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ओली के बाद नेपाल की सत्ता पर किसका कब्जा:रैपर बालेन शाह और पूर्व जज सुशीला कार्की बड़े दावेदार, राजा ज्ञानेंद्र की वापसी भी मुमकिन
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Divya Akashकाठमांडू,एजेंसी। नेपाल इस समय अपने सबसे बड़े नागरिक आंदोलन से गुजर रहा है। भ्रष्टाचार और शासन से नाराज जनता ने सरकार का तख्तापलट कर दिया। नतीजा यह हुआ कि प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफा देकर भागना पड़ा।
राजनीतिक संकट गहराने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि देश की बागडोर किसके हाथ में होगी। इस आंदोलन में 5 चेहरों की चर्चा हो रही है, जिनके बारे में माना जा रहा है कि वे अंतरिम प्रधानमंत्री हो सकते हैं…
सुशीला कार्की- भ्रष्टाचार विरोधी चेहरा
सुशीला कार्की को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की और बाद में जज बनीं। जब सुशीला 2016 में नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं, तो यह अपने आप में ऐतिहासिक था।
एक साल बाद 2017 में उन पर संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। आरोप लगाया गया कि वे फैसलों में राजनीतिक दबाव के खिलाफ खड़ी हो रही हैं और न्यायपालिका की आजादी का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।
असल में, नेताओं को डर था कि अगर कार्की कोर्ट में ऐसे ही सख्ती दिखाती रहीं, तो उनकी राजनीति और सत्ता को बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए उन्होंने संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाकर उन्हें पद से हटाने की कोशिश की।
महाभियोग प्रस्ताव आने के बाद सैकड़ों छात्र, महिलाएं और आम लोग काठमांडू की सड़कों पर उतर आए। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक ऐतिहासिक आदेश देकर कहा कि जब तक महाभियोग की सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक सुशीला कार्की को काम करने से नहीं रोका जा सकता।

रिटायरमेंट के बाद सुशीला कार्की सरकार के खिलाफ कई आयोजनों में शामिल होती दिखीं।
जून 2017 में उनकी रिटायरमेंट से सिर्फ एक दिन पहले संसद ने महाभियोग प्रस्ताव वापस ले लिया गया। अब 8 साल बाद वे पीएम बनने की सबसे बड़ी दावेदार कही जा रही हैं।
बालेन शाह- रैपर से काठमांडू के मेयर
काठमांडू के मेयर बनने से पहले बालेंद्र शाह, जिन्हें लोग बालेन के नाम से जानते हैं, नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप सीन में दिखते थे। कभी छतों पर रैप बैटल करते, तो कभी म्यूजिक वीडियो बनाते। उनके गानों में गरीबी, पिछड़ापन और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए जाते थे।
इन्हीं गीतों ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। उनके रैप में अक्सर नेताओं की बेइज्जती की जाती थी, लेकिन तब लोग चौंक गए जब बालेन ने मई 2022 में काठमांडू से मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।
बालेन काले ब्लेजर, काली जींस और काले धूप के चश्मे में प्रचार करने जाते, जिसकी खूब चर्चा हुई। निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले सिर्फ 33 साल के बालेन ने बड़े-बड़े दिग्गजों को चुनाव में हरा दिया। वह निर्दलीय उम्मीदवर बनकर मेयर का चुनाव जीतने वाले पहले शख्स बने।
नेपाल में काठमांडू के मेयर की हैसियत कई केंद्रीय मंत्री से भी अधिक मानी जाती है। ऐसे में इस जीत की चर्चा सिर्फ नेपाल में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हुई। साल 2023 में टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनकी प्रोफाइल स्टोरी की।

