कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में शनिवार को TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हमला हुआ। घोष श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की रैली में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान उत्तरपाड़ा में भीड़ ने उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया और अंडे फेंके।
विधायक के ऑफिस की तरफ से X पर घटना का वीडियो पोस्ट किया गया है। वीडियो में कुणाल घोष ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। पीछे की सीट पर भी कुछ लोग बैठे थे, जो वीडियो बना रहे थे। हमले में कार का पीछे का शीशा भी टूट गया।
TMC नेताओं ने घटना के पीछे BJP के शामिल होने का आरोप लगाया है। पिछले 4 महीने के दौरान घोष पर हमले का यह तीसरा मामला है। इससे पहले 13 सितंबर को उनके घर और ऑफिस में तोड़फोड़ हुई थी। 15 जून को लोगों ने उनके सिर पर अंडा फेंका था।
वीडियो में कुणाल घोष ड्राइवर की बगल वाली सीट पर ब्लू शर्ट में बैठे दिखे।
भीड़ ने ‘गो बैक’ के नारे लगाए और विधायक को वापस जाने का इशारा करते दिखे।
कुणाल घोष अंडे फेंकने वाले लोगों के सामने हाथ भी जोड़ते दिखे।
कुणाल घोष बोले- यह जंगलराज है
घटना पर कुणाल घोष ने कहा- यह जंगलराज है। मेरी कार पर पत्थर और अंडे फेंके गए और रास्ता रोक दिया गया। वहां कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि वह कोलकाता लौट रहे हैं और सीधे लालबाजार या भवानी भवन जाकर शिकायत दर्ज कराएंगे।
TMC ने BJP पर हमले का आरोप लगाया है। पार्टी नेता असित मजूमदार ने कहा- यह आम लोगों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि BJP का पहले से सुनियोजित हमला था। वहीं, उत्तरपाड़ा से BJP विधायक दीपांजन चक्रवर्ती ने कहा कि यह लोगों का गुस्सा था।
कुणाल घोष पर हमले के दो पुराने मामले
1. 15 जून: ममता के घर के बाहर अंडा फेंका
कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी के आवास के बाहर कुणाल घोष पर अंडा फेंका गया था। घटना उस समय हुई, जब घोष ममता से मुलाकात के बाद बाहर निकलकर मीडिया से बात कर रहे थे।
घोष ने शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने चंदन सिंह और रवि कोयल को गिरफ्तार किया था। दोनों को बाद में जमानत मिल गई थी।
एक युवक ने घोष पर करीब से अंडा फेंका, जो उनके सिर पर लगा था।
2. 12 अगस्त: घर और पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़
कोलकाता के गरपार इलाके में घोष के घर, क्लब और पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़ का आरोप लगा था। उस समय घोष घर पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने दावा किया था कि बाहर से लोगों को बुलाकर उन्हें निशाना बनाया गया।
घोष के मुताबिक, हमलावरों ने घर के पास पहुंचने की कोशिश की और बाद में पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़ की। कुछ लोगों ने ऑफिस के बाहर लगे ममता बनर्जी और कुणाल घोष के पोस्टर और बैनर फाड़ दिए थे।
बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता पर 3 बार हमला
8 जुलाई: कोलकाता में TMC की रैली के दौरान ममता बनर्जी के कार्यक्रम में अंडे फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए थे। यह रैली बारुईपुर रेप-मर्डर मामले के विरोध में निकाली गई थी।
9 अगस्त: नॉर्थ 24 परगना के हालीशहर में ममता बनर्जी की कार को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था। इस दौरान कार पर कीचड़, चप्पल और पत्थर फेंकने का आरोप लगा। प्रदर्शनकारियों ने ‘चोर-चोर’ के नारे भी लगाए। ममता ने आरोप लगाया था कि उनकी कार पर ईंट-पत्थर फेंके गए और उनकी जान को खतरा हो सकता था।
हालीशहर में ममता की कार को लोगों ने घेर लिया था।
11 अगस्त: कोलकाता के श्यामबाजार में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर आयोजित TMC कार्यक्रम के दौरान भी ममता बनर्जी के खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए थे।
