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कोरबा

समाज को भ्रमित करने वाले नैरेटिव से रहें सचेत : कैलाश चंद्र

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श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय, कोरबा में कल्चरल मार्क्सवाद पर परिचर्चा आयोजित
मीडिया, सिनेमा, पाठ्यक्रम और साहित्य के माध्यम से सामाजिक धारणाओं के
निर्माण पर हुआ मंथन

कोरबा। श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय, कोरबा में ‘कल्चरल मार्क्सवाद’ विषय पर अध्ययन एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कोरबा में आयोजित ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र में क्षेत्र साहित्य प्रमुख विश्वजीत सिंह , क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश चंद्र ,छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा उपस्थित रहे।

 परिचर्चा में कल्चरल मार्क्सवाद की ऐतिहासिक एवं वैचारिक पृष्ठभूमि सहित शिक्षा, संस्कृति, परिवार, मीडिया, सिनेमा, साहित्य, फिल्म, वेब सीरीज और ओटीटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से निर्मित होने वाले सामाजिक नैरेटिव पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश चंद्र ने कहा कि कल्चरल मार्क्सवाद को समझने के लिए उसके अकादमिक स्रोतों, ऐतिहासिक विकास और वैचारिक पृष्ठभूमि का गंभीर अध्ययन आवश्यक है। वर्तमान समय में सामाजिक विचारों और धारणाओं के निर्माण में मीडिया तथा विभिन्न प्रकार के नैरेटिव की महत्वपूर्ण भूमिका
है।

उन्होंने कहा कि समाज में प्रचलित किसी विचार अथवा नैरेटिव को केवल उसकी बाहरी अभिव्यक्ति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके स्रोत, उद्देश्य और दीर्घकालीन प्रभावों के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। समाज में वैचारिक भ्रम उत्पन्न करने वाले नैरेटिव को पहचानने के लिए तथ्यपरक अध्ययन, तार्किक चिंतन और निरंतर संवाद आवश्यक है।
बाजार के निर्माण में संस्कृति और नैरेटिव की भूमिका कैलाश चंद्र ने वैश्विक बाजार शक्तियों और सामाजिक-सांस्कृतिक नैरेटिव के संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि बाजार का निर्माण केवल उत्पादन, व्यापार और उपभोग से नहीं होता। संस्कृति, जीवन-शैली, सामाजिक धारणाएं और प्रचारित नैरेटिव भी बाजार की दिशा तथा उपभोक्ताओं के व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था, अकादमिक पाठ्यक्रमों और मनोरंजन माध्यमों के जरिए सामाजिक एवं सांस्कृतिक विमर्श का निर्माण होता है। शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाया जाने वाला विचार धीरे-धीरे सार्वजनिक विमर्श और समाज के नैरेटिव का हिस्सा बन जाता है। इसलिए विद्यार्थियों को विभिन्न विचारधाराओं का तथ्यपरक एवं तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
कैलाश चंद्र ने भारतीय और पश्चिमी चिंतन परंपराओं की तुलना करते हुए भारतीय दर्शन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति परिवार और उसकी मूल्य-व्यवस्था है। भारतीय परिवार केवल एक सामाजिक इकाई नहीं, बल्कि संस्कार, उत्तरदायित्व, सहयोग और पीढ़ियों के बीच ज्ञान एवं अनुभव के हस्तांतरण का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने भारतीय समाज की पारिवारिक एवं सांस्कृतिक संरचना पर वैश्विक वैचारिक और बाजारगत प्रवृत्तियों के संभावित प्रभावों को समझने की आवश्यकता बताई।
ग्राम्शी और फ्रैंकफर्ट स्कूल के विचारों पर विमर्श परिचर्चा में इटली के विचारक एंटोनियो ग्राम्शी के ‘सांस्कृतिक वर्चस्व’ के सिद्धांत तथा फ्रैंकफर्ट स्कूल से संबंधित प्रमुख विचारकों मैक्स होर्खाइमर, थियोडोर अडोर्नो और हर्बर्ट मार्क्यूज़ के विचारों का उल्लेख किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक वैचारिक विमर्श संस्कृति, शिक्षा, मीडिया और सामाजिक संस्थाओं के स्तर पर भी दिखाई देता है। समाज में प्रसारित होने वाले विभिन्न नैरेटिव, उनके अकादमिक स्रोत और सामाजिक प्रभाव को समझने के लिए ऐसे अध्ययन एवं परिचर्चा कार्यक्रम आवश्यक हैं।
विद्यार्थियों और प्रबुद्धजनों ने रखे प्रश्न परिचर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने शिक्षा, मीडिया, संस्कृति, परिवार, सामाजिक बदलाव, बाजार और मनोरंजन माध्यमों से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। वक्ताओं ने इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए विषय के अलग-अलग वैचारिक और सामाजिक पहलुओं को स्पष्ट किया।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और नगर के प्रबुद्धजनों ने सहभागिता की। प्रतिभागियों ने इस प्रकार के विषयों पर शैक्षणिक संस्थानों में नियमित अध्ययन, शोध और संवाद आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई।
विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर अध्ययन की आवश्यकता परिचर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कल्चरल मार्क्सवाद और समकालीन सामाजिक नैरेटिव जैसे विषयों पर विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर निरंतर अध्ययन और सार्थक विमर्श होना चाहिए। इससे विद्यार्थी और समाज के विभिन्न वर्ग वैचारिक प्रवृत्तियों को तथ्यपरक ढंग से समझ सकेंगे तथा किसी प्रकार के भ्रम से बचते हुए विवेकपूर्ण दृष्टिकोण विकसित कर
पाएंगे।
कार्यक्रम का समापन उपस्थित अतिथियों, वक्ताओं, महाविद्यालय परिवार और प्रतिभागियों के प्रति महाविद्यालय प्राचार्य डॉ मनोज कुमार झा के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। अध्येताओं में अक्षदा पुण्डलिक संगीता तिवारी नीति तिवारी देवेंद्र पिपरिया शीलू साहू ने परिचर्चा में भाग लिया। संचालन महाविद्यालय प्राध्यापक रुचिका कल्ला ने किया।

