दुर्ग-भिलाई,एजेंसी। दुर्ग जिले के अहिवारा नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अंकुर पांडेय पर बिल पास कराने के नाम पर 50 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगा है। 50 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप दो लोगों ने अहिवारा पालिका के सीएमओ पर लगाया गया है।
पहला आरोप पीएम आवास योजना से जुड़े आवास प्रेरक अंशुल मोराने ने लगाया है। अंशुल ने सीएमओ का पैसे के लिए दबाव बनाने एक ऑडियो भी बनाया था। जो कि अब वायरल हो रहा है। दूसरी शिकायत पीएम आवास योजना के तहत काम करने वाले वास्तुविद सलाहकार ने लगाया है। वहीं, सीएमओ ने इसे एआई जनरेटेड वाइस बताया है। उन्होंने कहा कि, मुझे फंसाने का षडयंत्र है।
क्या है पूरा मामला
पहला मामला: अहिवारा नगर पालिका परिषद और जामुल पालिका परिषद में सीएलटीसी (आवास प्रेरक) अंशुल मोराने ने शिकायत में बताया कि, प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्य के दौरान सीएमओ अंकुर पांडे की तरफ से बार-बार कमीशन की मांग की गई। मोराने ने बताया कि 30 अप्रैल 2025 को वास्तुविद सलाहकार आर्किटेक्ट राहुल देवकर को 5,78,070 रुपए का भुगतान किया गया था।
इस भुगतान के एवज में सीएमओ ने उनसे 50 प्रतिशत यानी करीब 2.89 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। लगातार दबाव बनाने के बाद उन्हें कैश 1.39 लाख रुपए दे दिया गया। लेकिन इसके बाद भी सीएमओ ने शेष राशि के लिए दबाव बनाने लगे और राशि न देने पर नौकरी से हटाने की धमकी दी। बाद में अंशुल पर कार्यों में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर उसे नौकरी से निकाल दिया।
दूसरा मामला : इसी बीच प्रधानमंत्री आवास योजना तहत कार्यरत वास्तुविद सलाहकार चितरंजन अग्रवाल ने भी भुगतान में अनियमितता और कमीशन मांगने की शिकायत पालिका अध्यक्ष से की है। अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने 1 मई 2025 को अपना बिल प्रस्तुत किया था।
लेकिन सीएमओ द्वारा 50 प्रतिशत कमीशन की मांग किए जाने के कारण अब तक भुगतान लंबित है। जबकि नगर पालिका के खाते में इस कार्य का पूरा फंड उपलब्ध है। लेकिन कमीशन न देने की वजह से पांच महीने से मेरा भुगतान अटका हुआ है।
खुद की पास करवाया बिल और मांगने लगे कमीशन
शिकायतकर्ता अंशुल ने बताया कि, आर्किटेक्ट राहुल देवकर का बिल 5.78 लाख की पास हुआ था। इसमें उन्होंने 50 प्रतिशत कमीशन रिश्वत के रूप में देने की बात की थी। यह मांग राहुल से भी की गई थी। हमने इस मामले में बचने के लिए बिल के भुगतान की मांग नहीं की थी, लेकिन सीएमओ ने खुद ही बिल निकलवाया और राशि कमीशन मांगने लगे। इसके बाद उन्हें 1.39 लाख रुपए नगद कैश दिया गया।
बिल की राशि में दो आर्किटेक्ट का हिस्सा
आर्किटेक्ट राहुल देवकर ने एक अन्य आर्किटेक्ट चितरंजन अग्रवाल के साथ मिलकर यह कार्य किया था। इसका दोनों आर्किटेक्ट के बीच एग्रीमेंट था। एग्रीमेंट के हिसाब से राहुल को राशि मिलते ही चितरंजन को पूरी राशि मिलेगी और केवल 10 प्रतिशत राशि राहुल रखेगा। पैसा मिलने के बाद राहुल ने चितरंजन को पूरा पैसा दे दिया और 10% खुद रखा। सीएमओ को 1.39 लाख की राशि देने के बाद भी वे 50 प्रतिशत के हिसाब से बाकी के डेढ़ लाख रुपए की मांग करने लगे।
शिकायतकर्ता अंशुल मोराने और चितरंजन।
आवास प्रेरक को वसूली का जिम्मा, नहीं दिया तो नौकरी से निकाला
राहुल देवकर ने रकम चितरंजन को दी थी उसमें से बाकी के डेढ़ लाख रुपए लाने के लिए सीएमओ अंकुर पांडेय ने आवास प्रेरक अंशुल मोराने पर दबाव बनाया। सीएमओ पांडेय ने अंशुल को कहा कि अगर पैसे वसूल कर नहीं लाओगे तो तुम्हारी नौकरी रहे या मत रहे, पैसा मैं किसी भी तरह तुमसे वसूल लूंगा। पैसा नहीं देने की सजा तुम्हे भुगतनी पड़ेगी।
अंशुल ने बताया कि इसके बाद 15 मई को 7 बजे के बाद शाम को सीएमओ अंकुर पांडेय ने मेरा मोबाइल रख लिया। गाड़ी पालिका में खड़ी करवा दी और अपनी गाड़ी में बैठाकर जामुल के बोगदा पुलिया के पास घासीदास तालाब के पास मुझे ले जाया गया। यहीं पर राहुल को भी बुलाया गया। यहां पर हम दोनों को धमकी दी गई। बकाया राशि डेढ़ लाख की इसे भी दिलाओ।
इसके बाद भी हमने टालने की कोशिश की। लेकिन सीएमओ लगातार दबाव बनाते रहे और मुझ पर गलत आरोप लगाकर मुझे नौकरी से निकलवा दिया। इस मामले में उन्होंने पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नंदिनी पुलिस और नगरीय प्रशासन विभाग में भी शिकायत की है।
