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कोरबा

कडुवाहट भरी जिंदगी में आई मिठास, नौकरी ने पहाड़ी कोरवाओं के जीवन में लाया उल्लास

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स्वास्थ्य विभाग में मिली नौकरी से पहाड़ी कोरवाओं की बदल रही जीवनरेखा

कोरबा । यह पहाड़ी कोरवा समारिन बाई है। कुछ दिन पहले तक इन्हें गिनती के कुछ लोग ही जानते थे। यह सिर्फ इनकी ही बात नहीं है। इनके गाँव की भी यही बात है। घने जंगल के बीच मौजूद इनके गाँव टोकाभांठा को भी बहुत कम लोग जानते हैं। मुख्य सड़क से दूर टोकाभांठा में रहने वाली पहाड़ी कोरवा समारिन बाई का जीवन भी घने जंगल में बसे गाँव की तरह गुमनाम सा था। जहाँ सुबह का सूरज तो रोज निकलता था, लेकिन इनकी जिंदगी में गरीबी का अंधेरा जस का तस रहता था। दिन के उजाले में पहाड़ के नजदीक पहाड़ जैसी जिंदगी जीने वाली समारिन बाई ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें नौकरी मिल जायेगी और अंधेरे से घिरी गरीबी को दूर कर कडुवाहट भरी जिंदगी में मिठास तथा जीवन में उल्लास का उजियारा लाएगी।
     अजगर बहार ग्राम पंचायत के अंतर्गत ग्राम टोकाभांठा में रहने वाली समारिन बाई अब पहले से काफी बदल गई है। उनकी जिंदगी और रहन सहन में बदलाव की शुरुआत हाल ही के दिनों से हुई है। जिला प्रशासन की पहल पर जब विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा था तब समारिन बाई की शिक्षा भी बहुत काम आई। कक्षा दसवीं तक पढ़ी समारिन बाई को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू में वार्ड आया की नौकरी मिल गई। फिर क्या था, जंगल में बकरी चराने वाली और गरीबी की वजह से आर्थिक तंगी से जूझने वाली समारिन बाई अस्पताल में अलग रूप में नज़र आ रही है। ट्रे में दवाइयां लेकर मरीजों के वार्ड तक और डॉक्टर, नर्स के साथ उनके आसपास समारिन का दिन गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन वह सरकारी अस्पताल में अपनी ड्यूटी करेगी। उन्हें तो लगता था कि हम पहाड़ी कोरवाओं की जिंदगी गरीबी के बीच जंगल में उनके पुरखों की तरह ही कठिनाइयों के बीच बीतेगी। पहाड़ी कोरवा समारिन बाई का कहना है कि उनका समाज ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है। जंगल में गरीबी के बीच बहुत ही विषम परिस्थितियों में जीवन यापन करना पड़ता है। ऐसे में शिक्षा से जुड़ पाना संभव नहीं हो पाता। खासकर लड़कियों को घर के काम करने पड़ते हैं, उनका स्कूल जाना और पढ़ाई पूरी कर पाना बहुत चुनौती है। मैंने किसी तरह पढ़ाई तो कर ली थी लेकिन नौकरी मिलेगी यह कभी सोचा ही नहीं था। समारिन बाई ने बताया कि उन्हें अस्पताल में नौकरी मिली है। इस जगह में रहकर वह जान पा रही है कि अन्य समाज के साथ कैसे रहना है। किस तरह पढ़ाई कर महिलाएं काम कर रही है। यहाँ बहुत कुछ सीखने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अभी मानदेय में जो राशि मिल रही है उससे घर का खर्च चला रही है। भविष्य में कुछ पैसे बचत करने की कोशिश भी करेगी ताकि अपने बच्चों का भविष्य बना पाए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू में ही पहाड़ी कोरवा समार साय, बुधवार सिंह की भी स्वच्छक तथा वार्ड बॉय के रूप में नौकरी लगी है। मानदेय के आधार पर मिली नौकरी से दोनों खुश है और बताते हैं कि दिन भर जंगल में बिताने से बेहतर है कि यहां काम कर कुछ पैसे मिल जाएं। इससे घर परिवार का खर्च चल जाता है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा पहाड़ी कोरवाओं को दी जा रही नौकरी की सराहना करते हुए कहा कि हमारी कड़ुवाहट भरी जिंदगी में नौकरी से मिठास जरूर आयेगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिशा निर्देशन में कलेक्टर अजीत वसंत ने स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग में जिले के पहाड़ी कोरवाओं तथा बिरहोरों को योग्यता के आधार पर मानदेय में नौकरी पर रखने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में पीवीटीजी के 19 युवाओं को अस्पतालों में विभिन्न पदों पर रखा गया है।

