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सभी बरी तो मुंबई ब्लास्ट किसने किए, 189 किसने मारे’:विक्टिम बोले- फैसला हमारा अपमान, बरी आरोपियों ने कहा- आतंकी का दाग हटा

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मुंबई,एजेंसी। मुंबई के दहिसर में रहने वाले प्रभाकर मिश्रा लोकल ट्रेन से घर के लिए निकले। वे विरार जाने वाली लोकल के फर्स्ट क्लास डिब्बे में गेट के पास ही खड़े थे। जोरदार धमाका हुआ। प्रभाकर को होश आया, तो उनके शरीर पर गंभीर चोटें थीं। उन्हें सुनाई भी कम दे रहा था।

उस दिन मुंबई की 7 लोकल ट्रेनों के कोच में सीरियल बम ब्लास्ट हुए। इस आतंकी हमले में 189 लोगों की मौत हो गई और 824 लोग घायल हुए। ये सभी धमाके फर्स्ट क्लास के कोच में हुए थे। प्रभाकर भी इन धमाकों के एक विक्टिम हैं। इस ब्लास्ट के 19 साल बाद 21 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है।

74 साल के प्रभाकर मिश्रा फैसले से बेहद निराश हैं, वे कहते हैं, ‘जितना बड़ा धक्का धमाके से लगा था, उतना ही अब इस फैसले से लगा है।‘ हालांकि इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। 19 साल तक सलाखों के पीछे जिंदगी गुजार चुके ये 12 आरोपी और उनके परिवार कोर्ट के शुक्रगुजार हैं। वे कहते हैं, ‘इतने सालों से हम पर लगा आतंकी होने का तमगा अब हट गया है।’

महाराष्ट्र सरकार, बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। कोर्ट के फैसले के बाद हम मुंबई और पुणे गए। ब्लास्ट के विक्टिम और उनके परिवारों से बात की। साथ ही 19 साल जेल में आरोपियों की तरह बिताने वाले लोगों के परिवार से मिले।

प्रभाकर मिश्रा, 74 साल इस फैसले ने धमाकों से ज्यादा तकलीफ दी

धमाके के वक्त प्रभाकर मिश्रा की उम्र 55 साल थी। हाल पूछने पर उन्होंने एक गहरी सांस लेकर बोलना शुरू किया।

वे 11 जुलाई 2006 की शाम को याद करते हुए कहते हैं, ‘वो मेरी जिंदगी का सबसे भयानक दिन था। मैं लोकल के फर्स्ट क्लास डिब्बे में गेट के पास खड़ा था। तभी मेरे पोते का फोन आया और पूछा- बाबा कब तक आ रहे हैं? मैं उसे जवाब दे पाता, उससे पहले ही एक कान फाड़ देने वाला धमाका हुआ।‘

‘पहले लगा कि मेरे फोन की बैटरी फट गई है। मैं नीचे गिर पड़ा और कुछ समझ नहीं आया।‘

जब होश आया तो देखा कि मेरे हाथ पर गंभीर चोटें थीं। आंखों के पास का हिस्सा जल गया था और कान के पर्दे पूरी तरह फट चुके थे। उस धमाके का असर आज तक झेल रहा हूं। मेरे एक कान से आज भी सिर्फ 40% ही सुनाई देता है।

प्रभाकर की आवाज में काफी निराशा थी। वे आगे कहते हैं, ‘आज 19 साल बाद इस फैसले से मैं उतना ही दुखी और निराश हूं, जितना उस दिन घायल होने पर था। हमें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन इस फैसले से संतुष्टि नहीं मिली। ऐसा लगता है कि जांच एजेंसियां असली दोषियों को पकड़ने या उनके खिलाफ मजबूत सबूत पेश करने में नाकाम रहीं।‘

प्रभाकर मिश्रा ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘सबूतों का अभाव कैसे हो गया? अगर ये लोग दोषी नहीं थे, तो असली अपराधी कौन है और वे कहां हैं? ये किसकी नाकामी है? क्या पुलिस ने गलत लोगों को पकड़ा या सही लोगों को भाग जाने दिया? अगर ये लोग दोषी नहीं थे, तो कोई और तो है जिसने ये सब किया।‘

रमेश विट्ठल नाइक लड़ाई यहीं खत्म न की जाए, मेरी बेटी और बाकी निर्दोषों को इंसाफ मिले

मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट के 189 मृतकों के परिवारों में से एक रमेश विट्ठल नाइक हैं। उनकी 27 साल की बेटी नंदिनी उस शाम घर नहीं लौटी। रमेश की आवाज में गुस्सा और बेबसी दोनों नजर आती है।

वे कहते हैं, ‘उस शाम ने मुझसे मेरी बेटी छीन ली। पिछले 19 साल से हम 11 जुलाई को माहिम में इकट्ठा होते हैं और अपने प्रियजनों को याद करते हैं। हर साल मेरे मन में बस एक ही सवाल आता था कि आखिर फैसला कब आएगा? हम बस ये जानना चाहते थे कि जिन आतंकवादियों ने हमारी दुनिया उजाड़ी, क्या वे वाकई जेल में हैं?‘

रमेश फैसले के बाद सवाल पूछ रहे हैं कि जब सभी निर्दोष हैं तो 19 साल उन्हें जेल में क्यों रखा और असली दोषी को क्यों नहीं पकड़ा गया?

रमेश फैसले के बाद सवाल पूछ रहे हैं कि जब सभी निर्दोष हैं तो 19 साल उन्हें जेल में क्यों रखा और असली दोषी को क्यों नहीं पकड़ा गया?

‘अब इतने इंतजार के बाद हमें ये सुनने को मिला कि हाईकोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को ये कहकर बरी कर दिया कि उन्होंने कुछ किया ही नहीं था। ये सुनकर हमें गहरा सदमा लगा है। ये हमारे 19 साल के संघर्ष और इंतजार का अपमान है। मैं राज्य के मुख्यमंत्री से भी मिलकर पूछना चाहता हूं कि इस देश में क्या हो रहा है? जब इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ, इतने निर्दोष लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए, तो क्या वो सब झूठी कहानी थी?’

’हमारी और बाकी पीड़ित परिवारों की मांग का आखिर क्या हुआ। हम सब यही चाहते हैं कि धमाके के दोषियों को फांसी की सजा हो, लेकिन सजा देना तो दूर, उन्हें बरी कर दिया गया। हम सरकार और न्यायपालिका से अपील करते हैं कि इस लड़ाई को यहीं खत्म न किया जाए। इसे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाए, ताकि मेरी बेटी और सभी निर्दोषों को न्याय मिल सके।’

अब बरी हुए आरोपियों की बात… 19 साल बाद आतंकी होने का धब्बा धुला, लेकिन जख्म बाकी

इस कहानी का दूसरा पहलू भी है, जिन्होंने धमाके कराने के आरोप में 19 साल तक सलाखों के पीछे काटे। पुणे में रह रहे राहिल शेख से जब हमने बात की, तो उनकी आवाज में खुशी और दर्द दोनों था। छोटे भाई सोहेल शेख को बरी किए जाने पर वे कहते हैं, ‘आज मैं और मेरा पूरा परिवार देश की न्यायपालिका को सलाम करता है। वो हमारे नायक हैं, जिन पर हर इंसान को भरोसा था और आज ये भरोसा सच साबित हो गया।’

राहिल बताते हैं, ‘इस केस के बाद हम एकदम टूट गए थे। ये लगने लगा था कि हम बस हिंदुस्तान में मरने के लिए हैं। हमें कभी इंसाफ नहीं मिलेगा। दुनिया की बातों ने हमें यही महसूस कराया कि शायद ये हमारा देश नहीं है, लेकिन आज घर का बच्चा-बच्चा खुश है।’

हम अल्लाह के शुक्रगुजार हैं और अपने कानून का सम्मान करते हैं, जिसने हमारे हक में फैसला सुनाया। भाई (सोहेल) से भी फोन पर बात हुई, वो भी बहुत खुश है।

राहिल संघर्ष के दिनों को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं, ‘हमें समाज ने ‘आतंकवादी’ का तमगा दे दिया था। जब हम राशन कार्ड, गैस सिलेंडर या आधार कार्ड जैसे डॉक्यूमेंट बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में जाते, तो हमें गालियां मिलती थीं। अधिकारी कहते- ‘चले जाओ आतंकवादी, तुम्हारा भाई तो पाकिस्तान जा रहा था, तुमने रोका क्यों नहीं?, तुम्हारे भाई को तो फांसी ही लगेगी। ये सब सुनकर हमारी हिम्मत टूट जाती थी।’

