मुंबई,एजेंसी। मुंबई के दहिसर में रहने वाले प्रभाकर मिश्रा लोकल ट्रेन से घर के लिए निकले। वे विरार जाने वाली लोकल के फर्स्ट क्लास डिब्बे में गेट के पास ही खड़े थे। जोरदार धमाका हुआ। प्रभाकर को होश आया, तो उनके शरीर पर गंभीर चोटें थीं। उन्हें सुनाई भी कम दे रहा था।
उस दिन मुंबई की 7 लोकल ट्रेनों के कोच में सीरियल बम ब्लास्ट हुए। इस आतंकी हमले में 189 लोगों की मौत हो गई और 824 लोग घायल हुए। ये सभी धमाके फर्स्ट क्लास के कोच में हुए थे। प्रभाकर भी इन धमाकों के एक विक्टिम हैं। इस ब्लास्ट के 19 साल बाद 21 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है।
74 साल के प्रभाकर मिश्रा फैसले से बेहद निराश हैं, वे कहते हैं, ‘जितना बड़ा धक्का धमाके से लगा था, उतना ही अब इस फैसले से लगा है।‘ हालांकि इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। 19 साल तक सलाखों के पीछे जिंदगी गुजार चुके ये 12 आरोपी और उनके परिवार कोर्ट के शुक्रगुजार हैं। वे कहते हैं, ‘इतने सालों से हम पर लगा आतंकी होने का तमगा अब हट गया है।’
महाराष्ट्र सरकार, बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। कोर्ट के फैसले के बाद हम मुंबई और पुणे गए। ब्लास्ट के विक्टिम और उनके परिवारों से बात की। साथ ही 19 साल जेल में आरोपियों की तरह बिताने वाले लोगों के परिवार से मिले।
प्रभाकर मिश्रा, 74 साल इस फैसले ने धमाकों से ज्यादा तकलीफ दी
धमाके के वक्त प्रभाकर मिश्रा की उम्र 55 साल थी। हाल पूछने पर उन्होंने एक गहरी सांस लेकर बोलना शुरू किया।
वे 11 जुलाई 2006 की शाम को याद करते हुए कहते हैं, ‘वो मेरी जिंदगी का सबसे भयानक दिन था। मैं लोकल के फर्स्ट क्लास डिब्बे में गेट के पास खड़ा था। तभी मेरे पोते का फोन आया और पूछा- बाबा कब तक आ रहे हैं? मैं उसे जवाब दे पाता, उससे पहले ही एक कान फाड़ देने वाला धमाका हुआ।‘
‘पहले लगा कि मेरे फोन की बैटरी फट गई है। मैं नीचे गिर पड़ा और कुछ समझ नहीं आया।‘
जब होश आया तो देखा कि मेरे हाथ पर गंभीर चोटें थीं। आंखों के पास का हिस्सा जल गया था और कान के पर्दे पूरी तरह फट चुके थे। उस धमाके का असर आज तक झेल रहा हूं। मेरे एक कान से आज भी सिर्फ 40% ही सुनाई देता है।
प्रभाकर की आवाज में काफी निराशा थी। वे आगे कहते हैं, ‘आज 19 साल बाद इस फैसले से मैं उतना ही दुखी और निराश हूं, जितना उस दिन घायल होने पर था। हमें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन इस फैसले से संतुष्टि नहीं मिली। ऐसा लगता है कि जांच एजेंसियां असली दोषियों को पकड़ने या उनके खिलाफ मजबूत सबूत पेश करने में नाकाम रहीं।‘
प्रभाकर मिश्रा ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘सबूतों का अभाव कैसे हो गया? अगर ये लोग दोषी नहीं थे, तो असली अपराधी कौन है और वे कहां हैं? ये किसकी नाकामी है? क्या पुलिस ने गलत लोगों को पकड़ा या सही लोगों को भाग जाने दिया? अगर ये लोग दोषी नहीं थे, तो कोई और तो है जिसने ये सब किया।‘
रमेश विट्ठल नाइक लड़ाई यहीं खत्म न की जाए, मेरी बेटी और बाकी निर्दोषों को इंसाफ मिले
मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट के 189 मृतकों के परिवारों में से एक रमेश विट्ठल नाइक हैं। उनकी 27 साल की बेटी नंदिनी उस शाम घर नहीं लौटी। रमेश की आवाज में गुस्सा और बेबसी दोनों नजर आती है।
वे कहते हैं, ‘उस शाम ने मुझसे मेरी बेटी छीन ली। पिछले 19 साल से हम 11 जुलाई को माहिम में इकट्ठा होते हैं और अपने प्रियजनों को याद करते हैं। हर साल मेरे मन में बस एक ही सवाल आता था कि आखिर फैसला कब आएगा? हम बस ये जानना चाहते थे कि जिन आतंकवादियों ने हमारी दुनिया उजाड़ी, क्या वे वाकई जेल में हैं?‘
रमेश फैसले के बाद सवाल पूछ रहे हैं कि जब सभी निर्दोष हैं तो 19 साल उन्हें जेल में क्यों रखा और असली दोषी को क्यों नहीं पकड़ा गया?
