Connect with us

कोरबा

ललमटिया एक ऐसा गांव, जहां आज तक नहीं पहुंची विकास की रोशनी:यहां आज भी लालटेन युग

Published

on

विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो के संरक्षण एवं उनका
जीवन स्तर सुधारने में सरकारी तंत्र हो रहा फेल

ग्रामीणों ने कहा -कलेक्टर साहब खुद यहां आएं और हमें बुनियादी सुविधाएं दें

पंडो परिवार ने कहा-कलेक्टर साहब कब आएंगे हमारे गांव और हमारे गांव तथा हमारा जीवन कब समृद्ध होगा

पाली /कोरबा ।

आजादी के 76 साल बाद भी कोरबा जिले के ललमटिया में विकास की रोशनी आज तक नहीं पहुंची। यहां पंडों जनजाति निवास करती है और इंतजार है एक ऐसे जनप्रतिनिधि और अधिकारी की, जो यहां विकास की रोशनी पहुंचा सके। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि कलेक्टर साहब खुद यहां आएं और हमारी तकलीफ को समझें और हमें भी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करें। जनपद पंचायत पाली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रामाकछार के आश्रित मोहल्ला ललमटिया में निवासरत विशेष संरक्षित पिछड़ी जनजाति पंडो के संरक्षण में सरकारी तंत्र पूरी तरह फेल नजर आ रहा है। पंडो जनजाति के लोग राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाते हैं। राष्ट्रपति के इन दत्तक पुत्रों की हालत में सुधार लाने के लिए 2014 में पंडो अभिकरण बनाने के बाद भी धरातल पर कुछ नहीं दिखा। इस संरक्षित अति पिछड़ी जनजाति की अनदेखी शासन-प्रशासन कैसे कर रहा है, यह तब उजागर हुआ है, जब पाली के हमारे प्रतिनिधि ने खबर कवरेज करने के दौरान गांव ललमटिया में पहुंचे, जहां जनजातियों की बुरी स्थिति सामने आई।
विडंबना तो यह है कि वनवासी जीवनशैली और सामाजिक ताने-बाने में जीवनयापन करने वाले इस विशेष पिछड़ी जनजाति को मुख्यधारा में लाने के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। यदि इस संरक्षित जनजाति को वास्तव में संरक्षित करना है तो इसके लिए जो योजनाएं बनती हैं, वे कागजी न हों। इस समाज के कुछ युवा पढ़-लिखकर शासकीय सेवा में कार्यरत हैं। अगर इस जनजाति की नई पीढ़ी को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा, एक-एक पंडो परिवार को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी जरूरतें उपलब्ध कराई जाएंगी, तभी इन्हें संरक्षित किया जा सकता है। दरअसल, इन्हें महाभारत के पांडवों का वंशज भी माना जाता है। ललमटिया में पंडो की तीन पीढिय़ों से निवास करते आ रहे हैं। वर्तमान में 25 परिवार निवास कर रहे हैं। पण्डो सडक़,पुल पुलिया ,पानी ,बिजली जैसी जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं । पानी की समस्या का आलम यह है कि महिलाएं रोज पैदल उबड खाबड़ पथरीली रास्तों से खाई में उतरती हैं तब उन्हें ढोढ़ी का पानी मिलता है। महिलाएं जंगल के कठिन रास्ते से सर पर डेचकी (एल्युमिनियम का घड़ा)में पानी भरकर घर लाती हैं। उनकी बस्ती में एक हैंडपंप है वह भी ठीक से पानी नहीं देता। 50 वर्षों से पण्डो जनजाति के लोग रह रहे हैं लेकिन पानी के साथ सडक़ बिजली की सुविधा नहीं है। दिव्य आकाश की टीम जब पण्डो के बीच पहुंची, तब उन्होंने टीम से ही सवाल करने लग गए कि आप ही बताएं यहां क्या सुविधा दिखाई दे रही हंै? उन्होंने कहा योजना लाभ बड़े लोग ले रहे हैं उनके घरों के आसपास सभी सुविधाएं होती है। लेकिन हम पण्डो के प्रति किसी का ध्यान नहीं है। वही पीएम आवास योजना से मकान नहीं मिलने से भी खासा नाराज हैं । सक्षम लोगों को योजना के तहत मकान मंजूर हुए हैं, लेकिन एक भी गरीब परिवार को यहां मकान नहीं मिला है । यहां बताना होगा कि पण्डो जनजाति को राष्ट्रपति ने गोद लिया था, इनके विकास के लिए पांडव विकास प्राधिकरण बना है, इसके बावजूद यहां के पण्डो जनजाति के लोग पशुत्तर जिंदगी जीने मजबूर हैं
पंडो परिवार का दर्द-ए-बखान
लालटेन युग में जी रहे हम-प्रिवन पंडो


