खेल
कबड्डी संघों की खींचतान में फंसे खिलाड़ी…निलंबन की चेतावनी:नेशनल कबड्डी ट्रायल पर छत्तीसगढ़ में विवाद, सचिव बोले- खिलाड़ी भाग रहे पैसों के पीछे
दुर्ग,एजेंसी। दिल्ली में होने जा रही 35वीं सब जूनियर बालक-बालिका राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता से पहले छत्तीसगढ़ में खेल संघों की खींचतान खुलकर सामने आई है। इसका खामियाजा अब सीधे खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल, राज्य में कबड्डी को लेकर दो संघों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। एक संघ खिलाड़ियों को ट्रायल देने की अनुमति दे रहा है।
वहीं दूसरा संघ खिलाड़ियों को धमकी दे रहा है कि यदि वे ट्रायल में शामिल हुए तो उन्हें सीधे निलंबित कर दिया जाएगा। ट्रॉयल में हिस्सा लेने से खिलाड़ियों को रोकने वाले सचिव का तर्क ये है कि खिलाड़ी अनुशासन में रहे इसलिए ऐसा आदेश जारी किया है। आजकल खिलाड़ी पैसे के लिए भागा दौड़ी कर रहे हैं। पैसे वाले टूर्नामेंट खेलते हैं, फेडरेशन में खेलना पसंद नहीं कर रहे हैं।

