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कोरबा

कोरबा में पीएनसी अधिकारी पर ग्रामीणों को धमकाने का आरोप:’जमीन में गाड़ देने’ और ‘जान से मारने’ जैसी धमकियां दीं,कार्रवाई न होने पर चक्काजाम

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कोरबा। कोरबा जिले की सिंघाली भूमिगत खदान में कार्यरत ठेका कंपनी पीएनसी के एक अधिकारी पर ग्रामीणों को धमकाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस में शिकायत देने के बावजूद आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।

जानकारी के अनुसार, सिंघाली भूमिगत खदान में कोयला उत्खनन और परिवहन का कार्य कर रही पीएनसी कंपनी के अधिकारी केके सिंह पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अधिकारी ने उन्हें ‘जमीन में गाड़ देने’ और ‘जान से मारने’ जैसी धमकियां दीं, साथ ही गाली-गलौज भी की।

पुलिस में शिकायत, लेकिन कार्रवाई नहीं

ग्रामीणों के मुताबिक, घटना के बाद उन्होंने संबंधित थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे नाराज ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

अरदा चौक पर किया चक्काजाम

कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने गुरुवार सुबह करीब 9 बजे बांकी मोंगरा-डेलवाडीह मार्ग स्थित अरदा चौक पर चक्काजाम शुरू कर दिया। सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कोयला लदे ट्रक, यात्री बसें और अन्य वाहन घंटों तक फंसे रहे।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण तख्तियां लेकर कंपनी और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

गिरफ्तारी और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक आरोपी अधिकारी केके सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई नहीं की जाती और प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

ग्रामीणों का आरोप है कि खदान प्रभावित क्षेत्रों में कंपनी के कुछ अधिकारी अक्सर स्थानीय लोगों पर दबाव बनाते हैं और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन की नजर आंदोलन पर

चक्काजाम की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा शुरू की। समाचार लिखे जाने तक प्रदर्शन जारी था और प्रशासन ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहा था।

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कोरबा

अंग्रेजी शराब तस्कर को पुलिस ने किया गिरफ्तार

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कोरबा। दिनांक 20.09.2026 को मुखबिर ने सूचना दिया गया कि ग्राम पीपरकुंडा पाली में एक मोटर सायकल हीरो एचएफ डिलक्स क्रमांक सीजी 16 सीएच 0396 के चालक के द्वारा भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब गोवा व्हिस्की का परिवहन कर शराब बिक्री करने वाला है। सूचना प्राप्त होने पर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी कोरबा के निर्देशन में चौकी कोरबी द्वारा ग्राम पीपरकुंडा पाली घटना स्थल पर पहुंचकर, शराब रेड की कार्यवाही करने पर मौके में एक व्यक्ति मोटर सायकल के पास खड़ा था, जो पुलिस टीम को आता देख मौके से फरार हो गया। पीछा करने पर नहीं मिला। पश्चात घटना स्थल पर एक हीरो एचएफ डिलक्स मोटर सायकल क्र. सीजी 16 सीएच 0396 एवं उक्त मोटर सायकल के पास ही 05 नग खाकी रंग के कागज का कार्टून में प्रत्येक कार्टून में 50-50 नग भरा, प्रत्येक की क्षमता 180-180 एमएल, कुल 250 नग अंग्रेजी गोवा व्हिस्की शराब, मध्य प्रदेश निर्मित, जुमला कुल 45 लीटर जुमला कीमत 33750 रु एवं मोटर सायकल की कीमत करीब 20000 रु, जुमला कीमत 53750 रु रखा होना पाया गया। जिसे गवाहों के समक्ष जप्त कर कब्जा पुलिस लिया गया। प्रकरण में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना कार्यवाही में लिया गया। जप्तशुदा मोटर सायकल का फरार चालक के संबंध में पता तलाश जारी है। आरटीओ से जप्त मोटर सायकल का परीक्षण बाद आरोपी के विरुद्ध विधिवत अग्रिम कार्यवाही की जाती है।

चौकी – कोरबी थाना – पसान
जिला – कोरबा, छत्तीसगढ़
अ. क्रमांक – 0/2026 धारा – 34(2) आबकारी एक्ट

नाम आरोपी – मोटर सायकल हीरो एचएफ डिलक्स क्रमांक सीजी 16 सीएच 0396 का चालक।

जप्ती: (1) 05 नग खाकी रंग के कागज के कार्टून में 250 नग अंग्रेजी गोवा व्हिस्की शराब, मध्य प्रदेश निर्मित, जुमला कुल 45 लीटर, जुमला कीमत 33,750 रुपये।
(2) एक पुरानी इस्तेमाली मोटर सायकल की कीमत करीब 20,000 रुपये।
कुल जुमला कीमत – 53,750 रुपये।

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कोरबा पुलिस की निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में डी.जे . बजा रहे डीजे संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

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पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के मार्गदर्शन में निर्धारित सीमा से अधिक तेज आवाज में डीजे बजाने पर थाना दीपक & बाकीमोंगरा में डीजे संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई, वाहन सहित डीजे साउंड सिस्टम जब्त

