Connect with us

कोरबा

जन्म के तुरंत बाद नवजात बच्ची को लावारिस छोड़ा:बालको में अपार्टमेंट के पास रोने की आवाज सुनकर लोगों ने बचाया, अस्पताल में भर्ती

Published

on

कोरबा। कोरबा के बालको थाना क्षेत्र के भद्रापारा में गुरुवार को एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिलने से हड़कंप मच गया। श्री अपार्टमेंट के पास बच्ची के रोने की आवाज सुनकर स्थानीय लोगों ने उसे देखा। जन्म के तुरंत बाद बच्ची को वहां छोड़ दिया गया था।

लोगों ने तत्काल डायल 112 को सूचना दी और बच्ची को बालको अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है।

डायल 112 की सूचना पर पहुंची पुलिस

डायल 112 की सूचना पर पहुंची पुलिस

रोने की आवाज सुनकर लोगों ने देखा

घटना बालको थाना क्षेत्र के भद्रापारा मुख्य मार्ग की है। श्री अपार्टमेंट के पास नवजात बच्ची को अकेले पड़ा देख आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने बिना देर किए बच्ची को सुरक्षित उठाया और अस्पताल पहुंचाया।

पुलिस ने शुरू की जांच

सूचना मिलते ही बालको पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी युवराज तिवारी के मुताबिक, मामले में जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्ची को वहां कौन छोड़कर गया।

CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। फुटेज और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर बच्ची को छोड़ने वाली महिला की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल नवजात अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में है।

Continue Reading

कोरबा

कोरबा में 40-45 वर्षीय व्यक्ति ने लगाई फांसी:पत्नी कैंसर से जूझ रही, मानसिक बीमारी का भी चल रहा था इलाज, पुलिस जांच जारी

Published

on

कोरबा। कोरबा में सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पथरीपारा में संतोष (40-45) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने पर सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि संतोष की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और उसका इलाज भी चल रहा था। वहीं, उसकी पत्नी लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

मार्च में मेन्टल हॉस्पिटल में कराया गया था भर्ती

सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि पुलिस को पथरीपारा में संतोष की आत्महत्या की सूचना मिली थी। इसके बाद सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में सामने आया कि संतोष ने फांसी लगाकर जान दी है। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

सीएसपी के अनुसार, संतोष की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। मार्च महीने में उसे सेंदरी स्थित मानसिक चिकित्सालय में भी भर्ती कराया गया था, जहां उसका इलाज चल रहा था।

पत्नी के इलाज के खर्च से परिवार आर्थिक परेशानी में

जानकारी के अनुसार, संतोष की पत्नी लंबे समय से कैंसर से पीड़ित है। उसके इलाज पर लगातार खर्च होने के कारण परिवार आर्थिक तंगी से भी गुजर रहा था। पुलिस की जांच में संतोष की मानसिक बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े पहलू सामने आए हैं। हालांकि, आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच

सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में पारिवारिक परिस्थितियों और आर्थिक स्थिति से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

Continue Reading

कोरबा

Korba Health News: मौत को मात देकर लौटी मुस्कान! शिवाय हॉस्पिटल की चिकित्सा सेवा से स्ट्रोक को हराकर घर लौटीं 63 वर्षीय लक्ष्मी सोरी

Published

on

गंभीर ब्रेन स्ट्रोक के बाद बंद हो गई थी आवाज, शरीर का बायां हिस्सा पड़ गया था सुन्न, समय पर उपचार और पुनर्वास से लौटी जिंदगी की रफ्तार

डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम के प्रयास और फिजियोथेरेपी से मिली नई उम्मीद

कोरबा। कभी-कभी जिंदगी अचानक ऐसी परीक्षा लेती है कि परिवार की खुशियां पलभर में चिंता और डर में बदल जाती हैं। आंखों के सामने अपना प्रियजन असहाय हो जाए, बोलना बंद कर दे और शरीर का एक हिस्सा काम करना छोड़ दे, तो परिवार के लिए हर पल किसी सदमे से कम नहीं होता। लेकिन ऐसे कठिन समय में सही फैसला, समय पर चिकित्सा और अपनों का हौसला उम्मीद की नई किरण बन सकता है।

कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में सामने आई 63 वर्षीय श्रीमती लक्ष्मी सोरी की कहानी कुछ ऐसी ही है। 14 मई 2026 की सुबह अचानक तेज चक्कर, उल्टियां और बेहोशी ने उनके परिवार को चिंता में डाल दिया। शरीर का बायां हिस्सा सुन्न और कमजोर पड़ गया था। बोलने की क्षमता प्रभावित हो गई थी और याददाश्त पर भी असर दिखाई दे रहा था। परिवार ने बिना देर किए उन्हें न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल पहुंचाया। जांच में गंभीर इस्कीमिक ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति सामने आई।

परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी अपने प्रियजन को इस गंभीर संकट से बाहर निकालना। ऐसे समय में हर मिनट की अहमियत थी और तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी थी।

डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में शुरू हुआ उपचार

शिवाय हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन एवं डायरेक्टर डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने तत्काल आपातकालीन उपचार शुरू किया। मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बाधित होने से उत्पन्न गंभीर स्थिति को देखते हुए मरीज की चिकित्सा देखभाल पर विशेष ध्यान दिया गया।

स्ट्रोक के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना और शीघ्र चिकित्सकीय मूल्यांकन बेहद महत्वपूर्ण होता है। लक्ष्मी सोनी के परिवार ने बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचकर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।

उस समय परिवार के मन में कई सवाल थे, लेकिन डॉक्टरों की देखरेख और उपचार की प्रक्रिया के साथ उम्मीद कायम रही कि हालात बेहतर हो सकते हैं।

