजरात माडल देश को दिया, उनके कार्यकाल में गुजरात विकास के नए सोपानों को तय किया और मोदी जी ने गुजरात माडल ऑफ डेवलपमेंट को देश के सामने रखा।
2014 में पहली बार और फिर 2019 तथा 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनकर नया इतिहास रच दिया। अब तक के उनके कार्यकाल को सख्त फैसलों वाला कहा जा सकता है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370, अनुच्छेद 35ए को हटाना, नोट बंदी, पूरे देश में जीएसटी लागू, पाक के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करना प्रमुख फैसले थे। उनकी योजनाओं में स्वच्छ भारत मिशन ने देश की तस्वीर ही बदल दी। जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, डीजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अफ इंडिया से सीधा लाभ जनता को मिला। आज मोदी वैश्विक नेता बन चुके हैं। यूं कहें तो संकल्प से शिखर तक रही उनकी यात्रा।

Continue Reading

कोरबा

HMS की सदस्यता में भारी गिरावट, गेवरा/दीपका क्षेत्र में 1,107 सदस्य घटे, रू.11.07 लाख का नुकसान

Published

on

कोरबागेवरा/दीपका/। कोयला मजदूर सभा (HMS) के SECL गेवरा–दीपका एवं CEWS गेवरा क्षेत्रों में वर्ष 2026 के यूनियन सदस्यता सत्यापन के आंकड़ों ने संगठन के जनाधार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में HMS की सदस्यता में रिकॉर्ड तोड़ 1,107 सदस्यों की भारी गिरावट दर्ज की गई है ।

सदस्यता सत्यापन 2025 बनाम 2026

वर्ष 2025 में जहाँ HMS को 1,326 श्रमिकों का मजबूत समर्थन हासिल था, वहीं वर्ष 2026 में यह आंकड़ा सिमटकर मात्र 219 रह गया है ।

क्षेत्रवार तुलनात्मक आंकड़े

गेवरा प्रोजेक्ट 562 (2025) ➔ 146 (2026) (कमी 416)
गेवरा क्षेत्रीय कार्यालय 147 (2025) ➔ 21 (2026) (कमी 126)
CEWS–गेवरा 50 (2025) ➔ 03 (2026) (कमी 47)
दीपका क्षेत्र 567 (2025) ➔ 49 (2026) (कमी 518)
कुल योग 1,326 से घटकर 219 (कुल कमी 1,107)

बैठकों और अपीलों का नहीं दिखा कोई असर

सत्यापन के दौरान यूनियन संगठन के केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व पदाधिकारियों की उपस्थिति व कई दौर की बैठकों के बावजूद आंकड़ों में कोई सुधार नहीं हो सका ।

स्थानीय नेतृत्व और जनाधार पर उठे सवाल

दीपका क्षेत्र के क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा अपने समाज व सहकर्मियों से की गई अपीलों का भी कोई असर नहीं पड़ा, अपने ही गृह क्षेत्र दीपका में सदस्यता 567 से गिरकर 49 पर आ जाने को लेकर विज्ञप्ति में तीखा व्यंग्य करते हुए, इसे अपने ही घर में औंधे मुंह गिरने जैसा बताया गया है और उनके जनाधार पर सवाल खड़े किए गए हैं ।

रू.11.07 लाख का वित्तीय घाटा

प्रति सदस्य रू.1,000 सदस्यता शुल्क के आधार पर वर्ष 2025 में जहाँ संगठन को रू.13.26 लाख का राजस्व मिला था, वहीं 2026 में यह घटकर मात्र रू.2.19 लाख रह गया है। इसके चलते HMS को सीधे तौर पर रू.11.07 लाख का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है ।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677