मुंबई,एजेंसी। मुंबई के दहिसर में रहने वाले प्रभाकर मिश्रा लोकल ट्रेन से घर के लिए निकले। वे विरार जाने वाली लोकल के फर्स्ट क्लास डिब्बे में गेट के पास ही खड़े थे। जोरदार धमाका हुआ। प्रभाकर को होश आया, तो उनके शरीर पर गंभीर चोटें थीं। उन्हें सुनाई भी कम दे रहा था।
उस दिन मुंबई की 7 लोकल ट्रेनों के कोच में सीरियल बम ब्लास्ट हुए। इस आतंकी हमले में 189 लोगों की मौत हो गई और 824 लोग घायल हुए। ये सभी धमाके फर्स्ट क्लास के कोच में हुए थे। प्रभाकर भी इन धमाकों के एक विक्टिम हैं। इस ब्लास्ट के 19 साल बाद 21 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है।
74 साल के प्रभाकर मिश्रा फैसले से बेहद निराश हैं, वे कहते हैं, ‘जितना बड़ा धक्का धमाके से लगा था, उतना ही अब इस फैसले से लगा है।‘ हालांकि इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। 19 साल तक सलाखों के पीछे जिंदगी गुजार चुके ये 12 आरोपी और उनके परिवार कोर्ट के शुक्रगुजार हैं। वे कहते हैं, ‘इतने सालों से हम पर लगा आतंकी होने का तमगा अब हट गया है।’
महाराष्ट्र सरकार, बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। कोर्ट के फैसले के बाद हम मुंबई और पुणे गए। ब्लास्ट के विक्टिम और उनके परिवारों से बात की। साथ ही 19 साल जेल में आरोपियों की तरह बिताने वाले लोगों के परिवार से मिले।
प्रभाकर मिश्रा, 74 साल इस फैसले ने धमाकों से ज्यादा तकलीफ दी
धमाके के वक्त प्रभाकर मिश्रा की उम्र 55 साल थी। हाल पूछने पर उन्होंने एक गहरी सांस लेकर बोलना शुरू किया।
वे 11 जुलाई 2006 की शाम को याद करते हुए कहते हैं, ‘वो मेरी जिंदगी का सबसे भयानक दिन था। मैं लोकल के फर्स्ट क्लास डिब्बे में गेट के पास खड़ा था। तभी मेरे पोते का फोन आया और पूछा- बाबा कब तक आ रहे हैं? मैं उसे जवाब दे पाता, उससे पहले ही एक कान फाड़ देने वाला धमाका हुआ।‘
‘पहले लगा कि मेरे फोन की बैटरी फट गई है। मैं नीचे गिर पड़ा और कुछ समझ नहीं आया।‘
जब होश आया तो देखा कि मेरे हाथ पर गंभीर चोटें थीं। आंखों के पास का हिस्सा जल गया था और कान के पर्दे पूरी तरह फट चुके थे। उस धमाके का असर आज तक झेल रहा हूं। मेरे एक कान से आज भी सिर्फ 40% ही सुनाई देता है।
प्रभाकर की आवाज में काफी निराशा थी। वे आगे कहते हैं, ‘आज 19 साल बाद इस फैसले से मैं उतना ही दुखी और निराश हूं, जितना उस दिन घायल होने पर था। हमें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन इस फैसले से संतुष्टि नहीं मिली। ऐसा लगता है कि जांच एजेंसियां असली दोषियों को पकड़ने या उनके खिलाफ मजबूत सबूत पेश करने में नाकाम रहीं।‘
प्रभाकर मिश्रा ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘सबूतों का अभाव कैसे हो गया? अगर ये लोग दोषी नहीं थे, तो असली अपराधी कौन है और वे कहां हैं? ये किसकी नाकामी है? क्या पुलिस ने गलत लोगों को पकड़ा या सही लोगों को भाग जाने दिया? अगर ये लोग दोषी नहीं थे, तो कोई और तो है जिसने ये सब किया।‘
रमेश विट्ठल नाइक लड़ाई यहीं खत्म न की जाए, मेरी बेटी और बाकी निर्दोषों को इंसाफ मिले
मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट के 189 मृतकों के परिवारों में से एक रमेश विट्ठल नाइक हैं। उनकी 27 साल की बेटी नंदिनी उस शाम घर नहीं लौटी। रमेश की आवाज में गुस्सा और बेबसी दोनों नजर आती है।
वे कहते हैं, ‘उस शाम ने मुझसे मेरी बेटी छीन ली। पिछले 19 साल से हम 11 जुलाई को माहिम में इकट्ठा होते हैं और अपने प्रियजनों को याद करते हैं। हर साल मेरे मन में बस एक ही सवाल आता था कि आखिर फैसला कब आएगा? हम बस ये जानना चाहते थे कि जिन आतंकवादियों ने हमारी दुनिया उजाड़ी, क्या वे वाकई जेल में हैं?‘
रमेश फैसले के बाद सवाल पूछ रहे हैं कि जब सभी निर्दोष हैं तो 19 साल उन्हें जेल में क्यों रखा और असली दोषी को क्यों नहीं पकड़ा गया?
