नरेंद्र मोदी :भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी की 100 वीं जयंती पर विशेष लेख
पीएम पद पर रहते हुए उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब हमेशा बेहतरीन तरीके से दिया। वो ज्यादातर समय विपक्षी दल में रहे, लेकिन नीतियों का विरोध तर्कों और शब्दों से किया। एक समय उन्हें कांग्रेस ने गद्दार तक कह दिया था, उसके बाद भी उन्होंने कभी असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।
मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं…लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं? अटल जी के ये शब्द कितने साहसी हैं…कितने गूढ़ हैं। अटल जी, कूच से नहीं डरे…उन जैसे व्यक्तित्व को किसी से डर लगता भी नहीं था। वो ये भी कहते थे… जीवन बंजारों का डेरा आज यहां, कल कहां कूच है..कौन जानता किधर सवेरा…आज अगर वो हमारे बीच होते, तो वो अपने जन्मदिन पर नया सवेरा देख रहे होते। मैं वो दिन नहीं भूलता जब उन्होंने मुझे पास बुलाकर अंकवार में भर लिया था…और जोर से पीठ में धौल जमा दी थी। वो स्नेह…वो अपनत्व…वो प्रेम…मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है।
आज 25 दिसंबर का ये दिन भारतीय राजनीति और भारतीय जनमानस के लिए एक तरह से सुशासन का अटल दिवस है। आज पूरा देश अपने भारत रत्न अटल को, उस आदर्श विभूति के रूप में याद कर रहा है, जिन्होंने अपनी सौम्यता, सहजता और सहृदयता से करोड़ों भारतीयों के मन में जगह बनाई। पूरा देश उनके योगदान के प्रति कृतज्ञ है। उनकी राजनीति के प्रति कृतार्थ है।
21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए उनकी एनडीए सरकार ने जो कदम उठाए, उसने देश को एक नई दिशा, नई गति दी। 1998 के जिस काल में उन्होंने पीएम पद संभाला, उस दौर में पूरा देश राजनीतिक अस्थिरता से घिरा हुआ था। 9 साल में देश ने चार बार लोकसभा के चुनाव देखे थे। लोगों को शंका थी कि ये सरकार भी उनकी उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाएगी। ऐसे समय में एक सामान्य परिवार से आने वाले अटल जी ने, देश को स्थिरता और सुशासन का मॉडल दिया। भारत को नव विकास की गारंटी दी।
वो ऐसे नेता थे, जिनका प्रभाव भी आज तक अटल है। वो भविष्य के भारत के परिकल्पना पुरुष थे। उनकी सरकार ने देश को आईटी, टेलीकम्यूनिकेशन और दूरसंचार की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ाया। उनके शासन काल में ही, एनडीए ने टेक्नॉलजी को सामान्य मानवी की पहुंच तक लाने का काम शुरू किया। भारत के दूर-दराज के इलाकों को बड़े शहरों से जोड़ने के सफल प्रयास किये गए। वाजपेयी जी की सरकार में शुरू हुई जिस स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने भारत के महानगरों को एक सूत्र में जोड़ा वो आज भी लोगों की स्मृतियों पर अमिट है। लोकल कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए भी एनडीए गठबंधन की सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसे कार्यक्रम शुरू किए। उनके शासन काल में दिल्ली मेट्रो शुरू हुई, जिसका विस्तार आज हमारी सरकार एक वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में कर रही है। ऐसे ही प्रयासों से उन्होंने ना सिर्फ आर्थिक प्रगति को नई शक्ति दी, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों को एक दूसरे से जोड़कर भारत की एकता को भी सशक्त किया।
जब भी सर्व शिक्षा अभियान की बात होती है, तो अटल जी की सरकार का जिक्र जरूर होता है। शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानने वाले वाजपेयी जी ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां हर व्यक्ति को आधुनिक और गुणवत्ता वाली शिक्षा मिले। वो चाहते थे भारत के वर्ग, यानि ओबीसी, एससी, एसटी, आदिवासी और महिला सभी के लिए शिक्षा सहज और सुलभ बने।
