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कोरबा

मंत्री ने महिलाओं को धमकाया, कहा-ज्यादा हेकड़ी मत दिखाओ:लखनलाल देवांगन बोले-पुलिस से फेंकवा देंगे; कांग्रेस बोली- ये महतारियों का अपमान

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कोरबा /रायपुर । उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने ठगी की शिकार महिलाओं को धमकाया है। मंत्री ने कहा ज्यादा हेकड़ी दिखाओगे तो पुलिस से फेंकवा देंगे। ये सभी महिलाएं कोरबा की हैं, जिनसे फ्लोरा मैक्स नाम की कंपनी करीब 500 करोड़ की ठगी की है। आरोपियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी।

मंत्री लखनलाल के धमकी देने वाले वीडियो को कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने भाजपा और मंत्री पर महतारियों का अपमान करने आरोप लगाया है। वहीं पूर्व CM भूपेश बघेल ने कहा कि लूट-खसोट में भागीदारी भाजपा की पहचान बन गई है।

कांग्रेस ने मंत्री का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया है और महिलाओं के अपमान का आरोप लगाया है।

कांग्रेस ने मंत्री का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया है और महिलाओं के अपमान का आरोप लगाया है।

अब जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, मंत्री लखनलाल देवांगन का वायरल वीडियो 12 जनवरी का है। कोरबा में कृषि मंत्री राम विचार नेताम के साथ लखनलाल एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। महिलाओं के एक ग्रुप ने दोनों मंत्रियों को घेर लिया था।

महिलाएं अपने नाम पर लिए गए लोन को माफ करने की मांग कर रही थी। उनका कहना था कि जब तक उनकी समस्याओं का हल नहीं निकलता, वे मंत्री को यहां से जाने नहीं देंगी।

जानिए वीडियो में क्या है

इस दौरान जब मंत्री लखनलाल देवांगन देखा कि महिलाएं हटने को राजी नहीं हैं, तो वे महिलाओं के करीब गए। उन्होंने कहा कि शासन आप लोगों का सहयोग कर रहा है, लेकिन ज्यादा हेकड़ी दिखाओगे तो पुलिस बुलाकर फेंकवा देंगे। इसके बाद महिलाएं आक्रोशित हो गईं।

महिलाओं को मंत्री राम विचार नेताम ने भी कहा कि नेतागिरी करने या सड़क जाम करने से काम नहीं बनेगा। कानून को अपने हाथ में ना लें, जो भी इसमें दोषी हैं, जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। लोन लेने से पहले कंपनी के बारे में जानकारी ले लेनी थी।

भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में सोशल मीडिया पर लिखा कि ठगी करने वाली कंपनियों से भाजपा नेताओं का ही नाम जुड़ता है। इस बार करोड़ों की ठगी करने वाली कंपनी फ्लोरा मैक्स का उद्घाटन करने में कृषि मंत्री लखनलाल देवांगन का नाम आ रहा है।

पिछली बार भी भाजपा सरकार में चिटफंड कंपनियों के कार्यालय का उद्घाटन भाजपा नेताओं ने ही किया था। लूट-खसोट में भागीदारी भाजपा की पहचान बन गई है।

महतारी वंदन का ढोंग, असल में अपमान

वहीं कांग्रेस ने लिखा- ‘ज्यादा हेकड़ी दिखाओगे तो पुलिस से बाहर फेंकवा देंगे’ – ये शब्द मंत्री लखनलाल देवांगन के हैं। यह वही मंत्री हैं, जिन्होंने चिटफंड कंपनी का उद्घाटन किया, और अब वही कंपनी महिलाओं का पैसा लेकर भाग गई है।

अब जब महिलाएं न्याय की मांग करने आईं, तो उन्हें धमकाया जा रहा है। महतारी वंदन का ढोंग, असल में महतारी का अपमान।

मंत्री बोले- घपला कांग्रेस के समय का, हम कार्रवाई कर रहे

विवाद के बाद मीडिया से उद्योग मंत्री लखनलाल ने कहा- ये घपला कांग्रेस सरकार के समय का है। हमने तो इस तरह की कंपनियों पर रोक लगाई है। 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच चल रही है। अभी और लोगों पर आगे कार्रवाई होगी।

महिलाओं ने कृषि मंत्री रामविचार को भी घेर लिया था, उन्होंने इस मामले में जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।

महिलाओं ने कृषि मंत्री रामविचार को भी घेर लिया था, उन्होंने इस मामले में जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।

अब जानिए महिलाओं से कैसे की गई ठगी?

