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कोरबा

पुलिस सहायता केंद्र मानिकपुर क्षेत्र के हत्या के प्रकरण का खुलासा:मुख्य आरोपी गिरफ्तार

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मानिकपुर हत्या प्रकरण के साथ बलगी डकैती प्रकरण में भी आरोपी की संलिप्तता उजागर

सजग कोरबा – सतर्क कोरबा अभियान के तहत कोरबा पुलिस की बड़ी कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित विशेष टीमों की संयुक्त कार्रवाई से मुख्य आरोपी गिरफ्तार

सीसीटीवी, टेक्निकल साक्ष्य एवं ह्यूमन इंटेलिजेंस के समन्वय से मिली सफलता

कोरबा। कोरबा पुलिस द्वारा गंभीर अपराधों के त्वरित निराकरण एवं अपराधियों की धरपकड़ हेतु लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पुलिस सहायता केंद्र मानिकपुर क्षेत्र में घटित हत्या के गंभीर प्रकरण में पुलिस ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है।

प्रार्थी शुभम सिंह बघेल निवासी साकेत कॉलोनी जमनीपाली द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराया गया था कि दिनांक 06-07 जून 2026 की दरमियानी रात उसके परिचित चन्द्रमणि रात्रे उर्फ दादू को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा जान से मारने की नीयत से बोलेरो वाहन से गंभीर चोट पहुंचाई गई थी, जिसकी उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 500/2026 धारा 109, 103(1), 3(5) भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।

पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रकरण के शीघ्र खुलासे हेतु अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया। गठित टीमों को सीसीटीवी जांच, तकनीकी साक्ष्य संकलन, संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ एवं ह्यूमन इंटेलिजेंस विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई।

पुलिस टीमों द्वारा लगातार प्रयास करते हुए घटना से संबंधित 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई तथा 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई। तकनीकी विश्लेषण एवं ह्यूमन इंटेलिजेंस से प्राप्त महत्वपूर्ण जानकारी के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया गया।

विवेचना के दौरान आरोपी राजेन्द्र साहू उर्फ कुनाल साहू पिता लक्ष्मी प्रसाद साहू उम्र 22 वर्ष निवासी कड़ारी थाना बाराद्वार जिला सक्ती, हाल मुकाम एम-299 विकास नगर कुसमुंडा थाना कुसमुंडा जिला कोरबा की संलिप्तता पाई गई।

पूछताछ में आरोपी द्वारा अपने साथी योगेन्द्र बघेल उर्फ योगी के साथ मिलकर घटना को अंजाम देना स्वीकार किया गया। आरोपी के मेमोरेंडम कथन के आधार पर घटना में प्रयुक्त बोलेरो वाहन क्रमांक CG-12 BD-5025 को जप्त किया गया।

विवेचना के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी उसी दिनांक को थाना बाकीमोंगरा क्षेत्र अंतर्गत बालगी में घटित डकैती की घटना में भी संलिप्त था। उक्त डकैती प्रकरण में पूर्व में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा घटना में प्रयुक्त वेन्यू कार एवं स्कूटी वाहन को पुलिस द्वारा जप्त किया गया था। वर्तमान आरोपी की गिरफ्तारी से उक्त प्रकरण में भी महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है।

गिरफ्तार आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से आरोपी का न्यायिक रिमांड प्राप्त किया गया है। प्रकरण में अन्य आरोपी एवं अन्य साक्ष्यों के संबंध में विवेचना जारी है।

उक्त संपूर्ण कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में गठित टीमों द्वारा किए गए अथक प्रयास, सीसीटीवी विश्लेषण, तकनीकी जांच एवं ह्यूमन इंटेलिजेंस की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कोरबा पुलिस आमजन से अपील करती है कि अपराध एवं अपराधियों के संबंध में किसी भी प्रकार की सूचना तत्काल पुलिस को दें। आपकी सजगता सुरक्षित कोरबा के निर्माण में सहायक है।

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कोरबा

हाथियों के झुंड ने रौंदी फसल, दंतैल ने तोड़ा मकान:केंदई-एतमानगर-जटगा से पसान पहुंचे 30 हाथी, मोहनपुर और बनिया में अलग-अलग झुंड

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कोरबा। कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल के पसान रेंज में हाथियों की सक्रियता बढ़ गई है। केंदई, एतमानगर और जटगा रेंज में घूम रहे करीब 30 हाथियों का झुंड अब पसान क्षेत्र के लैंगी, मोहनपुर और बनिया पहुंच गया है। हाथी अलग-अलग झुंडों में बंटकर पांच से ज्यादा स्थानों पर घूम रहे हैं।

बीती रात हाथियों ने कई ग्रामीण इलाकों में खेतों में लगी धान की फसल रौंद दी। अब हाथी दिन में भी फसल खा रहे हैं और रात के समय गांवों के आसपास पहुंच रहे हैं। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है और ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है।

झुंड से अलग दंतैल ने कच्चा मकान तोड़ा

झुंड से अलग हुए एक दंतैल हाथी ने मोहनपुर और पोड़ीकला के बीच जंगल में थुहानाला के पास रात में ग्रामीण के कच्चे मकान को कई जगह से तोड़ दिया। घटना के समय मकान मालिक परदेशी अपने परिवार के साथ एक ही कमरे में डरे हुए दुबके रहे।

हाथी के हमले से मकान को काफी नुकसान पहुंचा है। हालांकि राहत की बात रही कि घटना में किसी की जनहानि नहीं हुई।

