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कोरबा

डीजीएमएस के तत्वावधान में एसईसीएल में इलेक्ट्रिकल/मैकेनिकल उपकरणों एवं HEMM के रखरखाव पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन

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बिलासपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) मुख्यालय, बिलासपुर में दिनांक 20 नवंबर 2025 को खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के तत्वावधान में इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल उपकरणों तथा HEMM के सेफ इंस्टालेशन एवं रख-रखाव विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि सीएमडी एसईसीएल हरीश दुहन एवं विशिष्ट अतिथिगण निदेशक (तकनीकी) संचालन एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (तकनीकी) परियोजना एवं योजना रमेश चंद्र महापात्र, खान सुरक्षा महानिदेशालय, पश्चिम क्षेत्र, नागपुर से डीएमएस(इलेक्ट्रिकल) टी. श्रीनिवास, डीएमएस(मैकेनिकल) पीके जैन, डीडीएमएस (इलेक्ट्रिकल) गौरव लाढा, तथा सेफ्टी कमेटी के सम्मानित सदस्य — बी. धर्माराव (AITUC), आई.डी. चौहान (CITU) एवं जी.एस. प्रसाद (CMOAI) द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

मुख्य अतिथि हरीश दुहन, सीएमडी एसईसीएल ने कहा कि कंपनी तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से सुरक्षा और दक्षता दोनों को निरंतर सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने बताया कि एसईसीएल का प्रयास है कि जहां संभव हो, मैनुअल प्रक्रियाओं को मैकेनाइज्ड सिस्टम से प्रतिस्थापित किया जाए। उन्होंने उपकरणों को अप-टू-डेट रखने, आवश्यकतानुसार रिप्लेसमेंट करने और नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि कार्यस्थलों पर सुरक्षा सर्वोच्च स्तर पर सुनिश्चित हो सके।

निदेशक (तकनीकी) संचालन एन. फ्रैंकलिन जयकुमार ने कार्यशाला के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसी पहलें खदानों और वर्कशॉप्स में सुरक्षा स्तर को व्यावहारिक रूप से मजबूत बनाती हैं।

अपने संबोधन में निदेशक (तकनीकी) परियोजना एवं योजना रमेश चंद्र महापात्र ने कहा कि एसईसीएल का लक्ष्य ज़ीरो हार्म (शून्य क्षति) है और सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक कार्यस्थल, प्रत्येक उपकरण और प्रत्येक कामगार सुरक्षित रहे। उन्होंने ‘टेक-5 नियम’ को सुरक्षा का मूल आधार बताते हुए इसके पालन पर बल दिया।

लगभग 300 प्रतिभागियों— एसईसीएल मुख्यालय एवं संचालन क्षेत्रों के विद्युत एवं यान्त्रिकी तथा उत्खनन विभाग के स्टाफ अधिकारियों, इंजीनियर, सुपरवाइजर्स, फोरमैन, कामगार निरीक्षक एवं तकनीकी कर्मचारियों—ने कार्यशाला में सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यशाला में DGMS अधिकारियों द्वारा तीन तकनीकी सत्र आयोजित हुए। टी. श्रीनिवास (DMS–Elec.) ने फॉल्ट करेंट, अर्थिंग सिस्टम और ग्रेडिंग–कोऑर्डिनेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसके बाद गौरव लाढा (DDMS–Elec.) ने करंट ग्रेड सिस्टम, करंट ट्रांसफॉर्मर एवं संबंधित तकनीकी शब्दावली पर जानकारी साझा की।

अंत में पी.के. जैन (DMS–Mech.) ने इंजीनियरों व कॉम्पिटेंट पर्सन की जिम्मेदारियों, लॉगबुक व सांविधिक अभिलेखों के रख-रखाव, SOP/SMP/JSA के अनुपालन और दुर्घटनाओं की रोकथाम से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत उद्बोधन महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं बचाव) प्रकाश राय ने दिया, जिसमें उन्होंने एसईसीएल की सुरक्षा प्रतिबद्धता एवं सभी प्रतिभागियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला के दौरान के महाप्रबंधक (उत्खनन) दीपक कुमार ने एचईएमएम से संबंधित परिचालन एवं सुरक्षा बिंदुओं पर प्रस्तुति दी। इसके अलावा ओईएम कंपनियों एल एंड टी तथा कोमात्सू ने अपनी मशीनों में उपलब्ध आधुनिक सुरक्षा फीचर्स की जानकारी साझा की।

कार्यक्रम के अंत में महाप्रबंधक (ई एंड एम) श्रीकांत दास ने सभी अतिथियों, डीजीएमएस अधिकारियों तथा प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का संचालन मुख्य प्रबंधक (पर्यावरण) शेख ज़ाकिर हुसैन और वरिष्ठ प्रबंधक (ई एंड एम) श्रीमती मिताली तिवारी द्वारा सुचारू रूप से किया गया।

