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कोरबा

468.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज

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कोरबा। कोरबा जिले में एक जून से 22 जुलाई तक कुल 468.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई।
   अधीक्षक भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में जिले की तहसील कोरबा में 476 मिलीमीटर, अजगरबहार 332.8, भैंसमा, 409, करतला 412.1, बरपाली 508.9, कटघोरा 479, दीपका 505.6, दर्री 580.9, पाली 510.2, हरदीबाजार 399.6, पोंड़ी-उपरोड़ा 503.2, और पसान तहसील में 499.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

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कोरबा

दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में कोरबा जिला युवा कांग्रेस एवं एनएसयूआई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया

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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का तीखा हमला

कोरबा। देशभर में लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों, पेपर लीक की घटनाओं तथा युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ के विरोध में दिल्ली में संसद मार्च कर रहे छात्रों पर किए गए पुलिस के बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज के विरोध में जिला युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, एवं जिला कांग्रेस कमेटी, कोरबा द्वारा पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के नेतृत्व में सुभाष चौक, कोरबा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि देश का युवा पिछले लगभग बीस दिनों से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा था। छात्रों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि संसद के मानसून सत्र के प्रथम दिवस 20 जुलाई को वे संसद मार्च करेंगे और शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने वाले लगातार पेपर लीक मामलों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेंगे। लेकिन लोकतंत्र में संवाद करने के बजाय केंद्र सरकार ने छात्रों की आवाज को लाठियों के बल पर दबाने का प्रयास किया।

जिला युवा कांग्रेस शहर अध्यक्ष राकेश पंकज ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस देश का भविष्य युवा हैं, उसी देश में अपने भविष्य की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों को अपराधियों की तरह सड़कों पर पीटा जा रहा है। भाजपा सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों का अपराध क्या था? क्या रोजगार मांगना अपराध है? क्या निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग करना अपराध है? क्या शिक्षा मंत्री से जवाब मांगना अपराध है?

जिला युवा कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि आज देश का करोड़ों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में दिन-रात मेहनत कर रहा है, लेकिन बार-बार होने वाले पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं ने युवाओं का विश्वास पूरी तरह तोड़ दिया है। सरकार इन विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय युवाओं पर पुलिसिया दमन कर रही है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही की मानसिकता का परिचायक है।
कोरबा जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है। लगातार पेपर लीक, परीक्षाओं में अनियमितताएं, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बेरोजगारी ने युवाओं को निराश कर दिया है, लेकिन केंद्र सरकार इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय विरोध करने वालों को पुलिस के डंडों से कुचलने का प्रयास कर रही है।
जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में लाठी नहीं, संवाद चलता है। यदि सरकार अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय छात्रों पर बल प्रयोग करेगी, तो कांग्रेस पार्टी देशभर में छात्रों और युवाओं की आवाज बनकर संघर्ष करती रहेगी।
जिला कांग्रेस कमेटी, कोरबा ने मांग की कि—
• केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा दें।
• देशभर में हुए सभी पेपर लीक मामलों की सर्वोच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
• छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज की न्यायिक जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
• शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज सभी प्रकरण तत्काल वापस लिए जाएं।
• युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कहा कि देश का युवा अब डरने वाला नहीं है। लाठियों से आवाजें दबाई जा सकती हैं, लेकिन युवाओं के अधिकारों और उनके भविष्य की लड़ाई को समाप्त नहीं किया जा सकता। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अन्याय, दमन और तानाशाही के विरुद्ध लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी तथा छात्रों के सम्मान और उनके भविष्य की रक्षा के लिए हर स्तर पर उनके साथ खड़ी रहेगी।
पुतला दहन कार्यक्रम में कांग्रेस अजा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष नारायण लाल कुर्रे, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मो. शाहिद, ब्लाक अध्यक्ष राजेन्द्र तिवारी, पालूराम साहू, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, रोपा तिर्की, अर्चना उपाध्याय, पार्षद रवि चंदेल, रामगोपाल कुर्रे, मस्तूल सिंह कँवर, प्रदीप जैसवाल, आरिफ खान, मनहरण राठौर, संजू अग्रवाल, अंकित वर्मा, मो. राजा, ब्रिजभूशन प्रसाद, प्रदीप जैसवाल, तौफीक खान, देवीदयाल सोनी, नवीन कुकरेजा, निकिता खलखो, रजनी भारती, नीलू, मुश्कान, संगीता श्रीवास, राजेश यादव, दुर्गेश दिक्सेना, अनिल कुमार सिंह, पवन चौहान, रघुराज सिंह, सहित जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, ब्लॉक कांग्रेस के कार्यकर्ता, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस, सेवा दल तथा बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