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कोरबा

पिंजरे में घुसा 5 फीट का नाग, कोबरा के साथ जीवन के लिए संघर्ष करता रहा तोता, प्रकृति के नियम के सामने बेबस रहा इंसान

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कोरबा। सुबह करीब 6.30 बजे मिशन रोड निवासी एक परिवार के लिए दिन की शुरुआत बेहद भावुक और डरावनी घटना के साथ हुई, परिवार जब अपने पालतू तोते को देखने के लिए पिंजरे के पास पहुंचा तो अंदर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए, पिंजरे के भीतर करीब 5 फीट लंबा नाग फन फैलाए बैठा था।

परिवार ने जब ध्यान से देखा तो पता चला कि नाग पिंजरे में घुसकर उनके पालतू तोते का शिकार कर चुका था, जिस तोते को परिवार ने लंबे समय से बड़े प्यार और स्नेह से पाला था, उसे इस तरह खोना उनके लिए बेहद दुखद था, वहीं पिंजरे में मौजूद दूसरे तोते को लेकर भी परिवार चिंतित हो गया कि कहीं नाग उसे भी अपना शिकार न बना ले।

बिना समय गंवाए परिवार ने वाइल्डलाइफ रेस्क्यु टीम प्रमुख (नोवा नेचर) के जितेंद्र सारथी को सूचना दी,सूचना मिलते ही सारथी ने तत्काल अपनी टीम के सदस्य बॉबी श्रीवास को मौके के लिए रवाना कियाफिर कुछ देर पश्चात मौके पर पहुंचकर सावधानीपूर्वक स्थिति को नियंत्रित किया और नाग का सुरक्षित रेस्क्यू किया, रेस्क्यू के दौरान नाग के शरीर पर संघर्ष के कारण चोट के निशान भी दिखाई दिए,सांप को सुरक्षित रेस्क्यू बैग में रखने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली, बाद में उसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक रहवास क्षेत्र में छोड़ दिया गया।

“तोते की मौत का दुख है, लेकिन सांप भी दोषी नहीं”