कोरबा। कोरबा पुलिस द्वारा ध्वनि प्रदूषण एवं तेज आवाज में डीजे बजाने वालों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। न्यायालयों के निर्देशों, एनजीटी की गाइडलाइन तथा कोलाहल अधिनियम के प्रावधानों के तहत निर्धारित ध्वनि सीमा का उल्लंघन करने वाले डीजे संचालकों पर पुलिस द्वारा सख्ती बरती जा रही है।

इसी क्रम में थाना दीपका क्षेत्र में 02 डीजे संचालकों 1.नवरतन कुमार (निवासी-कसई पाली) & 2. रवि कुमार (निवासी-धुरेना) द्वारा निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक तेज आवाज में डीजे/ध्वनि विस्तारक यंत्र बजाते पाए जाने पर कार्रवाई की गई।

थाना बाकी मोंगरा क्षेत्र में 01 डीजे संचालक भूवन पाल ( निवासी कुरैना) के विरुद्ध निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजाने पर कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान डीजे के साउंड सिस्टम/ध्वनि विस्तारक यंत्रों को जब्त किया गया है। संबंधित डीजे संचालकों के विरुद्ध कोलाहल अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई करते हुए जब्त डीजे उपकरणों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।

कोरबा पुलिस की स्पष्ट अपील

कोरबा पुलिस द्वारा सभी डीजे संचालकों एवं आयोजन समितियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि निर्धारित ध्वनि सीमा एवं माननीय न्यायालय/एनजीटी के निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। नियमों का उल्लंघन कर तेज आवाज में डीजे बजाने पर डीजे उपकरण जब्त कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

कोरबा पुलिस — कानून व्यवस्था एवं आमजन की शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध।

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CPCB की अनुमति के बिना लोतलोता में पाइपलाइन कैसे बिछाई जा रही है? जयसिंह अग्रवाल ने ADM और CE-CSEB से की चर्चा”

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ADM एवं CE-CSEB दर्री से फोन पर की चर्चा, ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग
कोरबा। ग्राम लोतलोता स्थित राखड़ बांध को पुनः संचालित किए जाने की तैयारियों को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। ग्रामीणों द्वारा बांध की जर्जर स्थिति, पूर्व में तटबंध टूटने से खेतों एवं आसपास के क्षेत्रों में राखड़ पहुंचने तथा अब पुनः पाइपलाइन बिछाकर राखड़ भंडारण की तैयारी किए जाने की जानकारी दिए जाने के बाद उन्होंने पूरे मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जयसिंह अग्रवाल ने इस संबंध में ADM कोरबा तथा CE-CSEB दर्री से मोबाइल पर चर्चा कर लोतलोता राखड़ बांध की वर्तमान स्थिति और वहां चल रही गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़े इस विषय में पर्यावरणीय एवं सुरक्षा संबंधी सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा 23 जून 2026 को लोतलोता राखड़ बांध के Pond-A के 22 हेक्टेयर क्षेत्र के अस्थायी उपयोग की अनुमति सशर्त रूप से दी गई है। अनुमति की शर्त क्रमांक 3 में स्पष्ट किया गया है कि इसके लिए CPCB की सहमति अनिवार्य है तथा CPCB की सहमति प्राप्त नहीं होने पर मंडल की अस्थायी अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
ऐसे में ग्रामीणों द्वारा यह जानकारी दिया जाना कि CPCB की सहमति प्राप्त होने से पहले ही लोतलोता राखड़ बांध तक नई पाइपलाइन बिछाने एवं बांध की जल निकासी व्यवस्था को पुनः खोलने की तैयारी की जा रही है, गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि जब CPCB की सहमति स्वयं पर्यावरण संरक्षण मंडल की अनुमति की अनिवार्य शर्त है, तो उसकी सहमति प्राप्त होने से पहले पाइपलाइन बिछाने एवं बांध को पुनः उपयोग में लाने की तैयारी किस अनुमति के आधार पर की जा रही है, यह जिला प्रशासन को तत्काल स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने कलेक्टर को भेजे पत्र में मांग की है कि CPCB की सहमति की स्थिति तत्काल स्पष्ट कराई जाए और जब तक आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति एवं सुरक्षा परीक्षण पूरे नहीं हो जाते, तब तक पाइपलाइन बिछाने अथवा राखड़ भंडारण से संबंधित गतिविधियों को आगे न बढ़ाया जाए।

पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि लोतलोता के ग्रामीणों की चिंता को केवल विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बांध के आसपास गांव, कृषि भूमि और विद्यालय स्थित हैं तथा पूर्व में राखड़ एवं पानी के फैलाव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अप्रैल 2026 में झाबू राखड़ बांध की दुर्घटना के बाद ग्रामीणों की आशंकाओं को और अधिक गंभीरता से लेना आवश्यक है।
उन्होंने मांग की कि लोतलोता राखड़ बांध की संरचनात्मक मजबूती, तटबंध, स्लोप स्टेबिलिटी, जल निकासी एवं अन्य सुरक्षा मानकों की स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था से जांच कराई जाए। साथ ही पूर्व में राखड़ से प्रभावित किसानों एवं ग्रामीणों की क्षति का आकलन कर उनकी लंबित मांगों पर जिला प्रशासन, CSPGCL एवं संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक आयोजित कर समयबद्ध समाधान निकाला जाए।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि विद्युत उत्पादन की निरंतरता आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ग्रामीणों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और उनके अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए ग्रामीणों को विश्वास में लेकर संवेदनशील एवं त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

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