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कोरबा

जनपद कोरबा में नवपदस्थ सीईओ निर्मलकर एक्शन मूड में, पंचायतों को चेतावनी-काम शीघ्र पूरा करें, अन्यथा रिकव्हरी

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जनपद पंचायत पाली की कई ग्राम पंचायतों में राशि आहरित, लेकिन कई कार्य हुए ही नहीं और कई कार्य अधूरे

कलेक्टर के निर्देश पर एक्शन मोड में जनपद सीईओ — 13 ग्राम पंचायतों के कामों की हुई विस्तृत समीक्षा, कई कार्य बंद
आधे अधूरे काम करने वाली पंचायतों को नोटिस, जल्द करें काम पूरा या तो फिर होगी रिकवरी

कोरबा। कलेक्टर के निर्देश पर जनपद पंचायत कोरबा ने अंतर्गत ग्राम पंचायतों में संचालित विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा की है। सीईओ जनपद द्वारा प्राप्त रिपोर्ट में कुल 13 ग्राम पंचायतों के DMF, एवं मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास योजनाओं के तहत चल रहे कार्यों की वास्तविक प्रगति, जारी व खर्च राशि तथा वर्तमान स्थिति का ब्योरा शामिल है। कई कार्य बंद पाए गए, जबकि कुछ पंचायतों में मामूली प्रगति दर्ज की गई है। इस आधार पर संबंधित पंचायत सचिवों व अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि लंबित कार्यों को समयसीमा में पूरा करें, अन्यथा विभागीय कार्रवाई तय है।

जनपद सीईओ कोरबा खगेश निर्मलकर द्वारा जारी नोटिस में पंचायतों के
ग्राम पंचायतवार समीक्षा — जारी राशि, खर्च और कार्य की स्थिति

  1. अखरापाली (वर्ष 2020–21 /

अखरा पाली के ग्राम अखरा पाली में माध्यमिक शाला से धना राम घर तक सीसी रोड निर्माण

स्वीकृत राशि: 15.00 लाख

प्राप्त राशि: 12.00 लाख

खर्च: 12.00 लाख

स्थिति: बंद

  1. अरसेना (2019–20 /

ग्राम पंचायत अरसेना में सीसी रोड प्राथमिक शाला कुटरुवा से प्रमोद घर तक
स्वीकृत: 10 लाख

प्राप्त: 4.00

खर्च: 4.00

स्थिति: बंद

  1. बरपाली (2021–22 /

अहाता निर्माण कार्य हायर सेकेंडरी स्कूल बरपाली

स्वीकृत: 19.00 लाख

प्राप्त: 9.50 लाख

खर्च: 9.50 लाख

स्थिति: 100 मीटर कार्य शेष

  1. बेंदरकोना (2018–19 /

तालाब में रिटर्निंग वॉल निर्माण

स्वीकृत: 16.00 लाख

प्राप्त: 12.80

खर्च: 12.80

स्थिति: धीमी प्रगति


  1. ग्राम पंचायत भुलसीडीह (2024–25 / देवगुड़ी निर्माण कार्य ठाकुर दैय्या देव स्थल ग्राम भुलसीडीह

स्वीकृत: 3.00 लाख

प्राप्त: 1.20

खर्च: 1.20

स्थिति: बंद

–

  1. ग्राम पंचायत कुकरी चोली (2024–25 / मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास योजना) सीसी रोड निर्माण सोमन सिंह घर से नीलांबर यादव के घर की ओर

स्वीकृत: 10.00 लाख

प्राप्त: 10.00

खर्च: 6:00

स्थिति: बंद

7.मदनपुर(2023–24 /

देवगुड़ी निर्माण मनसा पहरी में

स्वीकृत: 1.50 लाख

प्राप्त: 0.75

खर्च: 0.75

स्थिति: कार्य बंद


  1. मदंनपुर (2024–25 / प्रेयर सेड निर्माण कार्य

स्वीकृत: 8.81 लाख

प्राप्त: 3.25 लाख

खर्च: 3.25 लाख

स्थिति: बंद

  1. पताडी, (2022–23 / सीसी रोड कार्य बाजार मोहल्ला हाई स्कूल से ग्राम पंचायत पताडी

स्वीकृत: 9.00 लाख

प्राप्त: 4.50

खर्च: 4.50

स्थिति: बंद

  1. ग्राम पंचायत-सकदुकला (2024–25 /

ग्रामीण सड़क एवं सीसी रोड निर्माण कार्य भेलवाटार से तालाब बांध तक

स्वीकृत: 12.00 लाख

प्राप्त: 4.80 लाख

खर्च: 4.80 लाख

स्थिति: बंद

  1. ग्राम पंचायत तौलीपाली (2022–25 /

सीसी रोड निर्माण झरिया मोहल्ला में पुनि राम घर से सुखदेव घर होते गजरूप घर तक

स्वीकृत: 10.00 लाख

प्राप्त: 4.00

खर्च: 4.00

स्थिति: बंद

  1. ग्राम पंचायत मुढूनारा (2022–23 /

सीसी रोड, पुलिया, नाली एवं स्कूल मार्ग निर्माण

स्वीकृत: 18.07 लाख

प्राप्त: 9.04 लाख

खर्च: 9.04 लाख

स्थिति: बंद

  1. (2022–23 /
    ग्राम पंचायत मुढूनारा

राज कुमार घर से मेन रोड तक मार्ग निर्माण

स्वीकृत: 19.91 लाख

प्राप्त: 9.96 लाख

खर्च: 9.96 लाख

स्थिति: बंद

सीईओ जनपद कोरबा की कार्रवाई

कोरबा जनपद सीईओ खगेश निर्मलकर ने स्पष्ट कहा है कि:

जिन पंचायतों में कार्य बंद है, उनके सचिवों और संबंधित तकनीकी सहायकों से जवाब-तलब किया जाएगा।

धीमी प्रगति वाली पंचायतों के लिए अलग मॉनिटरिंग टीम लगाई जाएगी।

धनराशि जारी होने के बावजूद कार्य लंबित रहने पर रिकवरी और निलंबन की कार्रवाई संभव है।

सभी पंचायतों को 15 दिन के भीतर अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।

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कोरबा

कोरबा जिले में भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बनाए जा रहे 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट

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विकसित भारत-जी राम जी के तहत रू1.32 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत

जल संरक्षण एवं संवर्धन के साथ ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार, 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में हो रहा निर्माण

मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जल सरंक्षण एवं संवर्धन सम्बंधी संरचनाओं को प्राथमिकता

कोरबा, 26 अक्टूबर 2026। जिले में गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने तथा वर्षा जल के संरक्षण और पुनर्भरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के तहत 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 97 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन संरचनाओं के निर्माण से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, वहीं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देकर जल संकट की चुनौती से निपटने में भी मदद मिलेगी।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने में मिलेगी मदद

बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट ऐसी संरचना है, जिसके माध्यम से वर्षा जल को रेत एवं अन्य फिल्टर सामग्री की सहायता से छानकर जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है तथा बोरवेल और आसपास के जलस्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। ग्राम पंचायतों, शासकीय भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों में ऐसी संरचनाएं जल संरक्षण की दृष्टि से उपयोगी हैं।

पांचों विकासखंडों में हो रहा निर्माण

जिले की 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में मांग एवं आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। विकासखंडवार स्थिति के अनुसार करतला में 64, कटघोरा में 30, कोरबा में 66, पाली में 13 तथा पोड़ी उपरोड़ा में 61 रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं।

इन संरचनाओं से विशेषकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जहां जलस्तर में गिरावट की समस्या है। वर्षा जल का बेहतर उपयोग होने से जल उपलब्धता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।

विकसित भारत- जी राम जी से जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के इन प्रयासों के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ जल सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।

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कोरबा

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष अग्रवाल को भ्रात शोक

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कोरबा। प्रेस क्लब के सदस्य एवं दैनिक तरूण छत्तीसगढ़ के संपादक सुभाष अग्रवाल के अनुज भ्राता (छोटे भाई) शहर के प्रतिष्ठित नागरिक एवं होटल रिलैक्स इन के संचालक सतीश अग्रवाल पिता स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल का आज सोमवार दिनांक 26/10/2026 की देर शाम 7.30 बजे निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कल मंगलवार दिनांक 27/10/2026 को सुबह 11 बजे स्थानीय मोती सागर पारा मुक्तिधाम में संपन्न होगा। इससे पूर्व अग्रोहा मार्ग स्थित उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनके निधन पर कोरबा प्रेस क्लब परिवार ने शोक व्यक्त किया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में परम शांति प्रदान करे एवं शोकाकुल परिवार को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति दे।

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कोरबा

बेबी एलिफेंट की छठी मनाई, नाम रखा ‘काशी’:7 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए, स्वस्थ जीवन की कामना की, जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में 9 हाथियों का झुंड घूम रहा है। झुंड में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई और उसका नाम ‘काशी’ रखा।

कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ जीवन की कामना की।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 9 हाथियों का झुंड फिलहाल काशीपानी के जंगल में घूम रहा है। इसके अलावा कुदमुरा रेंज में 32 हाथी और चचिया क्षेत्र में 7 हाथी मौजूद हैं। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।

20 साल से जंगल में आ रहे हाथी

ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल से हाथी इस जंगल में आते हैं। वे लंबे समय तक यहां रुकने के बाद वापस चले जाते हैं। यह हाथियों का पुराना कॉरिडोर है।

SDO मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों से छेड़छाड़ नहीं करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के मामलों में नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है। जनहानि रोकने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

साल 2000 में पहली बार आए थे हाथी

जिले में साल 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में हाथी आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई। कई बार जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।

धिनारा गांव से शुरू हुई छठी मनाने की परंपरा

बेबी एलिफेंट की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। ग्रामीण अब हाथियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां हाथियों को भगवान मानकर पूजा की जाती थी, वहीं अब ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं।

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