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छत्तीसगढ़

झीरम मामले में राहुल गांधी ने मांगी सुरक्षा की रिपोर्ट:हमले से पहले कहां-कितनी सिक्युरिटी मिली, होगी जांच, छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने नई दिल्ली के 10 जनपथ में राहुल गांधी से मुलाकात की। शनिवार को करीब 45 मिनट चली बैठक में झीरम मामले को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने हमले से पहले की सुरक्षा-व्यवस्था की पूरी जानकारी मांगी है।

उन्होंने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान कहां, कब और कितनी सुरक्षा दी गई, इसकी जानकारी जुटाने को कहा है। खास तौर पर हमले से पहले यात्रा के तीन चरणों में हुई सुरक्षा व्यवस्था की रिपोर्ट जुटाने पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर पुलिस कस्टडी जैसी कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा।

झीरम घाटी मामले को लेकर CG कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने राहुल गांधी से मुलाकात की।

झीरम घाटी मामले को लेकर CG कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने राहुल गांधी से मुलाकात की।

सीनियर वकीलों से ली जाएगी सलाह

बैठक में मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर भी बात हुई। कांग्रेस सीनियर वकीलों से सलाह लेने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा से कानूनी राय ली जा सकती है। उनकी सलाह के आधार पर वकील नियुक्त करने की संभावना है। हालांकि, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के साथ झीरम हमले में प्रभावित परिवारों के सदस्य भी शामिल हुए।

गांधी से मुलाकात के बाद छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के घर जाकर मुलाकात की।

गांधी से मुलाकात के बाद छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के घर जाकर मुलाकात की।

‘षड्यंत्रकारियों को फरार बताकर कार्रवाई नहीं की’

पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा कि बैठक में राहुल गांधी को कई महत्वपूर्ण तथ्य बताए गए। झीरम मामले में दोषी ठहराए गए 10 लोग मूल रूप से गांव के रहने वाले थे। इनमें कुछ लोग खाना पहुंचाने या गड्ढे खोदने जैसे काम करते थे। वहीं, मामले में षड्यंत्रकारी लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें सिर्फ फरार बताया गया।

उन्होंने कहा कि NIA ने साजिश के पहलू की जांच नहीं की। रिपोर्ट के पैराग्राफ 307 में नंदकुमार पटेल और उनके बेटों की पहचान को लेकर पूछताछ का जिक्र है, लेकिन इसके बाद जांच आगे नहीं बढ़ी।

राहुल गांधी ने कानूनी सलाह लेने को कहा

सिंहदेव ने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी को इन बातों की जानकारी दी और कानूनी राय के लिए मदद मांगी। राहुल गांधी ने कुछ खास लोगों से कानूनी सलाह लेने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर आगे पुलिस कस्टडी जैसी कार्रवाई के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

सिंहदेव के अनुसार, राहुल गांधी ने झीरम हमले से पहले दी गई सुरक्षा व्यवस्था की भी विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि सुरक्षा कहां, कब और कितनी दी गई थी।

झीरम हमले के दौरान की फाइल फोटो।

झीरम हमले के दौरान की फाइल फोटो।

हाईकमान की तरफ से लड़ी जाएगी लड़ाई- छविंद्र कर्मा

राहुल गांधी के साथ बैठक के बाद नक्सल हिंसा पीड़ित और शहीद महेंद्र कर्मा के बेटे छविंद्र कर्मा ने कहा कि झीरम हमले को लेकर NIA का जो फैसला आया है, हम उससे संतुष्ट नहीं हैं। ये सारे प्यादे हैं। हमने राहुल गांधी के सामने अपनी बातें रखीं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ नक्सली घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे राजनीति भी थी। अब इसकी लड़ाई हाईकमान की तरफ से लड़ी जाएगी।

उन्होंने कहा कि कई बड़े नक्सली लीडर, जिन्होंने सरेंडर किया है, उनके नाम झीरम नक्सली हमले में थे। लेकिन उन पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब कांग्रेस हाईकमान तय करेगा कि आगे इस मामले को लेकर क्या किया जाएगा और कैसे लड़ाई लड़ी जाएगी।

क्या था झीरम हमला?

