Connect with us

देश

सलमान के पिता सलीम खान को ब्रेन हेमरेज:डॉक्टर बोले- छोटी सर्जिकल प्रोसीजर की गई, यह ब्रेन सर्जरी नहीं, कुछ दिन अस्पताल में ही रहेंगे

Published

on

मुंबई, एजेंसी। सलमान खान के पिता और दिग्गज स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान को ब्रेन हेमरेज हुआ है, जिसके बाद उनकी एक छोटी सी सर्जिकल प्रोसीजर की गई है।

लीलावती अस्पताल के डॉक्टर जलील पार्कर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सलीम खान की डिजिटल सब्स्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA) की गई है। यह कोई ब्रेन सर्जरी नहीं है।

DSA एक हाईक्वालिटी का एक्स-रे होता है। इसमें शरीर की नसों में हुए ब्लॉकेज को ज्यादा साफ देखा जा सकता है। इसे सेरेब्रल एंजियोग्राफी भी कहा जाता है।

कुछ समय तक डॉक्टर्स की निगरानी में रहेंगे सलीम खान

डॉक्टर पार्कर के अनुसार, फिलहाल सलीम खान को डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा। उन्हें कुछ दिनों तक डॉक्टर्स की निगरानी में रखा जाएगा। हालांकि, उनकी हालत स्थिर है और वे रिकवरी कर रहे हैं। अगर सब कुछ ठीक रहा तो उन्हें आज या कल तक वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाया जा सकता है, लेकिन डिस्चार्ज को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।

डॉ. जलील पार्कर मुंबई में एक जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट (सांस की बीमारी के स्पेशलिस्ट) हैं, जो लीलावती हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर से जुड़े हैं।

डॉ. जलील पार्कर मुंबई में एक जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट (सांस की बीमारी के स्पेशलिस्ट) हैं, जो लीलावती हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर से जुड़े हैं।

अस्पताल पहुंचे परिवार के सदस्य, देखें तस्वीरें

मंगलवार देर रात तक सलमान खान अस्पताल में ही रहे थे।

मंगलवार देर रात तक सलमान खान अस्पताल में ही रहे थे।

अर्पिता खुद ड्राइव कर अस्पताल से गईं।

अर्पिता खुद ड्राइव कर अस्पताल से गईं।

बेटी अलवीरा खान भागते हुए अस्पताल पहुंचीं।

बेटी अलवीरा खान भागते हुए अस्पताल पहुंचीं।

सलमान खान की मां और सलीम खान की पत्नी सलमा खान अस्पताल पहुंचीं।

सलमान खान की मां और सलीम खान की पत्नी सलमा खान अस्पताल पहुंचीं।

सलीम खान की बेटी अर्पिता के पति एक्टर आयुष शर्मा भी अस्पताल पहुंचे।

सलीम खान की बेटी अर्पिता के पति एक्टर आयुष शर्मा भी अस्पताल पहुंचे।

अलवीरा और अतुल के बेटे अयान भी हॉस्पिटल पहुंचे।

अलवीरा और अतुल के बेटे अयान भी हॉस्पिटल पहुंचे।

अलवीरा और अतुल की बेटी अलीजेह भी अस्पताल पहुंचीं।

अलवीरा और अतुल की बेटी अलीजेह भी अस्पताल पहुंचीं।

सलीम खान के पोते अरहान और निर्वाण अस्पताल जाते हुए नजर आए।

सलीम खान के पोते अरहान और निर्वाण अस्पताल जाते हुए नजर आए।

बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी बुधवार सुबह अस्पताल पहुंचे।

बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी बुधवार सुबह अस्पताल पहुंचे।

सलीम खान के साथ कई फिल्में लिखने वाले जावेद अख्तर उनका हाल लेने बुधवार को भी अस्पताल पहुंचे।

सलीम खान के साथ कई फिल्में लिखने वाले जावेद अख्तर उनका हाल लेने बुधवार को भी अस्पताल पहुंचे।

संजय दत्त अस्पताल से निकलते समय गंभीर नजर आए।

संजय दत्त अस्पताल से निकलते समय गंभीर नजर आए।

सलीम खान के दामाद अतुल अग्निहोत्री भी हॉस्पिटल पहुंचे।

सलीम खान के दामाद अतुल अग्निहोत्री भी हॉस्पिटल पहुंचे।

सलीम खान की तबीयत बिगड़ने के बाद मंगलवार को सलमान खान शूटिंग छोड़कर अस्पताल पहुंचे। वहीं, संजय दत्त और जावेद अख्तर भी अस्पताल पहुंचे।

एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए अरबाज

मंगलवार को अरबाज खान अपनी पत्नी शूरा के साथ पिता से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। वहीं, बुधवार सुबह उन्हें मुंबई एयरपोर्ट पर एंट्री करते हुए स्पॉट किया गया।

मंगलवार सुबह इमरजेंसी में लाया गया था

अस्पताल प्रशासन ने बताया था कि सलीम खान को मंगलवार सुबह 8:30 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। उनके इलाज के लिए डॉक्टरों की एक टीम बनाई गई है। इसमें न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनय चव्हाण, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजीत मेनन, न्यूरोसर्जन डॉ. नितिन डांगे और डॉ. बिनीत अहलूवालिया शामिल हैं।

1960 के दशक में करियर शुरू हुआ था

सलीम खान 90 साल के हैं। उनका जन्म 24 नवंबर 1935 को हुआ था। वे हिंदी सिनेमा के दिग्गज स्क्रिप्ट राइटरों में शुमार हैं।

सलीम खान ने अपने करियर की शुरुआत एक्टिंग से की थी। 1960 के दशक में फिल्म बारात से करियर शुरू हुआ, लेकिन फिल्मों में उन्हें सीमित और छोटे किरदार ही मिले।

लगभग दो दर्जन फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने महसूस किया कि एक्टिंग नहीं, बल्कि राइटिंग असली ताकत है। इसके बाद उन्होंने लेखन की ओर रुख किया और स्क्रिप्ट राइटर बन गए।

अभिनय के शुरुआती दिनों में सलीम खान 'प्रिंस सलीम' नाम का उपयोग करते थे।

अभिनय के शुरुआती दिनों में सलीम खान ‘प्रिंस सलीम’ नाम का उपयोग करते थे।

‘सलीम-जावेद’ की जोड़ी फेमस हुई

सलीम खान और जावेद अख्तर की जोड़ी ‘सलीम–जावेद’ के नाम से मशहूर रही है। दोनों ने मिलकर हिंदी सिनेमा को कई सुपरहिट और यादगार फिल्में दीं, जैसे जंजीर, दीवार, शोले, डॉन और सीता और गीता। इन फिल्मों की दमदार कहानियां और डायलॉग लोगों के दिलों में बस गए।

उनकी लिखी स्क्रिप्ट ने फिल्मों का अंदाज बदल दिया। उन्होंने मजबूत किरदार, संवाद और सामाजिक मुद्दों को कहानी का हिस्सा बनाया। सलीम-जावेद की सफलता से फिल्म इंडस्ट्री में लेखकों को नई पहचान और सम्मान मिला और उन्हें भी स्टार्स की तरह महत्व मिलने लगा।

सलीम-जावेद भारतीय सिनेमा के पहले लेखक माने जाते हैं, जिन्हें ‘स्टार स्टेटस’ मिला। उन्होंने अमिताभ बच्चन की ‘एंग्री यंग मैन’ इमेज को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।

Continue Reading

देश

राज्यसभा चुनाव से पहले 26 नेता निर्विरोध निर्वाचित:इनमें शरद पवार, रामदास आठवले, विनोद तावड़े, अभिषेक मनु सिंघवी शामिल, 11 सीटों पर मुकाबला

Published

on

नई दिल्ली,एजेंसी। 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में 7 राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले (निर्विरोध) के ही निर्वाचित हो गए हैं। इनमें एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

कई राज्यों में विपक्षी दलों ने उम्मीदवार नहीं उतारे, जिसके कारण ये नेता बिना मतदान के ही राज्यसभा पहुंच गए। हालांकि बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना तय है। इन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव कराया जाएगा।

  • शरद पवार (NCP-शरद)
  • रामदास आठवले (आरपीआई-आठवले)
  • विनोद तावड़े (बीजेपी)
  • रामराव वडुकुटे (बीजेपी)
  • माया इवनाते (बीजेपी)
  • ज्योति वाघमारे (शिवसेना -शिंदे)
  • पार्थ पवार (एनसीपी)

तमिलनाडु (6)

  • तिरुची शिवा (DMK)
  • जे कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन (DMK)
  • एम क्रिस्टोफर तिलक (कांग्रेस)
  • एल के सुदीश (DMDK)
  • एम थंबीदुरई (AIADMK)
  • अंबुमणि रामदास (PMK)

पश्चिम बंगाल (5)

  • राहुल सिन्हा (BJP)
  • बाबुल सुप्रियो (TMC)
  • पूर्व डीजीपी राजीव कुमार (TMC)
  • सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी (TMC)
  • कोएल मलिक (TMC)

असम (3)

  • जोगेन मोहन (BJP)
  • तेरोस गोवाला (BJP)
  • प्रमोद बोरो (UPPL)

तेलंगाना (2)

  • अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस)
  • वेम नरेंद्र रेड्डी (कांग्रेस)

छत्तीसगढ़ (2)

  • लक्ष्मी वर्मा (BJP)
  • फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)

हिमाचल प्रदेश (1)

  • अनुराग शर्मा (कांग्रेस)

अब 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में

नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर चुनाव 16 मार्च को होंगे।

इन चुनावों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

कुल 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए 40 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। अब 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट पर मुकाबला होगा।

Continue Reading

देश

सुप्रीम कोर्ट बोला- UCC लागू करने का समय आ गया:संसद फैसला करे, शरियत कानून में सुधार की जल्दबाजी न करें, इससे नुकसान की संभावना

Published

on

नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। इस पर फैसला करना कोर्ट के बजाय संसद का काम है।

कोर्ट शरियत कानून 1937 की कुछ धाराओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इन धाराओं से मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप था।

CJI सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा- शरियत कानून की धाराएं रद्द कर दी गईं तो मुस्लिम समुदाय में संपत्ति के बंटवारे को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं बचेगा। इससे कानूनी खालीपन पैदा हो सकता है।

कोर्टरूम LIVE:

  • CJI: सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार सरकार से समान नागरिक संहिता लागू करने को कह चुका है। अलग-अलग समुदायों के लिए अलग नियम हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम सीधे किसी कानून को असंवैधानिक घोषित कर दें।
  • याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण: कोर्ट यह घोषित कर सकती है कि मुस्लिम महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए। अगर शरियत कानून की कुछ धाराएं रद्द होती हैं, तो ऐसे मामलों में भारतीय उत्तराधिकार कानून लागू किया जा सकता है।
  • बेंच: इस मुद्दे का स्थायी समाधान समान नागरिक संहिता ही है। लेकिन इसे लागू करने का फैसला संसद को लेना होगा। यह नीतिगत मामला है, और कानून बनाना संसद का अधिकार है।

मुसलमानों के परिवारिक मामलों में लागू होता है शरियत कानून 1937

शरियत कानून 1937, जिसे मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लीकेशन एक्ट कहा जाता है, ब्रिटिश शासन के समय बनाया गया एक कानून है। इसका उद्देश्य यह तय करना था कि भारत में मुसलमानों के निजी और पारिवारिक मामलों में इस्लामी कानून यानी शरियत लागू होगा।

इससे पहले अलग-अलग क्षेत्रों में अलग परंपराएं चलती थीं, जिससे फैसलों में एकरूपता नहीं थी। इस कानून के लागू होने के बाद शादी (निकाह), तलाक, गुजारा भत्ता, विरासत यानी संपत्ति का बंटवारा, वक्फ और परिवार से जुड़े अन्य मामलों में शरियत के नियम मान्य माने गए।

इसका मतलब यह है कि अगर किसी मुस्लिम परिवार में संपत्ति या शादी से जुड़ा विवाद होता है, तो अदालत शरियत के आधार पर फैसला कर सकती है। हालांकि, यह कानून केवल निजी मामलों पर लागू होता है।

चोरी, हत्या या अन्य आपराधिक मामलों में देश का सामान्य कानून ही लागू होता है। समय-समय पर इस कानून को लेकर बहस होती रही है, खासकर महिलाओं के अधिकारों को लेकर, क्योंकि कुछ मामलों में महिलाओं को पुरुषों के बराबर हिस्सा नहीं मिलता।

भारत में केवल उत्तराखंड में UCC लागू

भारत में अभी केवल उत्तराखंड में UCC लागू है। वहां 28 जनवरी 2025 को UCC लागू किया गया। मुख्यमंत्री आवास में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इसका ऐलान किया था। यूसीसी लागू होने से राजय में 5 नियम सख्ती से लागू हुए-

  1. शादी चाहे किसी भी धर्म के रीति-रिवाज से हो, लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन जरूरी है। 60 दिन में रजिस्ट्रेशन न होने पर 20 हजार रुपए तक जुर्माना लग सकता है।
  2. शादी के लिए लड़कों की उम्र 21 साल और लड़कियों के लिए 18 साल जरूरी है।
  3. शादी और तलाक के नियम सभी समुदायों पर एक जैसे लागू होंगे। यानी अलग-अलग धर्मों में अलग कानून नहीं रहेगा।
  4. लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है। इसमें पहचान छिपाने या धोखाधड़ी करके लिव-इन में रहने पर जेल भी हो सकती है।
  5. परिवार की संपत्ति पर बेटा-बेटी को समान अधिकार मिलेगा।
Continue Reading

देश

सुप्रीम कोर्ट बोला-सरकार कोविड वैक्सीन से नुकसान का मुआवजा दे:एरर-फ्री पॉलिसी बनाए, साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