बालेन शाह ने आम नेताओं के विपरीत ब्लैक ब्लेजर, ब्लैक चश्मा और ब्लैक पैंट में प्रचार किया।
बालेन की जीत को नेपाल में ‘बालेन इफेक्ट’ कहा गया। इसका असर ये हुआ कि नवंबर 2022 में होने वाले आम चुनाव में युवा निर्दलीय उम्मीदवारों की एक लहर पैदा हो गई। बिजनेस, डॉक्टर, एयरलाइन जैसे चमकदार पेशा छोड़ युवा राजनीति में उतर आए।
सबने वादा किया कि वे उस पुराने, भ्रष्ट राजनीतिक वर्ग का मुकाबला करेंगे, जिस पर दशकों से बुज़ुर्ग नेताओं का कब्जा है। छह महीने बाद हुए चुनाव में इसका असर भी दिखा। संसद में 25 युवा नेता आए।
बालेन शाह पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि वे युवाओं को गुमराह कर सरकार के खिलाफ भड़का रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी अपार लोकप्रियता बताती है कि बहुत सारे युवा उन्हें अगला प्रधानमंत्री मानने लगे हैं।
रबि लामिछाने- प्रदर्शनकारियों ने जेल से आजाद कराया
लामिछाने नेपाल के युवाओं में बेहद लोकप्रिय हैं। वे पहले टीवी पत्रकार थे और भ्रष्ट नेताओं से सीधे और कठिन सवाल पूछने के अंदाज से मशहूर हुए। उन्होंने 2013 में 62 घंटे से ज्यादा लगातार टॉक शो चलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। फिर ‘सिद्ध कुरा जनता संग’ जैसे कार्यक्रमों से भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की आवाज बन गए।
2022 में उन्होंने टीवी छोड़ राजनीति में कदम रखा और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी बनाई। उनकी पार्टी ने चुनाव में 20 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। खुद उन्होंने भी बड़ी जीत दर्ज की और कुछ ही महीनों बाद उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने।

रबि लामिछाने ने पहली बार पार्टी बनाई और चुनाव लड़े। उनकी पार्टी को 20 सीटें मिलीं।
लेकिन सफलता ज्यादा देर नहीं टिकी। जनवरी 2023 में उनकी नागरिकता पर सवाल उठे। आरोप था कि अमेरिकी नागरिकता छोड़ने के बाद उन्होंने नेपाली नागरिकता दोबारा सही तरीके से नहीं ली। सुप्रीम कोर्ट ने उनका चुनाव रद्द कर दिया और वे मंत्री पद से हट गए। हालांकि बाद में उन्होंने औपचारिकताएं पूरी कीं और फिर से उपचुनाव जीता, इस बार और भी बड़े अंतर से।
लेकिन विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ते। कभी पत्रकार की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराए गए, कभी दोहरे पासपोर्ट रखने के आरोप लगे, कभी सरकारी अनुबंधों में गड़बड़ी के। उन पर यह भी आरोप लगा कि उनके फाउंडेशन ने अस्पतालों के लिए मिलने वाली रकम का दुरुपयोग किया।
सबसे गंभीर मामला तब आया जब उन्हें सहकारी धोखाधड़ी केस में फंसा दिया गया। अप्रैल 2025 में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी हिरासत बरकरार रखी, यह कहते हुए कि सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा है।
वह जेल में मुकदमे का इंतजार कर ही रहे थे कि देश में भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों की लहर उठी और लोगों ने उन्हें जबरन जेल से आजाद करा लिया। अब उन्हें भी सत्ता का दावेदार माना जा रहा है।
कुलमान घिसिंग- नेपाल में बिजली की समस्या खत्म की
कुलमान घिसिंग को नेपाल में बिजली कटौती की समस्या को खत्म करने के लिए जाना जाता है। साल 2016 में जब वे नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) के मैनेजिंग डायरेक्टर बने तो देश में बिजली की समस्या आम थी। 18-18 घंटे तक बिजली की कटौती होती थी। अगले 2 साल में ही उन्होंने पूरे देश में बिजली की समस्या को लगभग खत्म कर दिया।
उनकी इस उपलब्धि के चलते उन्हें ‘उज्यालो नेपाल का अभियंता’ यानी कि नेपाल को रोशनी की राह दिखाने वाला कहा जाने लगा। कुलमान की लीडरशिप में नेपाल ने 2023-24 में भारत को बिजली निर्यात करना शुरू किया। उन्होंने पहली बार NEA को घाटे से निकालकर मुनाफा दिलाया।
मार्च 2025 में सरकार ने कुलमान को अचानक बर्खास्त कर दिया। दरअसल, उन्होंने उद्योगपतियों का 24 अरब रुपए का बकाया बिजली बिल माफ करने से इनकार किया था। इससे नाराज होकर सरकार ने उनके खिलाफ एक्शन लिया था। उनकी बर्खास्तगी को लेकर बहुत विवाद हुआ। इससे देशभर में उनकी लोकप्रियता बढ़ी।