कमीशन देने से मना किया तो रोका भुगतान
इधर, दूसरे मामले में अहिवारा नगर पालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना में पंजीकृत आर्किटेक्ट चितरंजन अग्रवाल ने कहा कि, 5 महीने पहले मैंने नगर पालिका अहिवारा के सीएमओ के पास भुगतान के लिए 2 लाख 22 हजार का बिल लगाया था। लेकिन उनके द्वारा 50 प्रतिशत घुस की मांग की गई। जिसको मैंने नकार दिया। इसके बाद 5 महीने से मुझे कोई भुगतान नहीं किया गया।
इससे पहले राहुल देवकर का काम भी स्टाफ लगाकर मैंने ही करवाया था। इसका एग्रीमेंट मेरे और राहुल देवकर के बीच हुआ था। एग्रीमेंट के अनुसार 4 लाख 39 हजार का भुगतान ऑनलाइन मुझे मिला है। बाकी प्रेशर देने पर 1.5 लाख रुपए बाद में मिला है। इस काम में भी राहुल देवकर से सीएमओ ने 50% कमीशन की मांग की थी। इसकी भी शिकायत की गई है।
अहिवारा पालिका अध्यक्ष विद्यानंद कुशवाहा।
अहिवारा पालिका अध्यक्ष बोले- शिकायत गंभीर है, जांच पूरी होने तक दूसरा सीएमओ भेजे
अहिवारा सीएमओ अंकुर पांडेय के कमीशन मांगने के मामले में अंशुल मोराने और चितरंजन अग्रवाल ने अहिवारा पालिका अध्यक्ष विद्यानंद कुशवाहा से लिखित शिकायत की है। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि सीएमओ का ऑडियो रिकार्डिंग वायरल हुआ है। हालांकि उनके द्वारा इसे नाकारा जा रहा है, ये जांच का विषय है। अगर ये सही पाया जाता है तो मामला काफी गंभीर है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री साफ कह चुके हैं कि पीएम आवास में अगर कोई भी भ्रष्टाचार और लेन-देन या कमीशनखोरी की शिकायत आती है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। सीएमओ के खिलाफ दो शिकायतें मिली है, इसके अलावा पार्षदों ने भी बैठक बुलाने का आग्रह किया है, लेकिन सीएमओ कार्यालय नहीं आ रहे थे। विषय गंभीर है। इस पर तत्काल जांच होनी चाहिए। हमने कलेक्टर, एसडीएम और नगरीय प्रशासन को पत्र भेजा है, जब तक जांच पूरी नहीं होती है सीएमओ को हटाकर दूसरा प्रभारी भेजा जाए।
कलेक्टर ने दोनों मामले में दिए जांच के निर्देश
ऑडियो वायरल होने के बाद इस मामले में गंभीरता को देखते हुए दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जांच के निर्देश दिए हैं। भिलाई-3 एसडीएम महेश सिंह राजपूत इस मामले की जांच कर रह हैं। दोनों ही शिकायतों के संबंध में एसडीएम ने जांच शुरू कर दी है।
मंगलवार की शाम को ही अहिवारा पालिका सीएमओ अंकुर पांडेय को जांच के संबंध में पूछताछ के लिए बुलाया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता चितरंजन अग्रवाल से भी पूछताछ की गई है। वहीं दूसरे शिकायतकर्ता अंशुल मोराने की शिकायत और ऑडियो के संबंध में भी सीएमओ से पक्ष जाना जा रहा है।
आरोपों पर सीएमओ बोले- ऑडियो फर्जी और एआई से बना हुआ।
आरोपों पर सीएमओ बोले- ऑडियो फर्जी और एआई से बना हुआ
इस मामले में सीएमओ अंकुर पांडेय ने कहा कि, यह आरोप मुझे फंसाने के लिए किया जा रहा है। क्योंकि कुछ मामलों में मैंने इन प्रतिनिधियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है और नोटिस भेजा है। जिसने आरोप लगाया है वो कई बार कार्यों में लापरवाही बरत चुका है, पहले भी उसे काम से हटाया जा सका है।
मुझे फंसाने के लिए इस तरह का षडयंत्र किया जा रहा है। इसकी जानकारी मैंने पुलिस समेत अपने उच्च अधिकारियों को दे दी है। ऑडियो पूरी तरह फर्जी है। इसे एआई से बनाया गया है। जांच के बाद सारी चीजें साफ हो जाएंगी।
कोरबा। जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर ने लोक स्वास्थय यांत्रिकी विभाग को निर्देशित किया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों को संबंधित ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए तथा जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) उनका क्रॉस वेरिफिकेशन करें। उन्होंने निर्देश दिए कि मार्च 2028 तक सभी लंबित कार्य पूर्ण कर लिए जाएं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिन योजनाओं में नल से नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, उन्हीं कार्यों का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने ग्राम स्तर पर जल एवं स्वच्छता समितियों की नियमित बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिए। पाली के वनांचल क्षेत्र में योजना की दुर्गति कोरबा जिले के पाली ब्लाक के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के कार्यों की