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कोरबा

कल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती मनाएगी कांग्रेस

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कोरबा। भारत के पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी की जयंती कार्यक्रम 20 अगस्त 2026, दिन गुरूवार को प्रातः 11.45 बजे मनाया जावेगा ।

उक्त जानकारी देते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्षद्वय मुकेश राठौर एवं मनोज चौहान ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत, सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, विधायक फूलसिंह राठिया, पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर, मोहित केरकेट्टा, श्याम लाल कंवर सहित जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति में भारत रत्न पूर्व प्रधान मंत्री स्व.राजीव गांधी की जयंती कार्यक्रम आयोजित है ।

श्री राठौर ने बताया कि 20 अगस्त को 11.45 बजे इंदिरा स्टेडियम परिसर में स्थापित राजीव गांधी प्रतिमा स्थल के समक्ष जयंती कार्यक्रम होगा ।

अध्यक्षद्वय ने जिला कांग्रेस, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, सेवादल, एनएसयुआई, पार्षद, पूर्व पार्षद, ब्लॉक कमेटी, मंडल कमेटी, वार्ड कमेटी, बूथ कमेटी, ओबीसी प्रकोष्ठ, अजा प्रकोष्ठ, अजजा प्रकोष्ठ सहित कांग्रेस संगठन के सभी मोर्चा, संगठन, प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया है।

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कोरबा में स्वतंत्रता दिवस पर साक्षरता का उत्सवः मशाल-टॉर्च रैली से डिजिटल शपथ तक, उल्लास ने जगाई नई उम्मीद

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कोरबा 17 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्षन में जिले में उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत उल्लास महा चौपाल एवं विविध जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। जिले के विभिन्न विकासखंडों, ग्राम पंचायतों, शासकीय विद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से साक्षरता को जन-जन से जोड़ते हुए शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान मशाल रैली, टॉर्च रैली एवं प्रभात फेरी निकालकर लोगों को साक्षरता के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। अधिकारियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं नागरिकों ने ‘उल्लास शपथ’ लेकर निरक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने तथा समाज में शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया।
डिजिटल साक्षरता शपथ पत्र भी हुआ जारी

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिले में डिजिटल साक्षरता शपथ पत्र भी जारी किया गया। इसके माध्यम से नागरिकों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग करने, ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने तथा तकनीक के माध्यम से शिक्षा एवं सशक्तिकरण से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। डिजिटल युग में प्रत्येक व्यक्ति को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
सेल्फी पॉइंट से लेकर खेल-कूद और रंगोली तक बनी आकर्षण का केंद्र

उल्लास महा चौपाल के दौरान सेल्फी पॉइंट लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। इसके साथ ही खेल-कूद प्रतियोगिता, रंगोली, चित्रकला एवं विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए साक्षरता के संदेश को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया।
‘अंगूठे से कलम तक’ अभियान ने दिया सशक्तिकरण का संदेश

कार्यक्रम में ‘अंगूठे से कलम तक’ अभियान के माध्यम से नवसाक्षरों एवं निरक्षर व्यक्तियों को पढ़ने-लिखने की क्षमता से जोड़ने का संदेश दिया गया। अभियान का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाना है।

स्वयंसेवी शिक्षकों और नवसाक्षरों का हुआ सम्मान
उल्लास कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों एवं नवसाक्षरों को उनके उत्कृष्ट योगदान और उपलब्धि के लिए प्रमाण-पत्र एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इससे साक्षरता अभियान से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ा और अन्य लोगों को भी अभियान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरणा मिली।
जिला परियोजना अधिकारी साक्षरता श्रीमती ज्योति शर्मा ने कहा कि साक्षरता अभियान को सफल बनाने में शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों, नवसाक्षरों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सहभागिता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि साक्षरता केवल पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित नहीं, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सक्षम बनाने का माध्यम है।

कार्यक्रम में ग्रामीणों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित इन गतिविधियों से जिले में उल्लास-नवभारत साक्षरता अभियान के साथ डिजिटल साक्षरता को भी जनआंदोलन का रूप देने का संदेश मिला।
संदेशः
“अंगूठे से कलम तक, साक्षरता से डिजिटल साक्षरता तक-हर व्यक्ति बने सक्षम, हर परिवार बने सशक्त।”

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खरीफ 2026 में कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने हेतु पात्र कृषक एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पोर्टल में कराये समयावधि में पंजीयन

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कोरबा 17 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ शासन, कृषि एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग रायपुर द्वारा प्रदेश में फसल क्षेत्राच्छादन, उत्पादन, उत्पादकता में वृद्धि करने, फसल कास्त लागत में कमी कर आय में वृद्धि करने, नवीन कृषि तकनीकी में निवेश को प्रोत्साहन, एवं बाजारोन्मुखी फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खरीफ 2026 से कृषक उन्नति योजना के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश जारी किया गया है।

