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ईरान में हिंसक प्रदर्शन, 217 लोगों की मौत का दावा

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सेना बोली- बच्चों को प्रदर्शन से दूर रखें वरना गोली लगने पर शिकायत मत करना

तेहरान,एजेंसी। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 217 लोगों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है। टाइम मैगजीन ने तेहरान के एक डॉक्टर के हवाले से बताया कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें ज्यादातर की मौत गोली लगने से हुई हैं।

सुरक्षा बलों ने गुरुवार रात प्रदर्शन तेज होने पर कई जगहों पर गोलीबारी की थी, इसके बाद से लगातार कार्रवाई जारी है। इस बीच रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एक अधिकारी ने सरकारी टीवी से बात करते चेतावनी दी कि माता-पिता अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखें, अगर उन्हें गोली लगे तो शिकायत मत करना।

सरकार प्रदर्शन रोकने के लिए पूरी ताकत लगा रही

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले कुछ दिनों तक यह साफ नहीं था कि सरकार क्या रुख अपनाएगी। खुद एंटी राइट्स पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा बल भ्रम में हैं। किसी को ठीक से नहीं पता कि आगे क्या होने वाला है। लेकिन शुक्रवार को सामने आई खूनी तस्वीरों और सख्त बयानों से साफ हो गया कि अब पूरी ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इससे पहले सरकार ने देशभर में इंटरनेट और फोन सर्विस लगभग बंद कर दी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो ईरानी सरकार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

प्रदर्शनकारी महिला ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उससे सिगरेट सुलगाती हुई। (इमेज क्रेडिट- मसीह अलाइनजाद)

प्रदर्शनकारी महिला ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उससे सिगरेट सुलगाती हुई। (इमेज क्रेडिट- मसीह अलाइनजाद)

प्रदर्शनकारी महिला 1979 में इस्लामी क्रांति करने वाले अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी की तस्वीर जलाकर उससे सिगरेट सुलगाती हुई। (तस्वीर क्रेडिट- मसीह अलाइनजाद)

प्रदर्शनकारी महिला 1979 में इस्लामी क्रांति करने वाले अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी की तस्वीर जलाकर उससे सिगरेट सुलगाती हुई। (तस्वीर क्रेडिट- मसीह अलाइनजाद)

एक्सपर्ट्स को आशंका- सरकार बेरहम कार्रवाई से नहीं हिचकेगी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब जब प्रदर्शन मध्यम वर्गीय इलाकों तक फैल गए हैं, तो सरकार बेरहमी से कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है।

ईरान पहले से ही इजराइल के साथ संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, गिरती अर्थव्यवस्था, बिजली और पानी की किल्लत जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। सरकार के भीतर भी मतभेद हैं।

राष्ट्रपति मसूद पजशकियान सार्वजनिक तौर पर नरम रुख दिखा रहे हैं, लेकिन उनके कई मंत्री सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं। सरकार का आरोप है कि अमेरिका और इजराइल इन प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोग पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं, जिन्होंने विदेश से प्रदर्शन तेज करने की अपील की है। कुर्द इलाकों में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है।

ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी

देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रहा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

खामेनेई की अपील- ट्रम्प को खुश करने के लिए देश बर्बाद न करें

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने शनिवार को देशभर में प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया था। ईरान की सरकारी टीवी ने उनका भाषण प्रसारित किया।

खामेनेई ने कहा कि ईरान ‘विदेशियों के लिए काम करने वाले भाड़े के लोगों’ को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी एजेंट हैं जो देश में हिंसा भड़का रहे हैं।

खामेनेई ने कहा कि देश में कुछ ऐसे उपद्रवी हैं जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करना चाहते हैं। लेकिन ईरान की एकजुट जनता अपने सभी दुश्मनों को हराएगी। उन्होंने ट्रम्प से कहा कि ईरान के मामलों में दखल देने के बजाए वे अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें।

उन्होंने आगे कहा- इस्लामिक रिपब्लिक सैकड़ों हजारों महान लोगों के खून के बल पर सत्ता में आई है। जो लोग हमें नष्ट करना चाहते हैं, उनके सामने इस्लामिक रिपब्लिक कभी पीछे नहीं हटेगी।”

खामेनेई का यह बयान उस घटना के कुछ ही समय बाद आया है, जब गुरुवार को ट्रम्प ने दोबारा चेतावनी दी थी कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों की हत्या करते हैं, तो अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है।

क्राउन प्रिंस बोले- देश लौटने की तैयारी कर रहा

ईरान के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने ऐलान किया है कि वह देश लौटकर चल रहे प्रदर्शनों में शामिल होंगे। 65 साल के रजा पहलवी करीब 50 साल से अमेरिका में निर्वासन में रह रहे हैं। शनिवार सुबह उन्होंने कहा कि वह अपने देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में रजा पहलवी ने लिखा- मैं भी अपने देश लौटने की तैयारी कर रहा हूं ताकि हमारी राष्ट्रीय क्रांति की जीत के समय मैं आप सबके साथ, ईरान की महान जनता के बीच खड़ा रह सकूं। मुझे पूरा भरोसा है कि वह दिन अब बहुत करीब है।

क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग

ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे। उनके बाद सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं।

ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं।

इसी कारण 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है।

ईरान की इकोनॉमी तेल निर्यात पर निर्भर

साल 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पैट्रोकैमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को 90% तेल निर्यात करता है।

ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है, जैसे कि INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स। फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा।

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आखिर 4 माह बाद होगी खामेनेई की अंतिम विदाई; जनाजे की भव्य तैयारी, जानें क्यों हुई संस्कार में देरी?