‘अब इतने इंतजार के बाद हमें ये सुनने को मिला कि हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को ये कहकर बरी कर दिया कि उन्होंने कुछ किया ही नहीं था। ये सुनकर हमें गहरा सदमा लगा है। ये हमारे 19 साल के संघर्ष और इंतजार का अपमान है। मैं राज्य के मुख्यमंत्री से भी मिलकर पूछना चाहता हूं कि इस देश में क्या हो रहा है? जब इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ, इतने निर्दोष लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए, तो क्या वो सब झूठी कहानी थी?’
’हमारी और बाकी पीड़ित परिवारों की मांग का आखिर क्या हुआ। हम सब यही चाहते हैं कि धमाके के दोषियों को फांसी की सजा हो, लेकिन सजा देना तो दूर, उन्हें बरी कर दिया गया। हम सरकार और न्यायपालिका से अपील करते हैं कि इस लड़ाई को यहीं खत्म न किया जाए। इसे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाए, ताकि मेरी बेटी और सभी निर्दोषों को न्याय मिल सके।’
अब बरी हुए आरोपियों की बात… 19 साल बाद आतंकी होने का धब्बा धुला, लेकिन जख्म बाकी
इस कहानी का दूसरा पहलू भी है, जिन्होंने धमाके कराने के आरोप में 19 साल तक सलाखों के पीछे काटे। पुणे में रह रहे राहिल शेख से जब हमने बात की, तो उनकी आवाज में खुशी और दर्द दोनों था। छोटे भाई सोहेल शेख को बरी किए जाने पर वे कहते हैं, ‘आज मैं और मेरा पूरा परिवार देश की न्यायपालिका को सलाम करता है। वो हमारे नायक हैं, जिन पर हर इंसान को भरोसा था और आज ये भरोसा सच साबित हो गया।’
राहिल बताते हैं, ‘इस केस के बाद हम एकदम टूट गए थे। ये लगने लगा था कि हम बस हिंदुस्तान में मरने के लिए हैं। हमें कभी इंसाफ नहीं मिलेगा। दुनिया की बातों ने हमें यही महसूस कराया कि शायद ये हमारा देश नहीं है, लेकिन आज घर का बच्चा-बच्चा खुश है।’
हम अल्लाह के शुक्रगुजार हैं और अपने कानून का सम्मान करते हैं, जिसने हमारे हक में फैसला सुनाया। भाई (सोहेल) से भी फोन पर बात हुई, वो भी बहुत खुश है।
राहिल संघर्ष के दिनों को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं, ‘हमें समाज ने ‘आतंकवादी’ का तमगा दे दिया था। जब हम राशन कार्ड, गैस सिलेंडर या आधार कार्ड जैसे डॉक्यूमेंट बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में जाते, तो हमें गालियां मिलती थीं। अधिकारी कहते- ‘चले जाओ आतंकवादी, तुम्हारा भाई तो पाकिस्तान जा रहा था, तुमने रोका क्यों नहीं?, तुम्हारे भाई को तो फांसी ही लगेगी। ये सब सुनकर हमारी हिम्मत टूट जाती थी।’