दिल्ली में 4 से 8 अक्टूबर तक राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता होगी।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दिल्ली में 4 से 8 अक्टूबर तक राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता होगी। इसके लिए एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ ने बालिका टीम चयन के लिए 31 अगस्त को भिलाई के शासकीय स्कूल जोन-2, खुर्सीपार में ट्रॉयल का आयोजन रखा था। इसकी जानकारी संघ ने लेटरपैड से जारी की। लेकिन इसके बाद दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ जिला दुर्ग के सचिव ने बिना लेटरपैड के वॉट्सऐप पर मैसेज जारी किया।
इसमें उन्होंने खिलाड़ियों को धमकी दी। कहा कि अगर इस फेडरेशन में कोई भी खिलाड़ी/टीम भाग हिस्सा लेता है, तो उसे छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ और दुर्ग जिला कबड्डी संघ के किसी भी फेडरेशन गेम या किसी भी कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लेने नहीं दिया जाएगा। निलंबित किया जाएगा। इस मैसेज के बाद कई बालिका खिलाड़ी असमंजस में जिले के करीब 300 से ज्यादा खिलाड़ी ट्रॉयल देने नहीं पहुंचे।
अध्यक्ष-सचिव को भी मैसेज- खिलाड़ियों को हिस्सा लेने से रोकें
इसके बाद एक मैसेज सभी जिले के अध्यक्ष और सचिव को छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के महासचिव के नाम से वॉट्सऐप पर भेजा गया। जिसमें कहा गया कि, सभी अपने इकाई के पंजीकृत खिलाड़ियों को सूचना दे दें कि वे इस प्रतियोगिता में भाग लेते हैं, तो उन्हें छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के राज्य कबड्डी चैम्पियनशिप और उससे अनुमति प्राप्त प्रतियोगिता में हिस्सा लेने नहीं दिया जाएगा। उन्हें निलंबित किया जाएगा।
7 सितंबर को बालक वर्ग का ट्रॉयल, असमंजस में खिलाड़ी
बालिका वर्ग के ट्रॉयल में धमकी भरे मैसेज के बाद ज्यादातर खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया। अब 7 सितंबर रविवार को इसी नेशनल टूर्नामेंट के लिए बालक वर्ग का ट्रॉयल रखा गया है। ऐसे में खिलाड़ियों को इसका डर सता रहा है कि कहीं हम इस ट्रॉयल में हिस्सा लेंगे तो कहीं हमारा आगे खेल प्रभावित न हो।
2021 में भी निकाला था बेतुका आदेश
दरअसल, खेल संघ की लड़ाई लंबे समय से चल रही है। इसकी वजह से सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों को हो रहा है। साल 2021 में भी दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ जिला दुर्ग के सचिव ने आदेश निकालकर शहरी खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से रोक दिया था।
इतना ही एक क्लब की संबद्धता भी रद्द कर दी थी। इसके पीछे सचिव ने यह तर्क दिया था कि दुर्ग ग्रामीण से खिलाड़ी बहुत हैं, इसलिए क्लब की संबद्धता रद्द की जाती है। जबकि जानकारों का कहना है कि जिला संगठन में ग्रामीण और शहरी दोनों ही खिलाड़ी हिस्सा ले सकते हैं।
खेल विभाग ने भी माना- सचिव ने किया पक्षपात, संघ को मान्यता भी नहीं
शहरी खिलाड़ियों को हिस्सा न देने के मामले की शिकायत खेल एवं युवा कल्याण विभाग दुर्ग में की गई थी। इसके बाद विभाग के सहायक संचालक विलियम लकड़ा ने जांच की थी। विभागीय जांच में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि जिला संघ होने की वजह से शहर के खिलाड़ी भी हिस्सा ले सकते हैं।
संघ के सचिव पीलाराम पारकर ने शहरी खिलाड़ियों को लेने से साफ मना किया, यह पूरी तरह पक्षपात है। साथ ही शासन स्तर से दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ को खेल एवं युवा कल्याण विभाग से मान्यता नहीं दिया गया। विभाग के सहायक संचालक ने संघ के सचिव खिलाफ कार्रवाई करने सचिव पद से हटाने की अनुशंसा की थी। लेकिन उसके बाद भी आज तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दोनों संघ के अलग-अलग दावे
एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों का कहना है कि, दिल्ली में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हमने जो लेटर भेजा है, वे लेटरपैड में हस्ताक्षर के साथ है। लेकिन दूसरे संघ के लोग बिना लेटरपैड के ऐसे ही मैसेज भेज रहे हैं।
इसका मतलब उन्हें कोई मान्यता नहीं है। अगर वे सही हैं तो नियमानुसार लेटरपैड से निर्देश जारी करें। जिससे उस निर्देश के खिलाफ कोई कोर्ट या फोरम में जाकर चैलेंज कर सके।
वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के पदाधिकारी का कहना है कि, वो पहले के पदाधिकारी थे तो उन्होंने पहले ऐसा क्यों नहीं किया कि खिलाड़ियों के लिए ओपन ट्रॉयल रखते। पहले वे अलग-अलग खिलाड़ियों को कॉल करके बुलाते थे।
इससे कई ग्रामीण खिलाड़ी छूट जाते थे। मैं जब सचिव बना तो मैंने ग्रामीण बच्चों को उठाने का काफी प्रयास किया है। आज यहां सब कुछ सही तरीके से चल रहा है। आज वे माहौल खराब कर रहे हैं और पॉलिटिक्स कर रहे हैं।
नेशनल स्तर पर खेलने का मौका आया, तो संघों ने रास्ता रोका- खिलाड़ी
ग्रामीण और छोटे कस्बों से आए कई खिलाड़ियों ने बताया कि, उन्होंने कठिन परिश्रम और आर्थिक तंगी झेलकर यहां तक सफर तय किया है। अब जब उनके सामने नेशनल स्तर पर खेलने का मौका आया, तो संघों की राजनीति ने रास्ता रोक दिया।
खिलाड़ियों का कहना है कि अगर सरकार और खेल विभाग ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो छत्तीसगढ़ के कई होनहार खिलाड़ी इस बार नेशनल टूर्नामेंट से वंचित रह जाएंगे।

एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी प्रकाश राव।
सभी खिलाड़ी आते तो बनती अच्छी टीम, डर की वजह से नहीं पहुंचे
एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी प्रकाश राव ने कहा कि, एकेएफआई ने दिल्ली में राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता के लिए छग की टीम का ट्रॉयल रखा था। इसमें राजनांदगांव, महासमुंद, दुर्ग, बिलासपुर के खिलाड़ी आए थे। दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ के सचिव पीला राम पारकर के मैसेज की वजह से कई खिलाड़ी नहीं आए।
अगर वे सभी खिलाड़ी आते तो प्रदेश की बहुत अच्छी कबड्डी टीम तैयार होती। खिलाड़ियों को हर जगह वे खेलने से रोक रहे हैं। हमारा कहना है कि आप खिलाड़ियों को क्यों रोक रहे हैं। अगर उन्हें आपत्ति है तो वे लिखित में लेटरपैड में आदेश जारी करें, ताकि हम उसे चैलेंज कर सकें। खिलाड़ियों को धमकी देकर रोकना गलत है।
कबड्डी के राष्ट्रीय अंपायर बोले- खिलाड़ियों के हित में बारे में नहीं सोच रहे लोग
इस मामले में कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय अंपायर केशव सेठ ने कहा कि, अभी जो संघ ट्रॉयल ले रहा है। उसे सुप्रीम कोर्ट से मान्यता मिली है। उसी के आधार पर ट्रॉयल रखा गया है। लेकिन दूसरे गुट के लोग वॉट्सऐप पर मैसेज जारी कर खिलाड़ियों को धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। वे खिलाड़ियों के हित के बारे में भी नहीं सोच रहे हैं।
जबकि पहले वे फर्जी खिलाड़ियों को खिलाते थे। हरियाणा समेत दूसरे प्रदेश क बच्चों को खिलाकर छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की उपेक्षा की है। इन्हीं सब कारणों की वजह से प्रदेश में कबड्डी के दो गुट हो गए। जो सचिव बच्चों को धमका रहे हैं उन्हें खुद छग खेल एवं युवा कल्याण विभाग से मान्यता नहीं है।

कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय अंपायर केशव सेठ।
अनुशासन में रहे खिलाड़ी इसलिए निकाला ऐसा आदेश
दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ के सचिव पीला राम पारकर ने कहा कि, आपसी कुछ विवाद के बाद उन्होंने अलग फेडरेशन बनाया है। उनके फेडरेशन को भी मान्यता है। शुरू से बॉडी चली आ रही है उससे जुड़े हुए हैं। हमने ऐसा इसलिए कहा है कि खिलाड़ी अनुशासन में रहे। खिलाड़ी अलग-अलग फेडरेशन में खेलेंगे तो फेडरेशन की वैल्यू ही नहीं रह जाएगी। आज कल टूर्नामेंट पैसे वाले होने लगे हैं।
पैसे के चक्कर में खिलाड़ी भागा-दौड़ी कर रहे हैं। पैसे के चक्कर की वजह से खिलाड़ी फेडरेशन में खेलना पसंद नहीं कर रहे हैं। हमने ऐसा मैसेज इसलिए किया, ताकि खिलाड़ी एक ही जगह से खेलें। हमारे संघ ने भी यह क्लियर कर दिया है कि नई बॉडी में कोई भी खिलाड़ी हिस्सा न लें। दोनों फेडरेशन का केस चल रहा है। रही बात वॉट्सऐप पर मैसेज भेजने की तो मैं ऐसे ही सूचना जारी करता हूं, लेकिन रजिस्टर पर अलग से इंट्री करता हूं।

खेल
कभी ‘पनौती’ कहकर हुई थीं ट्रोल, आज पति की ‘Lucky Charm’ बनीं अनुष्का शर्मा, 8 साल से फिल्मों से हैं दूर
अहमदाबाद, एजेंसी। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की जोड़ी देश की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक मानी जाती है। हाल ही में आईपीएल 2026 के फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की शानदार जीत के बाद एक बार फिर अनुष्का शर्मा चर्चा में आ गई हैं। टीम की जीत के जश्न के दौरान कैमरा बार-बार उनकी ओर घूमता नजर आया और सोशल मीडिया पर भी उनकी खुशी भरे वीडियो तेजी से वायरल होने लगे।