कुलमान की बर्खास्तगी के बाद देशभर में उनके समर्थन में विरोध प्रदर्शन हुए।
इसके बाद उन्होंने ‘उज्यालो नेपाल’ अभियान शुरू किया, इससे युवाओं का रुझान उनकी तरफ हुआ। उन्होंने 2025 में बहरीन, यूएई, और कतर की यात्रा की और प्रवासी नेपालियों का समर्थन जुटाया। अब वे भी नेपाल के अंतरिम पीएम के दावेदार हैं।
सन्दुक रुइट- जेन जी आंदोलन के समर्थक
सन्दुक रुइट नेपाल के मशहूर नेत्र विशेषज्ञ हैं। रुइट ने छोटे चीरे वाली मोतियाबिंद सर्जरी शुरू की थी, इससे सर्जरी का खर्च कम हुआ। इस तरीके को दुनियाभर के देशों में अपनाया गया। इसके बाद वे ‘गॉड ऑफ साइट’ यानी ’दृष्टि के देवता’ नाम से मशहूर हुए।
रुइट ने 1994 में तिलगंगा नेत्र विज्ञान संस्थान की स्थापना की थी जो हर हफ्ते 2500 मरीजों का इलाज करता है। इसमें 40% सर्जरी मुफ्त है। उन्होंने अपने करियर में मोतियाबिंद सर्जरी करके 1.8 लाख लोगों की आंखों की रोशनी लौटाई है।

सन्दुक रुइट की लोकप्रियता दुनियाभर में है।
ऑस्ट्रेलिया, बहरीन और भारत जैसे देशों में उनके संपर्क हैं, जो उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत बनाते हैं। हालांकि रुइट ने कभी कोई राजनीतिक पद नहीं संभाला है। 2023 में उन्हें राष्ट्रपति बनाने की चर्चा थी, इस पर उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति का पद मेरे लिए नहीं है। सन्दुक ने जेन जी आंदोलन को समर्थन दिया है।
डॉ. रुइट को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (2006), पद्म श्री (2018), ईसा पुरस्कार (2023), भूटान का राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार (2015), नेपाल का राष्ट्रीय प्रतिभा पुरस्कार (2019) जैसे सम्मान मिल चुके हैं।
ज्ञानेंद्र शाह- नेपाल के आखिरी राजा
ज्ञानेंद्र शाह 1950-51 में महज 3 साल की उम्र में पहली बार राजा बने थे। उस समय उनके दादा त्रिभुवन भारत भाग गए थे और शाही परिवार संकट में था। तब राणा शासकों ने छोटी उम्र के ज्ञानेंद्र को गद्दी पर बिठा दिया ताकि आसानी से शासन चलाया जा सके। हालांकि कुछ ही महीनों बाद त्रिभुवन वापस लौटे और वे फिर से राजा बने।
इसके बाद ज्ञानेंद्र लंबे समय तक परछाईं में ही रहे। 1 जून 2001 को शाही नरसंहार में उनके बड़े भाई राजा बीरेंद्र, महारानी ऐश्वर्या और शाही परिवार के कई सदस्य मारे गए। इस त्रासदी के बाद अचानक ज्ञानेंद्र शाह को नेपाल की गद्दी संभालनी पड़ी। यही पल उनकी दूसरी और सबसे बड़ी राजनीतिक वापसी का जरिया बना।
नेपाल में 2008 में 240 साल पुरानी राजशाही को समाप्त कर दिया गया और लोकतंत्र बहाल हुआ। ज्ञानेंद्र को राजमहल खाली करना पड़ा। इसके बाद ज्ञानेंद्र लंबे समय तक खामोश रहे, लेकिन हाल के वर्षों में फिर चर्चा में आए।