प्रिवन सिंह पंडो का कहना है कि हम पंडो परिवार रामाकछार के लालमट्टीपारा में निवास करते 50 वर्ष हो गए, लेकिन हमारा जीवन लालटेन से ऊपर नहीं आ पाया। हमने अभी तक बिजली की की रोशनी नहीं देखी। पूरी दुनिया चांद पर पहुंच गई और हम बरसात के दिनों में नाला पार कर आवागमन करते हैं। प्रशासन ने नाले में पुल तक नहीं बना पाया।
रात के अंधेरे में निकलना मुश्किल


उमेंद सिंह पंडो का कहना है कि लाईट नहीं होने से रात के अंधेरे में निकलना मुश्किल हो जाता है, बरसात के दिनों में जहरीले जंतुओं सहित जंगल में जानवरों का खतरा बना रहता है। हमें कई बार खतरों से सामना करना पड़ा।
अब तक गांव में नहीं पहुंची सडक़-इतवार सिंह


इतवार सिंह पंडो का कहना है पहुंच विहीन है हमारी बस्ती। दो से तीन किलो मीटर तक सडक़ नहीं, दो तीन किलो मीटर सडक़ बन जाए तो बस्ती तक गाडिय़ां पहुंचने लगेंगी, लेकिन 50 साल में यहां की सडक़ नहीं बनी। उन्होंने कहा- कलेक्टर साहब यहां कब आएंगे।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कोरबा

राताखार के बजरंग चौक स्थित शिव मंदिर के पास सड़क धंसी, गहरे गड्ढे से हादसे का खतरा बढ़ा

Published

on

कोरबा। नगर पालिका निगम कोरबा के वार्ड क्रमांक-4 राताखार स्थित बजरंग चौक के समीप शिव मंदिर के पास सड़क पर बना गहरा गड्ढा स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण यह गड्ढा पूरी तरह पानी से भर जाता है, जिससे इसकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। परिणामस्वरूप दोपहिया, चारपहिया और अन्य छोटे-बड़े वाहन चालक अनजाने में गड्ढे में उतर जाते हैं और वाहन फंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

बारिश के मौसम में जलभराव के कारण सड़क और गड्ढे में अंतर दिखाई नहीं देता। विशेषकर रात के समय या तेज बारिश के दौरान यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार दोपहिया वाहन चालक संतुलन खोकर गिर चुके हैं, जबकि चारपहिया वाहनों के भी गड्ढे में फंसने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे लोगों को अनावश्यक परेशानी के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र का प्रमुख आवागमन मार्ग है, जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। शिव मंदिर होने के कारण सुबह-शाम श्रद्धालुओं का भी यहां आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में सड़क पर बना यह गहरा गड्ढा किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग और नगर निगम के अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

क्षेत्रवासियों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस गड्ढे की तत्काल मरम्मत कराई जाए। जब तक स्थायी मरम्मत नहीं होती, तब तक यहां बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की जाए ताकि वाहन चालकों को पहले से सतर्क किया जा सके। नागरिकों का कहना है कि बरसात के मौसम में ऐसी लापरवाही किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। लोगों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर आमजन को राहत दिलाने की मांग की है।