शासन द्वारा जारी दिशा निर्देश में कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने हेतु कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन कराना आवश्यक है। एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत ऐसे समस्त कृषक, जिन्होने विगत खरीफ में धान की फसल लेने वाले ऐसे कृषक, जिन्होने आगामी खरीफ में धान के बदलें अन्य खरीफ फसल लेने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराया हो, खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने हेतु पंजीयन कराया हो, योजनांतर्गत पात्र होंगे। विधिक व्यक्तियों यथा ट्रस्ट/मण्डल/प्राईवेट लिमि. कंपनी/शाला विकास समिति/केन्द्र एवं राज्य शासन के संस्थान/महाविद्यालय आदि संस्थाओं को योजना से लाभ लेने की पात्रता नही होगी।

योजनांतर्गत आदान सहायता राशि कृषकों के बैंक खातें में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) के माध्यम से की जाएगी। विगत खरीफ में धान की फसल लेने वाले ऐसे कृषक, जिन्होने आगामी खरीफ में धान के बदलें अन्य खरीफ फसल लेने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराया हो, उन्हे एग्रीस्टेक पर पंजीयन तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबें की पुष्टि उपरांत मान्य रकबें पर राशि 15 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। विगत वर्ष के फसल एवं रकबें की पुष्टि डिजिटल क्रॅाप सर्वे के डेटा से तथा जहां यह डेटा उपलब्ध नही हो, वहां जिला कलेक्टर की अनुमति से गिरदावरी के डेटा से पुष्टि की जाएगी। पूर्व से ही खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने वाले कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल तथा एग्रीस्टेक पर पंजीयन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबें की पुष्टि उपरांत मान्य रकबें पर पूर्ववत् राशि  10 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। जिन क्षेत्रों में रकबें की पुष्टि हेतु डिजिटल क्रॉप सर्वे का डेटा उपलब्ध नही है, वहां जिला कलेक्टर की अनुमति पर गिरदावरी से सत्यापित रकबें पर आदान सहायता राशि दी जाएगी। कलेक्टर के निर्देशानुसार खरीफ वर्ष 2026 में फसलवार, रकबावार, खसरावार शत-प्रतिशत एवं त्रुटिरहित गिरदावरी/ई-गिरदावरी करने राजस्व एवं कृषि विभाग के मैदानी अमलें को भू-अभिलेख कोरबा द्वारा आदेश जारी किया गया है। भू-अभिलेख द्वारा डिजिटल क्रॉप सर्वे करने हेतु सर्वेयरों की नियुक्ति किया जाकर तहसील स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
डी.पी.एस. कंवर, उप संचालक कृषि द्वारा जिलें के समस्त इच्छुक एवं पात्र कृषकों से अपील की गई है कि शासन द्वारा जारी दिशा निर्देश में कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने हेतु कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन कराना सुनिश्चित करें। एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन हेतु पात्र एवं इच्छुक कृषक आवश्यक दस्तावेज सहित नजदीकी सहकारी समिति से संपर्क करे। एग्रीस्टेक छ.ग. फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल में पंजीयन कराने के लिए किसानों को अपने साथ आधार कार्ड, भूमि का अद्यतन ऋण पुस्तिका/ब-1, खसरा तथा विशेष रूप से आधार कार्ड से लिंक मोबाईल नंबर लेकर नजदीकी लोक सेवा केन्द्र अथवा सेवा सहकारी समिति पहुंचना होगा। पंजीयन के दौरान आधार कार्ड लिंक मोबाईल नंबर पर ओ.टी.पी. प्राप्त होगी, जिसके जरिये ही सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी। तदोपरांत सत्यापन का कार्यवाही संबंधित क्षेत्र के पटवारी के लॉगिन से तथा अनुमोदन की कार्यवाही तहसीलदार लॉगिन से की जायेगी। एकीकृत किसान पोर्टल, एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन तथा समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन, कृषक उन्नति योजना, प्राईस सपोर्ट स्कीम, अंतर्गत पंजीकृत रकबें का समयावधि में गिरदावरी/ई-गिरदावरी/डिजिटल क्रॉप सर्वे कार्य के संबंध में अधिक जानकारी हेतु किसान अपने क्षेत्र के पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सेवा सहकारी समिति अथवा लोक सेवा केन्द्र से संपर्क कर सकते है।

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मानिकपुर खदान विस्तार की जनसुनवाई स्थगित, जयसिंह अग्रवाल बोले, स्थगन समाधान नहीं, अब ग्रामीणों की जायज मांगों के निराकरण का समय