आरोपी अखिलेश सिंह और उसके अन्य साथी फ्लोरा मैक्स सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी चला रहे थे, जिसकी मुख्य शाखा कोरबा और दूसरी शाखा चांपा में खोली गई थी। कंपनी ने फर्जी स्कीम बताकर आम लोगों और महिला समूह के सदस्यों से 30-30 हजार रुपए जमा करवाए।

बदले में हर सदस्य को हर महीने 2700 रुपए देने का वादा किया। इसके अलावा कंपनी साड़ी, बर्तन, जूते, ज्वेलरी जैसे 35 हजार रुपए का सामान बेचने के लिए देती थी। सामान बेचने के बाद वे फिर से कंपनी में 35 हजार रुपए जमा करवाते थे। इसके बदले में सदस्यों को 35 रुपए कमीशन मिलता था।

इसके बाद कंपनी ने बिजनेस के लुभावने सपने दिखाकर महिलाओं के नाम से लोन लिया, लेकिन जब अनियमितताएं सामने आईं तो पुलिस प्रशासन ने कंपनी को सील कर दिया। बैंक महिलाओं को लोन की किस्त जमा करने कह रहे हैं।

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रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा निलंबित

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कोरबा। कार्यालय उप पुलिस अधीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), बिलासपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार एसीबी/ईओडब्ल्यू इकाई बिलासपुर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के अंतर्गत दर्ज अपराध क्रमांक 0/2026 की कार्रवाई में कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा को 29 मई 2026 को प्रार्थी अमृत बघेल से 40,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

एसीबी की कार्रवाई के बाद आरोपी मिश्रा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा द्वारा यह माना गया कि उनका यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत है।
फलस्वरूप, प्रदीप मिश्रा, सहायक ग्रेड-02, कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, कटघोरा निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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अगले तीन घंटे में तूफानी बारिश के आसार

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कोरबा। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगले तीन घंटों में कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के रायगढ़, सक्ती और सरगुजा के कुछ इलाकों में तूफानी बारिश के आसार हैं। तेज हवाओं के साथ भारी बारिश एवं बिजली गिरने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है।

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संस्कृत विषय बचाओ अभियान: घोषणा को अमल में लाने संस्कृत शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

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कोरबा। प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी नोयन कुमार बुडेक, मनोज कुमार वर्मा, डॉ नारायण प्रसाद, गंगाराम साहू, हेमंत कुमार हिरवानी, दुर्गेश कुमार साहू, कुलेश्वर प्रसाद, दिनेश मंडावी, सुनील महार, ईश्वरी यदु कामिनी पिल्लई, रेणुका लदेर, शारदा साहू, सुरेखा सेन, सोमप्रभा साहू सहित प्रदेश के पांच शिक्षा संभाग के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची की भाषा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप संस्कृत विषय के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु उल्लेख किया गया है को ध्यान में रखते हुए गजेंद्र यादव शिक्षा मंत्री द्वारा 30 अप्रैल को विधानसभा से घोषणा किया गया कि संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर रहे हैं, जिनका लघु चलचित्र सोशल मीडिया पर बहुत प्रसारित हैं।

इसे देख सुनकर प्रदेश भर के संस्कृत शिक्षकों में शासन की सौहार्द्रपूर्ण निर्णय से हर्ष की लहर है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा, सभ्यता और संस्कार परक एक राष्ट्रभाषा है, जिनमें सनातन संस्कृति पूर्ण रूप से समाहित है। संघ के पदाधिकारियों द्वारा 10 मई एवं 26 मई 2026 को नवा रायपुर स्थित एम -14 आवास में शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर घोषणा के धरातल पर क्रियान्वयन के लिए शीघ्र अति शीघ्र शासकीय आदेश जारी करवाने हेतु मांग पत्र सौपा, जिससे शिक्षक आश्वस्त हो जावे तथा मंत्री द्वारा संस्कृत विषय को अनिवार्य करने विभागीय अधिकारी को निर्देश दिए यह शिक्षकों के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है, किन्तु आज पर्यन्त कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पदाधिकारियों ने आगे बताया कि इस पावन कार्य के लिए निरंतर प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर, विधायकगण, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरूण साव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , राज्यपाल रमेन डेका , संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डलम्, प्रदेश संयोजक व अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी फेड़रेशन कमल वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, डॉ अतुल कोठारी राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली, आयुक्त राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा सहित 50 से भी अधिक आवेदन बारंबार संस्कृत विषय को पूर्व की भांति अनिवार्य करने तथा नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में रखने के लिए मांग पत्र ज्ञापन सौपा गया था। 25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एससीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं का संस्कृत विषय को अनिवार्य करने निर्देशित भी किया गया था। इसी क्रम में 07 सितंबर 2025 को सरयू पारिण भवन मठपुरेना में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भी मांग पत्र सौपा गया था। वहां पर अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत संकल्प का विषय है विकल्प का नहीं। संस्कृत भाषा के साथ अन्याय नहीं होगा। एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रहा है। अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है।

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