25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत कई नेता शामिल थे।

करीब 13 साल चली सुनवाई के बाद 5 सितंबर 2026 को जगदलपुर की NIA स्पेशल कोर्ट ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद 16 सितंबर को कोर्ट ने सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी।

13 साल बाद आया फैसला, 10 दोषियों को मौत की सजा

13 साल पुराने झीरम घाटी नक्सली हमले में जगदलपुर की NIA स्पेशल कोर्ट से 10 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा अब हाईकोर्ट की न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। NIA स्पेशल कोर्ट ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया है।

हाईकोर्ट में इसे क्रिमिनल रेफरेंस/डेथ रेफरेंस के रूप में दर्ज किया गया है। अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ट्रायल कोर्ट के फैसले, पेश किए गए सबूतों और दोषसिद्धि के आधार पर मामले की सुनवाई करेगी।

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मुंगेली: आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता

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प्रदेश में 2,262 स्थानों पर हुए 12,698 आयोजन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुंगेली के मदकू में कार्यक्रम में हुए शामिल

सुपोषित थाली के प्रदर्शन के साथ माताओं और बच्चों के पोषण पर हुआ संवाद

आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता
आंगन मिलन सेवा से उत्सव स्थल बने आंगनबाड़ी केंद्र, पहले दिन 97 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता

मुंगेली, 26 सितंबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रदेश में शुक्रवार से शुरू हुई ‘आंगन मिलन सेवा’ के पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव जैसा माहौल रहा। राज्यभर में 2,262 स्थानों पर 12,698 गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 97,471 लोगों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मुंगेली जिले के मदकू में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में शामिल हुए और माताओं एवं बच्चों के पोषण का संदेश दिया।

आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती माताओं का स्वागत किया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों, दालों और हरी सब्जियों का प्रदर्शन कर परिवारों को संतुलित भोजन के बारे में बताया गया। सुपोषित थाली के माध्यम से महिलाओं ने जाना कि रोजमर्रा के भोजन में विविध खाद्य पदार्थ शामिल कर माताओं और बच्चों का पोषण कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रमों में बच्चों के अभिभावकों ने भी भाग लिया और पोषण तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए।

महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थियों ने बताया कि योजनाओं से मिली सहायता से वे अपनी और अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। आंगन मिलन सेवा के माध्यम से परिवारों और समुदाय को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ते हुए बच्चों के पोषण को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया।

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हाईकोर्ट में भर्ती के लिए 23 पद बढ़े:ड्राइवर के 20 और आकस्मिकता निधि-कर्मचारियों के 54 पदों पर होगी नियुक्ति, 30 सितंबर तक करें आवेदन

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए जरूरी खबर है। हाईकोर्ट प्रशासन ने स्टाफ कार ड्राइवर और आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों की भर्ती में पदों की संख्या बढ़ा दी है। इसके साथ ही आवेदन की अंतिम तारीख भी तय है। उम्मीदवार 30 सितंबर 2026 की शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्री विभाग ने भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी। जिसके मुताबिक पहले ड्राइवर 17 और आकस्मिकता निधि कर्मचारी के 34 पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए आवेदन पत्र भी जमा कराए गए।

अब पद बढ़ने से युवाओं को मिलेगा मौका

हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी संशोधित नोटिस के अनुसार प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल पदों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में भर्ती की प्रक्रिया पहले जारी किए गए विज्ञापन में निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार ही होगी। इसलिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को मूल विज्ञापन में दी गई पात्रता, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य शर्तों को ध्यान में रखना चाहिए।

आकस्मिकता निधि में किन पदों पर होगी भर्ती

हाईकोर्ट में आकस्मिकता निधि के तहत सफाई कर्मचारी, कुक, माली, चौकीदार, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर जैसे पद शामिल हैं। भर्ती के बाद इन कर्मचारियों को आकस्मिकता निधि से वेतन प्रदान किए जाएंगे। इनकी भर्ती भी अस्थाई तौर पर होगी।

नए आवेदकों को मिलेगा मौका

जारी आदेश के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों ने इस भर्ती के लिए पहले ही आवेदन कर दिया है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है। उनका पहले किया गया आवेदन ही मान्य रहेगा। इस संशोधन के बाद केवल नए आवेदन जमा करने और वंचित उम्मीदवारों को मौका मिलेगा।

महिलाओं और दिव्यांगजनों को आरक्षण

भर्ती में महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए नियमानुसार आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। आरक्षण और पात्रता से संबंधित विस्तृत जानकारी आधिकारिक भर्ती विज्ञापन में देखी जा सकती है।

कहां मिलेगी पूरी जानकारी

अभ्यर्थी हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट highcourt.cg.gov.in पर जाकर भर्ती से संबंधित संशोधित नोटिस, मूल विज्ञापन, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य शर्तों की जानकारी देख सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 की शाम 5 बजे तक है।

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बिलासपुर हिंसा का मुख्य आरोपी रामसिंह ठाकुर MP से गिरफ्तार:दोस्त के घर छिपा था, बागेश्वर धाम भी गया, अब तक 30 आरोपी पकड़ाए

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बिलासपुर, एजेंसी। बिलासपुर हिंसा के मुख्य आरोपी हिंदूवादी नेता राम सिंह ठाकुर को पुलिस ने मध्यप्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, 28 अगस्त की रात दो पक्षों में विवाद हुआ था, जो बाद में सामुदायिक हिंसा में बदल गया। इस दौरान पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। टीआई का सिर फट गया था। गाड़ियों, घरों और दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई थी।

