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कोरबा

सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज में कोरबा के युवाओं को अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर

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जिला स्तरीय चैलेंज के लिए 6 अक्टूबर तक प्रस्तुत कर सकेंगे आइडिया, व्यापक स्तर की प्रतियोगिता में आवेदन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर
कोरबा, 30 सितंबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत कोरबा में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिले के युवाओं, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों, महिला स्व-सहायता समूहों और अन्य नवप्रवर्तकों से प्रतियोगिता में भाग लेकर जनसमस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय समस्याओं को समझकर तैयार किए गए नवाचार कोरबा के साथ प्रदेश और देश के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।

जिला स्तरीय चैलेंज 6 अक्टूबर तक प्रस्तुत करें विचार

कलेक्टर श्री दुदावत ने बताया कि कोरबा में आयोजित जिला स्तरीय सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के लिए प्रतिभागी 6 अक्टूबर 2026 तक अपने आइडिया और नवाचार संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं। जिला स्तर पर प्रथम पुरस्कार एक लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार 75 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 50 हजार रुपये दिया जाएगा। इसके अलावा 10-10 हजार रुपये के सांत्वना पुरस्कार सहित अन्य पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।

कलेक्टर ने कहा कि कोरबा में उद्योग, खनन, वन क्षेत्र और दूरस्थ जनजातीय अंचलों से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। युवा फ्लाई ऐश के उपयोग, धूल एवं वायु प्रदूषण में कमी, मानव-हाथी द्वंद्व, दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, वनोपज के भंडारण एवं विपणन, सड़क सुरक्षा तथा साइबर धोखाधड़ी से बचाव जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से समस्याओं के ऐसे समाधान सोचने का आग्रह किया जो किफायती हों और व्यवहार में लाए जा सकें।

व्यापक स्तर का चैलेंज- 17 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित व्यापक स्तर के ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ में आवेदन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर 2026, रात्रि 11.59 बजे है। इस प्रतियोगिता में कृषि, कानून एवं व्यवस्था, महिला एवं बाल, नगरीय विकास, स्वास्थ्य, रक्षा, सतत विकास, अधोसंरचना एवं परिवहन, उभरती तकनीकें तथा शिक्षा एवं रोजगार सहित 10 क्षेत्रों में समाधान आमंत्रित किए गए हैं।
प्रत्येक क्षेत्र से पांच विजेताओं का चयन किया जाएगा। इनमें तीन सामान्य श्रेणी, एक महिला श्रेणी और एक विजेता 21 वर्ष से कम आयु वर्ग से होगा। इस प्रकार कुल 50 विजेताओं को प्रत्येक को 10 लाख रुपये, यानी कुल पांच करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। चयनित नवाचारों को संबंधित सरकारी विभागों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किए जाने का अवसर भी मिल सकता है।
प्रतियोगिता में विद्यार्थी, शोधकर्ता, फैकल्टी सदस्य, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, गैर सरकारी संगठन, स्व-सहायता समूह और व्यक्तिगत नवप्रवर्तक भाग ले सकते हैं। व्यक्तिगत, टीम अथवा संस्था के रूप में आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के लिए कंपनी पंजीयन या डीपीआईआईटी मान्यता अनिवार्य नहीं है। आवेदक अथवा टीम के किसी एक संस्थापक के पास छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा अथवा दमन एवं दीव का मूल निवास प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
इच्छुक प्रतिभागी ओटीपी के माध्यम से पंजीयन कर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन में संबंधित क्षेत्र एवं उप-विषय का चयन कर समस्या, प्रस्तावित समाधान, प्रोटोटाइप अथवा पायलट और उपलब्ध प्रमाण की जानकारी देनी होगी। शीर्षक, समस्या, समाधान, व्यवहार्यता, प्रभाव और टीम के विवरण सहित छह स्लाइड की पीडीएफ प्रस्तुति भी अपलोड करनी होगी।
प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन 18 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक किया जाएगा। चयनित प्रतिभागियों की ऑनलाइन प्रस्तुति 16 से 25 नवंबर के बीच होगी। सेमीफाइनलिस्ट की घोषणा 28 नवंबर को तथा अंतिम प्रस्तुति एवं विजेताओं का चयन 7 दिसंबर 2026 को नागपुर में किया जाएगा।
कलेक्टर श्री दुदावत ने कहा कि एक विद्यार्थी का सरल विचार या किसी समूह का व्यावहारिक अनुभव भी लोगों के जीवन में बदलाव ला सकता है। उन्होंने पात्र प्रतिभागियों से जिला स्तरीय चैलेज के लिए 6 अक्टूबर तक और व्यापक स्तर की प्रतियोगिता के लिए 17 अक्टूबर तक अपने विचार प्रस्तुत करने की अपील की। ऑनलाइन आवेदन संबंधी सहायता के लिए जिला नोडल अधिकारी विजय कारे, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, कोरबा से मोबाइल नंबर 8109363862 पर संपर्क किया जा सकता है। महाविद्यालयों के विद्यार्थी अपने संस्थान के इनोवेशन सेल से भी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

