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शिवकुमार बोले-कर्नाटक में वंदेमातरम के 2 पैरे ही गाए जाएंगे:हम पार्टी के फैसले के साथ, भाजपा तुष्टीकरण की राजनीति करती है

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बेंगलुरु, एजेंसी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को कहा कि राज्य में वंदे मातरम के सिर्फ दो छंद (पैरे) ही गाए जाएंगे। मैं पार्टी की विचारधारा में विश्वास रखता हूं और हम इस फैसले पर कायम रहेंगे। भाजपा पर तुष्टीकरण की राजनीति करती है।

शिवकुमार बेंगलुरु में इंडिया टुडे के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यहां उन्होंने कहा- स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम उनकी जानकारी के बिना गाया गया था, लेकिन भविष्य में किसी भी सरकारी कार्यक्रम में अब राष्ट्रगीत के दो ही छंद गाए जाएंगे।

दरअसल, कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC ने 19 अगस्त को ऐलान किया था कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के 6 में से सिर्फ शुरुआती दो पैरा ही गाएगी।

यह फैसला 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम गान को लेकर हुए विवाद के बाद आया। भाजपा ने कांग्रेस पर वंदे मातरम के अपमान का आरोप लगाया था।

वंदे मातरम विवाद पर शाह और भाजपा अध्यक्ष के बयान

  • गृह मंत्री अमित शाह- कांग्रेस का वंदे मातरम पूरा न गाने का फैसला हैरान करने वाला और देशविरोधी है। 1937 में कांग्रेस ने जो फैसला लिया था, उसे पीएम मोदी ने सुधारा है। कांग्रेस ने 1937 में राष्ट्रगीत के दो टुकड़े कर मुस्लिम तुष्टीकरण किया था। उस फैसले से दो-राष्ट्र सिद्धांत को मजबूती मिली और आगे चलकर देश का विभाजन हुआ।
  • भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन- कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय गीत का अपमान किया है। कांग्रेस अब नई मुस्लिम लीग बन गई है। यह फैसला वंदे मातरम को अपने मन में रखकर बलिदान देने वाले शहीदों का अपमान है।

भाजपा का आरोप- कांग्रेस के कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम नहीं हुआ

कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के दौरान राहुल, खड़गे और सोनिया आपस में कुछ बात करते दिखे थे।

कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के दौरान राहुल, खड़गे और सोनिया आपस में कुछ बात करते दिखे थे।

वंदे मातरम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद 15 अगस्त को शुरू हुआ। BJP ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पूरा वंदे मातरम गाए जाने पर सोनिया गांधी ने इसे रोकने की कोशिश की। BJP ने इसका वीडियो भी X पर शेयर किया था और दावा किया कि राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान परेशान दिखे।

कांग्रेस ने कहा था- खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं सोनिया

भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने सफाई दी थी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में पूरा वंदे मातरम गाया गया था और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई।

उनके मुताबिक, सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं था। वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं क्योंकि वे लंबे समय से खड़े थे।

वंदे मातरम पर नोटिफिकेशन और कानून क्या कहते हैं?

पहला नोटिफिकेशन: 31 जनवरी 2026

गृह मंत्रालय ने ‘ऑर्डर्स रिलेटिंग टू द नेशनल सॉन्ग ऑफ इंडिया’ जारी किया। इसमें ‘वंदे मातरम’ के पूरे 6 छंदों को आधिकारिक संस्करण बताया गया है। आदेश के मुताबिक जब राष्ट्रगीत गाया जाए, तो आधिकारिक यानी पूरा संस्करण गाया जाना चाहिए। इसकी टाइमिंग 3 मिनट 10 सेकेंड बताई गई है। साथ ही राष्ट्रगीत के गायन/वादन के दौरान सम्मान, शिष्टाचार बनाए रखने, साथ ही इसे सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़े होने का निर्देश है।

कानून: जुलाई-अगस्त 2026

प्रेवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल जुलाई 2026 में लाया गया। राज्यसभा ने इसे 29 जुलाई और लोकसभा ने 30 जुलाई 2026 को पास किया। 11 अगस्त को कानून बना। इसका मकसद ‘वंदे मातरम’ को 1971 के कानून के तहत कानूनी सुरक्षा देना है। संशोधन में कहा गया है कि जो व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकता है या उसके गायन में शामिल सभा में रुकावट डालता है, उसे 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

दूसरा नोटिफिकेशन: 9 जुलाई 2026

गृह मंत्रालय ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान से जुड़े आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। आदेश में कहा गया कि दोनों के सही पाठ, उच्चारण और तय प्रोटोकॉल का पालन किया जाए। यदि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों गाए या बजाए जाएं, तो पहले राष्ट्रगीत और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। आदेश में इन निर्देशों के उल्लंघन के लिए कोई अलग सजा नहीं बताई गई है, बल्कि संबंधित संस्थानों और संगठनों को इन्हें सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं

इन तीनों से क्या निकला?