Continue Reading

कोरबा

सीईओ जिला पंचायत ने निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण

Published

on

गुणवत्तायुक्त कार्य निश्चित समयावधि में पूर्ण करने के दिए निर्देश

स्व-सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा कर किया उत्साहवर्धन

विशेष ग्राम सभा झाबर में हुए शामिल, रंजना के अमृत सरोवर परिसर में किया पौधरोपण

कोरबा। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन ने गुरुवार को जनपद पंचायत कटघोरा अंतर्गत ग्राम पंचायत ढेलवाडीह, चाकाबुड़ा, देवगांव, बतारी, रंजना, झाबर एवं घुंचापुर का दौरा कर विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं तथा कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही न बरती जाए।

निरीक्षण की शुरुआत ग्राम ढेलवाडीह से हुई, जहां सीईओ ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट, सामुदायिक शौचालय, कचरा छटाई शेड एवं अटल डिजिटल सेवा केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने आसपास की पंचायतों से प्लास्टिक अपशिष्ट एकत्रित कर यूनिट की क्षमता बढ़ाने तथा सामुदायिक शौचालय के नियमित संचालन की जिम्मेदारी स्व-सहायता समूह को सौंपने के निर्देश दिए।

ग्राम चाकाबुड़ा में नवनिर्मित पीडीएस गोदाम, निर्माणाधीन पंचायत भवन एवं आंगनबाड़ी भवन का निरीक्षण करते हुए गोदाम परिसर में पौधरोपण एवं भवन के सामने सुरक्षा दीवार (रेट प्रोटेक्शन) निर्माण कराने के निर्देश दिए। इसी दौरान खुशी महिला स्व-सहायता समूह द्वारा कोकून से धागा निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन कर समूह की महिलाओं से चर्चा की तथा उनकी नई मशीन एवं शेड की मांग पर आर.एफ. एवं सी.आई.एफ. मद से प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश जनपद पंचायत को दिए, ताकि महिलाएं आजीविका गतिविधियों से जुड़कर और अधिक आत्मनिर्भर बन सकें।

प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला चाकाबुड़ा के निरीक्षण के दौरान अध्ययन समय में अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों के विरुद्ध जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिए।

ग्राम देवगांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे आवासों का निरीक्षण करते हुए हितग्राहियों को शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ कर समय पर पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया। ग्राम बतारी के बरेली हाट बाजार में निर्माणाधीन सामुदायिक शौचालय का निरीक्षण कर गुणवत्ता के साथ शीघ्र निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के क्लस्टर संगठन की बैठक में शामिल होकर समूह की महिलाओं से योजनाओं एवं आजीविका गतिविधियों पर चर्चा की तथा उनका उत्साहवर्धन किया। निर्माणाधीन महतारी सदन का निरीक्षण करते हुए समय पर कार्य पूर्ण करने तथा परिसर में बच्चों के लिए सुविधायुक्त क्रीड़ा स्थल विकसित करने के निर्देश दिए।

ग्राम रंजना में अमृत सरोवर परिसर में आम एवं जामुन सहित फलदार पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) का निरीक्षण कर मशीनों की उपयोगिता एवं वर्तमान स्थिति का अवलोकन किया तथा ग्राम पुस्तकालय का निरीक्षण करते हुए भवन के भीतर आकर्षक चित्रकारी कराने के निर्देश एसडीओ आरईएस को दिए।

सीईओ श्री जैन ग्राम झाबर में आयोजित विशेष ग्राम सभा में भी शामिल हुए। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और कहा कि एसईसीएल के समन्वय से समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल की जाएगी।

सीईओ ने ग्राम मोहनपुर के आश्रित ग्राम घुंचापुर स्थित गोबर गैस संयंत्र का निरीक्षण कर उसे शीघ्र क्रियाशील बनाने के लिए पंचायत को आवश्यक निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत कटघोरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी यशपाल सिंह, एसडीओ आरईएस ए.के. भार्गव, कार्यक्रम अधिकारी वीबी-जी राम जी योगेश चंद्रा, प्रधानमंत्री आवास बीसी श्रीमती शालिनी कंवर, उप अभियंता इन्द्र भूषण टेकाम एवं रामकुमार पोर्ते, क्षेत्रीय समन्वयक एनआरएलएम के. कश्यप, एसबीएम के अधिकारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