5 महीने में 25 से ज्यादा TMC नेताओं पर हमले
पश्चिम बंगाल में 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। 15 साल बाद TMC सत्ता से बाहर हो गई। वहीं पहली बार भाजपा की सरकार बनी। चुनाव के बाद पिछले 5 महीनों में 25 से ज्यादा TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अंडे फेंकने या हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें TMC सांसद अभिषेक बनर्जी और महुआ मोइत्रा जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।
28 मई को नॉर्थ 24 परगना जिले में TMC सांसद सौगत रॉय की कार पर अंडे फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगे।
30 मई को सोनारपुर में ममता के भतीजे और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर अंडे, पत्थर और जूते फेंके गए। सुरक्षाकर्मियों को उन्हें पुलिस हेलमेट पहनाकर वहां से निकालना पड़ा।
हमलावरों ने अभिषेक का हेलमेट पकड़कर खींचा। इस दौरान अभिषेक की सिक्योरिटी और अन्य TMC कार्यकर्ता उन्हें बचाते दिखे।
6 जून को मदन मित्रा के काफिले पर अंडे फेंके गए। वहीं 16 जून को युवा नेता सौमित्र बनर्जी और 18 जून को पूर्व मंत्री उदयन गुहा पर भी अंडे और जूते फेंकने की घटनाएं सामने आईं।
1 जुलाई को कृष्णनगर में TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर अंडे, सब्जियां और पत्थर फेंके गए।
सुरक्षा घेरे के बावजूद नेताओं तक कैसे पहुंच रहे हमलावर
नेताओं की सुरक्षा उनके पद से नहीं, खतरे के हिसाब से तय होती है। खतरे के मुताबिक X, Y, Y+, Z और Z+ सुरक्षा दी जाती है। इसकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य पुलिस की होती है। ममता बनर्जी को Z+ सुरक्षा मिली है।
कुणाल घोष जैसे TMC नेताओं ने सवाल उठाया है कि ममता बनर्जी के Z+ सुरक्षा वाले आवास के पास अंडा कैसे फेंका गया? उनका कहना है कि इतनी कड़ी सुरक्षा वाली जगह पर ऐसी घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
लेकिन दूसरे TMC नेताओं की सुरक्षा में हाल के महीनों में बदलाव हुआ है। मई 2026 में अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा Z+ से घटाकर Z कर दी गई और उनके घर-दफ्तर के बाहर अतिरिक्त पुलिस भी हटा दी गई।
कुणाल घोष की अतिरिक्त सुरक्षा भी घटाकर MLA स्तर की कर दी गई। वहीं, महुआ मोइत्रा की सुरक्षा को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनके क्षेत्र के दौरे के दौरान दो अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात करने का आदेश दिया था।
ओस्लो, एजेंसी। नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2026 का शांति पुरस्कार भारतवंशी नवनीतम नवी पिल्लै को देने का ऐलान किया है। दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं पिल्लै ने रंगभेद के खिलाफ लड़ने वाले नेल्सन मंडेला समेत कई लोगों की मदद की थी।
पिल्लै को युद्ध अपराध और नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाने और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के प्रयासों के लिए यह सम्मान दिया गया है।
नोबेल समिति ने कहा कि दुनिया में युद्ध और संघर्ष बढ़ रहे हैं। ऐसे में शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना और उसे मजबूत करना बेहद जरूरी है।
पिल्लै नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाली छठवीं भारतीय हैं। उन्हें दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा।
नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद पिल्लै का रिएक्शन…
नोबेल प्राइज मिलने के बाद पिल्लै ने कहा-
हम नूर्नबर्ग की अदालत में हैं। मुझे नहीं लगता कि उनके नोबेल पुरस्कार के लिए इससे ज्यादा मजबूत प्रतीक कोई और हो सकता है।