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एसईसीएल मुख्यालय के 09 कर्मियों के सेवानिवृत्त पर भावभीनी विदाई दी गयी

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बिलासपुर/कोरबा। आज दिनाँक 30.09.2026 को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर से सेवानिवृत्त हुए 09 कर्मियों को मुख्यालय बिलासपुर स्थित सीएमडी कक्ष में उन्हें शाल, श्रीफल, पुष्पहार से सम्मानित कर समस्त भुगतान का चेक प्रदान कर भावभीनी विदाई दी गयी।

मुख्यालय प्रशासनिक भवन के कान्फ्रेन्स हाल में मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन एवं निदेशक (तकनीकी)–संचालन रमेश चंद्र महापात्र के मुख्य आतिथ्य, विभिन्न विभागाध्यक्षों, श्रमसंघ प्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति में कैलाश चंद्र साहू , महाप्रबंधक (खनन), ओएसडी सीएमडी सचिवालय , अजय तिवारी, महाप्रबंधक (खनन), भूमिगत खदान विभाग, विश्वजीत मोइत्रा, उप महाप्रबंधक (उत्खनन) आंतरिक अंकेक्षण विभाग, राजेंद्र कुमार गुजर, सीनियर डीईओ, ए-1 वन विभाग, मुनिराम सतनामी, कार्यालय अधीक्षक निदेशक (मा. सं.) सचिवालय, शुभेंदु चटर्जी, वरिष्ठ तकनीकी निरीक्षक ए-1 गुणवत्ता नियंत्रण विभाग, मिनीश्वर प्रसाद जांगड़े, वरिष्ठ सुरक्षा निरीक्षक सुरक्षा विभाग, वृन्दावन, सहायक सुरक्षा उप निरीक्षक सुरक्षा विभाग तथा तपोधन मिश्रा, फोरमेन इंचार्ज, ग्रेड–ए-1 इंदिरा विहार सब-स्टेशन को सेवानिवृत्ति पर विदाई दी गयी।
इस अवसर पर शीर्ष प्रबंधन ने अपने-अपने उद्बोधन में कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के योगदान एवं कार्यकौशल से ही कम्पनी सफलता के मुकाम पर पहुँची है। सेवानिवृत्त कर्मियों के योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। अंत में उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मियों के सपरिवार उज्ज्वल भविष्य की ईश्वर से कामना की।

सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों ने कम्पनी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यहाँ के कर्मचारियों में कार्य के प्रति बहुत ही निष्ठा है। यहाँ के अधिकारी-कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर साथ में कार्य करते हैं।

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त कर्मियों का परिचय पढ़ते हुए सफलतापूर्वक उद्घोषणा का दायित्व प्रबंधक (राजभाषा) श्रीमती सविता निर्मलकर ने निभाया।

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विकसित भारत-जी राम जी के तहत विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने जिला पंचायत में दिया गया प्रशिक्षण

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ग्रामीण बताएंगे गांव के विकास की राह

गाँव स्थानीय जरूरत और संसाधनों के आधार पर बनेगा प्लान

युक्तधारा से परिसंपत्तियों की मैपिंग और वाटर बजट से तय होंगी जल संरक्षण की प्राथमिकताएं

कोरबा, 30 सितम्बर 2026। गांव में क्या चाहिए और विकास की सबसे पहली जरूरत क्या है, अब इसका निर्धारण गांव के लोग, स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर करेंगे। विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए बुधवार को जिला पंचायत के सभा कक्ष में जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह ने की। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्यगण एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह ने कहा कि ग्रामों के समग्र एवं सतत विकास के लिए विकसित भारत-जी राम जी के तहत विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि योजनाओं में हुए बदलावों और नई व्यवस्थाओं से ग्राम विकास को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को ग्राम पंचायत स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने तथा ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन ने कहा कि विकसित ग्राम पंचायत प्लान स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और ग्रामीणों की प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार किया जाएगा। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायत में उपलब्ध परिसंपत्तियों की मैपिंग की जाएगी, जबकि वाटर बजट के आधार पर जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि ग्राम सभा इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होगी। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों के आधार पर रोजगार, जल सुरक्षा, आजीविका, ग्रामीण अधोसंरचना और स्थायी परिसंपत्तियों से जुड़े कार्यों को एकीकृत योजना में शामिल किया जाएगा, ताकि विकास कार्यों का सीधा लाभ ग्रामीणों को मिले और गांव में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हो।