नोटिफिकेशन के मुताबिक वंदे मातरम के पूरे 6 छंद ही इसका आधिकारिक संस्करण हैं। जब राष्ट्रगीत गाया जाता है, तो इसी पूरे संस्करण को गाने का निर्देश है। हालांकि, दोनों नोटिफिकेशन में 6 छंद न गाने पर कार्रवाई करने की बात नहीं है। 2026 के कानून में भी यह साफ नहीं कहा गया है कि 6 छंद पूरे न गाने पर अपराध होगा। कानून में अपराध तब है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत का गायन रोकता है या गा रही सभा में रुकावट डालता है।

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FD में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर, इन 2 बैंकों ने बढ़ाया ब्याज

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश के दो प्रमुख प्राइवेट सेक्टर बैंकों एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और फेडरल बैंक (Federal Bank) ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में बदलाव किया है। हालांकि, दोनों बैंकों ने यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए की है। इससे चुनिंदा अवधि की FD पर सीनियर सिटीजन को पहले की तुलना में थोड़ा ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

HDFC Bank ने 0.10% बढ़ाई ब्याज दर

HDFC Bank ने 3 करोड़ रुपए से कम की FD पर कुछ चुनिंदा अवधि के लिए वरिष्ठ नागरिकों की ब्याज दर में 10 बेसिस पॉइंट यानी 0.10 फीसदी की बढ़ोतरी की है। बैंक की संशोधित दरें 19 अगस्त 2026 से लागू हो चुकी हैं।

इस बदलाव के बाद 3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने से कम अवधि वाली FD पर सीनियर सिटीजन को अधिकतम 7.10 फीसदी सालाना ब्याज मिलेगा। इससे पहले इसी अवधि की FD पर 7 फीसदी ब्याज दिया जा रहा था।

सामान्य ग्राहकों की दरों में बदलाव नहीं

एचडीएफसी बैंक ने अन्य FD अवधि की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। 60 साल से कम उम्र के ग्राहकों को अभी भी अलग-अलग अवधि की FD पर 2.75 फीसदी से लेकर 6.50 फीसदी तक ब्याज मिल रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी इस खास अवधि को छोड़कर बाकी FD की ब्याज दरें पहले जैसी ही हैं।

Federal Bank में भी बढ़ा रिटर्न

फेडरल बैंक ने भी सीनियर सिटीजन के लिए FD पर ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक की नई दरें 17 अगस्त 2026 से लागू हैं। वरिष्ठ नागरिकों को अब FD पर अधिकतम 7.20 फीसदी तक ब्याज मिल रहा है।

बैंक सामान्य ग्राहकों को अलग-अलग अवधि की FD पर 3 फीसदी से लेकर 6.70 फीसदी तक ब्याज देता है। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर 3.50 फीसदी से शुरू होकर 7.20 फीसदी तक जाती है। बैंक 48 महीने की अवधि वाली FD पर सीनियर सिटीजन को सबसे ज्यादा 7.20 फीसदी ब्याज दे रहा है।

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जांजगीर-चांपा की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत:2 ने इंदौर, तीसरी ने इटारसी में दम तोड़ा

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इटारसी/जांजगीर-चांपा, एजेंसी। मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई। इंदौर के बेटमा थाना क्षेत्र में फूड पॉइजनिंग के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन 2 बच्चियों ने इंदौर और तीसरी ने इटारसी में दम तोड़ दिया। तीनों एक ही परिवार की थीं।

बेटमा पुलिस के मुताबिक, तीनों बच्चियों की उम्र 10, 8 और 5 साल बताई गई है। इनमें से दो ने इंदौर में दम तोड़ा, जबकि तीसरी की तबीयत छत्तीसगढ़ ले जाते समय बिगड़ गई। उसे इटारसी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। तीनों बच्चियां मूल रूप से जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़ की रहने वाली थीं।

छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई।

छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई।

रात में खाना खाने के बाद तीनों की तबीयत बिगड़ी

परिजन के मुताबिक, पीथमपुर की एलएनटी कंपनी में कार्यरत नरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी अमरोतिन के परिवार ने रात करीब 2 बजे दाल, चावल, रोटी और सब्जी खाई थी। खाना खाने के तुरंत बाद उनकी तीनों बेटियों को उल्टी-दस्त शुरू हो गए।

तबीयत बिगड़ने पर बच्चियों को अस्पताल ले जाया गया। इंदौर के अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद दो बच्चियों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन दोनों के शव एंबुलेंस से पैतृक गांव जांजगीर-चांपा ले जाने के लिए रवाना हुए।

बिना पोस्टमॉर्टम कराए सौंप दिया गया शव

परिजन का आरोप है कि इंदौर के अस्पताल में दोनों बच्चियों के शवों को बिना पोस्टमॉर्टम कराए उन्हें सौंप दिया गया। इसी दौरान एंबुलेंस में साथ मौजूद तीसरी बेटी की तबीयत भी बिगड़ गई। उसे रास्ते में इटारसी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

मौत की वजह पोस्टमॉर्टम और बिसरा रिपोर्ट से होगी स्पष्ट

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तीनों बच्चियों के शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मौत की सटीक वजह स्पष्ट नहीं है। संदिग्ध फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि तीनों की तबीयत खाना खाने के तुरंत बाद बिगड़ी थी।