हालांकि, राहिल करीबियों का शुक्रिया भी करते हैं, जिन्होंने उन्हें और उनके परिवार को हिम्मत दिलाई। वे कहते हैं, ’हमारे कई हिंदू भाई अब्बा को तसल्ली देते और कहते थे- ‘टेंशन मत लो, सब ठीक हो जाएगा। वो जरूर वापस आएगा।’
वे आगे बताते हैं, ‘जब ये घटना हुई, तब तक हमारा परिवार एक साथ था। अम्मी-अब्बा, हम तीनों भाई, बहन और जीजा सब एक जगह रहते थे, लेकिन इस केस ने सब बर्बाद कर दिया। आज सब अलग-अलग रहते हैं। इस पूरे संघर्ष में हम तो टूटे ही, लेकिन सबसे ज्यादा हमारे मां-बाप टूट गए थे। मेरे भाई और उनके परिवार ने बहुत परेशानियां झेलीं। उनके बच्चों की परवरिश में बहुत मुश्किलें आईं।’
वकील बोले- ये फैसला जांच एजेंसियों के गाल पर तमाचा
ये राहत सिर्फ आरोपी बनाए गए लोगों के परिवारों तक सीमित नहीं है। कानूनी लड़ाई लड़ रहे वकीलों के लिए भी ये ऐतिहासिक जीत है। 12 में से एक आरोपी रहे जमीर शेख की वकील ताहिरा कुरैशी ने कोर्ट के फैसले को जांच एजेंसियों की नाकामी का सबूत बताया।
ताहिरा कहती हैं, ‘इस फैसले से हम बहुत खुश हैं। खासकर तब जब निचली अदालत ने कुछ लोगों को फांसी तक की सजा सुना दी थी। ये सच है कि न्याय मिलने में बहुत देरी हुई, लेकिन हम शुक्रगुजार हैं कि आखिरकार सच की जीत हुई। मेरे मुवक्किल निर्दोष साबित हुए।‘
‘मेरे मुवक्किल को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि वे इस साजिश का हिस्सा थे और उन्होंने विदेश जाकर ट्रेनिंग ली थी। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तब वे एक सामान्य परिवार के सिर्फ 25-26 साल के युवक थे। उन्होंने शुरू से लेकर आखिर तक हमेशा यही कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। असली गुनहगारों को न पकड़ पाने की नाकामी में उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है।‘
उन्होंने आगे कहा, ‘ये फैसला जांच एजेंसियों के गाल पर तमाचा और एक बहुत बड़ा सबक है। हमें अपने मुवक्किलों के बरी होने की खुशी है।‘
‘जांच एजेंसियों को इस बारे में सोचना चाहिए कि निष्पक्ष जांच करने के बजाय क्यों ऐसे मामलों में एक खास कम्युनिटी के लोगों को निशाना बनाया जाता है। हमारा हमेशा से यही स्टैंड रहा कि इन्हें गलत तरीके से फंसाया गया। कोर्ट के फैसले ने भी इस पर मुहर लगा दी।‘
BJP लीडर किरीट सोमैया बोले- तो असली गुनहगार कौन?