युक्तधारा बताएगा कहां है जरूरत और कहां बन सकता है काम

प्रशिक्षण में सहायक परियोजना अधिकारी संदीप डिक्सेना ने मैदानी अमले को विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायत में उपलब्ध परिसंपत्तियों की मैपिंग, स्थानीय आवश्यकताओं की प्रविष्टि, विकासात्मक अंतराल की पहचान तथा संभावित कार्यस्थलों के चयन की ऑनलाइन प्रक्रिया समझाई गई।

प्रशिक्षण में बताया गया कि उपलब्ध संसाधनों और मौजूदा परिसंपत्तियों का आकलन कर विकास कार्यों की आवश्यकता एवं प्राथमिकता का बेहतर निर्धारण किया जा सकेगा। इससे ग्राम पंचायतों में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्यों का चयन किया जाएगा।

वाटर बजट से तय होगी गांव की जल जरूरत और संरक्षण की प्राथमिकता

प्रशिक्षण में वाटर बजट पर विशेष जोर दिया गया। ग्राम पंचायत में उपलब्ध जल संसाधनों तथा पानी की आवश्यकता का आकलन कर जल संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इससे गांव की वर्तमान एवं भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त कार्यों का चयन किया जा सकेगा।

अधिकारियों ने बताया कि सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन और ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीणों की जरूरतों एवं सुझावों को विकसित ग्राम पंचायत प्लान में शामिल किया जाएगा। इस प्रकार ग्रामीणों की भागीदारी, स्थानीय संसाधनों का आकलन और वैज्ञानिक तरीके से तैयार वाटर बजट ग्राम पंचायतों की विकास योजना का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

विकसित ग्राम पंचायत प्लान के माध्यम से रोजगार सृजन, जल सुरक्षा, आजीविका संवर्धन, ग्रामीण अधोसंरचना एवं स्थायी परिसंपत्तियों को आपस में जोड़ते हुए कार्यों की प्राथमिकता तय की जाएगी। इससे ग्राम पंचायतों में जरूरत आधारित और परिणाममूलक विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।

प्रशिक्षण में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रेणुका राठिया एवं श्रीमती सुष्मिता अनंत, कार्यपालन अभियंता आरईएस श्रीमती यामिनी, कार्यक्रम अधिकारी, सहायक प्रोग्रामर, तकनीकी सहायक सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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तोते के पिंजरे में घुसा 5 फीट का नाग:कोरबा में एक तोते का शिकार कर चुका था, दूसरे की बचाई जान, सुरक्षित रेस्क्यू

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कोरबा । कोरबा के मिशन रोड में एक परिवार के लिए दिन की शुरुआत डर और दुख के साथ हुई। परिवार जब अपने पालतू तोतों को देखने पिंजरे के पास पहुंचा तो अंदर करीब 5 फीट लंबा नाग फन फैलाए बैठा था। पिंजरे में मौजूद दूसरा तोता जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था।

पिंजरे में फन फैलाए बैठे नाग का रेस्क्यू - Dainik Bhaskar

पिंजरे में फन फैलाए बैठे नाग का रेस्क्यू

परिवार ने बताया कि उन्होंने दो तोतों को लंबे समय से बच्चे की तरह पाल रखा था। पिंजरे के अंदर देखने पर पता चला कि नाग एक तोते का शिकार कर चुका था। अपने पालतू को इस तरह खोने से परिवार भावुक हो गया, जबकि दूसरे तोते की जान भी खतरे में थी।

बाद में प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया

बाद में प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया

छोटे पिंजरे में फन फैलाए बैठा था नाग

परिवार ने तुरंत नोवा नेचर फाउंडेशन के वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम प्रमुख जितेंद्र सारथी को सूचना दी। जानकारी मिलते ही उन्होंने टीम सदस्य बॉबी श्रीवास को मौके पर भेजा।

बॉबी ने मौके पर पहुंचकर सावधानी से रेस्क्यू शुरू किया। पिंजरा छोटा था और नाग फन फैलाए हुए था, ऐसे में सांप को बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद टीम ने सुरक्षित तरीके से नाग को रेस्क्यू कर लिया।

शरीर पर मिले संघर्ष के निशान

रेस्क्यू के दौरान नाग के शरीर पर संघर्ष के निशान भी दिखाई दिए। इससे अंदाजा लगाया गया कि शिकार बना तोता अपनी जान बचाने के लिए काफी देर तक संघर्ष करता रहा होगा। नाग को सुरक्षित रेस्क्यू बैग में रखने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। बाद में वन विभाग के नियमानुसार नाग को उसके प्राकृतिक रहवास क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

बोले- सांप का कोई दोष नहीं

नोवा नेचर फाउंडेशन के जितेंद्र सारथी ने कहा कि परिवार के लिए अपने पालतू तोते को खोना बेहद दुखद है। लेकिन प्रकृति के नजरिए से देखें तो यह फूड चेन और इकोसिस्टम का हिस्सा है। सांप अपना भोजन तलाशते हुए पिंजरे में घुसा था, इसलिए इसमें सांप का कोई दोष नहीं है।

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