जितेंद्र सारथी ने कहा कि इस घटना में सबसे ज्यादा दुख उस परिवार को हुआ जिसने अपने तोते को अपने परिवार के सदस्य की तरह पाला था, लेकिन प्रकृति के नजरिए से देखें तो यह फूड चैन और इकोसिस्टम का हिस्सा है।

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कोरबा

सफाई मित्रों का सम्मान, उनके समर्पण को नमन: महापौर संजू देवी राजपूत

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सफाई मित्र नगर की स्वच्छता व्यवस्था की वास्तविक ताकत, उनकी सुरक्षा एवं कल्याण नगर निगम की प्राथमिकता
कोरबा।
नगर पालिक निगम कोरबा के पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार में आज जिला प्रशासन एवं नगर निगम के तत्वावधान में आयोजित सफाई मित्र सुरक्षा एवं सम्मान कार्यक्रम में महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर उन्होंने स्वच्छता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सफाई मित्रों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके समर्पण, मेहनत एवं सेवाभाव की सराहना की।

महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने कहा कि सफाई मित्र नगर की स्वच्छता व्यवस्था की वास्तविक ताकत हैं। उनकी मेहनत और निष्ठा से ही कोरबा को स्वच्छ, सुंदर एवं स्वस्थ बनाए रखने का संकल्प साकार होता है। सफाई मित्रों का योगदान केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि वे शहर के नागरिकों के स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली को सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि महापौर के रूप में सफाई मित्रों की सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य एवं कल्याण सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। नगर निगम परिवार के इन महत्वपूर्ण सदस्यों को बेहतर कार्य परिस्थितियां, आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निगम निरंतर प्रयासरत है।

कार्यक्रम के दौरान सफाई मित्रों के योगदान को नमन करते हुए महापौर ने कहा कि उनके परिश्रम और समर्पण का सम्मान करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे स्वच्छता को अपनी आदत और सामाजिक जिम्मेदारी बनाएं तथा सफाई मित्रों के कार्यों का सम्मान करें।

महापौर ने कहा कि स्वच्छ कोरबा का निर्माण जनसहभागिता और सफाई मित्रों के समर्पण से ही संभव है। सफाई मित्रों का सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके श्रम और सेवा भावना के प्रति नगर निगम की कृतज्ञता का प्रतीक है।
महापौर का संदेश: “सफाई मित्रों का सम्मान, स्वच्छ कोरबा की पहचान है। उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान के लिए नगर निगम सदैव प्रतिबद्ध है।”

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कोरबा

आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं की हुई गोदभराई

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माताओं और बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य व शासकीय योजनाओं की दी गई जानकारी

कोरबा। सेवा संकल्प अभियान के तहत बुधवार को रामसागर पारा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 03 में आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वार्ड क्रमांक 2 की पूर्व पार्षद चित्रलेखा चंदेल ने स्वस्थ शरीर, संस्कारवान संतान और परिवार में अच्छे संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। संस्कारम् टीम की अध्यक्ष आकांक्षा ने कहा कि मां केवल बच्चे को जन्म नहीं देती, बल्कि उसके भविष्य का निर्माण भी करती है। बच्चों के विकास के लिए माता-पिता का समय, विश्वास और संस्कार सबसे महत्वपूर्ण हैं।

कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। माताओं को संतुलित आहार, बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास तथा बेहतर देखभाल के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। इस दौरान गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और छह माह से अधिक आयु के शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, महतारी वंदन योजना एवं बाल संदर्भ योजना से लाभान्वित हितग्राहियों का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ अखबार वितरक संघ के जिला सचिव जय सिंह नेताम सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कल्पना मूर्ति, सहायिका सुषमा राम, मितानिन विमल जगत, सुभाषिनी विश्वकर्मा, कृष्णा कुशवाहा, संतोष गुप्ता, श्याम बाई, रामेश्वरी, रिया, सोनी, मधु पटेल, भगवती मरावी, फुलवारी, योगिता, संजना पटेल, पायल, प्रिया, रोशनी और काव्या उपस्थित रहीं। महिलाओं एवं बच्चों को शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए जागरूक किया गया।

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