उनकी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बड़े आर्थिक सुधार किए। इन सुधारों के कारण भाई-भतीजावाद में फंसी देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली। उस दौर की सरकार के समय में जो नीतियां बनीं, उनका मूल उद्देश्य सामान्य मानवी के जीवन को बदलना ही रहा।
उनकी सरकार के कई ऐसे अद्भुत और साहसी उदाहरण हैं, जिन्हें आज भी हम देशवासी गर्व से याद करते है। देश को अब भी 11 मई 1998 का वो गौरव दिवस याद है, एनडीए सरकार बनने के कुछ ही दिन बाद पोकरण में सफल परमाणु परीक्षण हुआ। इसे ‘ऑपरेशन शक्ति’ का नाम दिया गया। इस परीक्षण के बाद दुनियाभर में भारत के वैज्ञानिकों को लेकर चर्चा होने लगी। इस बीच कई देशों ने खुलकर नाराजगी जताई, लेकिन तब की सरकार ने किसी दबाव की परवाह नहीं की। पीछे हटने की जगह 13 मई को न्यूक्लियर टेस्ट का एक और धमाका कर दिया गया। 11 मई को हुए परीक्षण ने तो दुनिया को भारत के वैज्ञानिकों की शक्ति से परिचय कराया था। लेकिन 13 मई को हुए परीक्षण ने दुनिया को ये दिखाया कि भारत का नेतृत्व एक ऐसे नेता के हाथ में है, जो एक अलग मिट्टी से बना है।
उन्होंने पूरी दुनिया को ये संदेश दिया, ये पुराना भारत नहीं है। पूरी दुनिया जान चुकी थी, कि भारत अब दबाव में आने वाला देश नहीं है। इस परमाणु परीक्षण की वजह से देश पर प्रतिबंध भी लगे, लेकिन देश ने सबका मुकाबला किया।
वाजपेयी सरकार के शासन काल में कई बार सुरक्षा संबंधी चुनौतियां आईं। करगिल युद्ध का दौर आया। संसद पर आतंकियों ने कायरना प्रहार किया। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले से वैश्विक स्थितियां बदलीं, लेकिन हर स्थिति में अटल जी के लिए भारत और भारत का हित सर्वोपरि रहा।
जब भी आप वाजपेयी जी के व्यक्तित्व के बारे में किसी से बात करेंगे तो वो यही कहेगा कि वो लोगों को अपनी तरफ खींच लेते थे। उनकी बोलने की कला का कोई सानी नहीं था। कविताओं और शब्दों में उनका कोई जवाब नहीं था। विरोधी भी वाजपेयी जी के भाषणों के मुरीद थे। युवा सांसदों के लिए वो चर्चाएं सीखने का माध्यम बनतीं।
कुछ सांसदों की संख्या लेकर भी, वो कांग्रेस की कुनीतियों का प्रखर विरोध करने में सफल होते। भारतीय राजनीति में वाजपेयी जी ने दिखाया, ईमानदारी और नीतिगत स्पष्टता का अर्थ क्या है।
संसद में कहा गया उनका ये वाक्य… सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए…आज भी मंत्र की तरह हम सबके मन में गूंजता रहता है।
वो भारतीय लोकतंत्र को समझते थे। वो ये भी जानते थे कि लोकतंत्र का मजबूत रहना कितना जरुरी है। आपातकाल के समय उन्होंने दमनकारी कांग्रेस सरकार का जमकर विरोध किया, यातनाएं झेली। जेल जाकर भी संविधान के हित का संकल्प दोहराया। NDA की स्थापना के साथ उन्होंने गठबंधन की राजनीति को नए सिरे से परिभाषित किया। वो अनेक दलों को साथ लाए और NDA को विकास, देश की प्रगति और क्षेत्रीय आकांक्षाओं का प्रतिनिधि बनाया।
पीएम पद पर रहते हुए उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब हमेशा बेहतरीन तरीके से दिया। वो ज्यादातर समय विपक्षी दल में रहे, लेकिन नीतियों का विरोध तर्कों और शब्दों से किया। एक समय उन्हें कांग्रेस ने गद्दार तक कह दिया था, उसके बाद भी उन्होंने कभी असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।
उन में सत्ता की लालसा नहीं थी। 1996 में उन्होंने जोड़-तोड़ की राजनीति ना चुनकर, इस्तीफा देने का रास्ता चुन लिया। राजनीतिक षड्यंत्रों के कारण 1999 में उन्हें सिर्फ एक वोट के अंतर के कारण पद से इस्तीफा देना पड़ा। कई लोगों ने उनसे इस तरह की अनैतिक राजनीति को चुनौती देने के लिए कहा, लेकिन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी शुचिता की राजनीति पर चले। अगले चुनाव में उन्होंने मजबूत जनादेश के साथ वापसी की।
संविधान के मूल्य संरक्षण में भी, उनके जैसा कोई नहीं था। डॉ. श्यामा प्रसाद के निधन का उनपर बहुत प्रभाव पड़ा था। वो आपात के खिलाफ लड़ाई का भी बड़ा चेहरा बने। इमरजेंसी केबाद 1977 के चुनाव से पहले उन्होंने ‘जनसंघ’ का जनता पार्टी में विलय करने पर भी सहमति जता दी। मैं जानता हूं कि ये निर्णय सहज नहीं रहा होगा, लेकिन वाजपेयी जी के लिए हर राष्ट्रभक्त कार्यकर्ता की तरह दल से बड़ा देश था, संगठन से बड़ा, संविधान था।