ज्ञानेंद्र शाह को फिर से राजा बनाए जाने की मांग पिछले 2 साल से चल रही है।
लोकतंत्र से निराश खासकर हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों ने उन्हें प्रतीक बनाकर राजशाही की वापसी की मांग तेज कर दी है। उनकी रैलियों में नारे लगते हैं—“राजा आओ, देश बचाओ।” अब ओली सरकार के पतन और मौजूदा राजनीतिक संकट के बीच उन्हें अगला पीएम दावेदार माना जाने लगा है।

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पहला विमान कल तेहरान से दिल्ली आएगा, स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन पूरा, पासपोर्ट जमा किए
नई दिल्ली,एजेंसी। ईरान में जारी सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने वहां से भारतीयों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी कर ली है। पहला विमान कल तेहरान से नई दिल्ली के लिए रवाना होगा।
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने एक बयान में कहा, सभी छात्रों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। भारतीय दूतावास ने उनकी पर्सनल डिटेल और पासपोर्ट इकट्ठा कर लिए हैं। पहले बैच को सुबह 8 बजे तक तैयार रहने की जानकारी दे दी गई है।
पहले बैच में गोलेस्तान यूनिवर्सिटी, शाहिद बहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के कुछ स्टूडेंट्स शामिल हैं। फाइनल लिस्ट देर रात शेयर की जाएगी।
ईरान में करीब 10000 भारतीय रहते हैं। इसमें से 2500-3000 स्टूडेंट हैं, जो मेडिकल की पढ़ाई के लिए वहां गए थे।

यह तस्वीर कश्मीर की है, जिनके बच्चे ईरान में फंसे हुए हैं। उनके पेरेंट्स चिंता कर रहे हैं।

कश्मीर में रहने वाले लोगों ने सरकार से मांग की है कि पढ़ाई करने ईरान गए बच्चों को वापस लाया जाए।

भारत सरकार ने 14 जनवरी को एडवाइजरी जारी की थी।
विदेश मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर और ईमेल जारी किया
एडवाइजरी में कहा गया है कि ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों अपने पासपोर्ट,वीजा और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स हमेशा अपने पास तैयार रखें। इस संबंध में किसी भी मदद के लिए वे भारतीय दूतावास से संपर्क करें।
दूतावास ने आपातकालीन संपर्क हेल्पलाइन भी जारी की हैं। मोबाइल नंबर: +989128109115; +989128109109; +989128109102; +989932179359। ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in
ईरान में मौजूद वे सभी भारतीय नागरिक जिन्होंने अभी तक भारतीय दूतावास में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, उनसे अनुरोध है कि वे इस लिंक (https://www.meaers.com/request/home) के माध्यम से रजिस्टर्ड करें।
यह लिंक दूतावास की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। यदि ईरान में इंटरनेट बाधित होने के कारण कोई भारतीय नागरिक पंजीकरण करने में असमर्थ है, तो भारत में उनके परिवार के सदस्यों से अनुरोध है कि वे उनकी ओर से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच बातचीत हुई
बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। उन्होंने ईरान के हालातों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारतीय नागरिकों को ईरान ना जाने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं।
भारत सरकार की यह एडवाइजरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रम्प की उस धमकी के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि अगर ईरान देशभर में हो रहे प्रदर्शनों का हिंसा से जवाब देना जारी रखता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
दावा- ईरान में 12 हजार लोगों की मौत

