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लश्कर के आतंकी की हिंदुओं का गला काटने की धमकी:वायरल वीडियो में कहा- कश्मीर को आजादी भीख मांगने से नहीं, जिहाद से मिलेगी

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इस्लामाबाद,एजेंसी। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबू मूसा कश्मीरी ने हिंदुओं की गर्दन काटने की धमकी दी है। उसने यह बयान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दिया। इसका वीडियो भी सामने आया है, हालांकि ये कब का है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

वीडियो में अबू मूसा कहता है- कश्मीर मुद्दे का हल सिर्फ आतंकवाद और जिहाद से ही हो सकता है। आजादी भीख मांगने से नहीं, हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगी। हमें जिहाद का झंडा उठाना होगा।

अबू मूसा कश्मीरी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन जम्मू कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट का मेंबर है। उसका नाम अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले से भी जुड़ा था।

पाकिस्तानी नेताओं पर इस्लामी सिद्धांतों से भटकने का आरोप

अपने भाषण में अबू मूसा ने पाकिस्तानी नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि पाकिस्तान के नेता इस्लामी सिद्धांतों से भटक चुके हैं और जिहाद के रास्ते पर नहीं चल रहे हैं।

उसने कहा जो नेता जिहाद के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, उसे पाकिस्तान पर हुकूमत करने का कोई अधिकार नहीं है। मूसा ने दावा किया कि वह पहले भी ऐसे ही बयान मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हुई एक बैठक में दे चुका है।

अबू मूसा पहलगाम हमले में भी शामिल था

अबू मूसा पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले में भी शामिल था। दैनिक भास्कर ने तब पड़ताल की थी कि आखिर पहलगाम अटैक के दौरान पाकिस्तान से आतंकियों को कौन आदेश दे रहा था। इस दौरान दो पाकिस्तानी हैंडलर के नाम मिले थे।

पहला अबू मूसा और दूसरा रिजवान हनीफ। दोनों पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिंग कमांडर हैं। इन्हीं दोनों ने मुरीदके में अफगान को ट्रेनिंग भी दी थी। हालांकि सूत्रों का दावा था कि पहलगाम अटैक का मास्टरमाइंड अबू मूसा ही है। ये सैफुल्लाह कसूरी का करीबी भी है।

अबू मूसा ने पहले भी हिंदुओं को मारने की बात कही थी

पहलगाम हमले से 4 दिन पहले 18 अप्रैल को लश्कर के एक कार्यक्रम में अबू मूसा ने कश्मीर में हिंदुओं को मारने का जिक्र किया था। इसका वीडियो भी सामने आया था। इसमें मूसा ने कहा था, ’गाजा और कश्मीर का एक ही मसला है और दोनों मसलों का एक ही हल है, वो है जिहाद। उसने कहा था- हमें भीख नहीं, आजादी चाहिए। फिलिस्तीन और कश्मीर के जो दुश्मन हैं, वो हमारे दुश्मन हैं। जब इजराइल को घुटने पर ले आए, तो कश्मीर में भी करेंगे।’

अबू मूसा कथित तौर पर 'जम्मू-कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट' (JKUM) का नेतृत्व करता है। ये तस्वीर पिछले साल 18 अप्रैल को हुए उसी आयोजन की है, जिसमें उसने कश्मीर की तुलना गाजा-फिलिस्तीन से की थी।

अबू मूसा कथित तौर पर ‘जम्मू-कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट’ (JKUM) का नेतृत्व करता है। ये तस्वीर पिछले साल 18 अप्रैल को हुए उसी आयोजन की है, जिसमें उसने कश्मीर की तुलना गाजा-फिलिस्तीन से की थी।

लश्कर के एक और आतंकी ने पाकिस्तानी नेताओं पर तंज किया था

लश्कर-ए-तैयबा के एक अन्य कमांडर मोहम्मद अशफाक राणा ने भी कुछ दिन पहले इसी तरह पाकिस्तानी नेताओं पर तंज किया था। अशफाक राणा ने सीधे शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की आलोचना करते हुए उन पर देश को सही तरीके से न चलाने और अंतरराष्ट्रीय कर्ज को बर्बाद करने का आरोप लगाया था।