हम सब जानते हैं, अटल जी को भारतीय संस्कृति से भी बहुत लगाव था। भारत के विदेश मंत्री बनने के बाद जब संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण देने का अवसर आया, तो उन्होंने अपनी हिंदी से पूरे देश को खुद से जोड़ा। पहली बार किसी ने हिंदी में संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात कही। उन्होंने भारत की विरासत को विश्व पटल पर रखा। उन्होंने सामान्य भारतीय की भाषा को संयुक्त राष्ट्र के मंच तक पहुंचाया।
राजनीतिक जीवन में होने के बाद भी, वो साहित्य और अभिव्यक्ति से जुड़े रहे। वो एक ऐसे कवि और लेखक थे, जिनके शब्द हर विपरीत स्थिति में व्यक्ति को आशा और नव सृजन की प्रेरणा देते थे। वो हर उम्र के भारतीय के प्रिय थे। हर वर्ग के अपने थे।
मेरे जैसे भारतीय जनता पार्टी के असंख्य कार्यकर्ताओं को उनसे सीखने का, उनके साथ काम करने का, उनसे संवाद करने का अवसर मिला। अगर आज बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है तो इसका श्रेय उस अटल आधार को है, जिसपर ये दृढ़ संगठन खड़ा है।
उन्होंने बीजेपी की नींव तब रखी, जब कांग्रेस जैसी पार्टी का विकल्प बनना आसान नहीं था। उनका नेतृत्व, उनकी राजनीतिक दक्षता, साहस और लोकतंत्र के प्रति उनके अगाध समर्पण ने बीजेपी को भारत की लोकप्रिय पार्टी के रूप में प्रशस्त किया। श्री लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों के साथ, उन्होंने पार्टी को अनेक चुनौतियों से निकालकर सफलता के सोपान तक पहुंचाया।
जब भी सत्ता और विचारधारा के बीच एक को चुनने की स्थितियां आईं, उन्होंने इस चुनाव में विचारधारा को खुले मन से चुन लिया। वो देश को ये समझाने में सफल हुए कि कांग्रेस के दृष्टिकोण से अलग एक वैकल्पिक वैश्विक दृष्टिकोण संभव है। ऐसा दृष्टिकोण वास्तव में परिणाम दे सकता है।
आज उनका रोपित बीज, एक वटवृक्ष बनकर राष्ट्र सेवा की नव पीढ़ी को रच रहा है। अटल जी की 100वीं जयंती, भारत में सुशासन के एक राष्ट्र पुरुष की जयंती है। आइए हम सब इस अवसर पर, उनके सपनों को साकार करने के लिए मिलकर काम करें। हम एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जो सुशासन, एकता और गति के अटल सिद्धांतों का प्रतीक हो। मुझे विश्वास है, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के सिखाए सिद्धांत ऐसे ही, हमें भारत को नव प्रगति और समृद्धि के पथ पर प्रशस्त करनें की प्रेरणा देते रहेंगे।
अनूपगढ़ (श्रीगंगानगर), एजेंसी। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में रेलवे लाइन पर मंगलवार रात 9.45 बजे ब्लास्ट हो गया। अनूपगढ़-सूरतगढ़ ट्रैक पर धमाके से पहले रात 9 बजे पैसेंजर ट्रेन गुजरी थी। धमाके की आवाज 200 मीटर दूर तक सुनाई दी।
ब्लास्ट के कारण पटरी के नीचे लगे सीमेंट के दो ब्लॉक पूरी तरह से टूट गए। पटरियों के बीच 2 फीट गहरा गड्ढा हो गया।
ब्लास्ट की जानकारी के बाद आईबी, सीआईडी और एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। घटना के करीब 15 घंटे बाद बुधवार दोपहर 1.30 बजे ट्रैक के मरम्मत का काम शुरू हुआ।
घटना के कारण 8 ट्रेन कैंसिल हुई हैं।
धमाके के कारण रेलवे ट्रैक के नीचे लगे स्लीपर पूरी तरह टूट गए हैं। रेलवे ट्रैक को भी नुकसान हुआ है।
मंगलवार देर रात करीब 2 बजे रेलवे की टीम मौके पर जांच करने पहुंची। घटना को लेकर आसपास के लोगों से भी पूछताछ की गई।
धमाका इतना जोरदार था कि पटरी को ब्लॉक के साथ जोड़ने वाले लॉक भी टूट गए।
बुधवार दोपहर बाद ट्रैक के मरम्मत का काम शुरू किया गया। इससे पहले अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों की टीमों ने यहां जांच की।
ATS अधिकारी मौके पर पहुंचे
