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कोरबा

सत्ता मद में चूर मंत्री देवांगन का व्यवहार कोई अजूबा नहीं, क्या छत्तीसगढ़ की माता बहनों को कुड़ा करकट समझ रखे हैं? – सपना चौहान

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अनशनकारी फ्लोरा मैक्स से पीडि़त महिलाओं से मंत्री देवांगन ने किया दुव्र्यवहार: कांग्रेस ने घेरा

कोरबा । फ्लोरा मैक्स कंपनी द्वारा ठगी की शिकार महिलाएं इस कडकड़ाती ठंड में न्याय की आस में आईटीआई (तानसेन) चौक पर अनिश्चित कालीन धरने पर बैठी हंै। महिलाओं से मिलने पहुंचे राज्य के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के सुर अचानक बदल गए और महिलाओं को खुले आम धमकी दे दी और कड़े तेवर दिखाते कहा-ज्यादा हेकड़ी दिखाओगे तो उठाकर फेंकवा देंगे। महिलाओं ने भी तत्काल जवाब देते हुए कहा कि उठाकर फेंकवा दो, हमारे वोट से ही नेता बने हो। क्या छत्तीसगढ़ की माताओं-बहनों को आप कुड़ा करकट समझ रखे हैं? जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा शहर अध्यक्ष श्रीमती सपना चौहान ने मंत्री देवांगन के बयान को आढ़े हाथों लेते हुए कहा कि धरना स्थल पर श्रम मंत्री का व्यवहार जो दिखाई दिया, वह कोई आश्चर्यजनक घटना नहीं है। वास्तव में सत्ता के मद में चूर भाजपा को मंत्रियों व पदाधिकारियों का गुरूर होना कोई अजूबा नहीं। श्रीमती चौहान ने यह भी कहा कि महिलाओं ने जैसा बताया कि फ्लोरा मैक्स कंपनी के शुभारंभ कार्यक्रम का उद्घाटन स्वयं मंत्री देवांगन ने किया था, जिसकी वजह से महिलाओं ने भरोसा कर कंपनी की योजनाओं में शामिल हुईं और आज ठगी का शिकार हो गई हैं। उपेक्षा और आरोपियों के प्रति बरती जा रही नरमी पर नाराजगी जताई और कहा कि कोरबा की जनता को अब समझ आने लगा है। पिछले विधानसभा चुनाव के समय अपने आपको छत्तीसगढिय़ा एवं आम जनता के हितैषी बताने वाले मंत्री लखन देवांगन का सत्ता का नशा सिर चढ़ कर बोल रहा है। जो माता बहनों का अपमान करने से भी नही चुक रहे हंै। इसके लिए मंत्री देवांगन सार्वजनिक रूप से महिलाओं से मांगी मांगे। भाजपा का चाल चरित्र और चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है। पिछली कांग्रेस की सरकार में महिला स्व सहायता समूह को 12,000 करोड़ रूपये का कर्जा माफ किया गया था, तो क्या यह सरकार जो अपने आप को महिलाओं का हितैषी होने का ढिढ़़ोरा पिटती है, इनका कर्जा नहीं माफ कर सकती?
आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने भी महिलाओं के दुख दर्द को मरहम लगाने के बजाय स्पष्ट रूप से कहा कि हम लोग लोन माफ नहीं कर करते हैं। लोन हमसे पूछ कर लिये थे क्या? लोन के पैसे से आप लोग दारू मुर्गा खा गये।
सपना चौहान ने आगे कहा कि भाजपा शासन में कानून व्यवस्था की स्थिति एकदम लचर हो गई और अपराधियों के पौ-बारह हो गए हैं। सभी तरफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं। चोरी, हत्या, बलात्कार जैसी अपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि आम जनता की फरियाद भाजपा शासन में कोई सुनने वाला नहीं हैै।

हाल ही में छात्रावास की एक नाबालिग आदिवासी लडक़ी ने एक बच्चे को जन्म दिया। जो प्रदेश में भाजपा सरकार की बिगड़ती कानून व्यवस्था का ज्लवंत उदाहरण है। झूठ का सहारा लेकर सत्ता हथियाने वाले भाजपाई उसी जनता का आभार ऐसे शब्दों से करते है। यह जनता बखूबी समझ गई है। मंत्री के उक्त बयान की जितनी भी भर्तस्ना की जाय कम है। इसकी सारे कांग्रेसी निंदा करते है।

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कोरबा

कोरबा जिले में भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बनाए जा रहे 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट

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विकसित भारत-जी राम जी के तहत रू1.32 करोड़ से अधिक के कार्य स्वीकृत