Continue Reading

कोरबा

वेदांता एल्युमिनियम का मुनाफा 205 प्रतिशत बढ़कर रू.6,597 करोड़, एबिटडा 134% बढ़कर रू.10,499 करोड़

Published

on

मुंबई, 30 जुलाई 2026 । भारत की सबसे बड़ी एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड (बीएसई: 544780 और एनएसई: वीएएमएल) ने 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा की। एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में अपनी पहली तिमाही में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी के बोर्ड ने रू.8 प्रति शेयर के पहले अंतरिम लाभांश को भी मंजूरी दी है।

कंपनी की आय बढ़कर अब तक के सबसे अधिक रू.21,105 करोड़ हो गई, जो पिछली तिमाही की तुलना में 13 प्रतिशत और पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 45 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी बिक्री की मात्रा और बेहतर कीमत मिलने के कारण हुई। कंपनी का एबिटडा बढ़कर रिकॉर्ड रू.10,499 करोड़ हो गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में 24 प्रतिशत और पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 134 प्रतिशत अधिक है। लागत पर बेहतर नियंत्रण के कारण कंपनी का एबिटडा मार्जिन भी बढ़कर अब तक के सबसे अधिक 50 प्रतिशत पर पहुंच गया।

कंपनी का मुनाफा रू.6,597 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में 33 प्रतिशत और पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 205 प्रतिशत अधिक है। यह कंपनी के मजबूत परिचालन प्रदर्शन को दर्शाता है। कंपनी ने कर्ज कम करके अपनी वित्तीय स्थिति को और मजबूत किया है। नेट डेट-टू-एबिटडा अनुपात वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के 1.3 गुना से सुधरकर 0.9 गुना हो गया। लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए, क्रिसिल और आईसीआरए दोनों ने वेदांता एल्युमिनियम की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाकर एए प्लस (स्टेबल) कर दी है।

कंपनी का एल्युमिनियम उत्पादन बढ़कर अब तक के सबसे अधिक 632 किलो टन रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में 3 प्रतिशत और पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है। वहीं, वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स (वीएपी) का उत्पादन भी बढ़कर अब तक के सबसे अधिक 389 किलो टन हो गया, जो पिछली तिमाही की तुलना में 4 प्रतिशत और पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। कंपनी का एल्युमिना उत्पादन 826 किलो टन रहा, जो रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने और संयंत्रों के बेहतर उपयोग के कारण पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 41 प्रतिशत अधिक है।

भारत की सबसे बड़ी एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी के रूप में, वेदांता एल्युमिनियम दुनिया के सबसे मजबूत और प्रतिस्पर्धी, पूरी तरह से एकीकृत एल्युमिनियम कारोबारों में से एक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए कंपनी कच्चे माल की नियमित और सुरक्षित उपलब्धता को लगातार मजबूत कर रही है।

कंपनी के पहली तिमाही के प्रदर्शन पर बात करते हुए, वेदांता एल्युमिनियम के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ राजेश कुमार ने कहा, “एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में हमने इस तिमाही में मजबूत परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन के साथ अपनी नई शुरुआत की है। यह हमारे मजबूत कामकाज, योजनाओं को सही तरीके से लागू करने और भविष्य की सोच का परिणाम है। बदलते वैश्विक माहौल में कच्चे माल की सुरक्षित उपलब्धता, कामकाज को बेहतर बनाने और अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर हमारा ध्यान हमारी प्रतिस्पर्धी स्थिति को मजबूत कर रहा है। इससे हमें लगातार और लंबे समय तक विकास करने में भी मदद मिल रही है। इन प्रयासों के जरिए हम भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार एक मजबूत कंपनी बना रहे हैं। साथ ही, हम अपने सभी हितधारकों के लिए लंबे समय तक बेहतर मूल्य बनाने, लागत को कम रखने और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत एल्युमिनियम कारोबार तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।”