रात करीब 2 बजे आईबी और सीआईडी की टीम मौके पर पहुंची। सवा दो बजे एटीएस के एडिशनल एसपी सुरेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे।
श्रीगंगानगर एसपी हरिशंकर ने कहा- ब्लास्ट की तीव्रता कितनी थी और रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने के पीछे किसका हाथ है, इसकी जांच की जा रही है। एफएसएल की टीम यहां से सैंपल लेकर जांच करेगी।
ग्रामीणों ने सुना धमाका, रात 11 बजे पहुंची पुलिस
रामसिंहपुर सीआई राम प्रताप ने बताया- मंगलवार रात 8:30 बजे अनूपगढ़ जंक्शन से सूरतगढ़ की ओर जाने वाली ट्रेन रवाना हुई थी।
करीब 9 बजे ट्रेन 50 जीबी गांव के पास आस-पास पहुंची। ट्रेन के गुजरने के करीब 45 मिनट बाद पटरी पर धमाका हुआ।
धमाके की आवाज सुनकर 200 मीटर दूर बसे ढाणी में रहने वाले ग्रामीण पटरियों के पास पहुंचे थे। उनकी सूचना के बाद रात 11 बजे पुलिस व दूसरे अधिकारी मौके पर पहुंचे थे।
अक्टूबर में सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ा था विस्फोटक
सुरक्षा एजेंसियों ने अक्टूबर में पाकिस्तान बॉर्डर से सटे श्रीगंगानगर जिले के रावला मंडी क्षेत्र में भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री पकड़ी थी। इनमें 7.750 किलोग्राम विस्फोटक (RDX), दो जिगाना पिस्टल, चार मैगजीन और करीब 867 कारतूस थे। 5 बैटरी और दो रिमोट भी थे। हथियार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए गिराए गए।
संगरूर, एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि मैंने PM नरेंद्र मोदी को डिबेट की चुनौती दी है। मैंने उन्हें कहा है कि कहीं भी आकर मेरे साथ डिबेट कर लो, लेकिन वह मेरे सामने आकर बैठ नहीं सकते हैं। मैं गारंटी देता हूं कि 5 मिनट में उन्हें देशद्रोही साबित कर दूंगा। मोदी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नियत्रंति कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेरा अनुमान है कि मोदी सरकार एक साल में निपट जाएगी। 3 साल बाद अमित शाह होम मिनिस्टर नहीं होंगे।
ये बातें उन्होंने पंजाब के संगरूर में इंसाफ रैली के दौरान कही। संबोधन की शुरुआत में वह पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को स्टेज पर लाए।
राहुल गांधी ने कहा कि सिद्धू मूसेवाला के साथ जो हुआ, वह आज पंजाब में एक फैशन बन गया है। पंजाब में नशा सबसे बड़ा मुद्दा है। भगवंत मान दिल्ली में थे तो हमें चुटकुले सुनाते थे। सुबह 11 बजे उनके मुंह से शराब की बदबू आती थी। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर PM को बहस की चुनौती दी।
खड़गे बोले- दिल्ली में वोट चोरों की सरकार है
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि देश में वोट चोरी हुई है और कई जगह वोट चोरों की सरकार चल रही है। उन्होंने दिल्ली में बैठी सरकार वोट चोरों की सरकार है।
नई दिल्ली, एजेंसी। आंध्र प्रदेश में चक्रवाती तूफान मुरासु ने भारी तबाही मचाई है। तूफान से 2 लोगों की मौत हो गई और 52 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसलें बर्बाद हो गईं। इसके कारण 35 से ज्यादा ट्रेनें रद्द करनी पड़ी हैं।
12,230 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तूफान से राज्य को करीब रू.344 करोड़ का नुकसान हुआ है। बुधवार को भी आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में ठंड ने दस्तक दे दी है। बीते 24 घंटों में तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। बुधवार सुबह लखनऊ, वाराणसी, मुरादाबाद, बिजनौर और हापुड़ समेत 10 से अधिक जिलों में कोहरा छाया है। अगले 48 घंटे में पूर्वांचल के जिलों में बारिश की संभावना है।
दिल्ली में बुधवार सुबह वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। सुबह 7:41 बजे राजधानी का कुल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 605 दर्ज किया गया। इंडिया गेट के आसपास के इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 414 दर्ज किया गया है। इसे गंभीर श्रेणी में रखा गया है।