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कोरबा

कोरबा में कोयला उद्योग की हड़ताल को कांग्रेस का समर्थन:श्रमिक नेताओं के साथ कार्यकर्ता भी खदान बंद कराने पहुंचे, कहा-भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध

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कोरबा। कोरबा में कोयला उद्योग की राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय हड़ताल को कांग्रेस का समर्थन मिला। केंद्रीय संयुक्त ट्रेड यूनियन के आह्वान पर आयोजित इस हड़ताल में श्रमिक नेताओं के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी दीपका, कुसमुंडा और मानिकपुर खदानों को बंद कराने पहुंचे।

कोरबा जिला कांग्रेस के प्रमुख हरीश परसाई, वरिष्ठ कांग्रेसी तनवीर अहमद, विशाल शुक्ला और रामू कंवर सहित अन्य कांग्रेस नेता दीपका खदान पहुंचे। उन्होंने मजदूरों के साथ मिलकर अपनी आवाज बुलंद की और हड़ताल को समर्थन दिया।

कांग्रेस नेता हरीश परसाई ने बताया कि पार्टी के निर्देश पर वे इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार की नीतियों और रीति का विरोध कर रही है और आगे भी करती रहेगी।

कर्मचारियों ने किया सहयोग

तनवीर अहमद ने बताया कि सुबह से ही सभी श्रमिक नेताओं और कर्मचारियों का इस हड़ताल को व्यापक समर्थन मिल रहा है। कुसमुंडा और मानिकपुर खदानों में भी श्रमिक नेताओं ने पहली पाली के कर्मचारियों से हड़ताल का समर्थन करने का आग्रह किया, जिस पर कर्मचारियों ने सहयोग किया।

कांग्रेस और श्रमिक नेताओं ने इस हड़ताल को सफल बताया है, जिसमें सभी का सहयोग मिला। इस एक दिवसीय हड़ताल से साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) को नुकसान होने की संभावना है।

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कोरबा

सूअर के फंदे में फंसा तेंदुआ:वन विभाग ने किया उपचार, इलाज के बाद जंगल में छोड़ गया, शिकारी भेजा गया जेल

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कोरबा। कोरबा जिले के लाफा जंगल में सूअर पकड़ने के लिए लगाए गए तार के फंदे में एक तेंदुआ फंस गया। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने रात में ही रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

तेंदुए को फंदे से सुरक्षित निकालना मुश्किल था, इसलिए वन विभाग ने उसे ट्रेंकुलाइजेशन की अनुमति मांगी। रायपुर से अनुमति मिलने के बाद कुमार निशांत, डॉ. चंदन और कानन पेंडारी, बिलासपुर की रेस्क्यू टीम मंगलवार रात करीब 10 बजे मौके पर पहुंची।

तीन घंटे बाद तेंदुए को फंदे से बाहर निकाला

फंदे में फंसे तेंदुए को छटपटाते देख उसे पहले ट्रेंकुलाइज कर बेहोश करने का निर्णय लिया गया। तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को फंदे से सुरक्षित बाहर निकाला गया। उसके पेट और पिछले हिस्से में चोटें थीं, जिसका प्राथमिक उपचार किया गया।

वन विभाग ने किया रेस्क्यू

रेस्क्यू टीम तेंदुए को अपने वाहन में कानन पेंडारी, बिलासपुर ले गई। वहां स्वास्थ्य में सुधार और एंटी-स्नेयर वॉक और निगरानी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद बुधवार शाम छह बजे उसे उसी क्षेत्र में वापस छोड़ दिया गया। रात भर निगरानी में उसकी स्थिति सामान्य बनी रही।