RCB की जीत के बाद फिर चर्चा में आईं अनुष्का
अहमदाबाद में खेले गए आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने गुजरात टाइटन्स को हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की। इस ऐतिहासिक जीत के बाद जहां विराट कोहली और पूरी टीम सुर्खियों में रही, वहीं स्टैंड्स में मौजूद अनुष्का शर्मा की प्रतिक्रियाओं ने भी लोगों का ध्यान खींच लिया। मैच खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने अनुष्का को विराट कोहली की “लकी चार्म” बताना शुरू कर दिया। कई यूजर्स का मानना है कि अनुष्का की मौजूदगी टीम के लिए शुभ साबित हुई है।

एक वक्त था जब ट्रोलिंग का करना पड़ता था सामना
हालांकि, आज जो लोग अनुष्का को लकी चार्म बता रहे हैं, कुछ साल पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। शादी से पहले जब भी अनुष्का किसी मैच में विराट कोहली या टीम इंडिया को सपोर्ट करने पहुंचती थीं और टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं होता था, तो सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया जाता था। कई बार लोगों ने बिना किसी वजह के टीम की हार का जिम्मेदार भी उन्हें ठहराया। यहां तक कि उन्हें “पनौती” और “मनहूस” जैसे अपमानजनक शब्दों से भी ट्रोल किया गया। क्रिकेट और निजी जीवन को जोड़कर देखे जाने की इस सोच की उस समय काफी आलोचना भी हुई थी।
वक्त बदला और बदल गई लोगों की सोच
समय के साथ हालात भी बदले और लोगों का नजरिया भी। आज वही अनुष्का शर्मा फैंस के बीच विराट कोहली की सबसे बड़ी ताकत और सपोर्ट सिस्टम के रूप में देखी जाती हैं। RCB की लगातार दूसरी खिताबी जीत के बाद सोशल मीडिया पर उनके लिए प्यार और सम्मान से भरे पोस्ट देखने को मिल रहे हैं। मैदान पर विराट की उपलब्धियों के साथ-साथ फैंस अब अनुष्का के समर्थन और उनकी मौजूदगी को भी सकारात्मक नजरिए से देखने लगे हैं।

फिल्मों से दूर लेकिन चर्चा में हमेशा रहती हैं
अनुष्का शर्मा पिछले कुछ वर्षों से फिल्मों से दूरी बनाए हुए हैं। उनकी आखिरी रिलीज फिल्म ‘जीरो’ थी, जो साल 2018 में सिनेमाघरों में आई थी। इसके बाद उन्होंने किसी फिल्म में अभिनय नहीं किया। हालांकि, फिल्मों से दूर रहने के बावजूद अनुष्का अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ, परिवार और क्रिकेट मैचों में मौजूदगी को लेकर सुर्खियों में बनी रहती हैं।

परिवार को दे रही हैं प्राथमिकता
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा आज दो बच्चों के माता-पिता हैं और दोनों अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं। यही वजह है कि अनुष्का ने पिछले कुछ सालों में अपने प्रोफेशनल काम से ज्यादा अपने परिवार और बच्चों पर ध्यान दिया है।
ट्रोलिंग से तारीफ तक का सफर
अनुष्का शर्मा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सार्वजनिक जीवन में लोगों की राय कितनी जल्दी बदल सकती है। कभी सोशल मीडिया पर आलोचना झेलने वाली अनुष्का आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। चाहे वह अपनी फिटनेस हो, परिवार के प्रति समर्पण हो या फिर मुश्किल समय में मजबूत बने रहना, अनुष्का ने हर दौर में खुद को गरिमा और आत्मविश्वास के साथ संभाला है।