राम सिंह ठाकुर इस मामले में एक पक्ष का आरोपी है। वह मध्यप्रदेश के पन्ना में अपने दोस्त के घर छिपा था। फरारी के दौरान वह बागेश्वर धाम दर्शन करने भी गया था। शुक्रवार को पुलिस टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अब तक दोनों पक्षों के 30 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

गिरफ्तारी के बाद शनिवार को उसे कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट से जेल ले जाते समय पुलिस ने सुरक्षा घेरा मजबूत रखा। जेल पहुंचते ही आरोपी के समर्थक भी बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए और नारेबाजी की।

बिलासपुर हिंसा का मुख्य आरोपी राम सिंह ठाकुर अरेस्ट।

बिलासपुर हिंसा का मुख्य आरोपी राम सिंह ठाकुर अरेस्ट।

आरोपी राम सिंह ठाकुर को बिलासपुर कोर्ट में पेश किया गया।

आरोपी राम सिंह ठाकुर को बिलासपुर कोर्ट में पेश किया गया।

राम सिंह ठाकुर के समर्थकों ने गिरफ्तारी का विरोध किया, जय श्री राम के नारे लगाए।

राम सिंह ठाकुर के समर्थकों ने गिरफ्तारी का विरोध किया, जय श्री राम के नारे लगाए।

घटना के बाद धारा 144 लगाई गई थी

28 अगस्त को सिटी कोतवाली क्षेत्र के खपरगंज में हुए विवाद के दौरान दोनों पक्षों पर हिंसा भड़काने का आरोप है। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे। तनाव की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने धारा 144 लागू की थी।

दोनों पक्षों से अब तक 30 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस घटना के बाद दोनों पक्षों के करीब 100 लोगों को आरोपी बनाने का दावा किया। इसके साथ ही दोनों पक्षों के खिलाफ हिंसा, जानलेवा हमला जैसे गंभीर धाराओं में केस दर्ज की। इसके बाद से लगातार आरोपियों की धरपकड़ की जाती रही।

एक पक्ष के मुख्य आरोपी सोहेल खान सहित 15 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, दूसरे पक्ष के भी दर्जन भर आरोपी पकड़े जा चुके हैं। जबकि, राम सिंह ठाकुर घटना के बाद से फरार था। पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी।

बिलासपुर हिंसा मामले में अब तक 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

बिलासपुर हिंसा मामले में अब तक 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

मध्यप्रदेश में छिपा था हिंदूवादी नेता राम सिंह

राम सिंह पुलिस को लगातार चकमा दे रहा था। उसे पकड़ने के लिए टीम कई बार रायपुर में दबिश दे चुकी थी। लेकिन, वह नहीं मिला। इसके बाद से पुलिस की तकनीकी टीम उसका लोकेशन सहित तकनीकी साक्ष्य जुटाती रही। पिछले सप्ताह पुलिस को खबर मिली थी कि राम सिंह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड भाग गया है।

फरारी के दौरान बागेश्वर धाम भी गया

इसी दौरान पता चला कि वह कथावाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बागेश्वर धाम भी गया था। इसी आधार पर पुलिस ने जानकारी जुटाई तब जानकारी मिली कि राम सिंह मध्यप्रदेश के पन्ना में अपने दोस्त के घर छिपा है। वह बृजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम माकरी कुठार निवासी अपने दोस्त धीरेंद्र पटेल के घर में छिपा है।

इसके बाद एसीसीयू की टीम को मध्यप्रदेश रवाना किया, जहां दबिश देकर पुलिस ने राम सिंह को पकड़ लिया। एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। बिलासपुर लाकर उसे कोर्ट में पेश किया गया।

पथराव में टीआई का सिर फट गया था, 9 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

पथराव में टीआई का सिर फट गया था, 9 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

राम सिंह ने कहा था- जेल में हो सकती है हत्या

वहीं, इस घटना के बाद राम सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया था, जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताया था। उसने कहा था कि अपने धर्म के लिए लड़ने के कारण उसे अपराधी बनाया गया है। राम सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस और जेहादी उसे टारगेट कर रहे हैं।

रामसिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताया था।

रामसिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताया था।

दोनों पक्षों के बीच क्यों हुआ था विवाद

बताया जा रहा है कि कुछ महीने पहले हिंदू संगठन से जुड़े एक युवक ने सुसाइड किया था। विरोध प्रदर्शन के बाद सोहेल खान नाम के युवक को अरेस्ट किया गया था। इसी बात को लेकर सोहेल खान और दूसरे पक्ष के बीच रंजिश थी।

आरोप है कि सोशल मीडिया पर की गई कथित हिंदू विरोधी टिप्पणी और पुरानी रंजिश को लेकर विवाद शुरू हुआ, जिसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

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