‘अब इतने इंतजार के बाद हमें ये सुनने को मिला कि हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को ये कहकर बरी कर दिया कि उन्होंने कुछ किया ही नहीं था। ये सुनकर हमें गहरा सदमा लगा है। ये हमारे 19 साल के संघर्ष और इंतजार का अपमान है। मैं राज्य के मुख्यमंत्री से भी मिलकर पूछना चाहता हूं कि इस देश में क्या हो रहा है? जब इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ, इतने निर्दोष लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए, तो क्या वो सब झूठी कहानी थी?’
’हमारी और बाकी पीड़ित परिवारों की मांग का आखिर क्या हुआ। हम सब यही चाहते हैं कि धमाके के दोषियों को फांसी की सजा हो, लेकिन सजा देना तो दूर, उन्हें बरी कर दिया गया। हम सरकार और न्यायपालिका से अपील करते हैं कि इस लड़ाई को यहीं खत्म न किया जाए। इसे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाए, ताकि मेरी बेटी और सभी निर्दोषों को न्याय मिल सके।’
अब बरी हुए आरोपियों की बात… 19 साल बाद आतंकी होने का धब्बा धुला, लेकिन जख्म बाकी
इस कहानी का दूसरा पहलू भी है, जिन्होंने धमाके कराने के आरोप में 19 साल तक सलाखों के पीछे काटे। पुणे में रह रहे राहिल शेख से जब हमने बात की, तो उनकी आवाज में खुशी और दर्द दोनों था। छोटे भाई सोहेल शेख को बरी किए जाने पर वे कहते हैं, ‘आज मैं और मेरा पूरा परिवार देश की न्यायपालिका को सलाम करता है। वो हमारे नायक हैं, जिन पर हर इंसान को भरोसा था और आज ये भरोसा सच साबित हो गया।’
राहिल बताते हैं, ‘इस केस के बाद हम एकदम टूट गए थे। ये लगने लगा था कि हम बस हिंदुस्तान में मरने के लिए हैं। हमें कभी इंसाफ नहीं मिलेगा। दुनिया की बातों ने हमें यही महसूस कराया कि शायद ये हमारा देश नहीं है, लेकिन आज घर का बच्चा-बच्चा खुश है।’
हम अल्लाह के शुक्रगुजार हैं और अपने कानून का सम्मान करते हैं, जिसने हमारे हक में फैसला सुनाया। भाई (सोहेल) से भी फोन पर बात हुई, वो भी बहुत खुश है।
राहिल संघर्ष के दिनों को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं, ‘हमें समाज ने ‘आतंकवादी’ का तमगा दे दिया था। जब हम राशन कार्ड, गैस सिलेंडर या आधार कार्ड जैसे डॉक्यूमेंट बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में जाते, तो हमें गालियां मिलती थीं। अधिकारी कहते- ‘चले जाओ आतंकवादी, तुम्हारा भाई तो पाकिस्तान जा रहा था, तुमने रोका क्यों नहीं?, तुम्हारे भाई को तो फांसी ही लगेगी। ये सब सुनकर हमारी हिम्मत टूट जाती थी।’
हालांकि, राहिल करीबियों का शुक्रिया भी करते हैं, जिन्होंने उन्हें और उनके परिवार को हिम्मत दिलाई। वे कहते हैं, ’हमारे कई हिंदू भाई अब्बा को तसल्ली देते और कहते थे- ‘टेंशन मत लो, सब ठीक हो जाएगा। वो जरूर वापस आएगा।’
वे आगे बताते हैं, ‘जब ये घटना हुई, तब तक हमारा परिवार एक साथ था। अम्मी-अब्बा, हम तीनों भाई, बहन और जीजा सब एक जगह रहते थे, लेकिन इस केस ने सब बर्बाद कर दिया। आज सब अलग-अलग रहते हैं। इस पूरे संघर्ष में हम तो टूटे ही, लेकिन सबसे ज्यादा हमारे मां-बाप टूट गए थे। मेरे भाई और उनके परिवार ने बहुत परेशानियां झेलीं। उनके बच्चों की परवरिश में बहुत मुश्किलें आईं।’
