रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव की तुलना बंदर से की थी। इस टिप्पणी पर साहू समाज ने भूपेश बघेल के खिलाफ नाराजगी जताई है। छत्तीसगढ़ साहू समाज ने सभी जिलों में SP को ज्ञापन सौंपेगा। समाज ने कहा कि भूपेश बघेल 10 दिन के अंदर माफी मांगे नहीं तो आंदोलन किया जाएगा।
बता दें कि भूपेश बघेल ने बिलासपुर दौरे के दौरान जंगल की कहानी के जरिए डिप्टी सीएम अरुण साव पर तंज कसा था। छत्तीसगढ़ी में बयान देते हुए बघेल ने कहा था कि ‘जंगल के सभी राजा मन मिल के बेंदरा ल राजा बना दिन’।
इस मामले में अरुण साव की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि इतने वरिष्ठ नेता की भाषा और शब्दों में मर्यादा होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस ने कहा कि भूपेश बघेल ने अपने भाषण में सिर्फ एक कहानी का उदाहरण दिया था, किसी भी जाति, धर्म या समुदाय का अपमान करने का उनका कोई इरादा नहीं था। साहू समाज से अपील है पूरा वीडियो देखे और उसके बाद ही कोई निर्णय लें।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने बिलासपुर दौरे के दौरान डिप्टी सीएम साव पर तंज कसा था।
बिलासपुर में पूर्व सीएम ने दिया था बयान
बता दें कि, 29 दिसंबर 2025 पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर के लिंगियाडीह पहुंचे थे। जहां उन्होंने बस्ती उजाड़ने को लेकर पिछले 37 दिन से चल रहे स्थानीय आंदोलन का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव पर तीखा हमला बोला था।
उन्होंने कहा कि लिंगियाडीह बस्ती को तोड़कर जो गार्डन बनाया जा रहा है, “क्या मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ वहां घूमने आएंगे।” 2 साल में केवल 950 मीटर सड़क बन सकी और किसी भी मामले में काम नहीं हो पा रहा। उन्होंने स्थानीय लोगों से कहा कि वे डटे रहें, कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा।
भूपेश बघेल के इस बयान पर विवाद
अरुण साव पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि साव का नगरीय निकाय, PWD विभाग, जल जीवन मिशन किसी विभाग में काम नहीं चल रहा है।
अरुण साव की स्थिति ये है कि एक बार जंगल में ये मामला उठा कि शेर ही हमेशा राजा बनता है, इस बार शेर बदलना चाहिए। तो देखे की सबसे ज्यादा सक्रिय बंदर है। जंगल के सभी जानवरों ने मिलकर बंदर को राजा बना दिया लेकिन एक बार बघवा हिरण के बच्चे को ले गया।
हिरण के बच्चे को बचाने के लिए बंदर इस पेड़ से उस पेड़ कूदने लगा। पूछने पर बंदर ने कहा कि बच्चा बचे या ना बचे मेरे प्रयास में कमी नहीं होना चाहिए। यहीं अरुण साव की स्थिति है।
साहू समाज ने भूपेश बघेल को माफी मांगने 10 दिन का दिया समय-
220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।
अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है। संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
सुगम व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य, किसानों की आर्थिक ढाल
कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन आधारित नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश के खेतों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शासन की पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य से छोटे एवं बड़े सभी किसानों को समान रूप से उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुदृढ़ हो रहा है। कोरबा जिले के ग्राम कल्दामार निवासी कृषक अरुण कुमार इसकी मिसाल हैं, उन्होंने उपार्जन केंद्र भैंसमा में इस वर्ष 190 क्विंटल धान का विक्रय बिना किसी असुविधा के किया। गत वर्ष भी उन्होंने लगभग 350 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया था। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती टिकैतिन बाई के नाम से टोकन कटवा कर धान विक्रय की प्रक्रिया पूर्ण की। कृषक कुमार का कहना है कि शासन की पहल से उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। उच्च समर्थन मूल्य मिलने से अब किसानों को अगली फसल के लिए आर्थिक चिंता नहीं रहती और उन्हें उधार लेने की मजबूरी से भी मुक्ति मिली है। खेत से लेकर धान विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया आज किसानों के लिए सहज, सुरक्षित और तनावमुक्त हो गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है और वे अब समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों के हित में संचालित योजनाओं और प्रभावी नीतियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एवं मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।