उसने दावा किया था कि अगर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिले पैसों का सही इस्तेमाल किया गया होता, तो पाकिस्तान आज सऊदी अरब से भी ज्यादा खूबसूरत और ब्रिटेन व स्पेन से ज्यादा विकसित होता।

उसने आगे कहा कि इसके बावजूद देश की हालत लगातार खराब होती जा रही है। उसने कहा कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा भारी कर्ज के बोझ के साथ जन्म ले रहा है। अगर यह पैसा देश के भीतर लगाया गया होता तो पाकिस्तान आज कई विकसित देशों से आगे होता।

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नेपाल की बाढ़ से गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ा:बैराज के 36 गेट खोले गए, मोतिहारी-गोपालगंज समेत बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट

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पटना, एजेंसी। नेपाल के रसुवा जिले में बाढ़ से तबाही के बाद बिहार की गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ गया। बिहार के बागहा स्थित गंडक बैराज के 36 गेट खोल दिए गए हैं।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, इस बाढ़ के बाद गंडक में 3 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं, फ्लैश फ्लड आने की भी आशंका है।

बिहार के 8 जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है। ये जिले पश्चिमी चंपारण (बगहा), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं।

बिहार के CM सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ बैठक की। अधिकारियों को अलर्ट रहने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने CM सम्राट चौधरी को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए NDRF को भी तैनात किया जा रहा है।

अब तक प्रशासन ने क्या-क्या किया

  • नेपाल का पानी आने से पहले बैराज से एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
  • बैराज के पानी से जुड़ने वाली कई नहरों को भी खाली कर लिया गया है।
  • नेपाल से आने वाले पानी के लिए बैराज में जगह बनाई जा रही है।
  • गंडक नदी के किनारे बसे लोगों को ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
  • NDRF-SDRF की टीम संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात की गई है।

गंडक नदी में बढ़ रहा पानी

दोपहर 12 बजे- गंडक नदी में पानी का बहाव सामान्य था।

दोपहर 12 बजे- गंडक नदी में पानी का बहाव सामान्य था।

दोपहर 3 बजे- बगहा में गंडक नदी में पानी का बहाव तेज हो गया है।

दोपहर 3 बजे- बगहा में गंडक नदी में पानी का बहाव तेज हो गया है।

कितना असर डाल सकता है नेपाल से आ रहा पानी

  1. नेपाल से आने वाले पानी की चौड़ाई 22 मीटर, गंडक नदी की 200 मीटर
  2. नेपाल के जिस नदी से पानी आ रहा है, उसकी चौड़ाई करीब 22 मीटर है, जबकि गंडक नदी करीब 200 मीटर चौड़ी है। आगे चलकर यह पानी गंडक और कोसी नदी में बंटेगा।
  3. गंडक में 3-4 लाख क्यूसेक पानी आने का अनुमान
  4. गंडक नदी में करीब 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी आने का अनुमान है। गंडक के तेज बहाव को देखते हुए आसपास के गांवों को खाली कराया गया है।
  5. बैराज पर खतरा नहीं, तेज बहाव चिंता
  6. वाल्मीकिनगर गंडक बैराज को करीब 8.5 लाख क्यूसेक पानी का दबाव झेलने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इसलिए 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी आने पर फिलहाल बैराज पर खतरे की आशंका नहीं है। सबसे बड़ी चिंता तेज करंट को लेकर है, जिससे नदी में नाव चलाना जोखिम भरा हो सकता है।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए बगहा में लोग सारा सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर जाते दिखे।

बाढ़ के खतरे को देखते हुए बगहा में लोग सारा सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर जाते दिखे।

बगहा में टीम लोगों को निचले इलाकों से दूर रहने को कह रही है।

बगहा में टीम लोगों को निचले इलाकों से दूर रहने को कह रही है।

नेपाल बॉर्डर पर आवाजाही रोकी

बगहा में बॉर्डर पर नाकेबंदी की गई है। बिहार के जो लोग नेपाल में फंसे हैं, उन्हें भारत आने दिया जा रहा है। नेपाल के जो लोग बिहार में फंसे हैं, उन्हें नेपाल जाने दिया जा रहा है। अन्य लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

