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कोरबा

एसईसीएल एवं एक्सएलआरआई के संयुक्त तत्वावधान में श्रम कानून पर प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

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6-दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान एक्सएलआरआई के जाने-माने प्रोफेसर डॉ प्रमोद कुमार पाढ़ी ने कार्मिक अधिकारियों को सिखाए श्रम कानून एवं कार्मिक प्रबंधन के गुर

निदेशक (कार्मिक) बिरंची दास ने नॉलेज अपदेशन एवं अपस्किलिंग पर दिया ज़ोर

कोरबा/ बिलासपुर। एसईसीएल एवं ज़ेवियर लेबर रिलेशन्स इंस्टीट्यूट (एक्सएलआरआई) जमशेदपुर के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 25 मई 2024 को एसईसीएल के इन्दिरा विहार स्थित मैनेजमेंट डेव्लपमेंट इंस्टीट्यूट (एमडीआई) में श्रम कानून विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस 6-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में ज़ेवियर लेबर रिलेशन्स इंस्टीट्यूट जमशेदपुर के जाने-माने प्रोफेसर एवं श्रम कानून विशेषज्ञ डॉ प्रमोद कुमार पाढ़ी श्रम कानून विशेषकर आगामी लेबर कोड एवं मानव संसाधन प्रबंधन से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम के समापन के अवसर पर अपने उद्बोधन में निदेशक (कार्मिक) बिरंची दास ने कहा कि इस 6-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम से एसईसीएल में कार्मिक संवर्ग के अधिकारियों की श्रम कानून के उनके ज्ञान को मजबूती प्रदान की है और निश्चित रूप से इसके माध्यम से एसईसीएल में एक कुशल एचआर टीम तैयार करने में सफलता मिलेगी। उन्होने नॉलेज अपडेशन एवं अपस्किलिंग पर ज़ोर देते हुए कहा कि आज के बदलते कॉर्पोरेट परिवेश में एक कुशल एचआर मैनेजर को खुद की नॉलेज को हर समय अपडेट करते रहने कि आदत डालनी होगी और अपनेआप को निरंतर अपस्किल करने के प्रयास करने होंगे। तभी हम अपने कार्यस्थल को एक बेहतर वर्कप्लेस में बदल पाएंगे।

एसईसीएल में अपनी तरह के इस पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम में ज़ेवियर लेबर रिलेशन्स इंस्टीट्यूट जमशेदपुर के जाने-माने प्रोफेसर एवं श्रम कानून विशेषज्ञ डॉ प्रमोद कुमार पाढ़ी एवं उनकी टीम द्वारा प्रतिभागियों को श्रम कानून एवं प्रबंधन के गुर सिखाए गए। विभिन्न केस स्टडी एवं उदाहरण के माध्यम से उन्होने प्रतिभागियों को श्रम कानून एवं प्रावधानों के उचित कार्यान्वयन के बारे में बताया।

प्रतिभागियों ने अपने उद्गार में कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से श्रम कानून की बारीकियों को सीखने बहुत मदद मिली है और आने वाले समय में वे कार्यस्थल पर और अधिक आत्मविश्वास के साथ श्रम एवं आद्योगिक संबंध के क्षेत्र में अपना योगदान दे पाएंगे।

डॉ पाढ़ी के पास मानव संसाधन एवं श्रम कानून के विषय को पढ़ाने का लगभग 22 सालों से अधिक का अनुभव है एवं उनकी गिनती मानव-संसाधन विषय के जाने-माने विशेषज्ञों में होती है। डॉ पाढ़ी द्वारा इस विषय पर 8 पुस्तकें लिखी गयी हैं और उनके 25 से ज़्यादा आलेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

इस वर्कशॉप में एसईसीएल मुख्यालय एवं विभिन्न संचालन क्षेत्रों से कार्मिक संवर्ग के लगभग 30 अधिकारियों ने भाग लिया एवं सफलतापूर्वक प्रशिक्षण उपरांत सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया गया।

