बिना CGMC मंजूरी छत्तीसगढ़ में काम कर सकेंगे बाहरी डॉक्टर:जूडा बोला- फर्जीवाड़ा बढ़ेगा, लोकल्स की नौकरी खतरे में, स्वास्थ्य मंत्री बोले- व्यवस्था सुधरेगी
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल काउंसिल की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद प्रदेश में विवाद छिड़ गया है। दोनों नोटिफिकेशन 15 दिन के भीतर जारी किए हैं। पहला नोटिफिकेशन 27 मई को छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल ने जारी किया।
पहले नोटिफिकेशन में कहा गया कि दूसरे राज्यों में पंजीकृत एलोपैथिक चिकित्सकों (MBBS, MD, MS, DNB, DM, MCH) को छत्तीसगढ़ में चिकित्सकीय व्यवसाय (प्रैक्टिस) करने की अनुमति दी जा सकेगी। लेकिन काउंसिल की शर्त होगी कि दूसरे राज्य का कोई डॉक्टर अपना रजिस्ट्रेशन और जरूरी दस्तावेज जमा करेगा।
जांच के बाद उसे छत्तीसगढ़ में प्रैक्टिस करने की अनुमति दी जा सकेगी। इसके बाद 11 जून को छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया। जो काउंसिल के आदेश को सुपरसीड करता दिखाई देता है।
ये नोटिफिकेशन कहता है कि दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी बिना अतिरिक्त अनुमति के छत्तीसगढ़ में काम कर सकते हैं। काउंसिल के आदेश का विरोध जूनियर डॉक्टर्स और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन कर रहे थे।
जूडा और फेडरेशन का कहना है कि, ये दोनों ही नोटिफिकेशन लोकल डॉक्टर्स के भविष्य पर संकट है। इसके साथ की फर्जी डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी, जो सीधे मरीजों के भविष्य में संकट है। हालांकि सरकार का तर्क है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को ठीक करने अभी ये व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने ये स्पष्ट किया है कि इससे लोकल डॉक्टर्स के भविष्य पर कोई संकट नहीं आएगा। पढ़िए रिपोर्ट…
पहले जारी दो नोटिफिकेशन को डिटेल में समझिए
1. 27 मई 2026 का छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (CGMC) का आदेश
इस आदेश में कहा गया है कि
दूसरे राज्यों के MBBS, MD, MS, DNB, DM, MCh डॉक्टरों को राहत दी गई।
लेकिन शर्त जोड़ी गई अपना रजिस्ट्रेशन और जरूरी दस्तावेज जमा करेगा यानी सेल्फ अटेस्टेशन के बाद ही छत्तीसगढ़ में प्रैक्टिस की अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।
काउंसिल पूरे दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम अनुमति देगा।
ये 27 मई का आदेश है।
2. 11 जून 2026 का स्वास्थ्य विभाग का आदेश
यह आदेश पहले वाले से कहीं ज्यादा व्यापक है।
यदि कोई व्यक्ति किसी भी राज्य की मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड डॉक्टर है।
किसी राज्य के नर्सिंग काउंसिल में रजिस्टर्ड है या पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड है, या नेशनल मेडिकल (NMR) में दर्ज है।
तो वह छत्तीसगढ़ में काम कर सकता है। इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण लाइन है कि प्रैक्टिस के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।
ये 11 जून का आदेश है।
दोनों नोटिफिकेशन का व्यावहारिक असर उदाहरण से समझिए
केस 1 – एक MBBS डॉक्टर मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड है।
पहले: उसे छत्तीसगढ़ में अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता था।
अब: वह सीधे छत्तीसगढ़ में नौकरी या प्रैक्टिस कर सकता है।
केस 2 – एक नर्स महाराष्ट्र नर्सिंग काउंसिल में रजिस्टर्ड है।
पहले: स्थानीय पंजीयन को लेकर सवाल उठ सकते थे।
अब: वह सीधे छत्तीसगढ़ के अस्पताल में काम कर सकती है।
लोकल डॉक्टर बोले- ये राज्य के स्वास्थ्य और डॉक्टरों पर खतरा
पहले नोटिफिकेशन पर CGDF और JDA का कहना है कि उनका विरोध केवल दूसरे राज्यों के डॉक्टरों के आने का नहीं, बल्कि रोजगार, भर्ती और स्थानीय डॉक्टरों के हितों से भी जुड़ा हुआ है।
छत्तीसगढ़ में पहले से 16 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। हर साल 2455 एमबीबीएस और 435 एमडी/एमएस सीटों से नए डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। सरकार ने 5 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का भी फैसला किया है।
इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और नियमित भर्ती नहीं हो रही है। ऐसे में बाहर के राज्यों के डॉक्टरों को बिना अतिरिक्त स्थानीय अनुमति के प्रैक्टिस की छूट देना स्थानीय डॉक्टरों के हितों के खिलाफ माना जा रहा है।
सरकार बोली- ये अस्थायी व्यवस्था, सत्यापन अनिवार्य, रजिस्ट्रेशन नहीं
पूरे मामले में हमने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से सरकार का पक्ष जाना। मंत्री जायसवाल ने कहा कि, ये अस्थायी व्यवस्था है। हमारे राज्य में डॉक्टरों की कमी है। जब तक कमी पूरी नहीं हो जाती, ये अस्थायी व्यवस्था रहेगी।