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कोरबा

कोरबा प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह कल, उप मुख्यमंत्री अरुण साव होंगे मुख्य अतिथि

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कोरबा। कोरबा प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी (कार्यकाल 2026-28) का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार, 23जुलाई को दोपहर 12 बजे पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार, रामपुर (कोरबा) में आयोजित किया जाएगा। समारोह में छत्तीसगढ़ शासन के उप मुख्यमंत्री एवं कोरबा जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

समारोह में कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पाण्डेय, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, रामपुर विधायक फूलसिंह राठिया, कोरबा महापौर संजू देवी राजपूत, नगर निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर तथा जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रहेगी।

कार्यक्रम में कोरबा प्रेस क्लब के संरक्षक कमलेश यादव, अध्यक्ष नौशाद खान, उपाध्यक्ष राजकुमार शाह, सचिव दिनेश राज, उप सचिव हरीश तिवारी, कोषाध्यक्ष दुर्गेश श्रीवास्तव तथा कार्यकारिणी सदस्यों राजेश कुमार मिश्रा (मिट्ठू), नवाब हुसैन और आकाश शर्मा सहित पूरी कार्यकारिणी पद एवं गोपनीयता की शपथ लेगी।
शपथ ग्रहण समारोह में रायपुर प्रेस क्लब, बिलासपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों एवं पत्रकारों के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर पत्रकारों और मीडिया जगत में उत्साह का माहौल है।

कोरबा प्रेस क्लब ने जिले के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकारों, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से समारोह में उपस्थित होकर नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का उत्साहवर्धन करने की अपील की है।

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“पहले न्याय, फिर जनसुनवाई” – वर्षों से लंबित वादे पूरे किए बिना मानिकपुर परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई स्वीकार नहीं : जयसिंह अग्रवाल

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कोरबा। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की मानिकपुर ओपनकास्ट विस्तार परियोजना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रभावित ग्रामीणों के वर्षों पुराने लंबित मुद्दों का समाधान किए बिना पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित करना केवल कानूनी औपचारिकता पूरी करने का प्रयास होगा, जिसे प्रभावित जनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को विस्तृत पत्र भेजकर मांग की है कि 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले सभी लंबित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार एवं विस्थापन संबंधी मामलों का निराकरण किया जाए, अन्यथा जनसुनवाई तत्काल स्थगित कर नई तिथि घोषित की जाए।

जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि एसईसीएल को यह समझना होगा कि पर्यावरणीय जनसुनवाई कोई खानापूर्ति या सरकारी फाइल पूरी करने की प्रक्रिया नहीं है। यह उन हजारों परिवारों के भविष्य का प्रश्न है, जिनकी जमीन, मकान, खेती, रोजगार, जलस्रोत और पूरा सामाजिक जीवन इस परियोजना से प्रभावित होने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भिलाई खुर्द, दादरखुर्द, मानिकपुर, इमलीडुग्गू, उरगा, कुरूडीह, बेन्दरकोना, गोढ़ी, पंडरीपानी, सेमीपाली सहित अनेक गांवों के लोग वर्षों से एसईसीएल के अधूरे वादों का बोझ उठा रहे हैं। पिछली जनसुनवाइयों में रोजगार, पुनर्वास, लंबित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, धूल नियंत्रण, ब्लास्टिंग से क्षति का मुआवजा, हरित पट्टी विकास तथा स्थानीय परिवहनकर्ताओं को अवसर देने जैसे अनेक आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अधिकांश आज भी कागजों तक सीमित हैं।
उन्होंने कहा कि जब पुराने वादे पूरे नहीं हुए, तब नई जनसुनवाई में दिए जाने वाले आश्वासनों पर जनता विश्वास कैसे करे?
पूर्व मंत्री ने भिलाई खुर्द के सर्वेक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग 50 परिवारों को मनमाने ढंग से सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जबकि समान परिस्थितियों वाले अन्य मकानों को शामिल कर लिया गया। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताते हुए सभी छूटे परिवारों का निष्पक्ष पुनः सर्वे कराने की मांग की।
जयसिंह अग्रवाल ने पुनर्वास नीति को भी कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ₹6.91 लाख देकर प्रभावित परिवारों से यह कहना कि वे स्वयं जमीन खरीदकर नया मकान बना लें, वास्तविकता से पूरी तरह कटा हुआ निर्णय है। आज की परिस्थितियों में इतनी राशि से न जमीन खरीदी जा सकती है और न सम्मानजनक आवास बनाया जा सकता है। यदि एसईसीएल हजारों करोड़ रुपये का कोयला निकाल सकती है तो उसे प्रभावित परिवारों के लिए विकसित पुनर्वास कॉलोनी बसाने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।
उन्होंने कचांदी नाला को क्षेत्र के किसानों की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि इसके साथ किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ हजारों किसानों की सिंचाई व्यवस्था और भूजल पर गंभीर प्रभाव डालेगी। बिना वैज्ञानिक अध्ययन, वैकल्पिक व्यवस्था और ग्रामीणों की सहमति के इसका डायवर्सन किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं होगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में कोयला परिवहन आबादी के बीच से कराने के बजाय मानिकपुर से बरबसपुर बायपास तक रेलवे लाइन के समानांतर वैकल्पिक सड़क बनाई जाए, जिससे दुर्घटनाएं कम हों, प्रदूषण घटे और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
जयसिंह अग्रवाल ने वर्ष 1964 से 1968 के बीच तत्कालीन नेशनल कोल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनसीडीसी) द्वारा अधिग्रहित भूमि के लंबित मुआवजा प्रकरणों को एसईसीएल के इतिहास का सबसे बड़ा लंबित न्यायिक एवं मानवीय प्रश्न बताया। उन्होंने कहा कि लगभग छह दशक बाद भी अनेक परिवार अपने पूर्वजों की भूमि का वैधानिक मुआवजा पाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को विवश हैं। केवल यह कह देना कि राशि किसी ट्रिब्यूनल में जमा है, सार्वजनिक उपक्रम की जिम्मेदारी से बचने का आसान रास्ता नहीं हो सकता। एसईसीएल को ग्रामवार समीक्षा कर सभी वैधानिक उत्तराधिकारियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि जनसुनवाई से पहले पूर्व के सभी आश्वासनों की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, लंबित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के मामलों का निराकरण किया जाए, पुनर्वास पैकेज का पुनर्मूल्यांकन हो, भिलाई खुर्द के सभी छूटे परिवारों को सर्वे में शामिल किया जाए तथा जिला प्रशासन, एसईसीएल और प्रभावित ग्रामीणों की संयुक्त बैठक बुलाकर सभी विवादों का समाधान किया जाए।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी विकास का विरोध नहीं करती, लेकिन विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की बलि भी स्वीकार नहीं करेगी। जनता की सहमति के बिना विकास नहीं, बल्कि संघर्ष पैदा होता है।”
जयसिंह अग्रवाल ने अंत में कहा कि यदि 21 अगस्त 2026 से पहले उपर्युक्त सभी प्रमुख मुद्दों पर ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तो प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को तत्काल स्थगित किया जाना चाहिए। यदि बिना समाधान के केवल औपचारिक जनसुनवाई आयोजित की जाती है और उसके दौरान प्रभावित ग्रामीण लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते हैं अथवा कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।

CMD SECL Bilaspur – 21.07.2026
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