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कोरबा

घर में आने वाले लोगों का पहनावा ना देखें, आपके प्रति उनके मन का भाव देखें-आचार्यश्री मृदुलकांत शास्त्री

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सुदामा बनकर पुकारें तो कृष्ण चले आते हैं

कोरबा। आशीर्वाद प्वाइंट, पं. दीनदयाल सांस्कृतिक भवन टीपी नगर कोरबा में कबुलपुरिया परिवार द्वारा पितृ मोक्षार्थ गया श्राद्ध निमित्त श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह महोत्सव के सातवें दिन सुदामा चरित्र एवं सुकदेव विदाई के साथ कथा को विराम दिया गया। भागवत कथा के अंतिम दिन कल हवन, सहस्त्र धारा, पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण के साथ भगवत कथा ज्ञान सप्ताह संपन्न हो जाएगा।
आज कथा के अंतिम दिन आचार्यश्री शास्त्री ने सुदामा और कृष्ण की मित्रता का वर्णन संगीतमय कथा के माध्यम से श्रोताओं को ऐसा रसपान कराया कि कथा श्रवण कर्ता स्वयं को सुदामा मानकर कृष्ण की अद्भूत लीला का आनंद लिया। संगीतमय कथा सुनकर कई श्रद्धालुओं के नेत्रों से आंसू बह रहे थे। आचार्यश्री भी सुदामा चरित्र का वर्णन करते-करते अश्रु पोंछते नजर आये। आचार्यश्री के श्रीमुख से भगवत गंगा ऐसी बह रही थी, मानो साक्षात सुदामा और कृष्ण का अद्भूत मिलन हमारी नजरों के सामने तैर रहा हो। कथा के साथ-साथ सुदामा का,कृष्ण-रूक्मिणी से भेंट करने जाते समय पर साक्षात दृश्य लोगों को ऐसा भाया, मानो मंच पर लीला हो रही हो, ऊपर से अद्भूत संगीत की धून पर लोग भाव विभोर हो रहे थे।

सुदामा चरित्र के माध्यम से आचार्य श्री शास्त्री ने संदेश दिया कि भगवान की भक्ति सुदामा का चरित्र अपनाकर करें, तो भगवान चले आते हैं। दुनिया में सुदामा से भाग्यवान कोई नहीं, जिनके स्वागत के लिए भगवान स्वयं दौड़े चले आते हैं। कृष्ण से मिलने जाने से पहले सुदामा अपनी धर्मपत्नी सुशीला से कहते हंै कि मैं मित्र से मिलने कैसे जाऊं? उन्हें देने के लिए हमारे पास कुछ नहीं। गुुरू की तरह सुशीला बोलती हैं- ठाकुर जी से मिलने के लिए आप कदम तो बढ़ाएं, बाकी व्यवस्था मैं करती हूं और उन्होंने चार घरों में जाकर भीक्षाटन से जो चावल (पोहा)मिला, उसे पोटरी में बांधकर भगवान की भेंट के लिए सुदामा को दे दिया। भगवान भाव के भूखे होते हैं। जब सुदामा द्वारिका पहुंचे तो वहां भी दरबान से हिचकते हुए कृष्ण के लिए संदेश दिया और कहा -कृष्ण से कहना कि एक गरीब ब्राम्हण सुदामापुरी (पोरबंदर) से आया है और बता रहा है कि उज्जयिनी में संदीपनी आश्रम में एक साथ शिक्षा-दीक्षा लिए हैं। दरबान ने जब कृष्ण को यह संदेश दिया, तो कृष्ण अपने प्रिय मित्र से मिलने के लिए ऐसा आतुर हुए कि वे अपने सभी व्यस्त कार्यक्रमों को छोडक़र दौड़ते हुए सुदामा से मिले और उनका भव्य स्वागत करते हुए उन्हें गले से लगाया और विनम्रता पूर्वक अंदर ले गए और अपनी गद्दी में अपने बगल में बिठाया। ऐसा दृश्य कथा स्थल पर मानो स्वर्ग का एहसास करा रहा हो। भाव विभोर श्रोतागण आचार्य श्री की कथा सुनकर ऐसा एहसास कर रहे थे कि मानो यह सब दृश्य आंखों के सामने परिलक्षित हो रहे हों। अपनी दिव्यवाणी से आचार्य श्री ने प्रहसनों के माध्यम से बताया कि जब आपके घर में कोई मिलने आता है तो उनका पहनावा न देखें, बल्कि आपके प्रति उनके मन का भाव देखें। कृष्ण ने सुदामा के जीर्णशीर्ण कपड़े, नंगे पैर को नहीं देखा और प्रिय मित्र के भाव को एहसास किया। गद्दी में बैठे सुदामा ने कृष्ण से कहा कि मित्र! मेरे गरीब ब्राम्हण के आने से राजमहल के सम्मान में आघात तो नहीं लगा? यह शब्द सुनकर कृष्ण की आंखों में आंसू आ गए और जवाब में कहा- दुनिया का सबसे प्रिय मित्र मुझसे नंगे पैर मिलने इतने दूर से आया है, मैं तो धन्य हो गया और यह महल भी सम्मान से आलोकित हो रहा है, आज मेरा प्रिय मित्र जो आया है।