यह व्यवस्था डॉक्टरों की कमी वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के लिए लाई गई है। इससे अस्पतालों को विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराने में आसानी होगी। वहीं दोनों नोटिफिकेशन पर उन्होंने तर्क दिया कि पुरानी व्यवस्था में काउंसिल का अप्रूवल अनिवार्य होता था।
डॉक्टरों के विरोध के कारण ये भी
1. राज्य मेडिकल काउंसिल की भूमिका कमजोर होने का डर
अब तक छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के पास यह जानकारी रहती थी कि राज्य में कौन-कौन डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं। यदि दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को सीधे काम करने की अनुमति मिल जाती है, तो स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि राज्य की निगरानी व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
2. जवाबदेही का सवाल
यदि किसी दूसरे राज्य में पंजीकृत डॉक्टर के खिलाफ शिकायत आती है, तो कार्रवाई कौन करेगा? छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल या उस राज्य की मेडिकल काउंसिल जहां उसका पंजीकरण है? इस पर स्पष्ट व्यवस्था की मांग की जा रही है।
3. रोजगार और प्रतिस्पर्धा
कुछ डॉक्टरों को आशंका है कि बड़े निजी अस्पताल दूसरे राज्यों से डॉक्टर बुलाकर नियुक्तियां करेंगे, जिससे स्थानीय डॉक्टरों के लिए अवसर कम हो सकते हैं या फीस और वेतन पर दबाव बढ़ सकता है।
4. नर्सिंग होम एक्ट के तहत अधिसूचना
मेडिकल प्रैक्टिस और डॉक्टरों के पंजीकरण से जुड़े विषय आमतौर पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और संबंधित परिषदों के दायरे में आते हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने नर्सिंग होम एक्ट के तहत यह आदेश जारी किया है, जिसकी कानूनी व्याख्या पर भी चर्चा हो रही है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भी विरोध में उतरा
इस अधिसूचना का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) रायपुर ने भी कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉक्टर कुलदीप सोलंकी का कहना है कि यदि बिना वैध रजिस्ट्रेशन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए डॉक्टर, नर्स या अन्य हेल्थ प्रोफेशनल्स को प्रैक्टिस की अनुमति दी जाती है, तो इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा होगा।
IMA रायपुर ने कहा कि संबंधित अधिसूचना में कई गंभीर खामियां हैं। संगठन के अनुसार इस तरह की व्यवस्था से प्रदेश में फर्जी चिकित्सकों और अप्रमाणित स्वास्थ्यकर्मियों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे धोखाधड़ी होने की आशंका है।
IMA ने ये भी कहा है कि अधिसूचना जारी करने का अधिकार संबंधित परिषद या नियामक संस्था का होना चाहिए, न कि केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक स्तर पर। IMA के अनुसार छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
रायपुर, एजेंसी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ आएंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनका यह पहला प्रदेश दौरा होगा।
वे रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आमंत्रण पर नितिन नबीन ने दौरे के लिए सहमति दी है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन।
कार्यक्रम में भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी भी मौजूद रहेंगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी के दौरे को लेकर बीजेपी ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
अक्टूबर माह में प्रदेश प्रवास में आई थी प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी।
कार्यक्रम स्थल पर बीजेपी नेताओं की मीटिंग
बीजेपी सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी कार्यक्रम स्थल में प्रदेश पदाधिकारियों की मीटिंग लेंगे।
मीटिंग के दौरान प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में पिछले दौरे में हुई चर्चा का फीडबैक और अपडेट लेंगी। बैठक में प्रदेश पदाधिकारियों को आगे की जिम्मेदारियों और कामों को लेकर निर्देश भी दिए जाएंगे।
सीएम विष्णुदेव साय।
CM साय ने दिया था छत्तीसगढ़ आने का न्योता
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को छत्तीसगढ़ आने का आमंत्रण दिया था। इसके बाद नितिन नबीन ने 15 नवंबर को धरमजयगढ़ पहुंचने की सहमति दी। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके पहले दौरे को प्रदेश भाजपा संगठन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है।
बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाया जाता है जनजातीय गौरव दिवस
