देश
सलीम खान की रिपोर्ट मीडिया को देने से सलमान नाराज:डॉक्टर्स से कहा– प्राइवेसी का ध्यान रखें, लॉरेंस की धमकी के बीच रणवीर अस्पताल पहुंचे
मुंबई,एजेंसी। सलमान खान के पिता और दिग्गज स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान को ब्रेन हेमरेज के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। बुधवार को लीलावती अस्पताल के डॉक्टर जलील पार्कर ने सलीम खान की हेल्थ अपडेट दी थी, हालांकि अब सलमान ने हॉस्पिटल के डॉक्टर्स को निर्देश दिया है कि अब से उनके पिता से जुड़ी हेल्थ अपडेट न दी जाए।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार चाहता है कि सलीम खान की हेल्थ से जुड़ी जानकारी प्राइवेट रखी जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल के सार्वजनिक बयान से सलमान खान और परिवार नाराज थे।
परिवार के करीबी सूत्र ने कहा कि सेहत निजी मामला है और मीडिया से बात परिवार पर छोड़नी चाहिए। परिवार ने साफ किया है कि अब कोई मेडिकल डिटेल शेयर न की जाए। उनका कहना है कि अटकलों और बेवजह चर्चा से बचना जरूरी है।
उन्हें मंगलवार को ब्रेन हेमरेज के बाद मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद डॉक्टरों ने उनका एक सर्जिकल प्रोसीजर किया।
सलमान समेत परिवार के सदस्य अस्पताल पहुंचे

शुक्रवार को लगातार चौथे दिन सलमान खान अपने पिता को देखने के लिए लीलावती अस्पताल पहुंचे।

गुरुवार को अरबाज खान अस्पताल पहुंचे थे।

सलीम खान को देखने गुरुवार को पत्नी हेलन लीलावती अस्पताल पहुंची थीं।

अरबाज खान के बेटे अरहान दादा से मिलने गुरुवार को अस्पताल पहुंचे थे।

अलवीरा और अतुल के बेटे अयान भी गुरुवार को हॉस्पिटल पहुंचे थे।

आमिर खान और गौरी स्प्रैट को गुरुवार को अस्पताल के बाहर स्पॉट किया गया।

एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी गुरुवार को अपनी मां सुनंदा शेट्टी के साथ अस्पताल पहुंचीं।
रणवीर सिंह अस्पताल पहुंचे
बॉलीवुड से कई सेलेब्स सलीम खान को देखने अस्पताल पहुंच रहे हैं। लॉरेंस गैंग से मिली धमकी के बीच शुक्रवार को एक्टर रणवीर सिंह भी लीलावती अस्पताल पहुंचे।
इससे पहले आमिर खान भी गुरुवार को गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट के साथ हॉस्पिटल पहुंचे थे।
वहीं, सलमान की फिल्म गलवान में नजर आने वालीं एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में सलीम खान की सेहत को लेकर कहा,
“वह बहुत बेहतर हैं। मैं उनकी अच्छी सेहत की कामना करती हूं।”
कुछ समय तक डॉक्टर्स की निगरानी में रहेंगे सलीम खान
बुधवार को लीलावती अस्पताल के डॉक्टर जलील पार्कर ने मीडिया से बातचीत में बताया था कि सलीम खान की डिजिटल सब्स्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) की गई। यह कोई ब्रेन सर्जरी नहीं है। DSA एक हाईक्वालिटी का एक्स-रे होता है। इसमें शरीर की नसों में हुए ब्लॉकेज को ज्यादा साफ देखा जा सकता है। इसे सेरेब्रल एंजियोग्राफी भी कहा जाता है।
डॉक्टर पार्कर ने कहा था कि फिलहाल सलीम खान को डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा। उन्हें कुछ दिनों तक डॉक्टर्स की निगरानी में रखा जाएगा। उनकी हालत स्थिर है और वे रिकवरी कर रहे हैं।

डॉ. जलील पार्कर मुंबई में एक जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट यानी सांस की बीमारी के स्पेशलिस्ट हैं, जो लीलावती हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर से जुड़े हैं।
मंगलवार सुबह इमरजेंसी में लाया गया था
अस्पताल प्रशासन ने बताया था कि सलीम खान को मंगलवार सुबह 8:30 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। उनके इलाज के लिए डॉक्टरों की एक टीम बनाई गई है। इसमें न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनय चव्हाण, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजीत मेनन, न्यूरोसर्जन डॉ. नितिन डांगे और डॉ. बिनीत अहलूवालिया शामिल हैं।
1960 के दशक में करियर शुरू हुआ था
सलीम खान 90 साल के हैं। उनका जन्म 24 नवंबर 1935 को हुआ था। वे हिंदी सिनेमा के दिग्गज स्क्रिप्ट राइटरों में शुमार हैं।
सलीम खान ने अपने करियर की शुरुआत एक्टिंग से की थी। 1960 के दशक में फिल्म बारात से करियर शुरू हुआ, लेकिन फिल्मों में उन्हें सीमित और छोटे किरदार ही मिले।
लगभग दो दर्जन फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि एक्टिंग नहीं, बल्कि राइटिंग असली ताकत है। इसके बाद उन्होंने लेखन की ओर रुख किया और स्क्रिप्ट राइटर बन गए।

अभिनय के शुरुआती दिनों में सलीम खान ‘प्रिंस सलीम’ नाम का उपयोग करते थे।
‘सलीम-जावेद’ की जोड़ी फेमस हुई
सलीम खान और जावेद अख्तर की जोड़ी ‘सलीम–जावेद’ के नाम से मशहूर रही है। दोनों ने मिलकर हिंदी सिनेमा को कई सुपरहिट और यादगार फिल्में दीं, जैसे जंजीर, दीवार, शोले, डॉन और सीता और गीता। इन फिल्मों की दमदार कहानियां और डायलॉग लोगों के दिलों में बस गए।
उनकी लिखी स्क्रिप्ट ने फिल्मों का अंदाज बदल दिया। उन्होंने मजबूत किरदार, संवाद और सामाजिक मुद्दों को कहानी का हिस्सा बनाया। सलीम-जावेद की सफलता से फिल्म इंडस्ट्री में लेखकों को नई पहचान और सम्मान मिला और उन्हें भी स्टार्स की तरह महत्व मिलने लगा।

देश
‘महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी राजनीतिक गलती है’: कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी बोले
नई दिल्ली,एजेंसी। संसद में महिला आरक्षण बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव जारी है। प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन का धोखा बताया है। पीएम मोदी ने कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन का इनकार विपक्ष की एक बड़ी राजनीतिक गलती है और इसके लिए उन्हें भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।


देश
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम
नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए
पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026
दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026
सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।
12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया
- राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
- प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
- शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।
संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।
सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की
सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।
पीएम की 3 अपील
- 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
- 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
- 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी
17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

देश
‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

थरुर ने अपने भाषण में कहा
शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”


थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

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