आज जब लोग उन्हें विराट कोहली की “लकी चार्म” कह रहे हैं, तो यह सिर्फ क्रिकेट की जीत का जश्न नहीं बल्कि उस सफर की भी पहचान है, जिसमें उन्होंने आलोचनाओं के बीच खुद को मजबूत बनाए रखा।
खेल
विनेश फोगाट एशियन गेम्स ट्रायल में हारीं:बोलीं- पूरे सिस्टम से लड़ी, वापसी करूंगी, बैन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल की मंजूरी दी थी
पानीपत, एजेंसी। ओलिंपियन रेसलर विनेश फोगाट शनिवार को एशियन गेम्स ट्रायल का सेमीफाइनल मैच हार गईं। 53 किलो कैटेगरी में लगातार दो बाउट जीतने के बाद उन्हें जींद की मीनाक्षी गोयत ने हराया। विनेश अब एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगी।
हार के बाद विनेश ने कहा- मैं पूरे सिस्टम के खिलाफ लड़ रही थी। एक तरफ मैं थी और दूसरी तरफ सभी लोग थे। मैं फिर वापसी करूंगी।

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने एंटी-डोपिंग नियमों का हवाला देते हुए फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर बैन लगा दिया था।
विनेश ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, डिवीजन बेंच ने विनेश के पक्ष में फैसला सुनाया था। WFI ने फोगाट का ट्रायल रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- विनेश शानदार रेसलर हैं, उन्होंने देश को गर्व महसूस कराया। विनेश को एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी जाती है।
विनेश के मैच की PHOTOS…

मिनाक्षी से मैच हारने के बाद मैट छोड़ने से पहले विनेश बोलीं- मैं इस मैट पर वापस आऊंगी। हालांकि, बाद में वो दुखीं भी दिखीं।

विनेश फोगाट को पटखनी देतीं नीशू। हालांकि, विनेश ने वापसी करते हुए मुकाबला 7-6 से जीत लिया।

ज्योति सिहाग से हुए पहले मुकाबले की शुरुआत से ही विनेश आक्रामक नजर आईं।

53 किलो वेट कैटेगरी में विनेश फोगाट को विनर घोषित करते रेफरी।
विनेश बोलीं- मै फेल नहीं हुई
विनेश हार के बाद भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा- हार को अपनी असफलता नहीं मानती। मैं फेल नहीं हुई हूं। मैं फिर वापसी करूंगी। मेरा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और भविष्य में फिर से खुद को साबित करने के लिए मैट पर लौटूंगी।
विनेश फोगाट को पहले केवल 50 किलोग्राम वर्ग में खेलने को कहा गया, जिस पर उन्होंने विरोध जताया। विवाद के बाद WFI अध्यक्ष संजय सिंह के हस्तक्षेप से उन्हें 53 किलोग्राम वर्ग के ट्रायल में भी उतरने की अनुमति मिली। ट्रायल से पहले विनेश फोगाट ने कहा कि वजन-माप के लिए उन्हें करीब एक घंटे इंतजार कराया गया। उन्होंने कहा कि यहां किसी पर अब भरोसा नहीं है।
विनेश का मैच 2 बार रुका
मीनाक्षी से पहले विनेश का मुकाबला नीशू से हुआ। शुरूआत में नीशू ने विनेश को पटखनी देकर पांच पॉइंट हासिल किए। इसके बाद विनेश ने चार पॉइंट बटोरे। इस दौरान रेफरी से विनेश और उनके पति सोमबीर राठी की कहासुनी हो गई। आपत्ति के बाद मैच थोड़ी देर के लिए रोका गया। WFI के अध्यक्ष संजय सिंह भी मैट पर पहुंच गए। रेफरी ने विनेश को 7-6 से विजेता घोषित किया। नीशू ने विनेश से हाथ तक नहीं मिलाया।