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कोरबा

एसईसीएल मुख्यालय के 09 कर्मियों के सेवानिवृत्त पर भावभीनी विदाई दी गयी

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बिलासपुर/कोरबा। आज दिनाँक 30.09.2026 को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर से सेवानिवृत्त हुए 09 कर्मियों को मुख्यालय बिलासपुर स्थित सीएमडी कक्ष में उन्हें शाल, श्रीफल, पुष्पहार से सम्मानित कर समस्त भुगतान का चेक प्रदान कर भावभीनी विदाई दी गयी।

मुख्यालय प्रशासनिक भवन के कान्फ्रेन्स हाल में मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन एवं निदेशक (तकनीकी)–संचालन रमेश चंद्र महापात्र के मुख्य आतिथ्य, विभिन्न विभागाध्यक्षों, श्रमसंघ प्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति में कैलाश चंद्र साहू , महाप्रबंधक (खनन), ओएसडी सीएमडी सचिवालय , अजय तिवारी, महाप्रबंधक (खनन), भूमिगत खदान विभाग, विश्वजीत मोइत्रा, उप महाप्रबंधक (उत्खनन) आंतरिक अंकेक्षण विभाग, राजेंद्र कुमार गुजर, सीनियर डीईओ, ए-1 वन विभाग, मुनिराम सतनामी, कार्यालय अधीक्षक निदेशक (मा. सं.) सचिवालय, शुभेंदु चटर्जी, वरिष्ठ तकनीकी निरीक्षक ए-1 गुणवत्ता नियंत्रण विभाग, मिनीश्वर प्रसाद जांगड़े, वरिष्ठ सुरक्षा निरीक्षक सुरक्षा विभाग, वृन्दावन, सहायक सुरक्षा उप निरीक्षक सुरक्षा विभाग तथा तपोधन मिश्रा, फोरमेन इंचार्ज, ग्रेड–ए-1 इंदिरा विहार सब-स्टेशन को सेवानिवृत्ति पर विदाई दी गयी।
इस अवसर पर शीर्ष प्रबंधन ने अपने-अपने उद्बोधन में कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के योगदान एवं कार्यकौशल से ही कम्पनी सफलता के मुकाम पर पहुँची है। सेवानिवृत्त कर्मियों के योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। अंत में उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मियों के सपरिवार उज्ज्वल भविष्य की ईश्वर से कामना की।

सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों ने कम्पनी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यहाँ के कर्मचारियों में कार्य के प्रति बहुत ही निष्ठा है। यहाँ के अधिकारी-कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर साथ में कार्य करते हैं।

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त कर्मियों का परिचय पढ़ते हुए सफलतापूर्वक उद्घोषणा का दायित्व प्रबंधक (राजभाषा) श्रीमती सविता निर्मलकर ने निभाया।

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कोरबा

विकसित भारत-जी राम जी के तहत विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने जिला पंचायत में दिया गया प्रशिक्षण

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ग्रामीण बताएंगे गांव के विकास की राह

गाँव स्थानीय जरूरत और संसाधनों के आधार पर बनेगा प्लान

युक्तधारा से परिसंपत्तियों की मैपिंग और वाटर बजट से तय होंगी जल संरक्षण की प्राथमिकताएं

कोरबा, 30 सितम्बर 2026। गांव में क्या चाहिए और विकास की सबसे पहली जरूरत क्या है, अब इसका निर्धारण गांव के लोग, स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर करेंगे। विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए बुधवार को जिला पंचायत के सभा कक्ष में जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह ने की। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्यगण एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह ने कहा कि ग्रामों के समग्र एवं सतत विकास के लिए विकसित भारत-जी राम जी के तहत विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि योजनाओं में हुए बदलावों और नई व्यवस्थाओं से ग्राम विकास को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को ग्राम पंचायत स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने तथा ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन ने कहा कि विकसित ग्राम पंचायत प्लान स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और ग्रामीणों की प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार किया जाएगा। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायत में उपलब्ध परिसंपत्तियों की मैपिंग की जाएगी, जबकि वाटर बजट के आधार पर जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि ग्राम सभा इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होगी। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों के आधार पर रोजगार, जल सुरक्षा, आजीविका, ग्रामीण अधोसंरचना और स्थायी परिसंपत्तियों से जुड़े कार्यों को एकीकृत योजना में शामिल किया जाएगा, ताकि विकास कार्यों का सीधा लाभ ग्रामीणों को मिले और गांव में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हो।

युक्तधारा बताएगा कहां है जरूरत और कहां बन सकता है काम

प्रशिक्षण में सहायक परियोजना अधिकारी संदीप डिक्सेना ने मैदानी अमले को विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायत में उपलब्ध परिसंपत्तियों की मैपिंग, स्थानीय आवश्यकताओं की प्रविष्टि, विकासात्मक अंतराल की पहचान तथा संभावित कार्यस्थलों के चयन की ऑनलाइन प्रक्रिया समझाई गई।