TI सौरभ पांडे ने बताया कि तीनों लड़कियों का पोस्टमॉर्टम इटारसी में किया जाएगा। इसके बाद, शव उनके परिवारों को सौंप दिए जाएंगे। मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और बिसरा जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है।

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देश

शाह बोले- देश कोई धर्मशाला नहीं:यहां रहने का अधिकार सिर्फ नागरिकों को, घुसपैठिए भारत की सुरक्षा के लिए खतरा

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नई दिल्ली, एजेंसी। गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि यह देश कोई धर्मशाला नहीं है। यहां रहने का अधिकार केवल नागरिकों को है। घुसपैठिए देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए खतरा हैं। हमारा लक्ष्य देश को इन घुसपैठियों से मुक्त करना है।

शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज (NSS) कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने पिछले आठ महीनों में सभी बॉर्डर स्टेट का दौरा किया है। उन्होंने इन राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा की रणनीति से जुड़ा दस्तावेज भी साझा किया।

शाह ने आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने और उसके 360 डिग्री नेटवर्क को तोड़ने के लिए PRAHAR रणनीति को रोज की कार्रवाई में उतारने की बात कही।

शाह के संबोधन की बड़ी बातें…

नक्सलवाद, आतंक और उग्रवाद की चुनौतियां खत्म- सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के तीन बड़े केंद्रों- नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद से जुड़ी चुनौतियां खत्म कर दी हैं। इसका श्रेय सभी राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिसबलों को जाता है।

अगर पिछली सरकारों ने नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की समस्याओं को गंभीर होने से पहले समझ लिया होता, तो देश को दशकों तक इनका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ता।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूरे कैडर को खत्म करना और एक ही रात में उस पर प्रतिबंध लगाना केंद्र और राज्यों के तालमेल का बेहतरीन उदाहरण है।

सात साल में 274 भगोड़े विदेश से लाए गए- 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से वापस लाया गया है। सभी राज्य लक्ष्य तय करें कि विदेश में बैठे भगोड़ों को देश के कानून के दायरे में लाया जाए। मोदी सरकार ने मल्टी एजेंसी सेंटर को भी अपग्रेड किया है, ताकि यह कई स्तरों पर नतीजे देने वाला प्लेटफॉर्म बन सके।

एक साल में नए कानून 100% लागू होंगे- एक साल में तीनों नए कानून 100 फीसदी लागू होंगे। इससे आपराधिक मामलों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल में हो सकेगा और सजा की दर 25 फीसदी बढ़ेगी। NSS फोरम को 15 से 20 साल आगे की सुरक्षा चुनौतियों का अनुमान लगाकर उन्हें बड़े खतरे बनने से रोकने की रणनीति बनानी चाहिए।

युवा अधिकारी डेटा को जोड़कर, उसका एनालिसिस करके और AI के जरिए अपराध करने के तरीकों की पहचान कर काम की खुफिया जानकारी तैयार करें। इससे भविष्य की चुनौतियों को रोका जा सकेगा।

नशामुक्त भारत के लिए 3 लेवल पॉलिसी- सभी राज्यों की पुलिस नशीले पदार्थों के खिलाफ नॉरकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 को जमीन पर लागू करें। इससे युवा पीढ़ी को बचाने में मदद मिलेगी।

नशामुक्त भारत के लिए डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय यानी पता लगाना, रोकना और खत्म करना- तीन स्तरों की रणनीति अपनानी होगी। नशीले पदार्थों के खिलाफ सबसे सफल लड़ाई केवल भारत ही लड़ सकता है।

चुनौतियों को संकट न बनने दें- सुरक्षा नीति अलग-अलग नहीं बनाई जा सकती। इसमें वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा संकट, सप्लाई चेन की रुकावट, बढ़ता कट्टरपंथ और साइबर युद्ध जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखना होगा।

घुसपैठ-बॉर्डर सिक्योरिटी पर शाह के पिछले 3 बयान

22 मई: ड्रोन, रडार, स्मार्ट कैमरे लगाएंगे- केंद्र सरकार अगले एक साल के भीतर पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी करीब 6000 किलोमीटर लंबी सीमा पर स्मार्ट बॉर्डर सुरक्षा सिस्टम लागू करेगी। इसके तहत ड्रोन, रडार, स्मार्ट कैमरे और दूसरी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सीमा की निगरानी मजबूत की जाएगी, ताकि घुसपैठ और तस्करी को पूरी तरह रोका जा सके।

26 मई: जनसंख्या बदलाव की जांच के लिए कमेटी बनाई- केंद्र सरकार ने देश की आबादी में हो रहे असामान्य बदलाव की स्टडी के हाई-लेवल कमेटी बनाई। जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (रिटा) को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। यह कमेटी अवैध घुसपैठ और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे जनसंख्या में बदलाव जांच करेगी।

28 मई: घुसपैठियों अपने देश लौट जाओ- ममता बनर्जी के शासनकाल में हर दिन घुसपैठ होती थी, लेकिन अब घुसपैठिए खुद ही वापस लौटने लगे हैं। मैं घुसपैठियों से कहना चाहता हूं कि समय रहते खुद से अपने देश वापस लौट जाओ।

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