खबर से जुड़े हाईलाइट्स

  • वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से दोपहर 12 बजे 86 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
  • नेपाल के देवघाट में नारायणी नदी का जलस्तर अभी 4.77m है। यहां चेतावनी स्तर 7.30m और खतरे का निशान 9 मीटर है।
  • देवघाट में पानी बढ़ने के बाद गंडक बैराज तक पहुंचने में करीब 3.5 घंटे लग सकते हैं।
  • एहतियात के तौर पर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं।
  • मुजफ्फरपुर में SDM, BDO और CO ने मौके पर पहुंचकर बांध की स्थिति और आसपास के इलाकों का जायजा लिया।
  • वाल्मीकि नगर में प्रशासन की तरफ से माइकिंग की जा रही है। नदी से दूर रहने को कहा जा रहा है।
  • पूर्णिया के अमौर, बायसी और बैसा प्रखंड में भी प्रशासन अलर्ट है। माइकिंग की जा रही है।
  • गोपालगंज के 6 प्रखंड की 62 पंचायत प्रभावित होंने की आशंका है। जिला प्रशासन ने लोगो से ऊंचे स्थान पर जाने की अपील की है।

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नेपाल में बाढ़ से तबाही, सैकड़ों लापता, 95 मौतें:पावर प्लांट-पुल बहे, 133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे

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काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी। सुबह 9 बजे तिब्बत की दिशा से भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आया जिसमें कई इलाके चपेट में आ गए।

नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं।

नेपाली अधिकारियों के मुताबिक एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि जिस ग्लेशियल झील के फटने से अचानक बाढ़ आई थी, वहां अभी भी करीब 7 मीटर ऊंचा पानी का बांध बना हुआ है। यह कभी भी टूट सकता है।

तिब्बत से नेपाल में घुसा बाढ़ का पानी

तिब्बत-चीन सीमा पर ग्यिरोंग पोर्ट के इमिग्रेशन कॉम्प्लेक्स में लोग खतरे को देखकर भागते नजर आ रहे हैं।

तिब्बत-चीन सीमा पर ग्यिरोंग पोर्ट के इमिग्रेशन कॉम्प्लेक्स में लोग खतरे को देखकर भागते नजर आ रहे हैं।

अचानक आई बाढ़ के दौरान मिट्टी और पानी का तेज बहाव घुसता हुआ। पानी इमिग्रेशन कॉम्पलेक्स के ऊपर से आता हुआ दिख रहा है।

अचानक आई बाढ़ के दौरान मिट्टी और पानी का तेज बहाव घुसता हुआ। पानी इमिग्रेशन कॉम्पलेक्स के ऊपर से आता हुआ दिख रहा है।

बाढ़ का पानी इतनी तेज रफ्तार से आया कि लोगों को संभलने और सुरक्षित जगह पहुंचने तक का मौका नहीं मिला।

बाढ़ का पानी इतनी तेज रफ्तार से आया कि लोगों को संभलने और सुरक्षित जगह पहुंचने तक का मौका नहीं मिला।

चीन-नेपाल को जोड़ने वाला पुल तबाह

पानी के बहाव ने रसुआ जिले में नेपाल और चीन को जोड़ने वाले मितेरी पुल को तोड़ दिया।

पानी के बहाव ने रसुआ जिले में नेपाल और चीन को जोड़ने वाले मितेरी पुल को तोड़ दिया।

उफान पर भोटे कोशी नदी के तेज बहाव में पुल का बाकी हिस्सा भी बह गया।

उफान पर भोटे कोशी नदी के तेज बहाव में पुल का बाकी हिस्सा भी बह गया।

पहाड़ से उतर रही नदी ने तबाई मचाई

नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटे कोशी नदी में पानी का तेज बहाव नीचे आता दिख रहा है।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटे कोशी नदी में पानी का तेज बहाव नीचे आता दिख रहा है।

जैसे-जैसे नदी का पानी नीचे आया उसकी रफ्तार और ऊंचाई और ज्यादा हो गई।

जैसे-जैसे नदी का पानी नीचे आया उसकी रफ्तार और ऊंचाई और ज्यादा हो गई।

भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने रास्ते में आने वाले घरों को तबाह कर दिया।

भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने रास्ते में आने वाले घरों को तबाह कर दिया।

बाढ़ की वजह क्या?

शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक, ल्हेंदे नदी में बर्फ और पत्थरों का बड़ा हिस्सा गिरा, जिससे नदी का रास्ता रुक गया और पानी जमा होने लगा।

बाद में यह रुकावट टूट गई और जमा पानी तेज रफ्तार से नीचे बहा, जिससे अचानक फ्लैश फ्लड आ गई। ग्लेशियल झील फटने (GLOF) की संभावना की भी जांच की जा रही है। उस समय रसुवा में तेज बारिश नहीं हुई थी।

हालांकि इसकी वजह भूकंप भी बताई जा रही है। सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। बाढ़ भी इसी समय के आसपास आई, इसलिए इसके संबंध की जांच हो रही है।

नेपाल में 42 किमी की सड़क बही

बाढ़ का असर रसुवा से नुवाकोट, धादिंग होते हुए चितवन तक देखा गया। रसुवा में टिमुरे, स्याफ्रुबेसी, हाकुबेसी, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खाल्टी बस्ती और बेत्रावती समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुईं। बाढ़ धादिंग के गल्छी तक पहुंची और आगे मुग्लिन की ओर बढ़ने की चेतावनी दी गई।

बेत्रावती से रसुवागढ़ी-तिब्बत सीमा तक करीब 42 किमी सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई। इसके अलावा स्याफ्रुबेसी से सीमा तक 16 किमी सड़क को भी नुकसान पहुंचा।

भारत में कहां-कितना असर होगा

भारत में इसका असर मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी छोटी-बड़ी नदियों में दिखने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने का अलर्ट है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास सतर्कता बरती जा रही है।

सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए गंडक तक पहुंचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। अगले 5-6 घंटे अहम बताए गए हैं। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि इन सभी इलाकों में बाढ़ आएगी ही।

बिहार में बाढ़ का अलर्ट, गंडक नदी के जलस्तर पर नजर

नेपाल में बाढ़ के बीच भारत के पड़ोसी राज्य बिहार में भी गंडक नदी से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य के कई जिलों में तटबंधों की निगरानी, रात में गश्त और आपातकालीन टीमों की तैनाती जैसे कदम उठाए गए हैं।

रेड क्रॉस के मुताबिक, करीब 3 मीटर ऊंची लहरों का खतरा जताया गया है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 अगस्त को बाढ़ प्रभावित पटना, भागलपुर, कटिहार, नौगछिया, बेगूसराय और खगड़िया जिलों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया था।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 अगस्त को बाढ़ प्रभावित पटना, भागलपुर, कटिहार, नौगछिया, बेगूसराय और खगड़िया जिलों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया था।

तिब्बत में भूस्खलन से 3 लोगों की मौत, 265 लापता

चीनी सरकारी मीडिया CCTV के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग में हुए भूस्खलन में अब तक 3 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 265 लोग लापता हैं। स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे तक का यह आंकड़ा है। प्रभावित इलाके में बचाव अभियान जारी है।

बाढ़ में 13 साल की बच्ची समेत 12 ब्रिटिश नागरिक लापता

नेपाल के रासुवा जिले में आई भीषण बाढ़ के बाद 13 साल की बच्ची समेत 12 ब्रिटिश नागरिक लापता बताए जा रहे हैं।

लापता ब्रिटिश नागरिकों की उम्र 13 से 65 साल के बीच है। वे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक टूर ग्रुप के साथ यात्रा कर रहे थे। ट्रैवल कंपनी के मुताबिक, इस ग्रुप में 12 ब्रिटिश, 4 दक्षिण अफ्रीकी और 4 नेपाली नागरिक शामिल थे।

पायलट ने बताया- बाढ़ में 5 से 6 मीटर ऊंची लहरें देखीं

भीषण बाढ़ को हवा से देखने वाले एक हेलीकॉप्टर पायलट ने बताया कि उसने 5 से 6 मीटर तक ऊंची पानी की लहरें देखीं।

पायलट अमन बुधाथोकी ने CNN को बताया कि लैंडिंग से करीब पांच मिनट पहले उन्हें नदी से धूल उठती दिखाई दी। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद भूस्खलन हुआ है। उन्होंने यह भी अंदाजा लगाया कि सड़क बनाने के लिए सेना विस्फोट कर रही होगी।