हालांकि, राहिल करीबियों का शुक्रिया भी करते हैं, जिन्होंने उन्हें और उनके परिवार को हिम्मत दिलाई। वे कहते हैं, ’हमारे कई हिंदू भाई अब्बा को तसल्ली देते और कहते थे- ‘टेंशन मत लो, सब ठीक हो जाएगा। वो जरूर वापस आएगा।’

वे आगे बताते हैं, ‘जब ये घटना हुई, तब तक हमारा परिवार एक साथ था। अम्मी-अब्बा, हम तीनों भाई, बहन और जीजा सब एक जगह रहते थे, लेकिन इस केस ने सब बर्बाद कर दिया। आज सब अलग-अलग रहते हैं। इस पूरे संघर्ष में हम तो टूटे ही, लेकिन सबसे ज्यादा हमारे मां-बाप टूट गए थे। मेरे भाई और उनके परिवार ने बहुत परेशानियां झेलीं। उनके बच्चों की परवरिश में बहुत मुश्किलें आईं।’

वकील बोले- ये फैसला जांच एजेंसियों के गाल पर तमाचा

ये राहत सिर्फ आरोपी बनाए गए लोगों के परिवारों तक सीमित नहीं है। कानूनी लड़ाई लड़ रहे वकीलों के लिए भी ये ऐतिहासिक जीत है। 12 में से एक आरोपी रहे जमीर शेख की वकील ताहिरा कुरैशी ने कोर्ट के फैसले को जांच एजेंसियों की नाकामी का सबूत बताया।

ताहिरा कहती हैं, ‘इस फैसले से हम बहुत खुश हैं। खासकर तब जब निचली अदालत ने कुछ लोगों को फांसी तक की सजा सुना दी थी। ये सच है कि न्याय मिलने में बहुत देरी हुई, लेकिन हम शुक्रगुजार हैं कि आखिरकार सच की जीत हुई। मेरे मुवक्किल निर्दोष साबित हुए।‘

‘मेरे मुवक्किल को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि वे इस साजिश का हिस्सा थे और उन्होंने विदेश जाकर ट्रेनिंग ली थी। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तब वे एक सामान्य परिवार के सिर्फ 25-26 साल के युवक थे। उन्होंने शुरू से लेकर आखिर तक हमेशा यही कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। असली गुनहगारों को न पकड़ पाने की नाकामी में उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है।‘

उन्होंने आगे कहा, ‘ये फैसला जांच एजेंसियों के गाल पर तमाचा और एक बहुत बड़ा सबक है। हमें अपने मुवक्किलों के बरी होने की खुशी है।‘

‘जांच एजेंसियों को इस बारे में सोचना चाहिए कि निष्पक्ष जांच करने के बजाय क्यों ऐसे मामलों में एक खास कम्युनिटी के लोगों को निशाना बनाया जाता है। हमारा हमेशा से यही स्टैंड रहा कि इन्हें गलत तरीके से फंसाया गया। कोर्ट के फैसले ने भी इस पर मुहर लगा दी।‘

BJP लीडर किरीट सोमैया बोले- तो असली गुनहगार कौन?

कोर्ट के फैसले की चर्चा मुंबई के सियासी गलियारों में भी है। सीनियर BJP लीडर और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने जांच की दिशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, ‘इतना लंबा वक्त बीत चुका है। कई विक्टिम या उनके परिवार के लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं। कुछ दूसरी जगहों पर बस गए और कई ने ये हादसा भुलाने की कोशिश की। इस फैसले ने उन सबके जख्म फिर से ताजा कर दिए।‘

‘परिवारों को सबसे बड़ा झटका इस बात से लगा है कि अदालत ने सभी को एक झटके में निर्दोष कह दिया। न्यायपालिका से उम्मीद थी कि जब इतनी बड़ी घटना घटी है तो दोषियों को सजा मिलेगी, लेकिन यहां तो फैसला बिल्कुल उल्टा आया।‘

अबू आजमी बोले- ये देरी से मिला हुआ इंसाफ है

समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने कोर्ट के फैसले पर कहा, ‘ये इंसाफ तो है, लेकिन बेहद देर से मिला है। मैं पहले दिन से ये कहता आ रहा था कि 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन सीरियल ब्लास्ट में बेकसूरों को गिरफ्तार किया गया था। जब अदालत ने उन्हें 19 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया है, तो सवाल उठता है कि क्या यही न्याय है?’