आचार्य शास्त्री ने कहा कि कृष्ण ने सुदामा की झोली भर दी, लेकिन स्वाभिमान ब्राम्हण को वहां पर कुछ नहीं दिया और घर जाने के लिए विदाई दे दी। रास्ते भर सुदामा सोचता रहा कि घर में बच्चे और पत्नी भूखे होंगे और कृष्ण ने कुछ नहीं दिया। उदास मन से जब घर पहुंचा तो सुदामा की आंखें चौंधिया गईं। अपने घर को वह पहचानने में भ्रमित हुआ और घर के अंदर प्रवेश किया तो उसका घर महल जैसा और सभी सुख सुविधाओं से आबाद हो चुका था। यह मित्रता की महिमा ही है। मित्रता करनी हो तो सुदामा और कृष्ण जैसी, वरना मित्रता करें ही नहीं। जो दुख में काम आये, वही सच्चा मित्र होता है। भाव विभोर श्रद्धालुओं/ श्रोताओं की भीड़ से पूरा हॉल घंटों तक शांत था और सुदामा-कृष्ण के प्रहसन से सिर्फ मन में उनकी तस्वीरें तैर रही थीं। अद्भूत है सुदामा- कृष्ण की मित्रता। श्री शास्त्री ने कहा कि रिश्तों को प्रगाढ़ता दें और अपना स्वार्थ त्याग कर परिवार के सुख दुख में साथ रहें, मित्रता को आगे बढ़ाएं, माता-पिता का आदर करें और सेवा सत्कार से अपने जीवन को आबाद करें। समाज को कुछ देना सीखें, यही जीवन है। कथा के अंत में सुकदेव जी को विदाई दी गई और आचार्य श्री ने यहीं कथा को विराम दिया और इतने बड़े आयोजन के लिए कबुलपुरिया परिवार के सदस्यों से कहा कि स्वयं और पितरों के लिए इतना समय निकालना बड़ी बात है और जो स्वयं के लिए समय निकालें और आध्यात्म में गुजारे तो स्वयं का जीवन और पितर धन्य हो जाते हैं। आचार्य श्री के कहने पर पूरा कथा कक्ष राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा।

सुदामा और कृष्ण-रूक्मिणी की झांकी ने सबको आकर्षित किया

आज कथा के अंतिम दिन आचार्य श्री मृदुलकांत शास्त्री ने सुदामा-कृष्ण मित्रता की कथा से सबको रसपान कराया। इस अवसर पर आकर्षित सुदामा और कृष्ण-रूक्मिणी की झांकी का प्रदर्शन किया गया। सुदामा-कृष्ण मिलन अद्भूत था।

कल हवन, सहस्त्रधारा, पूर्णाहूति एवं प्रसाद वितरण

कबुलपुरिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अंतिम दिन कल प्रात: हवन-पूजन, सहस्त्रधारा और पूर्णाहूति के साथ ज्ञान यज्ञ संपन्न हो जाएगा और अंत में उपस्थितजनों को प्रसाद वितरित किया जाएगा। आयोजक परिवार ने सहस्त्रधारा का लाभ लेने कोरबा वासियों से सादर आग्रह किया है।

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कोरबा

हनुमान जन्मोत्सव (02 अप्रैल):गेवरा बस्ती चौक में हनुमान चालीसा पाठ एवं विशाल भंडारे का आयोजन