लेकिन कुछ ही सेकंड में उन्हें समझ आया कि यह तेज बाढ़ का पानी है। उन्होंने बताया कि गहरे रंग का पानी मलबे के साथ तेज गति से नीचे की ओर बह रहा था।

उन्होंने कहा कि यह बेहद डरावना दृश्य था। नुकसान का अंदाजा लगाने के लिए उन्होंने कुछ समय तक बाढ़ के बहाव का पीछा भी किया। पायलट ने कहा कि उन्होंने इससे पहले कभी प्रकृति की ताकत को इस तरह सामने आते नहीं देखा था।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी तबाही

नेपाल के खड्ग भंज्यांग इलाके की 23 अगस्त और 26 अगस्त 2026 की सैटेलाइट तस्वीरें, जिनमें बाढ़ से पहले और बाद का फर्क दिख रहा है।

चीन ने 574 बचावकर्मी और 30 हजार राहत सामग्री भेजी

चीन ने तिब्बत के ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर मलबे के बहाव के बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। इसके लिए 574 बचावकर्मियों को प्रभावित इलाके में भेजा गया है।

बचाव दल के साथ जरूरी मशीनें और खास उपकरण भी भेजे गए हैं, ताकि मलबे में फंसे या लापता लोगों की तलाश की जा सके।

बाढ़ में तमिलनाडु के करीब 50 तीर्थयात्री फंसे

नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बीच तमिलनाडु के करीब 50 तीर्थयात्री फंस गए हैं। अलर्ट मिलने के बाद तमिलनाडु सरकार ने उनके बचाव के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ये तीर्थयात्री तीन वाहनों में सवार होकर जा रहे थे। इनमें से एक वाहन में सवार लोगों ने टिमुरे स्थित सशस्त्र पुलिस बल की चौकी में शरण ली है। टिमुरे काठमांडू से करीब 150 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।

अधिकारियों के मुताबिक, फंसे हुए तीर्थयात्री तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों से हैं। इनमें चेन्नई, पुडुचेरी, चिदंबरम, कुंभकोणम, मयिलादुथुरई और तिरुचिरापल्ली के लोग शामिल हैं।

तमिलनाडु सरकार के अधिकारी नेपाल में संबंधित एजेंसियों के संपर्क में हैं और तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

नेपाली सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

80 सुरक्षाकर्मी भी लापता

बाढ़ की चपेट में सुरक्षा बल भी आए हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हैं। इनमें 44 नेपाली सेना के जवान शामिल हैं।

कैलाश मानसरोवर यात्रियों की तलाश तेज

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के लिए नेपाल का रसुवागढ़ी मार्ग अहम रास्ता है। बाढ़ के कारण नेपाल-चीन सीमा की ओर जाने वाली सड़क को भारी नुकसान पहुंचा है।

कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित हैं। हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है। यह बौद्ध, जैन और बोन परंपरा के अनुयायियों के लिए भी पवित्र स्थल है।

भारत से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर साल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते तिब्बत की ओर जाते हैं। इस बार बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों के संपर्क से बाहर होने के बाद उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

लापता लोगों में 3 अमेरिकी नागरिक भी

नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, लापता 291 विदेशी नागरिक लापता हैं। इनमें 142 भारतीय, 17 मलेशियाई, 12 ब्रिटिश, 4 दक्षिण अफ्रीकी, 8 दक्षिण कोरियाई, 1 अमेरिकी, 1 ऑस्ट्रेलियाई और 1 डच नागरिक शामिल हैं।

हालांकि, रिपोर्ट में एक जगह कम से कम 3 अमेरिकी नागरिकों के लापता होने की बात कही गई है। 111 अन्य लापता लोगों के नागरिकता की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है।

भोटेकोशी नदी में अचानक आई फ्लैश फ्लड के बाद रिहायशी इलाके से तेज रफ्तार में गंदा बाढ़ का पानी बहता हुआ।

भोटेकोशी नदी में अचानक आई फ्लैश फ्लड के बाद रिहायशी इलाके से तेज रफ्तार में गंदा बाढ़ का पानी बहता हुआ।