नूर्नबर्ग की अदालत जर्मनी के नूर्नबर्ग शहर में हुई उन ऐतिहासिक सुनवाइयों से जुड़ी है, जिनमें दूसरे विश्व युद्ध के बाद नाजी जर्मनी के बड़े नेताओं पर युद्ध अपराधों के मुकदमे चलाए गए थे।
1945-46 में यहां अंतरराष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण ने नाजी नेताओं पर युद्ध छेड़ने, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाया था।
नोबेल समिति के चीफ ने कहा- नॉर्वे से फोन आए तो उठा लीजिएगा
आम तौर पर नोबेल पुरस्कार समिति घोषणा से पहले विजेता को फोन पर सूचना दे देती है। लेकिन इस बार नोबेल समिति की पिल्लै से बात नहीं हो पाई थी।
पुरस्कार के ऐलान के बाद समिति के अध्यक्ष योर्गेन वाट्ने फ्राइडनेस ने कहा,
नॉर्वे का अंतरराष्ट्रीय फोन कोड +47 है। मैं उनसे यही कहूंगा कि अगर नॉर्वे के नंबर से फोन आए, तो कृपया उठा लीजिएगा।
फ्राइडनेस ने कहा कि इस साल के पुरस्कार के जरिए समिति दुनिया को याद दिलाना चाहती है कि देश हो या दुनिया कानून का पालन करना जरूरी है। इसी से व्यवस्था चलती है और विवादों को बिना हिंसा के सुलझाया जा सकता है।
पिल्लै अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में भी जज रहीं। 2008 से 2014 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया।
दादा मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए
नवनीतम नवी पिल्लै का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उनका परिवार भारतीय तमिल मूल का है। उनके दादा 1890 के दशक में भारत से बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां वे गन्ने के खेतों में काम करते थे।
एक हादसे में उनके दोनों हाथ चले गए। परिवार की आर्थिक हालत खराब होने के कारण उनके बेटे नारायणसामी नायडू को महज 8 साल की उम्र में स्कूल छोड़कर काम करना पड़ा।
किसी भी फर्म ने नौकरी नहीं दी तो खुद की फर्म खोली
नारायणसामी बस चलाकर परिवार का गुजारा करते थे। उनकी पत्नी संथमा घर संभालती थीं। इसी दौरान 1941 में नवी पिल्लै का जन्म हुआ। वह आठ बच्चों वाले परिवार में पांचवें नंबर पर थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन मुश्किलों के बावजूद उनके माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की।
पिल्लै ने दक्षिण अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ नेटाल से 1963 में ग्रेजुएशन और 1965 में कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की हार्वर्ड लॉ स्कूल से 1982 में मास्टर और 1988 में कानून में डॉक्टरेट की डिग्री ली।
1967 में पिल्लै ने नेटाल प्रांत में अपनी लॉ फर्म शुरू की। रंगभेद के दौर में नस्ल के कारण कोई भी लॉ फर्म उन्हें नौकरी देने को तैयार नहीं थी। ऐसे में उन्होंने अपना दफ्तर खोलकर वकालत शुरू की। वह नेटाल प्रांत में अपनी लॉ फर्म खोलने वाली पहली महिला बनीं।
रंगभेद के खिलाफ लड़ी लड़ाई, नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाई
1973 में पिल्लै ने याचिका दायर कर रॉबेन आइलैंड जेल में बंद राजनीतिक कैदियों को वकीलों की मदद लेने का अधिकार दिलाया। इनमें नेल्सन मंडेला भी शामिल थे। हालांकि कैदी के तौर पर उनकी मंडेला से कभी मुलाकात नहीं हुई।
1995 में जब मंडेला राष्ट्रपति बने तो उन्होंने नवी पिल्लै को दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश की थी। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली गैर-श्वेत महिला थीं।
1994 में रवांडा में बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ था। इसमें तुत्सी समुदाय के लोगों की बड़े पैमाने पर हत्या की गई। पिल्लै के करियर का सबसे अहम पड़ाव रवांडा में नरसंहार से जुड़े मामलों की सुनवाई रहा।
1995 में संयुक्त राष्ट्र ने रवांडा नरसंहार के अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण बनाया। पिल्लै इस न्यायाधिकरण में न्यायाधीश नियुक्त हुईं।
पिल्लै ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में 1999 से 2003 तक अध्यक्ष के रूप में काम किया।