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ग्रामीणों के दबाव का असर, मानिकपुर खदान विस्तार की जनसुनवाई स्थगित…
अंतत: secl प्रबंधन को झुकना पड़ा भू-विस्थापितों की एकता के सामने —
500 से अधिक ग्रामीणों के संकल्प के बाद SECL प्रबंधन ने 21 अगस्त की प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई टाली — जयसिंह अग्रवाल बोले, “स्थगन समाधान नहीं, अब ग्रामीणों की जायज मांगों के निराकरण का समय”
कोरबा। मानिकपुर ओपन कास्ट परियोजना के प्रस्तावित विस्तार को लेकर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा लगातार उठाई जा रही आवाज और जनसुनवाई का विरोध करने के सामूहिक संकल्प का असर सामने आया है। SECL प्रबंधन ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को स्थगित करने का निर्णय लिया है।
भिलाईखुर्द क्रमांक-1 में हाल ही में आयोजित बैठक में मानिकपुर खदान विस्तार से प्रभावित 8 गांवों के 500 से अधिक ग्रामीणों ने स्पष्ट घोषणा की थी कि जब तक मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार, छूटे हुए मकानों एवं परिवारों को पात्रता में शामिल करने सहित उनकी जायज और लंबित मांगों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक वे जनसुनवाई का पुरजोर विरोध करेंगे। ग्रामीणों के इस सामूहिक रुख के बाद SECL प्रबंधन द्वारा जनसुनवाई स्थगित किए जाने को ग्रामीणों के दबाव और उनकी जायज मांगों की गंभीरता का परिणाम माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि जनसुनवाई का स्थगित होना निश्चित रूप से ग्रामीणों के लिए तत्काल राहत की बात है, लेकिन इसे किसी समस्या का अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि, “ग्रामीणों ने अपनी एकजुटता और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के माध्यम से अपनी बात स्पष्ट रूप से प्रबंधन तक पहुंचा दी है। जनसुनवाई का स्थगित होना इस बात का संकेत है कि ग्रामीणों की मांगों को नजरअंदाज करके प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। अब यह SECL प्रबंधन के लिए एक अवसर है कि वह इस मिले हुए समय का सदुपयोग करे और ग्रामीणों की सभी जायज समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए।”
श्री अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीणों की मांगें अचानक सामने आई हुई मांगें नहीं हैं। मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार, छूटे हुए मकानों एवं परिवारों को पात्रता में शामिल करने तथा अन्य लंबित अधिकारों से संबंधित समस्याएं लंबे समय से ग्रामीणों के बीच असंतोष का कारण बनी हुई हैं। इसलिए केवल जनसुनवाई को आगे के लिए टाल देना पर्याप्त नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि “स्थगन से प्रबंधन को निश्चित रूप से कुछ समय मिला है। इसे मैं ग्रामीणों की ओर से प्रबंधन को दिया गया एक तरह का समय-अवकाश मानता हूं। अब इस समय का उपयोग समस्याओं को और लंबा खींचने के लिए नहीं, बल्कि समाधान के लिए होना चाहिए। प्रबंधन को चाहिए कि वह प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर प्रत्येक मांग पर गंभीरता से चर्चा करे और समयबद्ध तरीके से उसका निराकरण करे।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास और खनन परियोजनाओं का विरोध करना ग्रामीणों का उद्देश्य नहीं है। ग्रामीण केवल यह चाहते हैं कि उनकी जमीन, मकान और आजीविका प्रभावित होने की स्थिति में उन्हें कानून एवं न्याय के अनुरूप उचित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और अन्य अधिकार मिलें। जब तक प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक केवल परियोजना विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
श्री अग्रवाल ने SECL प्रबंधन से अपेक्षा किया है कि अब किसी टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय विश्वास का वातावरण बनाया जाए और प्रभावित ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रबंधन ईमानदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता है तो समाधान निकालना मुश्किल नहीं है।
उन्होंने कहा, “ग्रामीणों ने अपनी बात कह दी है और अपना संघर्ष भी स्पष्ट कर दिया है। अब गेंद SECL प्रबंधन के पाले में है। जनसुनवाई स्थगित करना पहला कदम हो सकता है, लेकिन असली सफलता तभी मानी जाएगी जब ग्रामीणों की जायज मांगों का वास्तविक और न्यायपूर्ण समाधान होगा।”
श्री अग्रवाल ने एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक मानिकपुर खदान विस्तार से प्रभावित ग्रामीणों की जायज मांगों का समाधान नहीं हो जाता, वे ग्रामीणों के साथ खड़े रहेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम से अब ग्रामीणों में यह उम्मीद जगी है कि जनसुनवाई के स्थगन से मिले समय का उपयोग SECL प्रबंधन केवल अगली तारीख तय करने में नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए करेगा। ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश है—“सिर्फ जनसुनवाई स्थगित नहीं, पहले अधिकारों का समाधान।”

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