वकील बोले- ये फैसला जांच एजेंसियों के गाल पर तमाचा
ये राहत सिर्फ आरोपी बनाए गए लोगों के परिवारों तक सीमित नहीं है। कानूनी लड़ाई लड़ रहे वकीलों के लिए भी ये ऐतिहासिक जीत है। 12 में से एक आरोपी रहे जमीर शेख की वकील ताहिरा कुरैशी ने कोर्ट के फैसले को जांच एजेंसियों की नाकामी का सबूत बताया।
ताहिरा कहती हैं, ‘इस फैसले से हम बहुत खुश हैं। खासकर तब जब निचली अदालत ने कुछ लोगों को फांसी तक की सजा सुना दी थी। ये सच है कि न्याय मिलने में बहुत देरी हुई, लेकिन हम शुक्रगुजार हैं कि आखिरकार सच की जीत हुई। मेरे मुवक्किल निर्दोष साबित हुए।‘
‘मेरे मुवक्किल को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि वे इस साजिश का हिस्सा थे और उन्होंने विदेश जाकर ट्रेनिंग ली थी। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तब वे एक सामान्य परिवार के सिर्फ 25-26 साल के युवक थे। उन्होंने शुरू से लेकर आखिर तक हमेशा यही कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। असली गुनहगारों को न पकड़ पाने की नाकामी में उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है।‘
उन्होंने आगे कहा, ‘ये फैसला जांच एजेंसियों के गाल पर तमाचा और एक बहुत बड़ा सबक है। हमें अपने मुवक्किलों के बरी होने की खुशी है।‘
‘जांच एजेंसियों को इस बारे में सोचना चाहिए कि निष्पक्ष जांच करने के बजाय क्यों ऐसे मामलों में एक खास कम्युनिटी के लोगों को निशाना बनाया जाता है। हमारा हमेशा से यही स्टैंड रहा कि इन्हें गलत तरीके से फंसाया गया। कोर्ट के फैसले ने भी इस पर मुहर लगा दी।‘
BJP लीडर किरीट सोमैया बोले- तो असली गुनहगार कौन?
कोर्ट के फैसले की चर्चा मुंबई के सियासी गलियारों में भी है। सीनियर BJP लीडर और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने जांच की दिशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, ‘इतना लंबा वक्त बीत चुका है। कई विक्टिम या उनके परिवार के लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं। कुछ दूसरी जगहों पर बस गए और कई ने ये हादसा भुलाने की कोशिश की। इस फैसले ने उन सबके जख्म फिर से ताजा कर दिए।‘
‘परिवारों को सबसे बड़ा झटका इस बात से लगा है कि अदालत ने सभी को एक झटके में निर्दोष कह दिया। न्यायपालिका से उम्मीद थी कि जब इतनी बड़ी घटना घटी है तो दोषियों को सजा मिलेगी, लेकिन यहां तो फैसला बिल्कुल उल्टा आया।‘
अबू आजमी बोले- ये देरी से मिला हुआ इंसाफ है
समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने कोर्ट के फैसले पर कहा, ‘ये इंसाफ तो है, लेकिन बेहद देर से मिला है। मैं पहले दिन से ये कहता आ रहा था कि 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन सीरियल ब्लास्ट में बेकसूरों को गिरफ्तार किया गया था। जब अदालत ने उन्हें 19 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया है, तो सवाल उठता है कि क्या यही न्याय है?’