दुर्गति है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड कोरबा के कार्यपालन अभियंता रमन उरांव को जानकारी देने के बाद भी साल भर से निरीक्षण करने का समय तक नहीं मिला। क्षेत्र में काम करने वाले ठेकेदारों ने केन्द्र की इस महत्वाकांक्षी योजना का बंटाधार कर दिया है और यदि सही जांच कराई जाए तो करोड़ों का भ्रष्टाचार निकलेगा। जल जीवन मिशन में कार्य करने वाले ठेकेदार करोड़पति बन गए और इनके तथा अधिकारियों की मिलीभगत से जहां योजना का लाभ अधिकांश एवं गांवों को नहीं मिल पा रहा है, वहीं गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों से योजना प्रारंभ होने से पहले ही दम तोड़ रही है और ठेकेदार भी कार्यवाही के अभाव में मदमस्त हैं।
मानदेय शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत पर प्रधानपाठकों की वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश कोरबा। समय सीमा की बैठक में मंगलवार को कलेक्टर कुणाल दुदावत के तेवर सख्त दिखे। उन्होंने शिक्षा विभाग की समीक्षा में विभाग की लापरवाही देखी। शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों के वितरण एवं स्कूलवार स्कैनिंग कार्य की समीक्षा की। मानदेय शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी संबंधी प्राप्त शिकायतों के निराकरण में प्रगति नहीं होने पर कलेक्टर ने संबंधित प्रधानपाठकों की वेतनवृद्धि रोकने तथा जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने विकासखंड कोरबा एवं पोड़ी-उपरोड़ा में स्कैनिंग की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए 31 जुलाई तक सभी विकासखंडों में शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने वेंडर से समन्वय कर सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत बालिकाओं को शीघ्र साइकिल वितरण सुनिश्चित करने तथा स्कूली विद्यार्थियों को गणवेश का दूसरा सेट उपलब्ध कराने के लिए उच्च अधिकारियों से समन्वय करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने पीएम पोषण गार्डन के लिए विद्यालयों की जानकारी 31 जुलाई तक उपलब्ध कराने, अहाताविहीन विद्यालयों की सूची तैयार करने तथा संबंधित जनपद पंचायतों के सीईओ को सरपंच एवं सचिव के माध्यम से उसका सत्यापन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अपार आईडी से वंचित विद्यार्थियों के लिए 1 अगस्त से 31 अगस्त तक विशेष शिविर आयोजित कर अपार आईडी बनाने तथा आधार एवं यू-डाइस से संबंधित त्रुटियों का निराकरण करने के निर्देश दिए। छात्र सुरक्षा बीमा की राशि समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने की शिकायत के मामले में कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के संबंधित शाखा प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
कोरबा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने विकासखंड कटघोरा अंतर्गत संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, छुरीकला में विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं से संबंधित प्राप्त गंभीर शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथयपरक जांच कर एक सप्ताह के भीतर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राचार्य को हटाने बच्चों ने विधायक पटेल और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन के काफिले का कर दिया था घेराव
गठित जांच समिति में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा, तहसीलदार कटघोरा, सहायक लेखा अधिकारी तथा कनिष्ठ लेखा अधिकारी (कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, कोरबा) को सदस्य बनाया गया है। समिति विद्यालय में उपलब्ध व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों को प्रदत्त सुविधाओं तथा शिकायतों से जुड़े सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच करेगी। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के हितों एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। शिकायतों की निष्पक्ष जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सहायक आयुक्त की कार्यशैली पर भी सवाल!
एकलव्य आवासीय विद्यालय में बच्चों ने कुछ दिन पूर्व पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन सहायक आयुक्त को निरीक्षण करने का समय ही नहीं मिला। महीनों से बच्चों को दूषित भोजन दिया जा रहा, लेकिन सहायक आयुक्त को कुछ पता ही नहीं।