ईरानी मुद्रा रियाल के ऐतिहासिक रूप से गिरने के बाद पिछले महीने ईरान में प्रदर्शन शुरू हुए थे। तब से देश के सभी 31 प्रांतों में फैल गए हैं।
प्रदर्शन में मरने वालों की संख्या पर नजर रखने वाली अमेरिकी संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि अब तक 2,550 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इनमें 2,403 प्रदर्शनकारी और 147 सरकार से जुड़े लोग शामिल हैं।
हालांकि ईरान से जुड़े मामलों को कवर करने वाली वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि देशभर में कम से कम 12 हजार लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं।
देश
लश्कर के आतंकी की हिंदुओं का गला काटने की धमकी:वायरल वीडियो में कहा- कश्मीर को आजादी भीख मांगने से नहीं, जिहाद से मिलेगी
Published
3 days agoon
January 14, 2026By
Divya Akashइस्लामाबाद,एजेंसी। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबू मूसा कश्मीरी ने हिंदुओं की गर्दन काटने की धमकी दी है। उसने यह बयान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दिया। इसका वीडियो भी सामने आया है, हालांकि ये कब का है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
वीडियो में अबू मूसा कहता है- कश्मीर मुद्दे का हल सिर्फ आतंकवाद और जिहाद से ही हो सकता है। आजादी भीख मांगने से नहीं, हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगी। हमें जिहाद का झंडा उठाना होगा।
अबू मूसा कश्मीरी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन जम्मू कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट का मेंबर है। उसका नाम अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले से भी जुड़ा था।
पाकिस्तानी नेताओं पर इस्लामी सिद्धांतों से भटकने का आरोप
अपने भाषण में अबू मूसा ने पाकिस्तानी नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि पाकिस्तान के नेता इस्लामी सिद्धांतों से भटक चुके हैं और जिहाद के रास्ते पर नहीं चल रहे हैं।
उसने कहा जो नेता जिहाद के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, उसे पाकिस्तान पर हुकूमत करने का कोई अधिकार नहीं है। मूसा ने दावा किया कि वह पहले भी ऐसे ही बयान मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ हुई एक बैठक में दे चुका है।
अबू मूसा पहलगाम हमले में भी शामिल था
अबू मूसा पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले में भी शामिल था। दैनिक भास्कर ने तब पड़ताल की थी कि आखिर पहलगाम अटैक के दौरान पाकिस्तान से आतंकियों को कौन आदेश दे रहा था। इस दौरान दो पाकिस्तानी हैंडलर के नाम मिले थे।
पहला अबू मूसा और दूसरा रिजवान हनीफ। दोनों पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिंग कमांडर हैं। इन्हीं दोनों ने मुरीदके में अफगान को ट्रेनिंग भी दी थी। हालांकि सूत्रों का दावा था कि पहलगाम अटैक का मास्टरमाइंड अबू मूसा ही है। ये सैफुल्लाह कसूरी का करीबी भी है।
अबू मूसा ने पहले भी हिंदुओं को मारने की बात कही थी
पहलगाम हमले से 4 दिन पहले 18 अप्रैल को लश्कर के एक कार्यक्रम में अबू मूसा ने कश्मीर में हिंदुओं को मारने का जिक्र किया था। इसका वीडियो भी सामने आया था। इसमें मूसा ने कहा था, ’गाजा और कश्मीर का एक ही मसला है और दोनों मसलों का एक ही हल है, वो है जिहाद। उसने कहा था- हमें भीख नहीं, आजादी चाहिए। फिलिस्तीन और कश्मीर के जो दुश्मन हैं, वो हमारे दुश्मन हैं। जब इजराइल को घुटने पर ले आए, तो कश्मीर में भी करेंगे।’