‘ये फैसला साफ तौर पर पुलिस और जांच एजेंसियों के पक्षपाती रवैये को सामने लाता है। कहीं भी बम धमाके होने पर असल गुनहगारों को पकड़ने के बजाय बेकसूर मुसलमानों को आतंकवाद के झूठे आरोपों में फंसा दिया जाता है। ये दुखद है कि इन बेगुनाहों की रिहाई भी कुछ नेताओं को नागवार गुजर रही है। ये देश में बढ़ती नफरत को दिखाता है।’

‘मेरी सरकार से मांग है कि बरी हुए सभी निर्दोषों को तत्काल घर, नौकरी और उचित आर्थिक मदद दी जाए। जिन जांच एजेंसियों ने इन बेगुनाहों को झूठे मामलों में फंसाकर जिंदगी बर्बाद की, उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही इस अन्याय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय की जानी चाहिए।’

हाईकोर्ट का फैसला- सरकारी वकील दोष साबित करने में नाकाम

बॉम्बे हाईकोर्ट कोर्ट ने 21 जुलाई को केस में फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रॉसीक्यूशन यानी सरकारी वकील आरोपियों के खिलाफ केस साबित करने में नाकाम रहे हैं।

हाईकोर्ट ने 671 पन्नों के फैसले की शुरुआत में कहा- ‘किसी अपराध के असल अपराधी को सजा देना कानून बनाए रखने के लिए एक अहम कदम है, लेकिन किसी मामले को सुलझा लेने का झूठा दिखावा करना एक भ्रामक समाधान देता है। ये जनता के भरोसे को कमजोर करता है, जबकि वास्तविकता में असली खतरा बना रहता है। ये केस यही दिखाता है।‘

कोर्ट ने एक-एक करके उन सभी स्तंभों को गिरा दिया, जिन पर निचली अदालत ने 2015 में 12 लोगों को दोषी ठहराया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ 22 जुलाई को महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है, जिस पर 24 जुलाई को सुनवाई होगी। अगर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पलट दिया तब 11 लोगों को सजा मिल सकती है।

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Ram Rahim को फिर मिली 30 दिन की पैरोल, 16वीं बार आया रोहतक जेल से बाहर

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चंडीगढ़, एजेंसी। साध्वियों के यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) और एक पत्रकार की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर जेल से राहत मिल गई है। हरियाणा सरकार ने राम रहीम को इस बार 30 दिनों की पैरोल (Parole) मंजूर की है। रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा होने के बाद वह सीधे सिरसा स्थित अपने मुख्य आश्रम के लिए रवाना हो गया है। साल 2017 में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से यह १६वां मौका है जब राम रहीम पैरोल या फर्लो पर जेल से बाहर आया है।

राम रहीम को पैरोल मिलने की खबर आते ही सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में उसके समर्थकों (साध-संगत) और डेरा प्रेमियों के बीच उत्साह का माहौल है। वहीं आश्रम में राम रहीम के स्वागत के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। बता दें कि इस साल में राम रहीम को मिलने वाली यह दूसरी पैरोल है। इससे पहले वह इसी साल जनवरी महीने में भी जेल से बाहर आया था।

साध्वी यौन शोषण मामले में मिली है 20 साल की सजा

गुरमीत राम रहीम 25 अगस्त 2017 से जेल में बंद है। उसे दो अलग-अलग साध्वियों के यौन उत्पीड़न के मामलों में सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने कुल 20 साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद, इसी साल 5 जनवरी को ‘शाह सतनाम दिवस’ के मौके पर उसे 40 दिनों की पैरोल दी गई थी जिसे पूरा करने के बाद वह वापस जेल लौट गया था।

पत्रकार हत्याकांड में उम्रकैद, एक मामले में हाई कोर्ट से मिल चुकी है राहत

पत्रकार हत्याकांड: जनवरी 2019 में पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में राम रहीम को दोषी मानते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई थी।

रणजीत सिंह हत्याकांड (बरी): अक्टूबर 2021 में सीबीआई कोर्ट ने डेरा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी राम रहीम को उम्रकैद की सजा दी थी। हालांकि, करीब तीन साल बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में राम रहीम को राहत देते हुए साक्ष्यों के अभाव में पूरी तरह बरी (Acquit) कर दिया था। फिलहाल राम रहीम को मिली इस 30 दिनों की पैरोल पर एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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पुणे में ऑनलाइन ठगी का ‘महा-जाल’: कारोबारी को लगा रू.7 करोड़ का चूना; टेलीग्राम पर भारी मुनाफे का लालच देकर लुटा