बाढ़ में 500 लोग लापता, इनमें 37 INR भी शामिल

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद करीब 500 यात्री लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 37 प्रवासी भारतीय (NRI) और 105 भारतीय नागरिक शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने यह जानकारी दी है।

सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा की आबादी करीब 50 हजार

रासुवा में सबसे ज्यादा तबाही हुई है। यह जिला काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा के पास स्थित है।

बाढ़ ने रसुवा से नुवाकोट और धादिंग तक नदी किनारे के कई इलाकों को प्रभावित किया। करीब 40-42 किलोमीटर सड़क और कम से कम 19 पुलों को नुकसान पहुंचा है। करीब दर्जनभर बस्तियां भी प्रभावित हुई हैं। रसुवा जिले की आबादी करीब 50 हजार है।

तबाही के मंजर की तस्वीरें

सैटेलाइट तस्वीर में दिखा तबाही का मंजर

सैटेलाइट तस्वीर में नेपाल की एक घाटी में पहाड़ों से नीचे की ओर आए मलबे, चट्टानों और बर्फ के तेज बहाव के निशान दिखाई दे रहे हैं।

रसुवा में बाढ़ से नौ बैंकों की शाखाएं बहीं, 26 कर्मचारी लापता

रसुवा में आई भीषण बाढ़ में नौ बैंकों की शाखाएं बह गईं। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन के मुताबिक, इनमें काम करने वाले 26 कर्मचारियों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। टेलीफोन सेवाएं ठप होने और बिजली नहीं होने के कारण राहत एवं बचाव टीमों को भी संपर्क करने में परेशानी हो रही है।

भारतीय वायुसेना अलर्ट पर, C-17 और C-130 विमान तैयार

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को कहा कि भारतीय वायुसेना नेपाल में राहत और बचाव मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है। राहत सामग्री, दवाइयों और मिट्टी हटाने वाले उपकरणों से लदे सी-17 और सी-130 विमान स्टैंडबाय पर रखे गए हैं।

बाढ़ के मलबे में अपना सामान ढूंढ़ते लोग

शी जिनपिंग ने राहत-बचाव तेज करने का दिया आदेश

तिब्बत में आई बाढ़ के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।

बाढ़ में कई लोगों की मौत हुई है। लापता लोगों की तलाश जारी है। बचाव अभियान के लिए 145 पुलिसकर्मियों और जवानों को प्रभावित इलाके में भेजा गया है।

नेपाल में तबाही की फोटोज

नेपाल के पहाड़ी जिले रासुवा में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने नदी किनारे बसे इलाकों में भारी तबाही मचाई।

नेपाल के पहाड़ी जिले रासुवा में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने नदी किनारे बसे इलाकों में भारी तबाही मचाई।

नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली में 26 अगस्त 2026 को अचानक आई बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त घर।

नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली में 26 अगस्त 2026 को अचानक आई बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त घर।

त्रिशूली में 26 अगस्त 2026 को अचानक आई बाढ़ के बाद एक घर के आसपास जमा हुआ कीचड़ और मलबा।

त्रिशूली में 26 अगस्त 2026 को अचानक आई बाढ़ के बाद एक घर के आसपास जमा हुआ कीचड़ और मलबा।

नेपाल के त्रिशूली में अचानक आई बाढ़ के बाद एक घर के आसपास जमा हुआ मलबा।

नेपाल के त्रिशूली में अचानक आई बाढ़ के बाद एक घर के आसपास जमा हुआ मलबा।

नेपाल के नुवाकोट जिले के ढुंगेबाजार में त्रिशूली नदी के आसपास का इलाका बाढ़ से प्रभावित हुआ।

नेपाल के नुवाकोट जिले के ढुंगेबाजार में त्रिशूली नदी के आसपास का इलाका बाढ़ से प्रभावित हुआ।

नेपाल में 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को नुकसान

बाढ़ से नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक रसुवा और नुवाकोट जिलों में कम से कम 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। इनमें चालू और निर्माणाधीन दोनों परियोजनाएं शामिल हैं।

लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी भारी नुकसान की खबर है। 20 मेगावाट की इस निर्माणाधीन परियोजना का पावरहाउस बाढ़ में पूरी तरह बह गया है। यहां 60 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोग +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।

नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है।

PM मोदी बोले- भारत हर संभव मानवीय मदद देने को तैयार

नेपाल में बाढ़ से हुई जनहानि पर प्रधानमंत्री मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।

लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना के 60 लोग लापता

नेपाल की 20 मेगावाट क्षमता वाली लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 60 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

परियोजना के प्रमोटर बिजय मोहन भट्टराई के मुताबिक, इनमें सुरंग के अंदर काम कर रहे 35 लोग शामिल हैं। भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ के बाद सुबह से इन लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है।

हेलिकॉप्टर से लोगों का रेस्क्यू जारी

ग्लेशियल झील फटने की आशंका

रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिमी से ज्यादा बारिश नहीं हुई, इसलिए बाढ़ की वजह स्थानीय बारिश नहीं मानी जा रही। अधिकारियों को शक है कि तिब्बत में ग्लेशियल झील फटने (GLOF) से अचानक पानी भोटे कोशी में आया।

ICIMOD-UNDP की 2020 की स्टडी के मुताबिक, भोटे कोशी बेसिन में 122 ग्लेशियल झीलें हैं। कौन-सी झील फटी, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है; सैटेलाइट इमेज और तकनीकी जांच से स्रोत का पता लगाया जा रहा है।

टिमुरे में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान की आशंका है। फिलहाल मौतों और नुकसान का सही आंकड़ा जुटाया जा रहा है।

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देश

खाद्य मानकों में सख्ती के FSSAI के कदमों के समर्थन में नेस्लेः वैश्विक सीईओ

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नई दिल्ली, एजेंसी। दिग्गज एफएमसीजी कंपनी नेस्ले के वैश्विक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) फिलिप नवरातिल ने बुधवार को खाद्य उत्पादों की लेबलिंग के नियमों को कड़ा करने के भारतीय खाद्य नियामक एफएसएसएआई के कदम का समर्थन किया। रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनी के सीईओ नवरातिल ने कहा कि ग्राहकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि वे जिस खाद्य पदार्थ का सेवन कर रहे हैं, उसमें क्या-क्या मिलाया गया है। उन्होंने कहा कि नेस्ले भारत में नियामकीय अनिवार्यता नहीं होने के बावजूद कैलोरी समेत सभी सामग्री की जानकारी देती है और कंपनी पारदर्शिता लाने के कदमों का समर्थन करती है। 

नवरातिल ने एक मीडिया गोलमेज बैठक में कहा, ”हम चाहते हैं कि उपभोक्ता इस बात को लेकर जिज्ञासु हों कि वे क्या खाते और पीते हैं। हम हमेशा पारदर्शिता के पक्ष में रहे हैं।” उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य कंपनियों के दावों और खुलासों की जांच हाल में तेज की है। नियामक ने भ्रामक विज्ञापनों, स्वास्थ्य संबंधी अप्रमाणित दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रमुख खाद्य एवं पेय कंपनियों को 150 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। इस पर नवरातिल ने कहा कि नेस्ले पैकेट के सामने पोषण संबंधी जानकारी देने के नियमों का भी स्वागत करेगी। 

उन्होंने कहा कि कंपनी चीनी, वसा और सोडियम की मात्रा कम करके अपने उत्पादों के पोषण संबंधी प्रोफाइल में सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे नियमों से उपभोक्ताओं को बेहतर जानकारी मिलेगी और वे अपने तथा अपने परिवार के लिए बेहतर विकल्प चुन सकेंगे। हालांकि, उन्होंने इस पर जोर दिया कि ऐसे नियम उचित और संतुलित तरीके से तथा वैज्ञानिक आधार पर लागू किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पोषण संबंधी जानकारी उत्पाद के कुल ग्राम के बजाय एक सामान्य हिस्से के आधार पर देना अधिक उपयुक्त हो सकता है, क्योंकि उपभोक्ता आमतौर पर उत्पाद का एक हिस्सा खाते हैं। सरकार के साथ सहयोग के बारे में पूछे जाने पर नवरातिल ने कहा कि यदि सरकार कंपनियों से सुझाव मांगती है तो नेस्ले अपने अनुभव और अन्य देशों के अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।

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