कोर्ट के फैसले की चर्चा मुंबई के सियासी गलियारों में भी है। सीनियर BJP लीडर और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने जांच की दिशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, ‘इतना लंबा वक्त बीत चुका है। कई विक्टिम या उनके परिवार के लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं। कुछ दूसरी जगहों पर बस गए और कई ने ये हादसा भुलाने की कोशिश की। इस फैसले ने उन सबके जख्म फिर से ताजा कर दिए।‘
‘परिवारों को सबसे बड़ा झटका इस बात से लगा है कि अदालत ने सभी को एक झटके में निर्दोष कह दिया। न्यायपालिका से उम्मीद थी कि जब इतनी बड़ी घटना घटी है तो दोषियों को सजा मिलेगी, लेकिन यहां तो फैसला बिल्कुल उल्टा आया।‘
अबू आजमी बोले- ये देरी से मिला हुआ इंसाफ है
समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने कोर्ट के फैसले पर कहा, ‘ये इंसाफ तो है, लेकिन बेहद देर से मिला है। मैं पहले दिन से ये कहता आ रहा था कि 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन सीरियल ब्लास्ट में बेकसूरों को गिरफ्तार किया गया था। जब अदालत ने उन्हें 19 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया है, तो सवाल उठता है कि क्या यही न्याय है?’
‘ये फैसला साफ तौर पर पुलिस और जांच एजेंसियों के पक्षपाती रवैये को सामने लाता है। कहीं भी बम धमाके होने पर असल गुनहगारों को पकड़ने के बजाय बेकसूर मुसलमानों को आतंकवाद के झूठे आरोपों में फंसा दिया जाता है। ये दुखद है कि इन बेगुनाहों की रिहाई भी कुछ नेताओं को नागवार गुजर रही है। ये देश में बढ़ती नफरत को दिखाता है।’
‘मेरी सरकार से मांग है कि बरी हुए सभी निर्दोषों को तत्काल घर, नौकरी और उचित आर्थिक मदद दी जाए। जिन जांच एजेंसियों ने इन बेगुनाहों को झूठे मामलों में फंसाकर जिंदगी बर्बाद की, उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही इस अन्याय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय की जानी चाहिए।’
हाईकोर्ट का फैसला- सरकारी वकील दोष साबित करने में नाकाम
बॉम्बे हाईकोर्ट कोर्ट ने 21 जुलाई को केस में फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रॉसीक्यूशन यानी सरकारी वकील आरोपियों के खिलाफ केस साबित करने में नाकाम रहे हैं।
हाईकोर्ट ने 671 पन्नों के फैसले की शुरुआत में कहा- ‘किसी अपराध के असल अपराधी को सजा देना कानून बनाए रखने के लिए एक अहम कदम है, लेकिन किसी मामले को सुलझा लेने का झूठा दिखावा करना एक भ्रामक समाधान देता है। ये जनता के भरोसे को कमजोर करता है, जबकि वास्तविकता में असली खतरा बना रहता है। ये केस यही दिखाता है।‘
कोर्ट ने एक-एक करके उन सभी स्तंभों को गिरा दिया, जिन पर निचली अदालत ने 2015 में 12 लोगों को दोषी ठहराया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ 22 जुलाई को महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है, जिस पर 24 जुलाई को सुनवाई होगी। अगर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पलट दिया तब 11 लोगों को सजा मिल सकती है।
वेलिंगटन, एजेंसी। बारिश से प्रभावित दूसरे वनडे में भारत ने न्यूजीलैंड को डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम से 4 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने 5 मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है।
वेलिंगटन में बारिश के कारण मुकाबला 47 ओवर का कर दिया गया था। टॉस जीतकर भारत ने पहले गेंदबाजी चुनी। न्यूजीलैंड की टीम 41 ओवर में 134 रन पर सिमट गई। डेरिल मिचेल ने सबसे ज्यादा 55 रन बनाए। भारत के लिए गुरनूर बरार ने 30 रन देकर 4 विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए।
135 रन का पीछा करते हुए भारत ने 26 ओवर में 7 विकेट पर 113 रन बनाए थे, तभी बारिश के कारण खेल रोकना पड़ा। इस समय DLS के तहत भारत का पार स्कोर 109 रन था। टीम इससे 4 रन आगे थी और इसी आधार पर जीत मिली। श्रेयस अय्यर ने 30, केएल राहुल ने नाबाद 26 और रोहित शर्मा ने 23 रन बनाए।
