नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री Narendra Modi असम और पश्चिम बंगाल चुनावों में पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बाद बीजेपी मुख्यालय पहुंच गए हैं। यहां पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच जश्न का माहौल चरम पर है। पीएम मोदी ने कहा, “…आज का ये दिन ऐतिहासिक है, अभूतपूर्व है। जब वर्षों की साधना सिद्धी में बदलती है तो चेहरे पर जो खुशी होती है वो खुशी आज मैं देश भर के भाजपा के कार्यकर्ताओं के चेहरे पर देख रहा हूं।
आज ऐसा कोई राज्य नहीं कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार हो मोदी ने कहा, “आज हम भारत की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देख रहे हैं। आज पूरे देश में एक भी ऐसा राज्य नहीं है जहां कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार हो। यह सिर्फ सियासत का बदलाव नहीं है, यह सोच का बदलाव है। यह बताता है कि विकसित होता हुआ भारत किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। आज का भारत अवसर चाहता है, विकास चाहता है, विश्वास चाहता है, आज का भारत प्रगति चाहता है, स्थिरता चाहता है, आज का भारत ऐसी राजनीति चाहता है जो देश को आगे बढ़ाए लेकिन दुर्भाग्य से आज की कांग्रेस बिल्कुल विपरीत दिशा में चल पड़ी है। ऐसे समय में जब पूरा देश कम्युनिज्म से किनारा कर चुका है तब कांग्रेस उसी विचारधारा को अपनाने में लगी है जिसे देश ने ठुकरा दिया है।
हर राज्य भी एक-दूसरे से लड़कर नहीं, एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज देश का हर राज्य भी एक-दूसरे से लड़कर नहीं, एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहता है। इन चुनावों ने इस संदेश को भी बहुत स्पष्ट किया है। बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में जिन तीन सरकारों को जनता ने सत्ता से बाहर किया उनकी एक समान पहचान थी, विभाजन की राजनीति। यही उनकी पहचान थी। उनकी राजनीति जोड़ने की नहीं, तोड़ने की थी। कभी भाषा के नाम पर विवाद खड़ा किया गया, कभी खाने-पीने की आदतों को लेकर समाज को बांटने की कोशिशें हुईं, कभी अपने ही देश के लोगों को तक बाहरी कहा गया लेकिन भारत की जनता ने इस राजनीति को साफ जवाब दिया है। देश ने बता दिया है कि उसे विवाद नहीं विकास चाहिए, विभाजन नहीं विश्वास चाहिए।
बंगाल की पावन धरा पर आज एक नया सूर्योदय हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “अभी 4 मई की यह शाम भले ही ढल रही हो लेकिन बंगाल की पावन धरा पर आज एक नया सूर्योदय हुआ है। एक ऐसा सवेरा जिसका इंतजार पीढ़ियों ने किया है। भाजपा ने जितनी सीटें जीतीं, वो महज एक चुनावी आंकड़ा नहीं है। ये उस अडिग विश्वास की हुंकार है जिसने डर, तुष्टीकरण और हिंसा की राजनीति को जड़ से उखाड़ फेंका है।
पहली कैबिनेट में ही आयुष्मान भारत योजना को हरी झंडी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “बंगाल के भविष्य की एक ऐसी यात्रा शुरू हो रही है जहां विकास, अटूट विश्वास और नई उम्मीदें कदम से कदम मिलाकर चलेंगी। मैं आज हर बंगालवासी को भरोसा देता हूं, बंगाल के बेहतर भविष्य के लिए, भाजपा दिन-रात एक कर देगी। बंगाल में अब महिलाओं को सुरक्षा का माहौल मिलेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा, पलायन रुकेगा। पहली कैबिनेट में ही आयुष्मान भारत योजना को हरी झंडी दिखाई जाएगी और घुसपैठियों के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
सिर झुकाकर पीएम मोदी ने जना देश को स्वीकारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम बंगाल, असम और पुडुचेरी की जनता की हर उम्मीद, हर अपेक्षा को अपनी सेवा से पूरा करेंगे। इसी विश्वास के साथ बंगाल, असम और पुडुचेरी में एक बार फिर से भाजपा-NDA को विजयी बनाने के लिए, लोकतंत्र को विजयी बनाने के लिए मैं सभी नागरिकों का, सभी मतदाताओं का और सभी देशवासियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं और सिर झुकाकर के उनका आदेश स्वीकार करता हूं। मोदी ने कहा, “बंगाल के ये चुनाव एक और वजह से बहुत खास रहे हैं। आप याद कीजिए, बंगाल चुनाव के समय कैसी खबरें आती थीं। हिंसा, डर और निर्दोष लोगों की मौतें। लेकिन