जनजातीय गौरव दिवस हर साल 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाया जाता है। केंद्र सरकार ने 2021 में इस दिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करने के साथ जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं को सम्मान देना है।
अंग्रेजों के खिलाफ किया था उलगुलान आंदोलन
भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आदिवासी समाज को एकजुट कर उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। जनजातीय गौरव दिवस पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित कर बिरसा मुंडा सहित आदिवासी नायकों के योगदान को याद किया जाता है।
रायपुर, एजेंसी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर सेंट्रल जेल में बंद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई।
इसके बाद भूपेश बघेल जेल से बाहर आए, इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा कि वे रामगोपाल अग्रवाल से मिलने आए थे। वे कांग्रेस के कोषाध्यक्ष हैं। उन्हें गलत तरीके से जेल में बंद करके रखा गया है।
रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं रामगोपाल अग्रवाल।
रिजवी बोले- रामगोपाल के खिलाफ 6 केस, 2 में जमानत, 4 मामले लंबित
बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी के मुताबिक, रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कुल 6 मामले दर्ज हैं। इनमें से 2 में उन्हें जमानत मिल चुकी है, जबकि 4 मामले अभी लंबित हैं। इन चारों में जमानत मिलने के बाद ही उनकी रिहाई संभव है।
रिजवी का दावा है कि किसी भी FIR में रामगोपाल का नाम नहीं है। उन्हें पहले से अपराधी एक आरोपी के बयान के आधार पर फंसाया गया है। वकील ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए कहा कि कांग्रेस कोषाध्यक्ष होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया है।
ED का दावा- रामगोपाल की निगरानी में कांग्रेस कार्यालय पहुंचाए गए 880 करोड़
बता दें कि, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा किया था। एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से जुटाए गए करीब 860 से 880 करोड़ रुपए रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाए गए थे।
ईडी का दावा है कि रामगोपाल अग्रवाल की निगरानी में यह पैसा कांग्रेस कार्यालय पहुंचाया गया। इस मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है।
इन संपत्तियों की कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपए बताई गई है। ED ने 8 अक्टूबर को संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया था।
इसके बाद 9 अक्टूबर को रायपुर की विशेष PMLA कोर्ट में रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई। रामगोपाल अग्रवाल को 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं।
अकाउंटेंट को सौंपा जाता था कैश
ED की जांच के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल संभालता था। आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर यह पैसा रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाया जाता था।
वहां रामगोपाल अग्रवाल के साथ काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र डढ़सेना को कैश सौंपे जाने का दावा किया गया है। ED के मुताबिक, इस पूरे लेनदेन में करीब 72 करोड़ रुपए रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में थे।
इस रकम को उनके निर्देश पर रखने, इस्तेमाल करने या बांटने का आरोप है। ED ने अपने दावों के समर्थन में डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए बयानों का हवाला दिया है।
अलग-अलग मामलों में जुलाई 2026 से हिरासत में
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले और उससे जुड़े मामलों में हाईकोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी को नियमित जमानत दे दी है। दोनों जुलाई 2026 से अलग-अलग मामलों में न्यायिक हिरासत में थे।
हाईकोर्ट ने लंबे समय से जेल में रहने, दस्तावेजी साक्ष्यों और बड़ी संख्या में गवाहों के कारण ट्रायल में लगने वाले संभावित समय को जमानत का आधार माना है।
रामगोपाल अग्रवाल को EOW/ACB में दर्ज FIR नंबर 4/2024 में आरोपी बनाया गया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि मूल FIR में उनका नाम नहीं था और आठवीं पूरक चार्जशीट में उन्हें आरोपी बनाया गया। उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री या कैश भी बरामद नहीं हुआ।
त्रिपाठी को देश नहीं छोड़ने और अन्य शर्तों पर जमानत
वहीं, अरुण पति त्रिपाठी पर सीएसएमसीएल में मैनपावर एजेंसियों के बिलों में ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त कार्यदिवसों के नाम पर अनियमित भुगतान की व्यवस्था बनाने और कमीशन वसूली में भूमिका निभाने का आरोप है।