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देशभर से मौसम की तस्वीरें
आंध्र प्रदेश के तटीय शहर काकीनाड़ा में भारी बारिश से निचले इलाके डूब गए हैं। सड़कों पर पानी भरा हुआ है।
तूफान मुरासु के असर से ओडिशा के पुरी में मंगलवार को दिन भर हल्की बारिश होती रही।
छत्तीसगढ़ के रायपुर में मंगलवार शाम को तेज बारिश हुई।
उत्तराखंड के कई इलाकों में लगातार बर्फबारी हो रही है।
राजस्थान: सीकर-फतेहपुर में माउंट आबू जैसी सर्दी: शेखावाटी में 2 डिग्री तक गिरा पारा
राजस्थान में रात को तापमान कम होने से अब सर्दी बढ़ने लगी है। शेखावाटी के इलाकों में न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गया। वहीं सीकर और फतेहपुर में माउंट आबू जैसी सर्दी पड़ने लगी है। इसके अलावा उदयपुर, चित्तौड़गढ़ के इलाकों में भी पारा गिरने से रात में सर्दी तेज होने लगी है।
मध्य प्रदेश: तूफान ‘मुरासु’ से आज MP के 5 जिलों में बारिश, अगले 4 दिन में गिरेगा पारा
मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ का असर है। मंगलवार को कई जिलों में बादल छाए रहे। वहीं, बूंदाबांदी और आंधी की स्थिति भी रही। IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, बुधवार से तूफान का असर कम होगा।
यूपी: 24 घंटे में 4 डिग्री पारा गिरा, लखनऊ समेत 10 जिलों में कोहरा छाया
उत्तर प्रदेश में ठंड ने दस्तक दे दी है। बीते 24 घंटों में तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। सुबह और शाम के समय ठिठुरन बढ़ने लगी है। बुधवार सुबह लखनऊ, वाराणसी, मुरादाबाद, बिजनौर और हापुड़ समेत 10 से अधिक जिलों कोहरा छाया है। वहीं मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में पूर्वांचल के जिलों में बारिश की संभावना जताई है।
बिहार: ठंड ने दस्तक दी, आज सामान्य रहेगा मौसम
बिहार में ठंड की दस्तक के बीच मौसम फिलहाल स्थिर रहेगा। नवंबर के पहले सप्ताह में लोगों को दिन में धूप और रात में हल्की ठंड का सामना करना पड़ेगा। दक्षिण भारत में चक्रवाती तूफान मुरासु की गतिविधियों के बीच बिहार के मौसम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसका असर बहार में भी देखने को क मिलेगा।
हरियाणा: 12 शहरों में प्रदूषण का असर, 5 शहरों की हवा बेहद खराब, 7 में AQI 200 के पार
हरियाणा में नवंबर की शुरुआत के साथ रात के तापमान में गिरावट का दौर जारी है, लेकिन दिन में अभी गर्मी का असर बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान 14.1 डिग्री गुरुग्राम में दर्ज किया गया, जबकि सबसे अधिक अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री हिसार में रहा।
पंजाब-चंडीगढ़: दिवाली तक साफ रहेगा मौसम, सुबह-शाम बढ़ेगी ठंड, खन्ना में AQI 262 तक पहुंचा
पंजाब और चंडीगढ़ में आज 4 नवंबर को मौसम ड्राई रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 9 नवंबर तक राज्य में बारिश की कोई संभावना नहीं है। दिवाली पर भी मौसम साफ रहने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों में राज्य के अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री की मामूली गिरावट दर्ज की गई है। अब यह सामान्य के करीब पहुंच गया है। राज्य में सबसे अधिक 32.8 डिग्री तापमान फरीदकोट में दर्ज किया गया।
हिमाचल: 9 नवंबर तक साफ रहेगा मौसम, 6 दिन ठंड से राहत, ऊना का पारा 34.2॰C पहुंचा
हिमाचल प्रदेश में अगले 6 दिन मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। 9 नवंबर तक किसी भी जिले में बारिश-बर्फबारी के आसार नहीं हैं। इससे लोगों को ठंड से राहत मिलेगी।
उत्तराखंड: 11 नवंबर तक मौसम शुष्क रहेगा, उत्तरकाशी में एवलांच से 2 की मौत
उत्तराखंड के सभी जिलों में 11 नवंबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, पहाड़ी इलाकों में धुंध छाई रहेगी। सुबह और शाम ठंडी हवाएं चलेंगी, जबकि दिन में हल्के बादल छाए रह सकते हैं।