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अजय जायसवाल ने क्षेत्रवासियों को किया आमंत्रित
कोरबा/कुसमुण्डा। जिला पंचायत कोरबा के पूर्व उपाध्यक्ष अजय जायसवाल एवं श्रीमती रीना अजय जायसवाल के आतिथ्य में हनुमान मंदिर सेवा समिति गेवरा बस्ती द्वारा 02 अप्रैल 2026 हनुमान जन्मोत्सव पर संगीतमय हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया जा रहा है। पंडित श्री रमाकांत महाराज के सानिध्य में हनुमान चालीसा पाठ होगा। हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन संध्या 5.30 बजे से प्रारंभ होगा और रात्रि 8.00 बजे विशाल भंडारे का भी आयोजन होगा।
जिला पंचायत कोरबा के पूर्व उपाध्यक्ष एवं क्षेत्र के जनप्रिय नेता, समाजसेवी अजय जायसवाल ने क्षेत्र के समस्त लोगों को इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने का निवेदन किया है और पुण्य लाभ लेने की अपील की है। उन्होंने हनुमान जयंती की सभी को शुभकामनाएं प्रेषित की है।

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कोरबा

अखबार वितरक संघ के पदाधिकारियों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का जताया आभार

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प्रदेश कार्यालय की सौगात दे कर अखबार वितरकों को दिया आपने नया हौसला-रामरक्षा सिंह

कोरबा। 29 मार्च को अखबार वितरक संघ का तृतीय प्रादेशिक सम्मेलन प्रदेश कार्यालय वार्ड क्र. 15, न्यु पानी टंकी टी पी नगर कोरबा में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। दूसरी पाली में समापन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल बाहर प्रवास के कारण उपस्थित नहीं हो पाए, लेकिन उनके प्रतिनिधि के रूप में पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए और कहा कि कांग्रेस कार्यकाल में यह कार्यालय बना। पूर्व मंत्री श्री अग्रवाल कोरबा के विकास को नया आयाम दिया और इसका कोई विकल्प नहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कांग्रेस के जिला शहर अध्यक्ष मुकेश राठौर ने की, वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में ग्रामीण जिला अध्यक्ष मनोज चौहान, पार्षद रवि चंदेल, पार्षद सुखसागर निमर्लकर, पूर्व पार्षद अविनाश बंजारे, अखबार वितरक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामरक्षा सिंह, महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष सुनील पाटनकर, छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष पी एस चंदेल मंचस्थ थे और सभी ने अखबार वितरकों की समृद्धि के लिए काम करने की बात कही। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। आभार व्यक्त जिला अध्यक्ष विपेन्द्र कुमार साहू ने किया। समापन समारोह के बाद उपस्थित संघ के सदस्यों ने एकता का संकल्प लिया।


कार्यक्रम के दूसरे दिन जिला इकाई एवं राष्ट्रीय स्तर से आए राष्ट्रीय अध्यक्ष रामरक्षा सिंह सहित पदाधिकारियों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का आभार जताने उनके निवास स्थान पहुंचे और कार्यालय की सौगात देने पर श्री अग्रवाल का आभार जताया। रामरक्षा सिंह ने कहा -छोटी इकाई को बढ़ाने और अंतिम व्यक्ति की समृद्धि हो, ऐसी आपकी सोच अद्भूत है। हम आपके प्रति हमेशा आभारी रहेंगे। महाराष्ट्र के अध्यक्ष सुनील पाटनकर ने कहा कि आप भी प्रदेश में अखबार कल्याण मंडल का गठन करने का प्रयास अपने स्तर पर करेंगे, क्योंकि सत्ता पक्ष अपना काम करता है, जो नहीं होता, उसके लिए विपक्ष दबाव बनाता है और समन्वित प्रयास से कार्य सफल होता है। इस अवसर पर अन्य राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं जिला इकाई के पदाधिकारी उपस्थित थे। पूर्व मंत्री ने सभी पदाधिकारियों का सम्मान किया।

