छत्तीसगढ़
बिलासपुर के आचार्यों द्वारा म.प्र. में दशमहाविद्या अनुष्ठान साईंखेड़ा नगर में 06 मार्च से
बिलासपुर । मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के समीप साईंखेड़ा नगर में नर्मदा तट समीप झिकोली में बिलासपुर के आचार्यों द्वारा दशमहाविद्या एवं श्रीविद्या का अनुष्ठान सम्पन्न कराया जायेगा। यह पूरा अनुष्ठान बिलासपुर निवासी धर्मभूषण डॉ. पं. श्रीधर गौरहा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न होने जा रहा है। इस अनुष्ठान में मोरबी गुजरात की सुप्रसिद्ध कथावाचिका एवं अग्निपीठ अखाड़े की पहली महिला महामंडलेश्वर साध्वी माता कनकेश्वरी देवी का सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भी आयोजन हो रहा है। बिलासपुर से भागवताचार्य पं. संकल्प शुक्ला, आचार्य पं. चिरंजीव पाण्डेय, पं. शिवम पाण्डेय, परिचालक पं. आदित्य बाजपेयी, पं. लव चौबे एवं पं. अभिषेक तिवारी महाविद्या अनुष्ठान सम्पन्न कराने जा रहे हैं। अवगत हो कि नरसिंहपुर जिले के आगे गाडरवारा स्टेशन से लगभग 30 किमी दूर साईंखेड़ा झिकोली में नर्मदा तट किनारे श्रीगुरुकृपा आश्रम संचालित है और यह क्षेत्र धूनीवाले दादाजी की तपस्थली के रुप में विख्यात है। कार्यक्रम आयोजक आश्रम प्रमुख साध्वी माता अंजनीदास एवं रामदास जी महाराज हैं । इस आयोजन से आसपास के क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है।
इस वृहद अनुष्ठान के मार्गदर्शक डॉ. पं. श्रीघर गौरहा के श्रीविद्या पर शोधग्रन्थ “श्रीविद्या-रहस्यम्” के कारण उन्हे मानद् विद्यावाचस्पति (पीएचडी) एवं दशमहाविद्या पर वृहद शोध ग्रन्थ “महाविद्या-रत्नाकरः” के लिए मानद् विद्यासागर (डी.लिट्) सम्मान प्रदान किया गया था। इनकी रचनाओं को द्वारका-शारदा एवं बद्रीनाथ ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य द्वारा अनुमोदित भी किया गया है जिससे कई श्रद्धालुगण लाभान्वित होते आ रहे हैं। ये दोनो ग्रन्थ राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध और मान्यता प्राप्त हैं। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए श्री गौरहाजी ने बताया है कि इस शक्ति अनुष्ठान में काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर-भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी एवं कमला का वैदिक एवं तान्न्त्रोक्त रीति से क्रम से अर्चन-पूजन- हवनादि कर्म सम्पन्न होंगे और अन्त में श्रीविद्या राजराजेश्वरी ललिता महात्रिपुरसुन्दरी का अनुष्ठान सम्पन्न होगा। ये सारी गतिविधियॉं राष्ट्र कल्याण और लोक कल्याण की भावना से संपादित होंगे। इस कार्य को सम्पन्न कराने की प्रेरणा उनके गुरुदेव प्रातः स्मरणीय पूज्य बर्फानी दादाजी महाराज से प्राप्त है जो कि कई वर्षों पूर्व अनुष्ठान स्थल जाकर स्वयं आश्रम प्रमुख माताजी को लिखित में आदेशित कर गए थे। बिलासपुर क्षेत्र से दश महाविद्या पर सांगोपांग जानकारी रखने वाले साधक और यहॉं के स्थानीय आचार्यों द्वारा इस कठिन कार्य को मध्यप्रदेश जाकर सम्पन्न कराया जाना क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

छत्तीसगढ़
सुकमा : मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता
जिला अस्पताल में मौत के मुंह से लौटाई महिला की सांसें
सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय श्रीमती पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई।
महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज श्रीमती पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के मातृत्व वन में किया सीता अशोक के पौधे का रोपण
जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।
राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।
मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल श्री डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।
इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल श्री डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।

इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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