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तेहरान, एजेंसी। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के लगभग चार महीने बाद उनकी अंतिम यात्रा निकालने की तैयारी पूरी कर ली गई है। अधिकारियों के अनुसार, जून के तीसरे सप्ताह में होने वाले अंतिम संस्कार में करीब दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है, जो आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी अंतिम यात्राओं में से एक बन सकती है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान, क़ोम और मशहद में अंतिम दर्शन के लिए ले जाया जाएगा। तीन दिनों तक जनता को श्रद्धांजलि देने का अवसर दिया जाएगा, जिसके बाद उन्हें मशहद में दफनाया जाएगा।

इमाम रज़ा की दरगाह के पास होगी दफन
अधिकारियों ने बताया कि खामेनेई की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें ईरान के पवित्र शहर मशहद में स्थित इमाम रज़ा की दरगाह के निकट दफनाया जाए। शिया मुस्लिम समुदाय के लिए यह दुनिया के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। इमाम रज़ा, जिन्हें अली अल-रिदा के नाम से भी जाना जाता है, ट्वेल्वर शिया परंपरा के आठवें इमाम थे। उनकी दरगाह हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है और ईरान की आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, मुख्य शोक समारोह तेहरान में आयोजित होगा, जो लगभग 24 घंटे तक चल सकता है। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक नगर क़ोम ले जाया जाएगा और फिर मशहद में अंतिम संस्कार किया जाएगा। तेहरान नगर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि अंतिम यात्रा पवित्र शहरों क़ोम और मशहद से होकर गुजरेगी, जहां लाखों लोग श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

क्यों हुई अंतिम संस्कार में  देरी?
इस्लामी परंपरा के अनुसार किसी व्यक्ति को मृत्यु के कुछ दिनों के भीतर दफनाया जाता है, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्धकालीन परिस्थितियों, सुरक्षा चुनौतियों और अभूतपूर्व भीड़ की आशंका के कारण अंतिम संस्कार को स्थगित करना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार, इतने बड़े आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा प्रबंधों के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी।विश्लेषकों का मानना है कि यदि अनुमानित दो करोड़ लोग अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं तो यह 1989 में ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी की अंतिम यात्रा का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।खोमैनी के अंतिम संस्कार में लगभग एक करोड़ लोग शामिल हुए थे। उस दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी और हजारों घायल हुए थे।

बेटे मोजतबा खामेनेई संभाल रहे हैं नेतृत्व
खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया था। हालांकि सत्ता संभालने के बाद से उन्होंने अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि ईरान की राजनीतिक और वैचारिक एकजुटता का भी बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इमाम रज़ा की दरगाह के निकट दफनाए जाने से खामेनेई की विरासत को धार्मिक महत्व भी मिलेगा। समर्थकों के लिए यह कदम उन्हें शिया इतिहास और इमामों की परंपरा से जोड़ने वाला प्रतीक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की नजर इस अंतिम यात्रा पर रहेगी, क्योंकि यह न केवल ईरान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय होगा, बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। 

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अमेरिका में गूंजी भारत की आजादी गाथा, न्यूयॉर्क सीनेट में 15 अगस्त को लेकर ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित

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न्यूयॉर्क, एजेंसी। न्यूयॉर्क की सीनेट ने राज्य की गवर्नर कैथी होचुल से 15 अगस्त 2026 को राज्य में ‘भारत स्वतंत्रता दिवस’ घोषित करने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें सांसदों ने महात्मा गांधी की विरासत को याद किया और अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की। सीनेटर जेरेमी कूनी द्वारा प्रायोजित इस प्रस्ताव में कहा गया है कि न्यूयॉर्क राज्य की विधायिका की परंपरा रही है कि वह उन महत्वपूर्ण दिनों को मान्यता देती है, जो राज्य के नागरिकों की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े होते हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि ”भारत की स्वतंत्रता दुनिया भर के लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह नागरिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों के साथ-साथ आत्मनिर्णय के लिए चले 90 वर्षों के संघर्ष के अंत का प्रतीक है।”

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कई राज्य सीनेटरों ने भारत की प्राचीन सभ्यता, लोकतांत्रिक परंपराओं, महात्मा गांधी के शांति संदेश और न्यूयॉर्क सहित पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बढ़ते योगदान की प्रशंसा की। कूनी ने कहा कि दुनिया भर में भारतीय अपने-अपने समुदायों पर स्थायी प्रभाव छोड़ रहे हैं और यह अवसर साझा इतिहास, संस्कृति और विरासत का जश्न मनाने तथा उस पर विचार करने का है। सीनेटर जॉन लियू ने कहा कि भारत का अस्तित्व हजारों वर्षों से है। उन्होंने कहा, ”भारत एक सभ्यता रहा है, एक राष्ट्र रहा है और वास्तव में हमारे देश से भी लंबे समय से लोकतंत्र का एक आदर्श मॉडल रहा है।”