‘ये फैसला साफ तौर पर पुलिस और जांच एजेंसियों के पक्षपाती रवैये को सामने लाता है। कहीं भी बम धमाके होने पर असल गुनहगारों को पकड़ने के बजाय बेकसूर मुसलमानों को आतंकवाद के झूठे आरोपों में फंसा दिया जाता है। ये दुखद है कि इन बेगुनाहों की रिहाई भी कुछ नेताओं को नागवार गुजर रही है। ये देश में बढ़ती नफरत को दिखाता है।’
‘मेरी सरकार से मांग है कि बरी हुए सभी निर्दोषों को तत्काल घर, नौकरी और उचित आर्थिक मदद दी जाए। जिन जांच एजेंसियों ने इन बेगुनाहों को झूठे मामलों में फंसाकर जिंदगी बर्बाद की, उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही इस अन्याय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय की जानी चाहिए।’
हाईकोर्ट का फैसला- सरकारी वकील दोष साबित करने में नाकाम
बॉम्बे हाईकोर्ट कोर्ट ने 21 जुलाई को केस में फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रॉसीक्यूशन यानी सरकारी वकील आरोपियों के खिलाफ केस साबित करने में नाकाम रहे हैं।
हाईकोर्ट ने 671 पन्नों के फैसले की शुरुआत में कहा- ‘किसी अपराध के असल अपराधी को सजा देना कानून बनाए रखने के लिए एक अहम कदम है, लेकिन किसी मामले को सुलझा लेने का झूठा दिखावा करना एक भ्रामक समाधान देता है। ये जनता के भरोसे को कमजोर करता है, जबकि वास्तविकता में असली खतरा बना रहता है। ये केस यही दिखाता है।‘
कोर्ट ने एक-एक करके उन सभी स्तंभों को गिरा दिया, जिन पर निचली अदालत ने 2015 में 12 लोगों को दोषी ठहराया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ 22 जुलाई को महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है, जिस पर 24 जुलाई को सुनवाई होगी। अगर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पलट दिया तब 11 लोगों को सजा मिल सकती है।
काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में आई बाढ़ के 13 दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीम अलग-अलग 7 हाईड्रोपॉवर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं।
अब तक 13 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि 4894 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 587 विदेशी नागरिक शामिल हैं। पहाड़ी इलाकों, टूटे रास्तों और भारी मलबे के कारण बचाव अभियान में कई मुश्किलें आ रही हैं।
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 1,356 लोगों की मौत हुई है। वहीं तिब्बत में 43 लोगों की मौत हुई है और 519 लापता हैं।
नेपाल रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी तस्वीर
चिलिमे सुरंग में बचाव कार्य जारी है। यहां कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। तस्वीर सोमवार की है।
चिलिमे टनल में नेपाल की टीम के साथ भारत की रेस्क्यू टीम भी ऑपरेशन में लगी है।
बाढ़ और भूस्खलन के बाद नेपाल के बागमती में मशीनरी से कीचड़ हटाया जा रहा है।
5 हजार लापता लोगों की रेस्क्यू की उम्मीदें कम
नेपाल हादसे को 14 दिन हो गए हैं। अभी भी लगभग 5 हजार लोग लापता हैं। जैसे ही दिन बढ़ रहे हैं, उनके रेस्क्यू की उम्मीदें भी खत्म होती जा रही है।
नेपाल ने दुनिया से जरूरी उपकरण और सामान मांगे
नेपाल सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जरूरी उपकरण और सामान मांगे हैं।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सरकार ने खास तौर पर ऐसे उपकरण मांगे हैं, जिनकी मदद से बाढ़, भूस्खलन, कीचड़ और बंद या क्षतिग्रस्त सुरंगों जैसी मुश्किल जगहों पर बचाव अभियान चलाया जा सके।
नेपाल में मौत का आंकड़ा 1357 हुआ
नेपाल में मंगलवार दोपहर 1 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक मरने वालों की संख्या बढ़कर 1357 हो गई है। इनमें से 102 शवों को परिजनों को सौंपे जा चुके हैं।
चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 6 लोग फंसे
नेपाल के चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 6 लोग फंसे हैं। इन्हें बचाने के लिए भारतीय सेना की 35 सदस्यीय टीम, नेपाल सेना और अन्य रेस्क्यू टीमें अभियान चला रही हैं।
करीब 250 मीटर लंबी टनल में टीम 130 मीटर तक पहुंच चुकी है। प्रोजेक्ट में मौजूद 71 लोग सुरक्षित निकल चुके हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने में अभी 3-4 दिन लग सकते हैं।