वेदांता एल्युमिनियम के मुख्य वित्त अधिकारी अनुप अग्रवाल ने कहा, “एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में हमारी पहली तिमाही की शुरुआत मजबूत रही। कंपनी ने रू.21,105 करोड़ की रिकॉर्ड आय, रू.10,499 करोड़ का एबिटडा और रू.6,597 करोड़ का पीएटी दर्ज किया। हम मजबूत वित्तीय स्थिति, बेहतर बैलेंस शीट और बेहतर क्रेडिट रेटिंग के साथ इस नए चरण में आगे बढ़ रहे हैं। इससे हमें अपनी रणनीतिक विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अधिक लचीलापन मिलेगा। दुनिया की प्रमुख एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों में से एक के रूप में, हम अपनी एकीकृत उत्पादन श्रृंखला और लगातार बढ़ते वैल्यू-एडेड उत्पादों के माध्यम से भारत और वैश्विक बाजारों में ऊर्जा बदलाव, बुनियादी ढांचे, परिवहन, पैकेजिंग और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने का लक्ष्य रखते हैं।”

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ईएसजी की प्रमुख उपलब्धियां

• समुदायों का विकास | सामाजिक पहल: वेदांता एल्युमिनियम ने जरूरत के अनुसार किए गए सीएसआर कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 4 लाख लोगों तक मदद पहुंचाई। कौशल विकास पहलों के जरिए 72,000 लोगों को सशक्त बनाया और विभिन्न सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के माध्यम से 27 लाख महिलाओं और बच्चों को सहयोग दिया।

• पर्यावरण के लिए पहल | प्रमुख उपलब्धियां:

o स्वच्छ ऊर्जा: वेदांता एल्युमिनियम द्वारा इस्तेमाल की गई नवीकरणीय ऊर्जा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 38 प्रतिशत बढ़कर 70.1 करोड़ यूनिट हो गई। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों को मदद मिली। नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग और ऊर्जा बचाने के उपायों से कंपनी के ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन में पिछले साल की तुलना में लगभग 3 प्रतिशत की कमी आई। यह वित्त वर्ष 2021 की तुलना में 11.6 प्रतिशत कम है।

o जल संरक्षण: कंपनी ने लगभग 49 लाख घन मीटर पानी का दोबारा उपयोग किया। साथ ही, पानी को फिर से इस्तेमाल करने, उसे दोबारा उपयोग में लाने और अन्य जल स्रोतों का उपयोग करके ताजे पानी की खपत कम की।

o कचरे से उपयोगी संसाधन: कंपनी ने 120 प्रतिशत फ्लाई ऐश का उपयोग किया, जिसमें पहले से जमा फ्लाई ऐश भी शामिल है। साथ ही, रेड-टू-ग्रीन पहल के तहत रेड मड का दोबारा उपयोग बढ़ाया।

o जैव विविधता संरक्षण: कंपनी ने स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने और खदान क्षेत्रों को फिर से बेहतर बनाने पर ध्यान देते हुए जैव विविधता से जुड़ी अपनी पहलें आगे बढ़ाईं। अब तक कंपनी ने कुल 29 लाख पेड़ लगाए हैं।

• कार्यस्थल को बेहतर बनाना | कर्मचारियों से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियां: वेदांता एल्युमिनियम ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के दौरान कार्यस्थल पर सुरक्षा को और मजबूत किया। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही की तुलना में कंपनी के सुरक्षा प्रदर्शन में सुधार हुआ। इस दौरान काम के दौरान होने वाली ऐसी चोटों की संख्या में कमी आई, जिनके कारण कर्मचारियों को काम से छुट्टी लेनी पड़ी। साथ ही, ऐसी चोटों की दर में भी सुधार हुआ।

कंपनी ने वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यस्थलों पर अधिक दौरे, नियमित सुरक्षा चर्चा, महत्वपूर्ण जोखिमों के प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्था और हर कार्यस्थल की जरूरत के अनुसार किए गए उपायों के माध्यम से कार्यस्थल की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। कंपनी ने कार्यस्थल पर सभी के लिए बेहतर अवसर बढ़ाने के लिए 21 प्रतिशत लैंगिक विविधता बनाए रखी और एलजीबीटीक्यू प्लस कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 35 से अधिक की। इससे कार्यस्थल को अधिक समावेशी और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार बनाने में मदद मिली।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677