प्रशिक्षण में बताया गया कि उपलब्ध संसाधनों और मौजूदा परिसंपत्तियों का आकलन कर विकास कार्यों की आवश्यकता एवं प्राथमिकता का बेहतर निर्धारण किया जा सकेगा। इससे ग्राम पंचायतों में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्यों का चयन किया जाएगा।

वाटर बजट से तय होगी गांव की जल जरूरत और संरक्षण की प्राथमिकता

प्रशिक्षण में वाटर बजट पर विशेष जोर दिया गया। ग्राम पंचायत में उपलब्ध जल संसाधनों तथा पानी की आवश्यकता का आकलन कर जल संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इससे गांव की वर्तमान एवं भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त कार्यों का चयन किया जा सकेगा।

अधिकारियों ने बताया कि सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन और ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीणों की जरूरतों एवं सुझावों को विकसित ग्राम पंचायत प्लान में शामिल किया जाएगा। इस प्रकार ग्रामीणों की भागीदारी, स्थानीय संसाधनों का आकलन और वैज्ञानिक तरीके से तैयार वाटर बजट ग्राम पंचायतों की विकास योजना का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

विकसित ग्राम पंचायत प्लान के माध्यम से रोजगार सृजन, जल सुरक्षा, आजीविका संवर्धन, ग्रामीण अधोसंरचना एवं स्थायी परिसंपत्तियों को आपस में जोड़ते हुए कार्यों की प्राथमिकता तय की जाएगी। इससे ग्राम पंचायतों में जरूरत आधारित और परिणाममूलक विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।

प्रशिक्षण में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रेणुका राठिया एवं श्रीमती सुष्मिता अनंत, कार्यपालन अभियंता आरईएस श्रीमती यामिनी, कार्यक्रम अधिकारी, सहायक प्रोग्रामर, तकनीकी सहायक सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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कोरबा

तोते के पिंजरे में घुसा 5 फीट का नाग:कोरबा में एक तोते का शिकार कर चुका था, दूसरे की बचाई जान, सुरक्षित रेस्क्यू

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कोरबा । कोरबा के मिशन रोड में एक परिवार के लिए दिन की शुरुआत डर और दुख के साथ हुई। परिवार जब अपने पालतू तोतों को देखने पिंजरे के पास पहुंचा तो अंदर करीब 5 फीट लंबा नाग फन फैलाए बैठा था। पिंजरे में मौजूद दूसरा तोता जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था।

पिंजरे में फन फैलाए बैठे नाग का रेस्क्यू - Dainik Bhaskar

पिंजरे में फन फैलाए बैठे नाग का रेस्क्यू

परिवार ने बताया कि उन्होंने दो तोतों को लंबे समय से बच्चे की तरह पाल रखा था। पिंजरे के अंदर देखने पर पता चला कि नाग एक तोते का शिकार कर चुका था। अपने पालतू को इस तरह खोने से परिवार भावुक हो गया, जबकि दूसरे तोते की जान भी खतरे में थी।

बाद में प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया

बाद में प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया

छोटे पिंजरे में फन फैलाए बैठा था नाग

परिवार ने तुरंत नोवा नेचर फाउंडेशन के वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम प्रमुख जितेंद्र सारथी को सूचना दी। जानकारी मिलते ही उन्होंने टीम सदस्य बॉबी श्रीवास को मौके पर भेजा।

बॉबी ने मौके पर पहुंचकर सावधानी से रेस्क्यू शुरू किया। पिंजरा छोटा था और नाग फन फैलाए हुए था, ऐसे में सांप को बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद टीम ने सुरक्षित तरीके से नाग को रेस्क्यू कर लिया।

शरीर पर मिले संघर्ष के निशान

रेस्क्यू के दौरान नाग के शरीर पर संघर्ष के निशान भी दिखाई दिए। इससे अंदाजा लगाया गया कि शिकार बना तोता अपनी जान बचाने के लिए काफी देर तक संघर्ष करता रहा होगा। नाग को सुरक्षित रेस्क्यू बैग में रखने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। बाद में वन विभाग के नियमानुसार नाग को उसके प्राकृतिक रहवास क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

बोले- सांप का कोई दोष नहीं

नोवा नेचर फाउंडेशन के जितेंद्र सारथी ने कहा कि परिवार के लिए अपने पालतू तोते को खोना बेहद दुखद है। लेकिन प्रकृति के नजरिए से देखें तो यह फूड चेन और इकोसिस्टम का हिस्सा है। सांप अपना भोजन तलाशते हुए पिंजरे में घुसा था, इसलिए इसमें सांप का कोई दोष नहीं है।

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