नेपाल ने 2 करोड़ डॉलर का मुआवजा मांगा
नेपाल ने बाढ़ से हुए नुकसान के लिए 2 करोड़ डॉलर (लगभग 189 करोड़ रुपए) का मुआवजा मांगा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने ब्रिटिश अखबार द गार्डियन को दिए इंटरव्यू में कहा कि, जिन देशों के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से जलवायु परिवर्तन बढ़ रहा है, उन्हें अब मदद के लिए आगे आना चाहिए।
नेपाल का कहना है कि वह दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 0.1% से भी कम योगदान करता है। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन का असर उस पर काफी ज्यादा पड़ रहा है। यहां तापमान दुनिया के औसत तापमान से करीब 50% ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 साल में नेपाल के पहाड़ों ने करीब एक-तिहाई बर्फ खो दी है।
लापता भारतीयों के परिजनों से DNA सैंपल मांगे गए
तिब्बत-नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद कुछ भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने इन लापता लोगों के परिवारों से DNA सैंपल जमा करने को कहा है, ताकि चीनी अधिकारी बरामद शवों की पहचान कर सकें।
7 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट – सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।
चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (22 MW) – नेपाली और भारतीय सेना की टीम करीब 115 मीटर अंदर सुरंग में पहुंची।
अपर त्रिशूली-1 (216 MW) – सुरंग में करीब 400 मीटर अंदर तक तलाशी ली गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
मेलुंग खोला (5 MW) – करीब 1 किमी के दायरे में ड्रोन से तलाशी ली गई।
त्रिशूली-3A (60 MW) – सुरंग और पावर हाउस में तलाश जारी।
त्रिशूली-3B (37 MW) – ड्रोन और थर्मल कैमरों से ऑफिस और आवासीय परिसर के आसपास तलाशी जारी है।
सागर, एजेंसी। राहुल गांधी ने सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद X पर लिखा- भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्यप्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं। दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। नए कानून बना दिए जाते हैं, लेकिन अगले हादसे तक उन्हें किसी तहखाने में डाल दिया जाता है।
उन्होंने लिखा- जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है, लेकिन मध्यप्रदेश को पता है आगे क्या होगा। कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि ये पहली बार नहीं है।
सागर के बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से अब तक करीब 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 120 से अधिक मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।
एसडीएम-एसडीओपी को हटाया, 30 के खिलाफ FIR
मामले में बंडा के एसडीएम आरती यादव और एसडीओपी प्रदीप बाल्मीकि को हटा दिया गया है।
मामले की जांच में बंबइया व्हिस्की और सागर गोल्ड नाम के दो ब्रांड सामने आए हैं। दोनों ब्रांड को लेकर दर्ज अलग-अलग एफआईआर में दो लाइसेंसी ठेकेदारों समेत 30 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
बंडा थाने की FIR में लाइसेंसी ठेकेदार यशवंत सिंह ठाकुर के खिलाफ बंबइया व्हिस्की को लेकर मामला दर्ज हुआ है, जबकि विनायका थाने की एफआईआर में लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा के खिलाफ सागर गोल्ड को लेकर मामला दर्ज किया गया है।
यह शराब गांव-गांव में किराना दुकानों से लेकर ढाबों और लाइसेंसी ठेकों तक बिकने के दावे सामने आए हैं। भर्ती मरीजों ने भी इन्हीं दो ब्रांड की शराब पीने के बाद तबीयत बिगड़ने की बात कही है। पुलिस अब शराब के निर्माण, सप्लाई और बिक्री के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
बंडा थाने में पहली FIR की कहानी…
बंडा थाने में दर्ज FIR के अनुसार, फरियादी अनूप सिंह लोधी ने बताया कि उसके गांव में करीब 8 लोग अवैध रूप से शराब बेचने का काम करते हैं। 4 सितंबर को वह अपने भतीजे राजेंद्र लोधी के साथ गांव में जुझार लोधी की दुकान पर गया था।