सीनेटर टोबी ऐन स्टाविस्की ने दोनों देशों के बीच मित्रता की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि दोनों देशों में समानताएं, मतभेदों से कहीं अधिक हैं। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सीनेट के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि ”यह भारत और अमेरिका के बीच मित्रता, लोकतंत्र और साझा मूल्यों के मजबूत संबंधों को दर्शाता है।” दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ”भारत की विरासत से लेकर न्यूयॉर्क के दिल तक : लोकतंत्र और समुदाय के रिश्तों का उत्सव।” भारतीय दूतावास ने प्रस्ताव आधिकारिक रूप से पेश करने के लिए जेरेमी कूनी का धन्यवाद किया और भारत की समृद्ध विरासत तथा न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के अमूल्य योगदान को सम्मान देने के लिए सभी विधायकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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दिल्ली मालवीय नगर होटल अग्निकांड की गूंज विदेशों तक, ग्लोबल मीडिया ने उठाए गंभीर सवाल, छिड़ गई नई बहस

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नई दिल्ली, एजेंसी। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी हैं। ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, कतर और बांग्लादेश सहित कई देशों के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने इस त्रासदी को प्रमुखता से कवर करते हुए भारत में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और भवन नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हादसे में मृतकों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की होने के कारण यह घटना वैश्विक मीडिया का ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

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अल जज़ीरा की रिपोर्ट
 कतर के समाचार चैनल अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भारत में आग लगने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि मालवीय नगर स्थित भवन के निचले हिस्से में रेस्तरां और ऊपर होटल संचालित हो रहा था। अल जज़ीरा ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि आग लगने के बाद पूरा भवन धुएं से भर गया और लोग अंदर फंस गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई इमारतों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी के कारण ऐसी घटनाओं में भारी जनहानि होती है।

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BBC ने  लिखा
ब्रिटेन के BBC ने अपनी रिपोर्ट में  इलाज के लिए भारत आए विदेशी नागरिक भी बने हादसे का शिकार हैडलाइन दी और बताया कि मृतकों में कई विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो भारत में चिकित्सा उपचार के लिए आए थे। BBC के अनुसार, यह भवन एक गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां आसपास के निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीज और उनके परिजन ठहरते थे। रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद के बयान का हवाला देते हुए कहा गया कि यह जांच की जा रही है कि भवन को गेस्ट हाउस के रूप में संचालित करने की वैध अनुमति थी या नहीं। BBC ने यह भी लिखा कि भारत में कई अग्निकांडों की जांच में खराब विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और भवनों के गलत उपयोग जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।

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स्पेन का एल पाइस
स्पेन के प्रमुख अखबार एल पाइस ने  सूचना मिलने में देरी और घनी आबादी को चुनौती बताया और लिखा कि दक्षिण दिल्ली के फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग की सूचना दमकल विभाग को देर से मिली। रिपोर्ट में कहा गया कि शुरुआती आशंका के अनुसार आग भवन के निचले हिस्से में चल रहे रेस्तरां से शुरू हुई हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एल पाइस ने दिल्ली की घनी आबादी, संकरी गलियों और पुराने भवनों में सुरक्षा मानकों की कमी को ऐसी घटनाओं के गंभीर होने का प्रमुख कारण बताया।

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जर्मनी का DW
जर्मन मीडिया संस्थान DW News ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भवन के बेसमेंट में रेस्तरां और ऊपर होटल संचालित हो रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक जांच में रेस्तरां से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आग के वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है।DW ने यह भी उल्लेख किया कि मृतकों में कुछ विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो इलाज के लिए भारत आए थे।

ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन
ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन ने घटना के मानवीय पहलू को प्रमुखता से दिखाया। रिपोर्ट में कहा गया कि आग और धुएं के तेजी से फैलने के कारण ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से छलांग लगानी पड़ी। द सन ने स्थानीय लोगों की सराहना करते हुए लिखा कि उन्होंने सड़क पर गद्दे बिछाकर कई लोगों की जान बचाने में मदद की। रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का भी जिक्र किया गया, जिनमें इमारत से उठती लपटें और धुआं दिखाई दे रहा था।

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बांग्लादेश का डेली स्टार 
बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र डेली स्टार ने लिखा कि आग लगने के बाद कई घंटों तक बचाव अभियान चलाया गया और 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि मृतकों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो इलाज या अन्य कार्यों के सिलसिले में दिल्ली आए हुए थे।विश्व मीडिया की अधिकांश रिपोर्टों में एक समान चिंता उभरकर सामने आई है ग्नि सुरक्षा मानकों का पालन, भवनों का उपयोग और आपातकालीन निकासी व्यवस्था।दिल्ली पुलिस ने होटल मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि भवन में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

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