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कोरबा

कोरबा में कोयला उद्योग की हड़ताल को कांग्रेस का समर्थन:श्रमिक नेताओं के साथ कार्यकर्ता भी खदान बंद कराने पहुंचे, कहा-भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध

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कोरबा। कोरबा में कोयला उद्योग की राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय हड़ताल को कांग्रेस का समर्थन मिला। केंद्रीय संयुक्त ट्रेड यूनियन के आह्वान पर आयोजित इस हड़ताल में श्रमिक नेताओं के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी दीपका, कुसमुंडा और मानिकपुर खदानों को बंद कराने पहुंचे।

कोरबा जिला कांग्रेस के प्रमुख हरीश परसाई, वरिष्ठ कांग्रेसी तनवीर अहमद, विशाल शुक्ला और रामू कंवर सहित अन्य कांग्रेस नेता दीपका खदान पहुंचे। उन्होंने मजदूरों के साथ मिलकर अपनी आवाज बुलंद की और हड़ताल को समर्थन दिया।

कांग्रेस नेता हरीश परसाई ने बताया कि पार्टी के निर्देश पर वे इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार की नीतियों और रीति का विरोध कर रही है और आगे भी करती रहेगी।

कर्मचारियों ने किया सहयोग

तनवीर अहमद ने बताया कि सुबह से ही सभी श्रमिक नेताओं और कर्मचारियों का इस हड़ताल को व्यापक समर्थन मिल रहा है। कुसमुंडा और मानिकपुर खदानों में भी श्रमिक नेताओं ने पहली पाली के कर्मचारियों से हड़ताल का समर्थन करने का आग्रह किया, जिस पर कर्मचारियों ने सहयोग किया।

कांग्रेस और श्रमिक नेताओं ने इस हड़ताल को सफल बताया है, जिसमें सभी का सहयोग मिला। इस एक दिवसीय हड़ताल से साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) को नुकसान होने की संभावना है।

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कोरबा

सूअर के फंदे में फंसा तेंदुआ:वन विभाग ने किया उपचार, इलाज के बाद जंगल में छोड़ गया, शिकारी भेजा गया जेल

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कोरबा। कोरबा जिले के लाफा जंगल में सूअर पकड़ने के लिए लगाए गए तार के फंदे में एक तेंदुआ फंस गया। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने रात में ही रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

तेंदुए को फंदे से सुरक्षित निकालना मुश्किल था, इसलिए वन विभाग ने उसे ट्रेंकुलाइजेशन की अनुमति मांगी। रायपुर से अनुमति मिलने के बाद कुमार निशांत, डॉ. चंदन और कानन पेंडारी, बिलासपुर की रेस्क्यू टीम मंगलवार रात करीब 10 बजे मौके पर पहुंची।

तीन घंटे बाद तेंदुए को फंदे से बाहर निकाला

फंदे में फंसे तेंदुए को छटपटाते देख उसे पहले ट्रेंकुलाइज कर बेहोश करने का निर्णय लिया गया। तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को फंदे से सुरक्षित बाहर निकाला गया। उसके पेट और पिछले हिस्से में चोटें थीं, जिसका प्राथमिक उपचार किया गया।

वन विभाग ने किया रेस्क्यू

रेस्क्यू टीम तेंदुए को अपने वाहन में कानन पेंडारी, बिलासपुर ले गई। वहां स्वास्थ्य में सुधार और एंटी-स्नेयर वॉक और निगरानी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद बुधवार शाम छह बजे उसे उसी क्षेत्र में वापस छोड़ दिया गया। रात भर निगरानी में उसकी स्थिति सामान्य बनी रही।

रेस्क्यू टीम तेंदुए को इलाज के लिए अपने वाहन से कानन पेंडारी, बिलासपुर ले गई। वहां इलाज और निगरानी के बाद जब उसकी हालत ठीक हो गई, तो बुधवार शाम करीब छह बजे उसे उसी जंगल में छोड़ दिया गया। रात भर उस पर नजर रखी गई और उसकी स्थिति सामान्य रही।