जुझार लोधी ने बताया कि एक नया सस्ता ब्रांड बरेठी के लाइसेंसी शराब ठेकेदार यशवंत सिंह, मनीष लोधी और आशीष साहू निवासी बंडा के द्वारा आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रविंद्र, रोहित, अनिकेत गंधर्व और माखन के माध्यम से अपनी गाड़ी से लाया गया है। उसने कहा कि यह शराब दुकान से 20 रुपए कम कीमत में मिलेगी।
अनूप सिंह ने कहा कि उसे आज शराब नहीं पीना है। इस पर राजेंद्र ने पूछा कि कहीं यह नकली या जहरीली शराब तो नहीं है। जुझार लोधी ने कथित तौर पर कहा कि ब्रांड वही है और उसे मनीष व आशीष ने शराब के फार्मूले से बनाया है। यह बाजार से 20 रुपए सस्ती मिलेगी।
इसके बाद राजेंद्र ने जुझार की दुकान से एक क्वार्टर देशी शराब बंबइया 70 रुपए में खरीदी और पी। रात में राजेंद्र अपने घर चला गया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे बंडा अस्पताल ले जाया गया, जहां से सागर रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान सागर में राजेंद्र की मौत हो गई। इसके अलावा करतार सिंह लोधी और दिग्विजय सिंह लोधी की भी शराब पीने से मौत होने की बात एफआईआर में दर्ज है।
पुलिस ने इन लोगों पर दर्ज की FIR
मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जुझार लोधी, दिनेश सिंह, सौरभ लोधी, गोविंद लोधी, मनोहर लोधी, लाइसेंसी यशवंत ठाकुर, मनीष लोधी, आशीष साहू, आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रोहित, माखन, अनिकेत गंधर्व, विशाल लोधी, मंगल रजक, विशाल लोधी और राजा सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
वहीं, विनायका थाना पुलिस ने लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा, राम सिंह लोधी, चंद्रभान राजपूत, अरविंद यादव, भगवान सिंह, मानसिंह अहिरवार समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
पुलिस द्वारा मामले में FIR कर ली गई है। शवों को गांव भेजा जा रहा है।
विनायका थाने में दर्ज दूसरी FIR की कहानी…
विनायका थाने में दर्ज FIR के अनुसार, फरियादी सुरेंद्र पिता गजराज लोधी निवासी पाटन ने शिकायत में बताया कि उसके गांव पाटन में राम सिंह, अरविंद, भगवान सिंह, देवी सिंह लोधी और मान सिंह चोरी-छिपे अवैध रूप से शराब बेचते हैं।
5 सितंबर की शाम को राम सिंह लोधी के पास से उसका भांजा रोशन पिता जगन्नाथ शराब पीकर वापस आया। घर पर उसे उल्टियां होने लगीं। सुरेंद्र ने उससे पूछा तो रोशन ने बताया कि वह गांव में राम सिंह के यहां शराब पीने गया था।
रोशन के अनुसार, राम सिंह ने बताया कि उसके पास नई शराब सस्ती आई है। इसे चंदू और चंद्रभान सिंह राजपूत तथा शराब ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा के द्वारा निर्मित कराया गया है। गद्दीदार रोहित शिवहरे, कर्मचारी राघवेंद्र सिंह, धर्मेंद्र राजपूत और सोहन सिंह के माध्यम से राम सिंह लोधी और अन्य जगहों पर इसे भेजा जाता है, जिससे शराब की कीमत कम होकर 60 रुपए में बेची जा रही है।
रोशन ने राम सिंह से पूछा कि नकली या जहरीली शराब तो नहीं है। इस पर राम सिंह ने कथित तौर पर कहा कि ब्रांड वही है और इसे शराब के फार्मूले से बनाया गया है, इसलिए बाजार से 30 रुपए सस्ता मिलेगा।
इसके बाद रोशन ने राम सिंह की दुकान से एक क्वार्टर देशी शराब सागर गोल्ड 60 रुपए में खरीदी और पी। रात में वह घर चला गया। घर आते ही उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी। उसे बंडा अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान रोशन की मौत हो गई।
ततरवारा सरपंच समेत 10 को बनाया आरोपी
मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राम सिंह लोधी निवासी पाटन, ततरवारा सरपंच चंदू उर्फ चंद्रभान पिता द्वारिका प्रसाद राजपूत निवासी ततरवारा, अरविंद पिता आशाराम यादव, भगवान सिंह पिता देवी सिंह लोधी, मानसिंह प्रताप बिहार अहिरवार, लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा, रोहित पिता उत्तम शिवहरे निवासी छतरपुर, राघवेंद्र पिता सोहन सिंह निवासी ततरवारा, धर्मेंद्र पिता भुजबल राजपूत निवासी ततरवारा और सोहन पिता उमराव सिंह राजपूत निवासी ततरवारा के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सागर मेें इस तरह की बोतल मिली थीं।