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कोरबा

चलो बचपन की ओर: 12 अप्रैल को महिलाओं के लिए खास कार्यक्रम- बचपन की टिकिट

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जीवन की आपाधापी में महिलाओं के पास स्वयं के लिए फूर्सत के पल नहीं, इसलिए महिलाओं के लिए खुशी के चार-पांच घंटे खास कार्यक्रम-सरोज पाण्डेय
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पूर्व सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय के नेतृत्व में सखी-सहेली महिला समूह द्वारा 12 अप्रैल को अशोक वाटिका के सुरम्य वादियों में महिलाओं के लिए खास कार्यक्रम होने जा रहा है। अपराह्न 4.00 बजे से अशोक वाटिका में जिले की महिलाओं के लिए बचपन की टिकिट-एक अनोखा कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। यह पूर्ण रूप से गैर राजनीतिक और पूर्णत: सामाजिक कार्यक्रम है और मुख्य रूप से बचपन में खेले जाने वाले खेल होगा और 18 से 25 एवं 25 से ऊपर उम्र की महिलाओं के लिए ऐसी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा, जो हम बचपन में खेलते थे।

प्रेस से खास संवाद कार्यक्रम में सुश्री सरोज पाण्डेय ने बताया कि जीवन की आपाधापी में महिलाओं के पास स्वयं के लिए समय नहीं बचता और इस कार्यक्रम के जरिए हम महिलाओं को बचपन की यादों में ले जाने के लिए यह खास कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे हैं, ताकि मोबाईल से दूर कुछ घंटे सामूहिक रूप से महिलाएं अपने लिए जी सकें। यह विशुद्ध रूप से रचनात्मक और सामाजिक सरोकार से जुड़ा कार्यक्रम है और सभी महिलाएं इसमें सादर आमंत्रित हैं। प्रतियोगिता में ऐसे खेलों का आयोजन किया जा रहा है, जिसे हम बचपन में खेलते थे।
सुश्री सरोज पाण्डेय ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं या टीम को सरप्राईज गिफ्ट दिया जाएगा और हमें आशा है कि यह महिलाओं को पसंद भी आएगा। 5 सांत्वना पुरूस्कार भी रखे गए हैं। महिलाओं का पंजीयन कल से प्रारंभ हो जाएगा।

शहर की महिलाओं को उनकी भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ पल निकालकर अपने बचपन को फिर से जीने का अवसर देने के उद्देश्य से एक अनोखे कार्यक्रम “बचपन की टिकट” का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में होटल गणेश इन में आयोजित प्रेस वार्ता में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय, जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, महापौर संजू देवी राजपूत, पार्षद नरेंद्र देवांगन, वरिष्ठ भाजपा नेता विकास अग्रवाल, एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, जिला मीडिया प्रभारी अर्जुन गुप्ता तथा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष प्रीति स्वर्णकार उपस्थित रहीं।

भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाओं को मिलेगा बचपन जीने का मौका – सरोज पांडेय

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय ने कहा कि सखी सहेली महिला समूह द्वारा आयोजित होने वाला यह विशेष कार्यक्रम 12 अप्रैल को शाम 4:00 बजे से 8:00 बजे तक अशोक वाटिका, कोरबा में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन खास तौर पर उन महिलाओं के लिए है, जो अपनी व्यस्त दिनचर्या में खुद को और अपने बचपन की खुशियों को कहीं पीछे छोड़ चुकी हैं। आज के तनावपूर्ण जीवन में महिलाएं अपने लिए समय नहीं निकाल पातीं और अधिकांश समय मोबाइल व जिम्मेदारियों में व्यतीत हो जाता है। ऐसे में “बचपन का टिकट” एक ऐसा मंच बनेगा, जहां महिलाएं अपने बचपन के खेल, मस्ती और यादों को फिर से जी सकेंगी।

यह कार्यक्रम पूरी तरह सामाजिक और निशुल्क रहेगा, जिसमें किसी भी प्रकार की राजनीतिक भागीदारी नहीं होगी। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि मंच केवल पुरस्कार वितरण के लिए रहेगा और सभी खेलों को खेल भावना से खेलने का आग्रह किया गया है। कार्यक्रम में आकर्षक पुरस्कारों के साथ-साथ पांच प्रकार के सांत्वना पुरस्कार भी रखे गए हैं।
बताया गया कि इस तरह का आयोजन इससे पहले दुर्ग में किया जा चुका है, जहां करीब 5000 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था। इसी सफलता को देखते हुए अब कोरबा की महिलाओं को भी इस अनोखे अनुभव से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रेस वार्ता का मुख्य उद्देश्य शहर की अधिक से अधिक महिलाओं तक यह संदेश पहुंचाना और उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित करना रहा। “बचपन का टिकट” — सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि खुद से फिर से जुड़ने का अवसर हैं।

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