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छत्तीसगढ़

नंदकुमार पटेल यूनिवर्सिटी के लिए नहीं मिल रही जमीन:200 एकड़ जमीन की तलाश, अलग-अलग 14 टीचिंग डिपार्टमेंट के लिए प्रस्ताव भी भेजा

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रायगढ़,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में शहीद नंदकुमार यूनिवर्सिटी के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। पिछले 6 साल 200 एकड़ जमीन से देखा जा रहा है, लेकिन अब तक जमीन नहीं मिल पाने के चलते केआईटी की पुरानी बिल्डिंग पर संचालित हो रही है। जिससे यूनिवर्सिटी के कई काम प्रभावित हो रहे हैं।

दरअसल, साल 2020 से शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय का संचालन किया जा रहा है। इससे पहले पॉलिटेक्निक की बिल्डिंग में यूनिवर्सिटी का काम चल रहा था, तो अब गढ़उमरिया रोड स्थित केआईटी की बिल्डिंग में संचालित है।

विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी जरूरत उसकी जमीन है। जिससे विश्विविद्यालय के अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों का काम बेहतर ढंग से संचालित हो सके। इसके बाद भी यूनिवर्सिटी के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। बताया जा रहा है कि शाहिद नंद कुमार पटेल यूनिवर्सिटी के लिए 200 एकड़ जमीन की जरूरत है।

जिससे उसमें विश्वविद्यालय के अलग-अलग शिक्षण विभागों के साथ ही अन्य काम हो सके। ऐसे में यूनिवर्सिटी के लिए जिले में दो जगह पर जमीन भी देखी गई थी, लेकिन उसमें वन भूमि क्षेत्र आने से वह भूमि यूनिवर्सिटी को नहीं मिल सकी। अब लगातार इसके लिए विश्वविद्यालय प्रयास कर रहा है।

विश्वविद्यालय के तहत 4 जिले के महाविद्यालय

  • विश्वविद्यालय के तहत चार जिले आते हैं। जिसमें जांजगीर चांपा, सक्ती, सारंगढ़ और रायगढ़ शामिल है।
  • इन चार जिलों में महाविद्यालय की एकेडमिक गतिविधियों के लिए विश्वविद्यालय काम करता है।
  • विश्वविद्यालय के तहत 136 महाविद्यालय हैं। जिसमें से करीब 40 शासकीय महाविद्यालय। बाकी 100 अशासकीय महाविद्यालय हैं।
  • विश्वविद्यायल चारों जिलों की महाविद्यायलय की परीक्षाएं आयोजित करता हैं। उनका एकेडमीक कार्य करता है।
  • छात्र चाहते थे कि पीएचडी का प्रवेश विश्वविद्यालय में शुरू हो। पीएचडी प्रवेश के लिए भी जल्द प्रक्रिया की जा रही है।

स्टाफ की भी कमी से जूझ रहा विश्वविद्यालय

बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय में अलग अलग शिक्षण विभाग शुरू करने का है। उस दिशा में भी प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया है। शुरुआती तौर पर 14 विभागों के लिए लिखा गया है।विश्वविद्यालय में स्टाफ की कमी भी देखी जा रही है।

बताया जा रहा है कि 62 पद राज्य शासन से स्वीकृत किया है। 177 पदों की स्वीकृति का प्रस्ताव राज्य शासन के पास विचाराधीन है। इन पदों पर भर्ती करने की नियुक्ती करने की अनुमती प्राप्त नहीं हुई है।

यूनिवर्सिटी के लिए जल्द जमीन मिलने की उम्मीद- कुलपति

यूनिवर्सिटी के कुलपति एलपी पटेरिया ने बताया कि, ये विश्वविद्यालय 2020 में विस्थापित हुआ। शुरुआती दौर में कोरोनाकाल में विकास की गति धीमी रही। 2022 के बाद हमने अपने गतिविधियों को गति दी। अभी कुछ काम शेष है। जैसे की विश्वविद्यायल का जमीन का आबंटन नहीं हो पाया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन, जिला प्रशासन, राज्य शासन से समन्वय स्थापित करके जमीन आबंटन के लिये काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द ही राज्य शासन की तरफ से जमीन आबंटित कर दी जाएगी।

भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए विश्वविद्यालय को कम से कम 200 एकड़ जमीन चाहिए होगी। कुछ जमीन देखी गई थी, लेकिन वनभूमि होने के कारण उसमें परेशानी आ गई है। दूसरे जमीन के लिए प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से चर्चा कर रहे हैं।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की चर्चा कोलकाता तक,व्यवसायी राजीव कुमार सिंह ने डॉ. रमन सिंह से की मुलाकात

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पूर्व मुख्यमंत्री के सुशासन और विकास कार्यों को बताया राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के विस्तार की महत्वपूर्ण प्रेरणा

सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर। कोलकाता के व्यवसायी राजीव कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के तीन बार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तथा उनके पुत्र एवं पूर्व सांसद अभिषेक सिंह से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ में हुए विकास कार्यों और सुशासन के मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में स्थापित विकास की सकारात्मक छवि ने देश के विभिन्न हिस्सों में भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुलाकात के दौरान राजीव कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने पारदर्शी प्रशासन, नियोजित आधारभूत संरचना, जनकल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय अनुशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। उनके अनुसार, इन उपलब्धियों ने भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के सामने सुशासन का एक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किया, जिसने अन्य राज्यों में भी सकारात्मक राजनीतिक संदेश पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति के लिए मजबूत प्रशासन, निवेश-अनुकूल वातावरण, कानून-व्यवस्था तथा विकासोन्मुख नीतियां आवश्यक होती हैं। छत्तीसगढ़ में इन पहलुओं पर किए गए कार्यों ने राज्य को एक अलग पहचान दिलाई, जिसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर भी होती रही है।

राजीव कुमार सिंह ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में उद्योग एवं व्यापार जगत उन राज्यों की ओर विशेष उम्मीद से देख रहा है, जहां प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और विकास को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुशासन, आर्थिक विकास और सामाजिक समरसता पर आधारित नीतियां देश के विभिन्न राज्यों में विकास की नई संभावनाओं को जन्म देंगी।

मुलाकात के दौरान डॉ. रमन सिंह और अभिषेक सिंह ने भी विकास, जनकल्याण और सुशासन के विषयों पर विचार साझा किए। इस अवसर पर प्रदेश के विकास मॉडल, निवेश की संभावनाओं तथा राष्ट्रीय स्तर पर उभरते आर्थिक अवसरों पर भी चर्चा हुई।

राजीव कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ के विकास अनुभवों को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि राज्य ने सीमित संसाधनों के बावजूद जिस प्रकार विकास और प्रशासनिक स्थिरता का उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी अध्ययन का विषय है।

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कोरबा

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले में एक लाख से अधिक आवास पूर्ण

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मनरेगा के माध्यम से हितग्राहियों को मिल रहा 90 दिवस का रोजगार

कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एक लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया है। वर्ष 2016 से अब तक जिले में कुल 1,00,013 आवासों का निर्माण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के आवासहीन एवं वंचित परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए चरणबद्ध तरीके से 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य हेतु 90 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे हितग्राहियों को मजदूरी भुगतान का लाभ भी प्राप्त होता है।

योजना के अंतर्गत एसईसीसी-2011 सर्वे तथा वर्ष 2018 में आयोजित आवास प्लस सर्वे में पात्र पाए गए परिवारों को क्रमबद्ध रूप से आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा सतत निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

जिले में वर्ष 2016 से 2023 के दौरान 61,223 आवास पूर्ण किए गए, जबकि वर्ष 2024 से 2026 के बीच 37,804 आवासों का निर्माण पूरा हुआ। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 478 आवास तथा प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 508 आवास पूर्ण किए गए हैं।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार पात्र ग्रामीण हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में एक लाख से अधिक आवासों का पूर्ण होना ग्रामीण विकास एवं जनकल्याण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

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कोरबा

05 जून पर्यावरण दिवस: छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से होगी सम्मानित

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बिलासपुर/पाली। पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति बिलासपुर, छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद, वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में 05 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस पर सरस्वती शिशु मंदिर सभागार तिलक भवन बिलासपुर में पर्यावरण सुरक्षा एवं संवर्धन विषय पर प्रतियोगिताएं, कार्यशाला, काव्य गोष्ठी, नृत्य, गीत-संगीत, फैंसी ड्रेस, बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता सहित पर्यावरण क्षेत्र में अह्म भूमिका निभाने वाली प्रतिभाओं एवं संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के मुख्य आतिथ्य में यह समारोह सम्पन्न होगा, जिसकी अध्यक्षता विनय पाठक करेंगे।इनके अलावा कई शिक्षाविद, पर्यावरणविद कार्यक्रम का गौरव बढ़ाएंगे। आईएफएस एस एस डी बड़गैया, समाजसेवी शैलेन्द्र सिंह कछवाहा, वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु कुमार तिवारी, आईएफएस नीरज जी, डॉ. अभिलाषा बेहार, आईएसएस रमेशचंद्र श्रीवास्तव, समाजसेवी राजीव नयन शर्मा, क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव, पर्यावरणविद हेमंत कुमार गौर सहित अन्य विभूतियां उपस्थित रहेंगी।

इस सम्मान समारोह में पाली स्थित छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल को भी छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुंदर एवं हरितिमा बनाने के साथ-साथ जल संरक्षण और वर्षा जलसंचयन, प्लास्टिक मुक्त अभियान एवं बच्चों द्वारा पर्यावरण जागरूकता रैलियों के माध्यम से समाज को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश देना एवं पौध रोपण जैसे विविध कार्यक्रम के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि यह विद्यालय के लिए गौरव की बात है और एक बड़ी उपलब्धि भी।

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