बरेठी का ठेका चला रहे थे मनीष और आशीष
शराब कांड के बाद पुलिस ने शराब कारोबार से जुड़े आरोपियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। सूत्रों की मानें तो बरेठी में स्थित शराब का ठेका आरोपी मनीष लोधी और आशीष साहू संचालित करते थे। कुछ मृतकों ने बरेठी और गूगरा खुर्द ठेके से भी शराब लेने का दावा किया है। हालांकि, प्रशासन इन बिंदुओं पर भी जांच कर रहा है।
सात शराब दुकानें सील, सैंपलिंग कराई
मामले को लेकर प्रशासन ने प्रथम दृष्टया एहतियातन बरेठी, बंडा, शाहगढ़, मगरधा, विनायका, दलपतपुर और बरायठा की शराब दुकानें सील कर दी हैं। दुकानों में मौजूद शराब की सैंपलिंग भी कराई गई है। सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।
संदिग्ध अवैध शराब मामले की एसडीएम करेंगे मजिस्ट्रियल जांच
सागर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रतिभा पाल ने सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध अवैध शराब के सेवन से हुई घटना को गंभीरता से लेते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं।
विगत दिनों सागर जिले के शाहगढ़ तहसील के ग्राम नौराज, गूगरा खुर्द तथा बंडा तहसील के ग्राम बमूरा आदि में 4 और 5 सितंबर की दरम्यानी रात संदिग्ध अमानक और अवैध शराब के सेवन के बाद ग्रामीणों के बीमार होने तथा कुछ मरीजों की मृत्यु की घटना को लेकर कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।
प्रभावित ग्रामीणों ने उल्टी, बेहोशी और शरीर में झटके जैसे लक्षणों की शिकायत के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंडा पहुंचकर उपचार कराया था। चिकित्सकों ने मरीजों का उपचार किया, लेकिन उपचार के दौरान कुछ मरीजों की मृत्यु हो गई।
गिरफ्तार आरोपियों को ले जाती हुई सागर पुलिस।
मरीजों की मौत के वास्तविक कारणों की होगी जांच
घटना के संबंध में प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि मृतकों द्वारा शराब का सेवन किया गया था, जिसे अमानक और अवैध बताया गया है। मजिस्ट्रियल जांच के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी जैसीनगर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसका वास्तविक कारण क्या था। इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी भी जानकारी जुटाई जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि मृतकों की मृत्यु का वास्तविक कारण अमानक और अवैध शराब का सेवन था या नहीं तथा शराब का निर्माण, भंडारण और वितरण किस स्तर पर और किसके द्वारा किया गया।
जांच में जिम्मेदारों की जवाबदेही होगी तय
जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित नियामकीय विभागों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई या नहीं। घटना के लिए मुख्य रूप से कौन-कौन से व्यक्ति जिम्मेदार हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए कौन से प्रशासनिक एवं कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं, इन बिंदुओं को भी जांच में शामिल किया गया है।
जिला प्रशासन ने जांच अधिकारी को सभी बिंदुओं की जांच कर स्पष्ट अभिमत सहित जांच प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मौतों का आंकड़ा बताने से बच रहा प्रशासन
शराब के मामले में लगातार मौतें सामने आ रही हैं, लेकिन प्रशासन मौतों का आंकड़ा बताने से बच रहा है। अब तक करीब 13 मौतें प्रशासन ने स्वीकार की हैं। लेकिन अन्य मौतों पर अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है। एसपी अनुराग सुजानिया और कलेक्टर प्रतिभा पाल को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
पिता-पुत्र की मौत, छोटा बेटा अस्पताल में भर्ती
बंडा के ग्राम बमूरा में एक ही परिवार में शराब का सेवन करने के बाद पिता गोविंद सिंह लोधी ने रविवार को दम तोड़ दिया था। बेटे रामप्रसाद सिंह लोधी को एयरलिफ्ट कर भोपाल एम्स भेजा गया था, जहां इलाज के दौरान रामप्रसाद की मौत हो गई। छोटा बेटा भूरे लोधी बीएमसी में भर्ती है। घर में परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
ललितपुर एएसपी बोले- सागर पुलिस ने भ्रामक जानकारी दी, कोई साक्ष्य हो तो हमें बताएं