टीम ने शिकारी को तार, फंदे के साथ पकड़ा

इस बीच, अचानकमार टाइगर रिजर्व से आई डॉग स्क्वाड टीम ने जांच के दौरान नगोई भाठा निवासी विजय कुमार गोड़ (37) को पकड़ा। उसकी तलाशी में शिकार में इस्तेमाल किए गए तार, फंदे और अन्य सामग्री बरामद हुई।

आरोपी विजय कुमार गोड़ ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसने सूअर का मांस खाने की लालसा में फंदा लगाया था, लेकिन उसमें तेंदुआ फंस गया। वन विभाग ने उसके खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 9, 51 और 52 के तहत मामला दर्ज किया है।

उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, पाली के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर उप जेल कटघोरा भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि पाली वन परिक्षेत्र में तेंदुए के अलावा बाघों के विचरण की सूचनाएं भी वन विभाग को मिलती रही हैं।

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कोरबा में पावर प्लांट विस्तार का विरोध:ग्रामीणों ने कलेक्टर से शिकायत की, पूर्व मंत्री से भी हस्तक्षेप की मांग

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कोरबा। कोरबा जिले में निजी पावर प्लांट के 1600 मेगावाट विस्तार को लेकर विरोध शुरू हो गया है। प्रभावित ग्रामीणों ने कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संयंत्र प्रबंधन ने पहले किए गए रोजगार और पुनर्वास संबंधी वादों को अब तक पूरा नहीं किया है।

ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को पत्र लिखकर बताया कि लैंको संयंत्र (वर्तमान में निजी पावर प्लांट के नाम से संचालित है) की स्थापना वर्ष 2005-06 में हुई थी। उस समय भूमि अधिग्रहण और जनसुनवाई के दौरान कंपनी ने प्रत्येक भूमि प्रभावित परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, शिक्षा सुविधा देने का आश्वासन दिया था।

2012-13 के विस्तार में भी मिले थे आश्वासन

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2012-13 में तीसरी और चौथी इकाई के विस्तार के समय भी यही आश्वासन दोहराए गए थे। उनका आरोप है कि उन वादों का भी पालन नहीं किया गया, जबकि तीसरी और चौथी इकाई का निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ता रहा। अब प्लांट में 1600 मेगावाट क्षमता की पांचवीं और छठवीं इकाई के विस्तार की तैयारी की जा रही है।

9 गांवों के 750 मकान प्रभावित होने की आशंका

ग्रामीण पूरन सिंह कश्यप ने बताया कि नए विस्तार से ग्राम सरगबुंदिया, अमलीभांठा, पहंदा, ढनढनी, संडेल, बरीडीह, खोड्डल, दर्राभाठा, पताढ़ी के लगभग 750 मकान प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि करीब चार हजार की आबादी सीधे तौर पर विस्थापन की स्थिति में आ जाएगी।

ग्रामीणों ने जताया फिर से ठगे जाने का डर

ग्रामीण अश्वनी कुमार तंवर ने कहा कि यदि फिर से भूमि अधिग्रहण किया जाता है और फिर से नए वादे किए जाते हैं, तो ग्रामीणों को एक बार फिर ठगे जाने का डर है।

ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जब तक पूर्व में किए गए रोजगार और पुनर्वास संबंधी वादों की लिखित और वास्तविक पूर्ति नहीं होती, तब तक किसी नए अधिग्रहण का समर्थन नहीं किया जाएगा।

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से हस्तक्षेप की मांग

सरगबुंदिया जनपद सदस्य रीना सिदार ने बताया कि ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से क्षेत्र के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के रूप में जनहित के मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया है।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को दी शिकायत

गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई और विस्तार योजना पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने वादों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक किसी नए विस्तार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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