अबू मूसा कथित तौर पर ‘जम्मू-कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट’ (JKUM) का नेतृत्व करता है। ये तस्वीर पिछले साल 18 अप्रैल को हुए उसी आयोजन की है, जिसमें उसने कश्मीर की तुलना गाजा-फिलिस्तीन से की थी।
लश्कर के एक और आतंकी ने पाकिस्तानी नेताओं पर तंज किया था
लश्कर-ए-तैयबा के एक अन्य कमांडर मोहम्मद अशफाक राणा ने भी कुछ दिन पहले इसी तरह पाकिस्तानी नेताओं पर तंज किया था। अशफाक राणा ने सीधे शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की आलोचना करते हुए उन पर देश को सही तरीके से न चलाने और अंतरराष्ट्रीय कर्ज को बर्बाद करने का आरोप लगाया था।
उसने दावा किया था कि अगर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिले पैसों का सही इस्तेमाल किया गया होता, तो पाकिस्तान आज सऊदी अरब से भी ज्यादा खूबसूरत और ब्रिटेन व स्पेन से ज्यादा विकसित होता।
उसने आगे कहा कि इसके बावजूद देश की हालत लगातार खराब होती जा रही है। उसने कहा कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा भारी कर्ज के बोझ के साथ जन्म ले रहा है। अगर यह पैसा देश के भीतर लगाया गया होता तो पाकिस्तान आज कई विकसित देशों से आगे होता।
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थाइलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरी, 30 की मौत:67 घायल, ज्यादातर स्कूली छात्र, 65 फीट ऊंचाई से मलबा गिरा, डिब्बे पटरी से उतरे
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3 days agoon
January 14, 2026By
Divya Akashथाईलैंड,एजेंसी। थाईलैंड में बुधवार को तेज रफ्तार से चल रही पैसेंजर ट्रेन पर 65 फीट ऊंचाई से एक क्रेन गिर गई। इसके चलते ट्रेन के कई डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक हादसे में 30 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 67 यात्री घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
क्रेन का इस्तेमाल रेल ब्रिज के निर्माण में हो रहा था। हादसे के समय ट्रेन में 195 लोग सवार थे। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें ज्यादातर यात्री स्कूल के छात्र थे। दुर्घटना के समय ट्रेन लगभग 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी।

थाईलैंड में बुधवार को रेल ब्रिज में इस्तेमाल हो रही क्रेन 65 फीट की ऊंचाई से एक पैसेंजर ट्रेन पर गिरी।

क्रेन गिरने के कारण थाईलैंड में बुधवार को पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतर गई।

क्रेन गिरने के कारण ड्राइवर को ब्रेक लगाने का मौका नहीं मिला, जिससे यह हादसा हुआ।

टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रेन के शीशे टूट गए और ट्रेन क्षतिग्रस्त हो गई।

पटरी से उतरते ही ट्रेन के डिब्बों में आग लग गई।

रेस्क्यू टीम ने घायल यात्रियों को निकालकर उन्हें पास के अस्पतालों में पहुंचाया।
ड्राइवर को ब्रेक लगाने का मौका नहीं मिला
यह दुर्घटना नाखोन राचासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुई। हादसे के वक्त ट्रेन राजधानी बैंकॉक से उबोन राचाथानी जा रही थी। क्रेन ट्रेन के तीन डिब्बों पर गिरा, जिनमें से दो डिब्बों में सबसे ज्यादा लोग सवार थे। इन्हीं डिब्बों में जानमाल का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।
न्यूज वेबसाइट ‘नेशन थाईलैंड’ के मुताबिक क्रेन गिरने के कारण ड्राइवर को ब्रेक लगाने का मौका नहीं मिला। टक्कर के बाद क्रेन का मलबा कोच पर गिरा, जिससे कई डिब्बे पटरी से उतर गए। पटरी से उतरते ही डिब्बों में आग लग गई।
बचाव दल ने अब तक 12 शव बरामद किए
हादसे के कुछ मिनट बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। बचाव दल ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है।
कई यात्री डिब्बों में फंसे हुए थे, जिन्हें कटिंग और स्प्रेडिंग उपकरणों की मदद से बाहर निकाला गया। अब तक 12 शव बरामद कर लिए गए हैं।
प्रशासन और रेलवे अधिकारी जांच कर रहे हैं कि क्रेन क्यों गिरी और सुरक्षा नियमों का पालन हुआ या नहीं। स्थानीय लोग और परिवार इस दुखद घटना से सदमे में हैं।
ट्रेन का डिब्बा दो हिस्सों में कटा
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी ने AFP समाचार एजेंसी को बताया कि उन्होंने एक तेज आवाज सुनी, जिसके बाद दो विस्फोट हुए।
निवासी ने कहा , “जब मैं यह देखने गया कि क्या हुआ है, तो मैंने पाया कि क्रेन एक यात्री ट्रेन पर पड़ी हुई थी। क्रेन से निकला मेटल का टुकड़ा ट्रेन के बीचों-बीच जा टकराया, जिससे वह दो हिस्सों में कट गया।”

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