पिल्लै के 2 ऐतिहासिक फैसले जिनकी दुनियाभर में चर्चा हुई
1. बलात्कार को नरसंहार का हिस्सा माना
1998 में रवांडा के ताबा शहर के मेयर जीन-पॉल अकायेसू को तुत्सी समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा में भूमिका के लिए नरसंहार का दोषी ठहराया। पिल्लै उन तीन जजों में शामिल थीं, जिन्होंने इस फैसले पर हस्ताक्षर किए।
इस फैसले में यह भी कहा गया कि अगर किसी समुदाय को पूरी तरह या उसके एक हिस्से को खत्म करने के इरादे से बलात्कार और यौन हिंसा की जाती है, तो उसे नरसंहार का अपराध माना जा सकता है।
यह फैसला इसलिए अहम था, क्योंकि युद्ध के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली यौन हिंसा को अक्सर गंभीर अपराधों के मुकदमों में नजरअंदाज कर दिया जाता था।
फैसले के बाद पिल्लै ने कहा था,
बहुत लंबे समय से बलात्कार को युद्ध में जीत के इनाम की तरह देखा जाता रहा है। अब इसे युद्ध अपराध माना जाएगा क्योंकि बलात्कार युद्ध की ट्रॉफी नहीं है।
1994 में रवांडा में हुए नरसंहार में करीब 8 लाख लोग मारे गए थे। यह नरसंहार लगभग 100 दिनों तक चला था। इसमें मुख्य रूप से तुत्सी समुदाय के लोगों की हत्या की गई थी।
2. मीडिया केस में नफरत फैलाने वालों को सजा
2003 में न्यायाधिकरण ने रवांडा नरसंहार के दौरान नफरत फैलाने और लोगों को हिंसा के लिए उकसाने के मामले में मीडिया से जुड़े तीन लोगों को दोषी ठहराया। इनमें रेडियो स्टेशन के संस्थापकों में शामिल फर्डिनेंड नाहिमाना, रेडियो स्टेशन की शुरुआती समिति के सदस्य जीन-बोस्को बारायाग्विजा और अखबार ‘कांगुरा’ के संपादक हसन नगेजे शामिल थे।
इन तीनों को नरसंहार, नरसंहार के लिए उकसाने और मानवता के खिलाफ अपराधों समेत कई आरोपों में दोषी पाया। नाहिमाना और नगेजे को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जबकि बारायाग्विजा को 35 साल जेल की सजा मिली।
पहली बार इस फैसले ने यह साफ किया कि मीडिया के जरिए नरसंहार के लिए लोगों को भड़काने वालों को भी उनके काम के लिए सजा दी जा सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसी। कॉकरोच जनता पार्टी के शनिवार को होने वाले प्रदर्शन को लेकर ज्यादा सख्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई।
CJI सूर्यकांत ने कहा- आपको कुछ चीजों को रोकना ही होगा। उन्हें रोकने के लिए सिर्फ उतनी ही कार्रवाई करें जितनी जरूरी हो।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करें। इस बात का हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी के साथ कोर्ट ने मेट्रो बंद करने का आदेश खारिज कर दिया।
दरअसल CJP के कल होने वाले प्रदर्शन को देखते हुए आज रात 9 बजे से 57 मेट्रो स्टेशन बंद होने थे।
वहीं नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशन आने वाली सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें कल कैंसिल रहेंगी। रेलवे ने इन ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से ही रद्द कर दिया है।
कोलकाता/चेन्नई/गुवाहाटी/पुडुचेरी, एजेंसी। चार राज्यों की 6 सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर BJP प्रत्याशी हसीरानी रथ 122753 वोटों से जीत गईं हैं। उन्हें कुल 164427 वोट मिले।
हसीरानी रथ ने 1,22,753 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह 1967 में सीट के अस्तित्व में आने के बाद नंदीग्राम सीट जीत का सबसे बड़ा अंतर है।
इससे पहले सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड 2016 में शुभेंदु अधिकारी के नाम था। तब उन्होंने TMC के टिकट पर CPI के अब्दुल कबीर शेख को 81,230 वोटों से हराया था।
इसके अलावा, रेजीनगर सीट पर भाजपा जीत गई है। प्रत्याशी सखाराव सरकार ने 75661 वोट से जीत दर्ज की है।
तमिलनाडु की दोनों मदुरंतकम और धारापुरम सीटों पर सीएम विजय की पार्टी TVK बढ़त बनाए हुए है। असम की नगांव लोकसभा सीट पर भाजपा आगे चल रही है।