अकेले घूम रहे दंतैल से ज्यादा खतरा

ग्रामीणों के मुताबिक, हाथियों का बड़ा झुंड आमतौर पर गांव के ज्यादा करीब नहीं आता। सबसे ज्यादा खतरा झुंड से अलग होकर घूमने वाले दंतैल हाथियों से बना हुआ है। पसान रेंज में सक्रिय हाथियों के दल में दो अकेले हाथी भी शामिल हैं, जो झुंड से अलग घूम रहे हैं। इनके लगातार स्थान बदलने के कारण वन विभाग के सामने इनकी निगरानी चुनौती बनी हुई है।

गांवों में मुनादी, जंगल नहीं जाने की सलाह

हाथियों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। हाथियों की मौजूदगी वाले गांवों में टीम की ओर से मुनादी कराई जा रही है।

ग्रामीणों को जंगल और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा रात में अकेले जंगल या खेतों की ओर नहीं जाने की सलाह दी जा रही है। विभाग की टीम हाथियों की लोकेशन पर लगातार नजर रख रही है।

करतला रेंज में भी 9 हाथी पहुंचे

इधर, कोरबा वनमंडल के करतला रेंज में भी 9 हाथी बेहरसुआं क्षेत्र में पहुंच गए हैं। ये हाथी पहले लबेद के आसपास घूम रहे थे।

वहीं, चिकनीपाली के पहाड़ पर 9 हाथियों का एक और दल अभी भी मौजूद है। इस तरह जिले के अलग-अलग वन क्षेत्रों में हाथियों की लगातार मौजूदगी बनी हुई है, जिससे वन विभाग को निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।

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कोरबा

कोरबा के घर में घुसा सांप,महिला को डसने का शक:कॉमन वुल्फ स्नेक का रेस्क्यू, सर्प मित्र ने बताया- यह जहरीला नहीं

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कोरबा। कोरबा के मानिकपुर इलाके में आधी रात एक घर में सांप घुसने से हड़कंप मच गया। रात करीब 3:30 बजे बिस्तर पर सांप देखकर घर की महिला चीखने लगी। परिजनों को आशंका हुई कि सांप ने महिला को डस लिया है। इसके बाद मोहल्ले में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस सिपाही हितेश राव ने तुरंत वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम के जितेंद्र सारथी को सूचना दी। सारथी ने पहले महिला को अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद वे खुद मौके पर पहुंचे और सावधानी से सांप को पकड़ लिया।

करैत जैसा दिखता है, लेकिन जहरीला नहीं

रेस्क्यू के बाद सांप की पहचान कॉमन वुल्फ स्नेक के रूप में हुई। रेस्क्यूअर जितेंद्र सारथी के मुताबिक, यह सांप जहरीला नहीं होता। उन्होंने बताया कि इसका रंग-रूप करैत जैसा दिखाई देता है, इसलिए कई बार लोग इसे जहरीला समझ लेते हैं।

सांप को लेकर अस्पताल पहुंचे रेस्क्यूअर

सांप को सुरक्षित पकड़ने के बाद जितेंद्र सारथी सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर से मिलकर स्पष्ट किया कि पकड़ा गया सांप जहरीला नहीं था। यह जानकारी मिलने के बाद महिला और उसके परिवार ने राहत की सांस ली।

डॉक्टरों ने भी महिला की हालत ठीक बताई। घटना के बाद समय पर सूचना देने और रेस्क्यू टीम तक बात पहुंचाने में सिपाही हितेश राव की भूमिका की भी सराहना की जा रही है।

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कोरबा

मानिकपुर खदान विस्तार की जनसुनवाई में भारी विरोध:पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और ग्रामीणों ने मुआवजा और रोजगार मांगा, लंबित मामले निपटाने को कहा

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कोरबा। कोरबा में एसईसीएल की मानिकपुर खदान के विस्तार के लिए पर्यावरण जनसुनवाई हुई। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पहुंचे। उन्होंने खदान विस्तार से पहले इलाके की समस्याओं को सुलझाने की मांग रखी।

जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि जब तक पुराने लंबित मामले नहीं निपटाए जाते, तब तक खदान विस्तार को मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि पहले के सभी भू-विस्थापितों के मुआवजा और पुनर्वास के लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाए। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार में अनिवार्य रूप से प्राथमिकता दी जाए।

ग्रामीणों ने प्रदूषण रोकने और ट्रकों को त्रिपाल से ढकने की मांग की

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खदान चलने से इलाके में प्रदूषण हो रहा है। कोयला ले जाने वाले वाहन बिना त्रिपाल के चलते हैं, जिससे पूरे इलाके में धूल उड़ती है। लोगों ने मांग की कि सभी कोयला परिवहन वाहनों को पूरी तरह त्रिपाल से ढकना जरूरी किया जाए और धूल व वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

जनसुनवाई में दूसरे वक्ताओं ने भी अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि खदान विस्तार से पहले इलाके में वायु, जल, ध्वनि और धूल प्रदूषण की वैज्ञानिक और पारदर्शी जांच की जाए। इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक हो, ताकि लोगों को असली स्थिति का पता चल सके।

मजदूरों को सुरक्षा उपकरण और बेहतर अस्पताल की मांग

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी शिकायत की। उन्होंने कहा कि खदान क्षेत्र में पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं नहीं हैं। मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के काम करने को मजबूर हैं। सभी मजदूरों को जरूरी स्वास्थ्य सुरक्षा उपकरण दिए जाएं और इलाके में बेहतर अस्पताल की सुविधा मिले।

इसके साथ ही, ग्रामीणों ने स्थानीय लोगों की शिकायतों के जल्दी समाधान के लिए एक पारदर्शी शिकायत निपटान व्यवस्था बनाने की मांग भी रखी।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक भू-विस्थापितों के अधिकार, मजदूरों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे न बढ़े।

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