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पुणे, एजेंसी। महाराष्ट्र के पुणे शहर से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शातिर गिरोह ने ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर एक कारोबारी की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये डकार लिए। पुणे के कोंढवा इलाके में रहने वाले 53 वर्षीय कारोबारी ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके साथ 7 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की गई है।

टेलीग्राम के जरिए बिछाया जाल
पुलिस के अनुसार, इस ठगी की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई थी, जब साइबर अपराधियों ने टेलीग्राम के जरिए कारोबारी से संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को निवेश और फॉरेक्स ट्रेडिंग का एक्सपर्ट बताकर कारोबारी का भरोसा जीता और उन्हें भारी मुनाफे का लालच दिया। इसके बाद उन्हें ‘PU Prime’ नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का लिंक भेजकर अकाउंट बनाने को कहा गया।

किस्तों में हड़प लिए रू.7.07 करोड़
कारोबारी को भरोसा दिलाया गया कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और उन्हें कुछ ही समय में मोटा रिटर्न मिलेगा। झांसे में आकर शिकायतकर्ता ने 10 अक्टूबर 2025 से लेकर 4 अप्रैल 2026 के बीच कई बैंक खातों में कुल 7,07,61,876 रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब लंबे समय तक कोई लाभ नहीं मिला और कारोबारी ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की, तो आरोपियों ने बहाने बनाने शुरू कर दिए। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे एक संगठित साइबर गिरोह का शिकार हो चुके हैं।

पुणे में साइबर क्राइम की ‘बाढ़’
पुणे साइबर पुलिस अब उन टेलीग्राम अकाउंट्स, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है जिनका इस्तेमाल ठगी में किया गया। गौरतलब है कि पुणे में साइबर अपराध के मामलों में डराने वाला उछाल आया है। आंकड़ों के मुताबिक, जहां साल 2022 में 357 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,504 पहुंच गई है।

पुलिस की अपील: सावधानी ही बचाव है
डीसीपी विवेक मसल ने बताया कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आम जनता को सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक, लुभावने निवेश ऑफर या टेलीग्राम ग्रुप पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी प्रकार के निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें।

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इबोला का खतरा: भारतीय हवाई अड्डों पर हाई अलर्ट; DGCA ने जारी की सख्त गाइडलाइंस, संदिग्धों के लिए विमान में होगी अलग व्यवस्था

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांगो और युगांडा जैसे अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस खतरनाक वायरस को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए विमानन कंपनियों के लिए नई और सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।

संदिग्ध यात्रियों के लिए ‘अलग’ सीटिंग और SOP जारी
DGCA द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत अब प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी। इन दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि यात्रा के दौरान कोई संदिग्ध मामला सामने आता है, तो एयरलाइंस को विमान के भीतर ही उनके लिए अलग बैठने की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यह नियम मुख्य रूप से कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों पर लागू होंगे।

हेल्थ डिक्लेरेशन और आइसोलेशन के कड़े नियम

  • अनिवार्य घोषणा पत्र: प्रभावित देशों से यात्रा करने वाले हर यात्री को विमान में चढ़ने से पहले एक ‘स्वास्थ्य घोषणा पत्र’ (Health Declaration Form) भरना होगा।
  • उड़ान के दौरान निगरानी: यदि उड़ान के दौरान किसी यात्री में इबोला जैसे लक्षण दिखते हैं, तो क्रू सदस्यों की जिम्मेदारी होगी कि उसे अन्य यात्रियों से अलग कर आइसोलेट करें।
  • APHO को रिपोर्टिंग: जो यात्री किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं या जिनमें लक्षण दिख रहे हैं, उन्हें इमिग्रेशन क्लीयरेंस से पहले हवाई अड्डा स्वास्थ्य अधिकारी (APHO) को अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना होगा।

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड पर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की है और ICMR तथा NCDC जैसी प्रमुख एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली और हैदराबाद जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमाओं पर निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यदि यात्रा के 21 दिनों के भीतर उन्हें लक्षण महसूस हों, तो तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचित करें।

इबोला के लक्षण और बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, उल्टी, कमजोरी, सिरदर्द, दस्त या शरीर से असामान्य ब्लीडिंग की समस्या हो, तो उसे तुरंत जांच करानी चाहिए। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने या लार जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से तेजी से फैलता है।

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