इसके अलावा पुडुचेरी की थट्टनचावडी सीट पर NDA समर्थित AINRC के उम्मीदवार अशोक आनंद जीत गए हैं। इन सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान हुआ था।
तमिलनाडु की धारापुरम सीट TVK ने 9,471 वोटों से जीतीं
तमिलनाडु उपचुनाव की गिनती पूरी। TVK ने धारापुरम निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव जीता, सत्यभामा 9,471 वोटों से जीतीं।
पुडुचेरी में NDA की सहयोगी AINRC जीती
पुडुचेरी में, सत्ताधारी AINRC ने कुछ महीने पहले सत्ता संभालने के बाद अपनी लोकप्रियता की पहली परीक्षा में जीत हासिल की। उसके उम्मीदवार अशोक आनंद ने अपने निकटतम कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी ई. विनायगम को 8,000 से ज्यादा वोटों से हराकर थट्टनचावडी उपचुनाव जीता। DMK उम्मीदवार के सेतु तीसरे स्थान पर रहे।
असम लोकसभा सीट पर BJP उम्मीदवार को 3.5 लाख वोट मिले
असम के नगांव में BJP के देवाशीष शर्मा 3.5 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर चुके हैं। वह 82, 988 वोटों से आगे चल रहे हैं। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल 2.7 लाख वोटों के साथ दूसरे, जबकि कांग्रेस के शिबामोनी बोरा 66,482 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं।
नंदीग्राम में 13 राउंड पूरे, BJP उम्मीदवार 106513 वोटों से आगे
नंदीग्राम में कुल 15 राउंड काउंटिंग होनी है, जिसमें अभी तक 13 राउंड की मतगणना पूरी हो चुकी है। हसिरानी रथ 1,05,869 वोट की बढ़त के साथ कुल 1,43,656 वोट हासिल कर निर्णायक जीत की तरफ आगे बढ़ रही हैं।
दूसरे स्थान पर कांग्रेस के मिलन प्रधान हैं, जिन्हें अब तक 37,787 वोट मिले हैं। लिहाजा, नंदीग्राम में BJP की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
नंदीग्राम में भाजपा की जीत तय
नंदीग्राम में भाजपा की हसीरानी रथ की जीत तय है। उन्हें 1,43,656 वोट मिले हैं और 1,05,869 वोट की लीड है। दूसरे स्थान पर कांग्रेस के मिलन प्रधान हैं। उन्हें अब तक 37,787 वोट मिले हैं।
असम- नगांव में भाजपा प्रत्याशी 83 हजार वोटों से आगे
असम के नगांव में BJP के देवाशीष शर्मा को 3.5 लाख से ज्यादा वोट मिल चुके हैं। वह 82, 988 वोटों से आगे चल रहे हैं। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल 2.7 लाख वोटों के साथ दूसरे, जबकि कांग्रेस की शिवमणि बोरा 66,482 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं।
नंदीग्राम की भाजपा उम्मीदवार 1 लाख से ज्यादा वोटों से आगे
नंदीग्राम की भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ को 1 लाख 43 हजार वोट मिल चुके हैं। कांग्रेस उम्मीदवार को 37 हजार 787 वोट मिले हैं। हसीरानी फिलहाल 1 लाख 5 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त है।
इस साल अप्रैल-मई में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ा था। यहां उन्हें 1 लाख 27 हजार 301 वोट मिले थे। उन्होंने TMC के पवित्र कर को 9 हजार वोटों से हराया था।
नंदीग्राम की भाजपा उम्मीदवार 97 हजार वोटों से आगे
नंदीग्राम की भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ को 1 लाख 32 हजार वोट मिल चुके हैं। कांग्रेस उम्मीदवार को 34 हजार 530 वोट मिले हैं। हसीरानी को 97 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त है।
इस साल अप्रैल-मई में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ा था। यहां उन्हें 1 लाख 27 हजार 301 वोट मिले थे। उन्होंने TMC के पवित्र कर को 9 हजार वोटों से हराया था।
6 सीटों पर 5,453 लोगों ने NOTA दबाया
4 राज्यों की 6 सीटों पर हुए उपचुनाव में 5,453 लोगों ने NOTA का इस्तेमाल किया। असम में 3976, रेजीनगर में 178, नंदीग्राम में 400, धारापुरम में 452, मदुरंतकम में 222 और पुडुचेरी की थट्टनचावडी में 225 NOTA वोट पड़े।