वार्मअप करतीं विनेश फोगाट।
विनेश के ट्रायल का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के ट्रायल में शामिल करने को लेकर विवाद हुआ था। कुश्ती से दूरी बनाए रखने के कारण WFI ने अपनी चयन नीति का हवाला देते हुए विनेश को ट्रायल में खेलने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विनेश ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने कहा कि मां बनने के कारण किसी खिलाड़ी को अवसर देने से इनकार नहीं किया जा सकता और उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी। WFI इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद, विनेश को एशियन गेम्स के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई।
पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे
विनेश ने अगस्त 2024 में पेरिस ओलिंपिक में डिस्क्वालिफाई होने के बाद कुश्ती से संन्यास की घोषणा की थी। हालांकि, उन्होंने 16 महीने बाद दिसंबर 2025 में संन्यास वापसी की घोषणा की।
18 जनवरी 2023 को रेसलर विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण पर महिला रेसलर्स के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
आरोपों पर कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण ने कहा था- किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं हुआ है। अगर हुआ है तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। उन्होंने कहा था कि अब ये खिलाड़ी नेशनल लेवल पर भी खेलने योग्य नहीं रहे।
खेल
शोक में डूबा खेल जगत… नहीं रहे Olympian राजा रणधीर सिंह, 79 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय खेल जगत के लिए आज का दिन एक अपूरणीय क्षति और गहरे शोक का है। देश के अनुभवी खेल प्रशासक और एशियाई खेलों में निशानेबाजी (Shooting) का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले दिग्गज ओलंपियन राजा रणधीर सिंह का आज निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे।
कई दिनों तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद उन्होंने अपने दिल्ली स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय खेलों के उस स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है जिसे उन्होंने खिलाड़ी और प्रशासक दोनों रूपों में संवारा था। राजा रणधीर सिंह के परिवार में उनकी पत्नी विनीता और तीन बेटियां महिमा, सुनैना और राजेश्वरी हैं।
राजेश्वरी भी एक निशानेबाज हैं। स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के कारण सिंह ने हाल में एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 2024 में चार साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था जबकि वह 1991 से 2015 तक इस संस्था में महासचिव रह चुके थे।

भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के सचिव राजीव भाटिया ने कहा, ”गहरे दुख के साथ हम राजा रणधीर सिंह के निधन की दुखद खबर साझा कर रहे हैं जो आज 27 मई 2026 को स्वर्ग सिधार गए। उन्होंने कहा, एक विशिष्ट ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और भारत, एशिया और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक राजा रणधीर सिंह ने निशानेबाजी खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में अमूल्य योगदान दिया।
भाटिया ने कहा, एनआरएआई और पूरा निशानेबाजी समुदाय इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त करता है और उनके परिवार तथा प्रियजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। सिंह के शानदार खेल करियर में पांच ओलंपिक में भागीदारी और 1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में ऐतिहासिक ट्रैप स्वर्ण पदक शामिल था जिससे उन्हें 1979 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था।

उन्होंने तोक्यो 1964 (रिजर्व निशानेबाज), मेक्सिको 1968, म्यूनिख 1972, मॉन्ट्रियल 1976, मॉस्को 1980 और लॉस एंजिल्स 1984 में ओलंपिक में हिस्सा लिया। खेलों की तरह ही अपने सफल प्रशासनिक करियर में उन्होंने 1987 से 2010 तक भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के महासचिव के तौर पर तथा 2001 से 2014 तक अलग अलग भूमिकाओं में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के सदस्य के रूप में कार्य किया। वह 2003 में दो साल के लिए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) में आईओसी के प्रतिनिधि बन गए।
पटियाला के पूर्व महाराजा और क्रिकेटर भूपिंदर सिंह के वंशज रणधीर सिंह भारत के सबसे जाने-माने खेल प्रशासकों में से एक थे। भारतीय खेलों की अक्सर बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्था में आम सहमति बनाने की अपनी काबिलियत के लिए उनकी प्रशंसा की जाती थी। देश में ओलंपिक आंदोलन को बढ़ावा देने का श्रेय भी बड़े पैमाने पर उन्हें ही दिया जाता था।
उनकी बेटी राजेश्वरी ने उनकी निशानेबाजी की विरासत को बरकरार रखा और वह भी ट्रैप निशानेबाज हैं। राजेश्वरी ने 2022 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के अलावा 2016 की एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक भी जीता था। वहीं उनकी बेटी सुनैना ने 2018 में आईओए की उपाध्यक्ष बनकर खेल प्रशासन में अपनी एक अलग जगह बनाई। वह आईओए की अंतरराष्ट्रीय संबंधों और शिक्षा समिति की सदस्य भी हैं।
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