रेस्क्यू टीम तेंदुए को इलाज के लिए अपने वाहन से कानन पेंडारी, बिलासपुर ले गई। वहां इलाज और निगरानी के बाद जब उसकी हालत ठीक हो गई, तो बुधवार शाम करीब छह बजे उसे उसी जंगल में छोड़ दिया गया। रात भर उस पर नजर रखी गई और उसकी स्थिति सामान्य रही।

टीम ने शिकारी को तार, फंदे के साथ पकड़ा

इस बीच, अचानकमार टाइगर रिजर्व से आई डॉग स्क्वाड टीम ने जांच के दौरान नगोई भाठा निवासी विजय कुमार गोड़ (37) को पकड़ा। उसकी तलाशी में शिकार में इस्तेमाल किए गए तार, फंदे और अन्य सामग्री बरामद हुई।

आरोपी विजय कुमार गोड़ ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसने सूअर का मांस खाने की लालसा में फंदा लगाया था, लेकिन उसमें तेंदुआ फंस गया। वन विभाग ने उसके खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 9, 51 और 52 के तहत मामला दर्ज किया है।

उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, पाली के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर उप जेल कटघोरा भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि पाली वन परिक्षेत्र में तेंदुए के अलावा बाघों के विचरण की सूचनाएं भी वन विभाग को मिलती रही हैं।

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कोरबा

कोरबा में पावर प्लांट विस्तार का विरोध:ग्रामीणों ने कलेक्टर से शिकायत की, पूर्व मंत्री से भी हस्तक्षेप की मांग

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कोरबा। कोरबा जिले में निजी पावर प्लांट के 1600 मेगावाट विस्तार को लेकर विरोध शुरू हो गया है। प्रभावित ग्रामीणों ने कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संयंत्र प्रबंधन ने पहले किए गए रोजगार और पुनर्वास संबंधी वादों को अब तक पूरा नहीं किया है।

ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को पत्र लिखकर बताया कि लैंको संयंत्र (वर्तमान में निजी पावर प्लांट के नाम से संचालित है) की स्थापना वर्ष 2005-06 में हुई थी। उस समय भूमि अधिग्रहण और जनसुनवाई के दौरान कंपनी ने प्रत्येक भूमि प्रभावित परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, शिक्षा सुविधा देने का आश्वासन दिया था।

2012-13 के विस्तार में भी मिले थे आश्वासन

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2012-13 में तीसरी और चौथी इकाई के विस्तार के समय भी यही आश्वासन दोहराए गए थे। उनका आरोप है कि उन वादों का भी पालन नहीं किया गया, जबकि तीसरी और चौथी इकाई का निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ता रहा। अब प्लांट में 1600 मेगावाट क्षमता की पांचवीं और छठवीं इकाई के विस्तार की तैयारी की जा रही है।

9 गांवों के 750 मकान प्रभावित होने की आशंका

ग्रामीण पूरन सिंह कश्यप ने बताया कि नए विस्तार से ग्राम सरगबुंदिया, अमलीभांठा, पहंदा, ढनढनी, संडेल, बरीडीह, खोड्डल, दर्राभाठा, पताढ़ी के लगभग 750 मकान प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि करीब चार हजार की आबादी सीधे तौर पर विस्थापन की स्थिति में आ जाएगी।

ग्रामीणों ने जताया फिर से ठगे जाने का डर

ग्रामीण अश्वनी कुमार तंवर ने कहा कि यदि फिर से भूमि अधिग्रहण किया जाता है और फिर से नए वादे किए जाते हैं, तो ग्रामीणों को एक बार फिर ठगे जाने का डर है।

ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जब तक पूर्व में किए गए रोजगार और पुनर्वास संबंधी वादों की लिखित और वास्तविक पूर्ति नहीं होती, तब तक किसी नए अधिग्रहण का समर्थन नहीं किया जाएगा।

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से हस्तक्षेप की मांग

सरगबुंदिया जनपद सदस्य रीना सिदार ने बताया कि ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से क्षेत्र के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के रूप में जनहित के मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया है।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को दी शिकायत

गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई और विस्तार योजना पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने वादों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक किसी नए विस्तार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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