इलाज के बाद पुनर्वास ने बढ़ाई स्वस्थ होने की उम्मीद

गंभीर स्थिति के बाद मरीज को दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटाना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। लक्ष्मी सोरी की रिकवरी में चिकित्सा देखभाल के साथ फिजियोथेरेपी की भूमिका रही। फिजियोथेरेपिस्ट अमन श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में कमजोर अंगों की कार्यक्षमता और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार के लिए प्रयास किए गए।

इसके साथ स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के समन्वय से बोलने तथा याददाश्त से जुड़ी परेशानियों में सुधार की दिशा में काम किया गया। लगातार देखभाल, पुनर्वास और परिवार के सहयोग ने उनकी रिकवरी के सफर को आगे बढ़ाने में मदद की।

यह सफर केवल बीमारी से उबरने का नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सुधारों के साथ आत्मविश्वास दोबारा हासिल करने का भी था। परिवार के लिए लक्ष्मी जी की बेहतर होती स्थिति राहत और खुशी का कारण बनती गई।

गंभीर हालत से स्वस्थ होकर घर वापसी, परिवार के लिए भावुक पल

जिस लक्ष्मी सोरी को परिवार गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचा था, उपचार और पुनर्वास के बाद वह होश में आईं, सामान्य रूप से बातचीत करने लगीं और अपने पैरों पर चलने की स्थिति में स्वस्थ होकर घर लौटीं।

यह परिवार के लिए भावुक कर देने वाला पल था। जिस घर में कभी अनहोनी की आशंका ने चिंता बढ़ा दी थी, वहां फिर से मुस्कान और राहत लौट आई। लक्ष्मी सोनी की रिकवरी ने उनके परिजनों को नई उम्मीद दी और इस बात को रेखांकित किया कि गंभीर बीमारी के बाद भी उचित चिकित्सा और पुनर्वास से सुधार की संभावनाएं बनी रहती हैं।

शिवाय हॉस्पिटल के लिए चिकित्सा सेवा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि

लक्ष्मी सोरी की रिकवरी शिवाय हॉस्पिटल, कोरबा की चिकित्सा टीम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है। गंभीर स्ट्रोक के उपचार से लेकर आगे की देखभाल और पुनर्वास तक, इस मामले में चिकित्सा सेवाओं के समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा देखभाल, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के प्रयासों ने मरीज को स्वस्थ जीवन की ओर लौटने में सहयोग दिया। यह कहानी अस्पताल में उपलब्ध उपचार सेवाओं के साथ-साथ स्ट्रोक के बाद पुनर्वास की अहमियत भी सामने लाती है।

विश्व स्ट्रोक दिवस पर शिवाय हॉस्पिटल का संदेश: लक्षण दिखें तो देर न करें

ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसके लक्षणों को पहचानकर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है। अचानक चेहरा टेढ़ा होना, एक हाथ या पैर में कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने या समझने में परेशानी और अचानक संतुलन बिगड़ना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत एंबुलेंस या आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें। स्ट्रोक के उपचार में देरी से मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।

शिवाय हॉस्पिटल, न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर, कोरबा की ओर से संदेश है कि जागरूकता, समय पर उपचार और उचित पुनर्वास मरीज की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लक्ष्मी सोरी की कहानी एक परिवार की चिंता से राहत तक के सफर की कहानी है। यह उस उम्मीद की कहानी है, जो मुश्किल समय में भी बनी रहती है। और यह संदेश भी कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानकर समय पर उठाया गया कदम किसी की जिंदगी में फिर से मुस्कान लौटाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

Continue Reading

कोरबा

कस्तूरबा छात्रावास में घुसा 5 फीट का नाग, जितेंद्र सारथी ने किया सुरक्षित रेस्क्यू, बच्चों और कर्मचारियों ने ली राहत की सांस

Published

on

कोरबा। कस्तूरबा छात्रावास में उस समय हड़कंप मच गया, जब परिसर में लगभग 5 फीट लंबा कोबरा सांप दिखाई दिया,छात्रावास में रिकंस्ट्रक्शन (पुनर्निर्माण) का कार्य चल रहा था,इसी दौरान काम कर रहे मजदूरों की नजर अचानक सांप पर पड़ी, सांप को देखते ही वहां मौजूद लोगों में भय का माहौल बन गया, इसके बाद तत्काल उमेश राठौर ने वन विभाग एवं नोवा नेचर के सदस्य जितेंद्र सारथी को इसकी सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही जितेंद्र सारथी बिना देर किए मौके पर पहुंचे और बेहद फुर्तीले एवं आक्रामक स्वभाव के कोबरा का सावधानीपूर्वक सुरक्षित रेस्क्यू किया,सांप को सुरक्षित रेस्क्यू बैग में रखने के बाद वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली फिर उसे प्राकृतिक रहवास जंगल में छोड़ दिया गया।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं जितेंद्र सारथी और छात्रावास अधीक्षिका

छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, जितेंद्र सारथी और छात्रावास की अधीक्षिका इस तरह की घटनाओं को लेकर गंभीर रहते हैं,परिसर में सांप या किसी अन्य वन्यजीव के दिखाई देने पर तत्काल सूचना देकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है, ताकि बच्चों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की सुरक्षा बनी रहे।

वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचाएं, विशेषज्ञों को दें सूचना

जितेंद्र सारथी ने लोगों से अपील की कि सांप दिखाई देने पर घबराएं नहीं और न ही उसे मारने का प्रयास करें, सांप से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या संबंधित वन विभाग को सूचना दें, समय पर सूचना और सुरक्षित रेस्क्यू से मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों की भी रक्षा की जा सकती है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677