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छत्तीसगढ़

रायपुर : मुख्यमंत्री साय ने स्व. दिलीप सिंह जूदेव की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

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मुख्यमंत्री श्री साय ने स्व. दिलीप सिंह जूदेव की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्व. जूदेव जी केवल एक प्रखर राष्ट्रवादी ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और  सांस्कृतिक पहचान के निष्ठावान प्रहरी थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन धर्म, संस्कृति और समाजसेवा के लिए समर्पित किया। उनके नेतृत्व में प्रारंभ हुआ ‘घर वापसी’ अभियान एक ऐतिहासिक सामाजिक आंदोलन बना, जिसने हजारों लोगों को उनकी मूल सनातन परंपरा से पुनः जोड़ा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी जल, जंगल, जमीन और जनजातीय अस्मिता के सशक्त रक्षक थे। उन्होंने वनांचल क्षेत्रों में आदिवासी समाज को उनका गौरव और पहचान लौटाने के लिए सतत संघर्ष किया। उनके प्रयासों से समाज में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का विस्तार हुआ तथा जनजातीय समाज अपनी जड़ों से और अधिक मजबूती से जुड़ सका।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्व. दिलीप सिंह जूदेव की राष्ट्रवादी मूल्यों के प्रति निष्ठा, उनका अडिग संकल्प, निडरता और ओजस्वी नेतृत्व आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

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कोरबा

497.6 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज

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कोरबा। कोरबा जिले में एक जून से 27 जुलाई तक कुल 497.6 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई।
   अधीक्षक भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में जिले की तहसील कोरबा में 521 मिलीमीटर, अजगरबहार 355.8, भैंसमा, 438.4, करतला 447.3, बरपाली 531.9, कटघोरा 501.1 दीपका 533.2, दर्री 644.3, पाली 518.8, हरदीबाजार 417.2, पोंड़ी-उपरोड़ा 540.4, और पसान तहसील में 521.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

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कोरबा

महामाया एफपीओ बना किसानों की समृद्धि का मजबूत आधार, 7 लाख के कारोबार से 1.96 करोड़ तक पहुंची सफलता की उड़ान

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कोरबा। करतला विकासखंड के नवापारा में स्थापित महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित (महामाया एफपीओ) आज इस बात का जीवंत उदाहरण बन चुकी है कि यदि किसान संगठित होकर आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन और सामूहिक विपणन को अपनाएं, तो उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव लाया जा सकता है। नाबार्ड के सहयोग और सहकारिता विभाग के मार्गदर्शन में शुरू हुई यह पहल आज क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए नई उम्मीद और समृद्धि की कहानी बन गई है।

वर्ष 2015-16 में मात्र 7.09 लाख रुपये के कारोबार से शुरू हुई इस किसान उत्पादक संगठन ने निरंतर विकास करते हुए वर्ष 2024-25 में अपना कारोबार बढ़ाकर 1.96 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया। यह उपलब्धि किसानों की एकजुटता, बेहतर प्रबंधन और योजनाबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम है।
एफपीओ से जुड़े 882 किसानों और बड़ी संख्या में महिला सदस्यों को सामूहिक विपणन, गुणवत्तायुक्त कृषि आदान, प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिला। पहले जहां किसान अपनी उपज स्थानीय व्यापारियों को कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर थे, वहीं अब सामूहिक विपणन के माध्यम से उन्हें बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल रहा है। इससे किसानों की मोलभाव करने की क्षमता भी बढ़ी है।
महामाया एफपीओ ने केवल उपज की बिक्री तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि काजू प्रसंस्करण, कोल्ड प्रेस्ड ऑयल, आम एवं जामुन पल्प जैसी प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना कर कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन भी शुरू किया। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी सृजन हुआ।
एफपीओ द्वारा संचालित कृषि इनपुट सेंटर के माध्यम से किसानों को समय पर खाद, बीज और दवाइयां बाजार से कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। आधुनिक खेती की तकनीकों पर नियमित प्रशिक्षण से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और खेती की लागत में कमी आई है।
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी यह संगठन उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 200 से अधिक महिलाओं को आय अर्जित करने के अवसर मिले हैं, जिससे उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है। किसानों की औसत आय में 50 हजार रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
महामाया एफपीओ आज आम, काजू, मूंगफली, जामुन, ब्लैक राइस, नींबू, तिल, सरसों सहित अनेक कृषि उत्पादों का संग्रहण और विपणन कर रहा है। शासन के सहयोग से अब 500 किलोग्राम प्रतिदिन क्षमता वाली उन्नत काजू प्रसंस्करण इकाई और 5 टन क्षमता के डीप फ्रीजर की सुविधा भी विकसित की जा रही है, जिससे उत्पादों का बेहतर भंडारण और वर्षभर विपणन संभव हो सकेगा।
महामाया एफपीओ की सफलता यह साबित करती है कि सहकारिता, आधुनिक कृषि तकनीक, मूल्य संवर्धन और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाया जा सकता है। आज यह संगठन कोरबा जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है।

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छत्तीसगढ़

मंत्री गजेंद्र बोले- देशहित में धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा वापस लें:रमन सिंह ने कहा- फैसला जरूरी था, भूपेश बोले- Gen-Z नरसिंह अवतार, मोदी सरकार हिरण्यकश्यप

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रायपुर, एजेंसी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर लिखा- एक प्रधान का इस्तीफा हो गया है। ये भारत के युवाओं की जीत है।

इसके अलावा भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार की तुलना ‘हिरण्यकश्यप’ से की और Gen Z को नरसिंह अवतार बताया। बघेल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों की जीत है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की हार है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी प्रधान के इस्तीफे का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांत करने के लिए ये फैसला जरूरी था। वहीं प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था।

यादव ने आगे कहा कि बड़े मंत्रालय में हजारों अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर कहीं कोई चूक होती है तो उसके लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। देशहित में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

इधर, बिलासपुर में छात्रों और युवा संगठनों ने ‘विजय रैली’ निकाली। रैली के दौरान स्टूडेंट्स ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ और ’एनटीए (NTA) रद्द करो’ के नारे लगाए। वहीं, छात्रों का कहना है कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, लड़ाई अभी भी बाकी है।

भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।
भूपेश बघेल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताया।

भूपेल बोले- छात्र नरसिंह के अवतार में आए

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा की ट्रोल टीम ने सोनम वांगचुक को चीन का ऐजेंट बता दिया था और मंत्री उनको जूस पिला रहे थे। इनकी स्थिति यह है कि जब जरूरत पड़े तो ये किसी को भी अपना बाप बना ले। छात्रों के आगे किसी एजेंसी की नहीं चली। छात्र नरसिंह के अवतार में आए हैं।

रमन सिंह बोले- आंदोलन शांत करने जरूरी था फैसला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस विषय को लेकर पूरी दुनिया भर में हल्ला मचाया जा रहा था, उसकी इतिश्री हो गई। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में सख्त से सख्त कानून बनाया जाएगा। 10 करोड़ और 10 साल की सजा जैसे कठोर कानून आने वाले समय में बनाएंगे जाएंगे ताकि किसी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो।

गजेंद्र यादव बोले- देशहित में इस्तीफा वापस लें प्रधान

डॉ रमन सिंह के बयान के कुछ ही समय बाद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इससे बिल्कुल अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था। जब एक बार जांच के लिए कमेटी गठित हो गई है, फास्ट ट्रैक कोर्ट बना दिया गया है, तो उसके बाद मुझे ऐसा लगता है कि धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। बल्कि देशहित में इस्तीफा वापस ले लेना चाहिए।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।

कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।

NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।

ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।

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