बंडा के शराब मामले में उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से शराब आने के सागर पुलिस के दावे को लेकर अब नया विवाद सामने आया है। ललितपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कालू सिंह ने सागर पुलिस के इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि ललितपुर जिले में इस प्रकार की कोई अवैध शराब बनाए जाने की जानकारी नहीं है।
ललितपुर एएसपी ने कहा कि सागर पुलिस की ओर से मीडिया में यूपी कनेक्शन को लेकर जो जानकारी दी गई है, वह भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सागर पुलिस के पास इस मामले में ललितपुर से अवैध या जहरीली शराब आने से जुड़े कोई तथ्य या साक्ष्य हैं, तो उन्हें ललितपुर पुलिस के साथ साझा किया जाए, ताकि दोनों पुलिस मिलकर कार्रवाई कर सकें।
दमोह में शराब पीने के बाद युवक की तबीयत बिगड़ी
दमोह जिले के गणेशपुरम हरदुआ गांव में सोमवार रात ज्यादा शराब पीने के बाद एक युवक भगवान सिंह (25) पिता दामोदर गौंड की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
युवक के चचेरे भाई मूरत सिंह ने बताया कि भाई को सोमवार दोपहर दो लोगों के साथ सागर जिले के रहली थाना क्षेत्र के बलेह गया था। वहां उसने शराब पी। गांव लौटने के बाद भी उसने शराब पी। शाम को उसके मुंह से झाग निकलने लगा और उल्टियां होने लगीं।
मुंबई, एजेंसी। मुंबई में पीएम मोदी के कार्यक्रम से पहले पुलिस ने 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने दोनों को सोमवार को पकड़ा था। इसकी जानकारी मंगलवार को सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, BKC स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में 24 साल का युवक PMO का अफसर बनकर पहुंचा था। उसके साथ लोडेड रिवाल्वर लिए गार्ड भी था। जांच के दौरान दोनों को पकड़ा गया। मुंबई क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है।
पीएम मोदी शाम को करीब 5.45 बजे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 का उद्घाटन करेंगे। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का सातवां संस्करण 8 से 11 सितंबर तक मुंबई में आयोजित किया जा रहा है।
फर्जी ID दिखाकर खुद को PMO अधिकारी बताया
पुलिस के अनुसार, संदिग्ध युवक की पहचान रोहन पारेख (24) के रूप में हुई है। वह NMACC परिसर में खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का वरिष्ठ अधिकारी बताकर घूम रहा था। उसके व्यवहार और गतिविधियों पर सुरक्षा अधिकारियों को संदेह हुआ।
पीएम के कार्यक्रम को देखते हुए इलाके में पहले से ही विशेष सुरक्षा समूह (SPG) और मुंबई पुलिस की कड़ी तैनाती थी। सुरक्षा जांच के दौरान पुलिस ने रोहन को रोका और उससे पूछताछ की।
पूछताछ में रोहन ने अपनी पहचान साबित करने के लिए PMO का पहचान पत्र दिखाया। पुलिस ने जब इसकी जांच की तो पता चला कि यह पहचान पत्र फर्जी था।
बॉडीगार्ड के पास मिली लोडेड पिस्टल
रोहन के साथ उसका निजी बॉडीगार्ड भी मौजूद था। तलाशी लेने पर अंगरक्षक के पास से भरी हुई पिस्तौल बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।
कल्चरल सेंटर में एंट्री की जांच शुरू
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि फर्जी PMO पहचान पत्र रखने वाला युवक सुरक्षा जांच को पार कर NMACC परिसर तक कैसे पहुंचा।
सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रोहन ने फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल कहां-कहां किया और उसे यह कार्ड किसने उपलब्ध कराया था। इसके अलावा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के उसके वास्तविक मकसद की भी जांच की जा रही है।
2020 में शुरू हुआ ग्लोबल फिनटेक फेस्ट
2020 से GFF एक अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया है। इसमें नीति निर्माता, नियामक, केंद्रीय बैंक, वित्तीय संस्थान, फिनटेक और टेक कंपनियों समेत कई वैश्विक विशेषज्ञ वित्त के भविष्य पर चर्चा करते हैं।
GFF 2026 में नीति, नियम, तकनीक, पूंजी और उद्योग से जुड़े लोग एक मंच पर आएंगे। इसका मकसद डिजिटल पेमेंट और वित्तीय समावेशन में भारत की भूमिका मजबूत करना और नई संभावनाओं को जमीनी असर में बदलना है।