Published

on

नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स का मुआवजा दे। इसके लिए वह नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी बनाए।

नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी का मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति को दवा या वैक्सीन से नुकसान हो जाए, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, भले ही इसमें किसी की गलती साबित न हुई हो।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह भी कहा कि वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम जारी रहेगा। इसके लिए अलग से एक्सपर्ट पैनल बनाने की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन की 2021 में दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 3 बड़ी बातें…

मुआवजा नीति का यह मतलब नहीं होगा कि सरकार या किसी दूसरी अथॉरिटी ने अपनी गलती मान ली है।

वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से जुड़े आंकड़े समय-समय पर पब्लिक डोमेन में रखा जाएगा।

इस फैसले का मतलब यह नहीं होगा कि व्यक्ति दूसरे कानूनी उपायों का सहारा नहीं ले सकता।

नंवबर 2025 में फैसला सुरक्षित रखा था

पिछले साल 13 नवंबर को इन याचिकाओं पर लंबी बहस हुई थी। इसके बाद जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा था कि कोर्ट के साथ-साथ दूसरे मुद्दों पर भी फैसला करेगा। जस्टिस नाथ ने आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था-“हम तय करेंगे कि समिति का गठन किया जाना है या नहीं, क्या निर्देश जारी किए जाने हैं। हम हर चीज की बारीकी से जांच करेंगे।”

इससे पहले सरकार ने केरल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें सईदा के.ए.की याचिका पर मुआवजे की नीति तैयार करने का आदेश दिया गया था।

2022 में सरकार ने जवाबी हलफनामे में तर्क दिया था कि वह मुआवजे के लिए उत्तरदायी नहीं है क्योंकि वैक्सीन अपनी मर्जी से लगवाई जाती है। यह लोगों का जोखिम जानने के बावजूद लिया गया फैसला होता है।

मई 2024 में वैक्सीन से मौत के दो दावे सामने आए

परिवार का दावा- कोवीशील्ड लगवाने के 7 दिन बाद बेटी की मौत

करुण्या की जुलाई 2021 में मौत हो गई थी।

करुण्या की जुलाई 2021 में मौत हो गई थी।

वेणुगोपाल गोविंदन का कहना था कि उनकी बेटी करुण्या की जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लेने के महीने भर बाद मौत हो गई थी। सीरम इंस्टीट्यूट ने ब्रिटेन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के बनाए फॉर्मूले पर कोवीशील्ड बनाई है और एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटिश हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन से खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। करुण्या की मौत मामले में परिवार की शिकायत पर सरकार ने राष्ट्रीय समिति का गठन किया था। बाद में समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि करुण्या की मौत का कारण वैक्सीन है इसके पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे।

दूसरा परिवार बोला- बेटी को कोविड डोज के बाद TTS हुआ, फिर मौत

8 साल की श्री ओमत्री की मई 2021 में मौत हो गई थी। परिवार के मुताबिक, रितिका ने मई में कोवीशील्ड की पहली डोज लगवाई थी। इसके 7 दिनों के अंदर रितिका को तेज बुखार और वॉमिट की शिकायत हुई। MRI में सामने आया कि रितिका को ब्रेन में ब्लड क्लोटिंग हुई और उसे ब्रेन हेमरेज हो गया था। दो हफ्ते बाद ही बेटी की मौत हो गई थी।

परिवार ने आगे बताया था कि हमें बेटी की मौत का सही कारण जानने के लिए दिसंबर 2021 में RTI के जरिए पता चला कि बेटी को थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम हुआ था। जो भी वैक्सीन के सामना करना पड़ा था और ‘वैक्सीन उत्पाद संबंधी प्रतिक्रिया’ के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।

PM ने कोवैक्सिन के 2 डोज लगवाए थे

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

जुलाई 2025: कोविड के बाद अचानक मौतों पर स्टडी: ICMR का दावा- वैक्सीन से इसका संबंध नहीं

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने अपनी स्टडी में बताया कि देश में हार्ट अटैक से होने वाली अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

यह स्टडी 18 से 45 साल के लोगों की अचानक मौत पर आधारित है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्टडी में कहा गया है कि भारत की कोविड वैक्सीन सेफ और इफेक्टिव है। इससे होने वाले गंभीर साइडइफेक्ट के मामले रेयर हैं।

स्टडी में बताया गया है कि अचानक हुई मौतों की अन्य वजहें हो सकती हैं। इनमें जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारी और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल हैं।

भारत में दो कोविड वैक्सीन विकसित हुई थीं। भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से कोवैक्सिन का निर्माण किया था। वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से कोवीशील्ड बनाई थी।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677