त्रिपाठी को देश नहीं छोड़ने की शर्त पर जमानत मिली है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कहा कि आरोप गंभीर हैं, लेकिन गवाहों के बयान और कथित लेन-देन के साक्ष्यों का परीक्षण ट्रायल में होगा। अभी अभियोजन के गवाहों के बयान शुरू नहीं हुए हैं।
मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। हाई कोर्ट ने भी माना कि उनके खिलाफ कोई बरामदगी लंबित नहीं है और कई सह आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है।
ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।
फरवरी 2019 में बना था सिंडिकेट
कारोबारी अनवर ढेबर ने सिंडिकेट बनाने के लिए फरवरी 2019 में जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में प्रदेश के 3 डिस्टलरी मालिकों को बुलाया। इस मीटिंग में छत्तीसगढ़ डिस्टलरी से नवीन केडिया, भाटिया वाइंस प्राइवेट लिमिटेड से भूपेंदर पाल सिंह भाटिया और प्रिंस भाटिया शामिल हुए।
साथ ही वेलकम डिस्टलरी से राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल के साथ हीरालाल जायसवाल और नवीन केडिया के संपर्क अधिकारी संजय फतेहपुरिया पहुंचे। मीटिंग में इनके अलावा एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह भी मौजूद थे।
बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में करंट लगने से पिता और बेटे की मौत हो गई। नेहरू चौक स्थित घर की बालकनी की लोहे की ग्रिल में करंट फैल गया था। सुबह नींद से जागने के बाद कपड़ा कारोबारी राकेश गुप्ता (45) बालकनी में पहुंचे और ग्रिल को छूते ही करंट की चपेट में आ गए। वे ग्रिल से चिपक गए।
पिता को बचाने के लिए उनका 24 साल का बेटा ओम गुप्ता भी करंट की चपेट में आ गया। दोनों को बचाने पहुंचीं राकेश की पत्नी वर्षा गुप्ता (45) को भी बिजली का झटका लगा और वह दूर जा गिरीं।
आसपास के लोगों की मदद से तीनों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने राकेश और ओम को मृत घोषित कर दिया। वहीं, वर्षा गुप्ता की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। बेहतर इलाज के लिए उन्हें रायपुर रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि घर के पास से 11 हजार केवी का हाईटेंशन तार गुजरा है। आशंका है कि इसी तार से निकली चिंगारी लोहे की ग्रिल तक पहुंची, जिससे उसमें करंट फैल गया। हालांकि, शॉर्ट सर्किट की आशंका भी जताई गई है। पुलिस दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।
नेहरू चौक स्थित कारोबारी राकेश गुप्ता का घर।
घर की बालकनी की लोहे की ग्रिल में फैला था करंट।
हादसे में पिता और बेटे की मौत हो गई है, पत्नी की हालत गंभीर है।
ग्रिल में पहले से फैला था करंट
जानकारी के मुताबिक, राकेश गुप्ता (45), पिता पुरुषोत्तम लाल गुप्ता, शुक्रवार सुबह रोज की तरह नींद से जागे थे। इसके बाद वे घर की बालकनी में गए। इसी दौरान उन्होंने वहां लगी लोहे की ग्रिल को हाथ लगाया। ग्रिल में करंट फैला हुआ था, जिसके कारण वे बिजली के झटके की चपेट में आ गए और उससे चिपक गए।
पिता को ग्रिल से चिपका देखकर उनका बेटा ओम गुप्ता (24) उन्हें बचाने के लिए दौड़ा। उसने पिता को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान वह भी करंट की चपेट में आ गया। देखते ही देखते परिवार के दो सदस्य बिजली के संपर्क में आ गए।
घटना के बाद परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पति और बेटे को बचाने पहुंचीं वर्षा, उन्हें भी लगा करंट
पति और बेटे को करंट की चपेट में देखकर वर्षा गुप्ता (45) उन्हें बचाने के लिए पहुंचीं। इस दौरान उन्हें भी बिजली का तेज झटका लगा और वह दूर जा गिरीं। घटना के बाद घर में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और तीनों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने राकेश गुप्ता और उनके बेटे ओम गुप्ता को मृत घोषित कर दिया। वहीं, वर्षा गुप्ता की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थिति नाजुक होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलने पर सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले में मर्ग कायम किया है। पुलिस ने पिता और बेटे के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है।
थाना कोतवाली बलौदाबाजार के पीएसआई खिलेंद्र कुमार ने बताया कि करंट की चपेट में आने से राकेश गुप्ता और उनके बेटे ओम गुप्ता की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, हादसे में घायल महिला की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें रायपुर रेफर किया गया है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि घर के पास से 11 हजार केवी का हाईटेंशन तार गुजरा है। आशंका है कि बालकनी में रखे सफाई के सामान के तार के संपर्क में आने से उसमें करंट फैल गया। इसके चलते बालकनी की लोहे की ग्रिल में भी करंट उतर आया और उसे छूते ही राकेश गुप्ता उसकी चपेट में आ गए। हालांकि, पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।