जल संरक्षण एवं संवर्धन के साथ ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार, 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में हो रहा निर्माण

मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जल सरंक्षण एवं संवर्धन सम्बंधी संरचनाओं को प्राथमिकता

कोरबा, 26 अक्टूबर 2026। जिले में गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने तथा वर्षा जल के संरक्षण और पुनर्भरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के तहत 234 बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। इन कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 32 लाख 97 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन संरचनाओं के निर्माण से जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, वहीं भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देकर जल संकट की चुनौती से निपटने में भी मदद मिलेगी।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने में मिलेगी मदद

बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट ऐसी संरचना है, जिसके माध्यम से वर्षा जल को रेत एवं अन्य फिल्टर सामग्री की सहायता से छानकर जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे भूजल पुनर्भरण में मदद मिलती है तथा बोरवेल और आसपास के जलस्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। ग्राम पंचायतों, शासकीय भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक भवनों में ऐसी संरचनाएं जल संरक्षण की दृष्टि से उपयोगी हैं।

पांचों विकासखंडों में हो रहा निर्माण

जिले की 180 से अधिक ग्राम पंचायतों में मांग एवं आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक बोरवेल रिचार्ज सैंड फिल्टर पिट का निर्माण कराया जा रहा है। विकासखंडवार स्थिति के अनुसार करतला में 64, कटघोरा में 30, कोरबा में 66, पाली में 13 तथा पोड़ी उपरोड़ा में 61 रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं।

इन संरचनाओं से विशेषकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को प्रोत्साहन मिलेगा, जहां जलस्तर में गिरावट की समस्या है। वर्षा जल का बेहतर उपयोग होने से जल उपलब्धता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।

विकसित भारत- जी राम जी से जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के इन प्रयासों के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ जल सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।

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कोरबा

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष अग्रवाल को भ्रात शोक

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कोरबा। प्रेस क्लब के सदस्य एवं दैनिक तरूण छत्तीसगढ़ के संपादक सुभाष अग्रवाल के अनुज भ्राता (छोटे भाई) शहर के प्रतिष्ठित नागरिक एवं होटल रिलैक्स इन के संचालक सतीश अग्रवाल पिता स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल का आज सोमवार दिनांक 26/10/2026 की देर शाम 7.30 बजे निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कल मंगलवार दिनांक 27/10/2026 को सुबह 11 बजे स्थानीय मोती सागर पारा मुक्तिधाम में संपन्न होगा। इससे पूर्व अग्रोहा मार्ग स्थित उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनके निधन पर कोरबा प्रेस क्लब परिवार ने शोक व्यक्त किया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में परम शांति प्रदान करे एवं शोकाकुल परिवार को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति दे।

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बेबी एलिफेंट की छठी मनाई, नाम रखा ‘काशी’:7 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए, स्वस्थ जीवन की कामना की, जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में 9 हाथियों का झुंड घूम रहा है। झुंड में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई और उसका नाम ‘काशी’ रखा।

कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने हाथी के बच्चे के स्वस्थ जीवन की कामना की।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

बेबी एलिफेंट का नाम ‘काशी’ रखा गया है।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

छठी कार्यक्रम काशीपानी जंगल के कारीपानी मंदिर के नीचे गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

रविवार को 7 गांवों के ग्रामीणों ने उसकी छठी मनाई।

जिले में 48 हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 9 हाथियों का झुंड फिलहाल काशीपानी के जंगल में घूम रहा है। इसके अलावा कुदमुरा रेंज में 32 हाथी और चचिया क्षेत्र में 7 हाथी मौजूद हैं। हाल के दिनों में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।

20 साल से जंगल में आ रहे हाथी

ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल से हाथी इस जंगल में आते हैं। वे लंबे समय तक यहां रुकने के बाद वापस चले जाते हैं। यह हाथियों का पुराना कॉरिडोर है।

SDO मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से हाथियों से छेड़छाड़ नहीं करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फसल नुकसान के मामलों में नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है। जनहानि रोकने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

साल 2000 में पहली बार आए थे हाथी

जिले में साल 2000 में पहली बार कुदमुरा रेंज के आमटिकरा गांव में हाथी आए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती गई। कई बार जिले में हाथियों की संख्या 150 तक पहुंच चुकी है।

धिनारा गांव से शुरू हुई छठी मनाने की परंपरा

बेबी एलिफेंट की छठी मनाने की परंपरा धिनारा गांव से शुरू हुई थी। ग्रामीण अब हाथियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां हाथियों को भगवान मानकर पूजा की जाती थी, वहीं अब ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर देते हैं।

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