इस बार पूरे देश ने एक नई खबर सुनी। पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान हुआ। पहली बार ऐसा हुआ कि चुनावी हिंसा में एक भी निर्दोष नागरिक की जान नहीं गई। लोकतंत्र के इस महापर्व में बंदूक की आवाज नहीं जनता जनार्धन की आवाज गूंजी। पहली बार डर नहीं, लोकतंत्र जीता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, “…आज पांच राज्यों के विधानसभा के चुनाव के संपन्न होने के बाद जो ऐतिहासिक समर्थन हमारी देवतुल्य जनता ने इन पांच राज्यों में हमें दिया है, उसके लिए मैं हृदय की गहराई से उन पांचों राज्यों के लोगों का अभिनंदन करता हूं कि आपने हमारे नेतृत्व के प्रति, भाजपा व NDA के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया है।
नई दिल्ली, एजेंसी। अग्निवीर अब चार की बजाय छह साल तक सेना में नौकरी कर सकेंगे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार को दो साल का सेवा विस्तार देने का ऐलान किया। इसका फायदा उन 75% अग्निवीरों को मिलेगा, जिन्हें पहले चार साल बाद सेवा छोड़नी पड़ती थी।
अभी हर बैच के 25% अग्निवीरों को चार साल बाद मेरिट के आधार पर नियमित सेना में शामिल किया जाता है। बाकी 75% को सेवा से बाहर होना पड़ता है। नए नियम में 25% अग्निवीरों को नियमित करने का पुराना नियम जारी रहेगा।
बाकी 75% को उनकी सहमति से दो साल और नौकरी करने का मौका मिलेगा। इस दौरान उन्हें बढ़ी हुई सैलरी और भत्ते भी मिलेंगे।
छह साल बाद भी सेना में नौकरी करने के इच्छुक अग्निवीरों को चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। फिलहाल तीनों सेनाओं में करीब 3.18 लाख अग्निवीर सेवा दे रहे हैं।
दिसंबर तक 18,300 अग्निवीरों का कार्यकाल पूरा होना था
आंकड़ों के मुताबिक 31 दिसंबर तक पहले बैच के करीब 18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है। ये पहले बैच में भर्ती हुए 24,400 अग्निवीरों का करीब 75% हैं।
पहले तय योजना के मुताबिक नवंबर के मध्य से 75% अग्निवीरों को चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर किया जाना था। नई व्यवस्था के तहत अब इन्हें दो साल का अतिरिक्त समय मिलेगा। यह सेवा विस्तार अग्निवीरों की सहमति से होगा।
एयरफोर्स ने पहले बैच के 712 अग्निवीरों को परमानेंट किया
पिछले महीने एयरफोर्स ने अपने पहले अग्निवीर बैच के 2,850 रिक्रूट्स में से 712 को नियमित सेवा में बनाए रखने का फैसला किया था।
एक आम आदमी की दीपावली यानि खर्चो की फेहरिस्त का जुबां की तरह लम्बी होना। ये घर का मुखिया ही जानता हैं कि उसे किस मद में कटोती करनी है और किसमे नहीं? दीपावली का त्योहार आते ही बाजारों में रौनक दिखाई देने लगती है। घरों की साफ-सफाई से लेकर सजावट तक हर तरफ उत्साह का माहौल रहता है। लेकिन इस बार बाजार ने शुभ-लाभ और स्वागत को भी महंगाई के रंग में रंग दिया है।
कभी घर के दरवाजे पर दस-बीस रुपये में मिलने वाला शुभ-लाभ का प्रतीक अब सौ रुपये तक पहुंच गया है। बंदनवार के दाम 80 से लेकर 1400 रुपये तक सुनकर लगता है कि लक्ष्मीजी के स्वागत के लिए अब जेब में भी कुबेर का खजाना होना चाहिए। ऊपर से ओम, स्वास्तिक, श्री यंत्र और कलश जैसे शुभ प्रतीकों के भाव भी आसमान छू रहे हैं।
अब तो आम आदमी सोचने लगा है कि घर में लक्ष्मीजी का स्वागत करें या पहले दुकानदार की लक्ष्मी का ख्याल रखें? महंगाई का आलम यह है कि शुभ-लाभ खरीदने से पहले भी आदमी को अपना बजट देखना पड़ रहा है। लगता है कि बाजार ने शुभ को भी प्रीमियम और लाभ को भी महंगे पैकेज में बेचने का फैसला कर लिया है।
मजेदार बात यह है कि बाजार में ग्राहक कम हैं, लेकिन उम्मीदें बड़ी हैं। दुकानदारों को लगता है कि दीपावली पर लोग दिल खोलकर खरीदारी करेंगे। मगर ग्राहक भी अब समझदार हो गया है। वह बंदनवार देखकर घर की चौखट नापता है और कीमत सुनकर अपनी जेब की औकात।
अब तो लगता है कि आने वाले समय में दुकानदार शुभ-लाभ के साथ एक चेतावनी भी टांग देंगे—’सावधान! यहां शुभ भी महंगा है और लाभ भी आपकी जेब देखकर मिलेगा।’
वैसे लक्ष्मीजी से हमारी प्रार्थना है कि इस बार घर में भले ही सादा बंदनवार लगे, लेकिन महंगाई की बंदनवार जरूर उतार दीजिए। आखिर आम आदमी को भी कभी तो सच्चे शुभ-लाभ का अनुभव तो हो!