भारत ने 4 रन से जीता मुकाबला
वेलिंगटन में बारिश के कारण भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला रद्द हो गया। भारत ने DLS मेथड से 4 रन से जीत दर्ज की। न्यूजीलैंड की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 134 रन पर ऑलआउट हो गई थी। बारिश के कारण मैच दोबारा शुरू नहीं हो सका और भारत ने मुकाबला अपने नाम कर लिया।
बारिश की वजह से भारत ने 26 ओवर की बल्लेबाजी की और मैच जीत लिया।
नई दिल्ली, एजेंसी। पेट्रोल में तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलने के आरोप पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने X पर लिखा- ‘E20 अब 420 बन गया है, जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी हो रहा है।’
राहुल के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने 7 जिलों से पेट्रोल के 14 सैंपल लेकर मान्यता प्राप्त लैब में जांच कराई। इनमें 11 सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा मिली। इंडियन ऑयल के एक सैंपल में यह 31.2% और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सैंपल में 30.5% थी।
हालांकि, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने जांच के नतीजों पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का कहना है कि सैंपल की जांच तय कानूनी और तकनीकी मानकों के मुताबिक नहीं हुई।
राहुल बोले- कस्टमर के पास कोई विकल्प नहीं
ज्यादा एथेनॉल वाला पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ियों का माइलेज घट सकता है और मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है। आम लोग महंगे पेट्रोल के पैसे दे रहे हैं, लेकिन उनकी गाड़ियां इतनी ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल के लिए नहीं बनी हैं। इससे गाड़ियों को नुकसान हो सकता है और बार-बार मैकेनिक के पास जाना पड़ सकता है।
ग्राहकों को यह नहीं बताया जा रहा कि उनकी गाड़ी में कितना एथेनॉल मिला पेट्रोल डाला जा रहा है। ऐसे में उनके पास कोई विकल्प भी नहीं है।
देशभर में बिक रहे पेट्रोल में वास्तव में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिलाया जा रहा है। उन्होंने तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
तीन तेल कंपनियों ने जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कर्नाटक सरकार के विभाग ने दावा किया था कि राज्य के कुछ पेट्रोल पंपों पर बिक रहे पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 26% से 31% के बीच थी।
इस पर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने कहा कि कर्नाटक समेत देशभर में सप्लाई किया जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के तय मानक आईएस 17021 के मुताबिक है। यह मानक एथेनॉल मिले पेट्रोल के लिए तय किया गया है।
कंपनियों ने अक्टूबर में लिए गए सैंपल की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2005 के सरकारी आदेश और 2024 की मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस में सैंपल लेने, उन्हें सुरक्षित रखने, जांच कराने और रिपोर्ट देने के नियम तय हैं।
किस कंपनी के पेट्रोल में कितना एथेनॉल मिला?
लैब जांच में सामने आया कि सभी बड़ी तेल कंपनियों के पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20% की लिमिट से काफी ज्यादा थी। बेंगलुरु अर्बन सहित 7 जिलों के सैंपलों में IOCL के पेट्रोल में सबसे ज्यादा 31.2% तक एथेनॉल मिला। इसके अन्य सैंपल में 20.8% एथेनॉल पाया गया।
वहीं, HPCL के पावर पेट्रोल में 30.5% और नॉर्मल पेट्रोल में 27% एथेनॉल पाया गया। BPCL के स्पीड पेट्रोल में 26.5% और अन्य सैंपल में 24.2% और 22.6% एथेनॉल मिला।
इसके अलावा, नायरा के पेट्रोल में 26.1%, शेल के पेट्रोल में 25.5% और MRPL के पेट्रोल में 19.2% तक एथेनॉल दर्ज किया गया।
गाड़ी मालिकों को रू.1 लाख करोड़ का नुकसान
कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने कहा कि केंद्र सरकार को देश की जनता के सामने साफ करना चाहिए कि उन्हें असल में कितना एथेनॉल वाला ईंधन दिया जा रहा है। कर्नाटक सरकार के आंकड़ों के मुताबिक…
माइलेज गिरने से नुकसान: अगर पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल की वजह से माइलेज में 10% की गिरावट आती है, तो देशभर के गाड़ी मालिकों को सालाना रू.62,000 करोड़ का नुकसान होगा।
मेंटेनेंस का अतिरिक्त खर्च: गाड़ियों के इंजन खराब होने और सर्विसिंग बार-बार कराने की वजह से रू.39,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
तेल कंपनियों ने सैंपल दोबारा जांच के लिए देने की मांग की
तेल कंपनियों के मुताबिक, नियमों के तहत पेट्रोल के 1-1 लीटर के 6 सैंपल लिए जाते हैं। इनमें से 2 सैंपल पेट्रोल पंप संचालक को रसीद देकर दिए जाते हैं, 2 तेल कंपनी या संबंधित विभाग के पास रखे जाते हैं और बाकी 2 जांच के लिए तय लैब में भेजे जाते हैं।
कंपनियों ने कहा कि सैंपल के लेबल पर संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर होने चाहिए। जांच रिपोर्ट तय समय में पेट्रोल पंप संचालक और तेल कंपनी को दी जानी चाहिए।
तीनों कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से सैंपल लेने की प्रक्रिया के दस्तावेज, हर पेट्रोल पंप की जांच रिपोर्ट और जांच के तरीके की जानकारी मांगी है।
कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से सैंपल दोबारा जांच के लिए देने को कहा है। उन्होंने मांग की है कि जांच अधिकृत लैब में हो और इसमें राज्य सरकार व तेल कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहें। कंपनियों का कहना है कि उनके यहां से सप्लाई होने वाला E20 पेट्रोल बीआईएस के मानकों के मुताबिक है।
शामली, एजेंसी। हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की हत्या के दो आरोपियों ने फर्जी एनकाउंटर की आशंका जताते हुए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से सुरक्षा मांगी है। आरोपियों ने कोर्ट से कहा कि उन्हें यूपी के शामली ले जाते समय हथकड़ी, बेड़ियां और बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाई जाए, क्योंकि यूपी पुलिस उनका फर्जी एनकाउंटर कर सकती है।
इस पर कोर्ट ने जेल प्रशासन को दोनों की पेशी के दौरान पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए साथ ही कहा कि रास्ते में कोई अनहोनी न हो।
दोनों आरोपी फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। दोनों को 12 नवंबर, 2026 को शामली कोर्ट में पेश किया जाना है। शामली में 26 अगस्त को हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की जिम के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
26 अगस्त को शामली में वारदात के बाद लोगों ने अंकित का शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया था।
अंकित को 5 गोलियां लगी थीं। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
अंकित की स्कॉर्पियो के अगले शीशे पर 3 गोलियां लगी थीं। सड़क पर कई कारतूस पड़े थे।
नवंबर 2026 में हत्याकांड की साजिश में शामिल योगेश उर्फ टुंडा और दीपक उर्फ तीतर को गिरफ्तार करके कैराना कोर्ट में पेश किया था।
26 अगस्त को यूपी के शामली में एक जिम के बाहर हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
31 अगस्त 2026 को यूपी पुलिस और एसटीएफ ने कैराना में मुठभेड़ में शूटर मुहित और सुमित को मार गिराया था।
अक्टूबर 2026 फरार चल रहे आरोपी आर्यन सिंधु और सत्यम उपाध्याय की संपत्ति कुर्क की गई थी।
6 साल पहले शादी, पत्नी सरकारी टीचर
अंकित बालियान शामली के बंतीखेड़ा गांव के रहने वाले थे। वह हरियाणा के सोनीपत में रहते थे। हालांकि, पिछले कई महीनों से वह परिवार के साथ अपने गांव में रह रहे थे। उसके पिता सतबीर रिटायर्ड फौजी हैं, जबकि मां अमरेश गृहिणी हैं।
अंकित 4 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। अंकित की शादी 6 साल पहले सीमा के साथ हुई थी। सीमा दिल्ली में सरकारी टीचर हैं। दोनों के बच्चे नहीं थे।