खेल
कबड्डी संघों की खींचतान में फंसे खिलाड़ी…निलंबन की चेतावनी:नेशनल कबड्डी ट्रायल पर छत्तीसगढ़ में विवाद, सचिव बोले- खिलाड़ी भाग रहे पैसों के पीछे
दुर्ग,एजेंसी। दिल्ली में होने जा रही 35वीं सब जूनियर बालक-बालिका राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता से पहले छत्तीसगढ़ में खेल संघों की खींचतान खुलकर सामने आई है। इसका खामियाजा अब सीधे खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल, राज्य में कबड्डी को लेकर दो संघों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। एक संघ खिलाड़ियों को ट्रायल देने की अनुमति दे रहा है।
वहीं दूसरा संघ खिलाड़ियों को धमकी दे रहा है कि यदि वे ट्रायल में शामिल हुए तो उन्हें सीधे निलंबित कर दिया जाएगा। ट्रॉयल में हिस्सा लेने से खिलाड़ियों को रोकने वाले सचिव का तर्क ये है कि खिलाड़ी अनुशासन में रहे इसलिए ऐसा आदेश जारी किया है। आजकल खिलाड़ी पैसे के लिए भागा दौड़ी कर रहे हैं। पैसे वाले टूर्नामेंट खेलते हैं, फेडरेशन में खेलना पसंद नहीं कर रहे हैं।

दिल्ली में 4 से 8 अक्टूबर तक राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता होगी।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दिल्ली में 4 से 8 अक्टूबर तक राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता होगी। इसके लिए एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ ने बालिका टीम चयन के लिए 31 अगस्त को भिलाई के शासकीय स्कूल जोन-2, खुर्सीपार में ट्रॉयल का आयोजन रखा था। इसकी जानकारी संघ ने लेटरपैड से जारी की। लेकिन इसके बाद दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ जिला दुर्ग के सचिव ने बिना लेटरपैड के वॉट्सऐप पर मैसेज जारी किया।
इसमें उन्होंने खिलाड़ियों को धमकी दी। कहा कि अगर इस फेडरेशन में कोई भी खिलाड़ी/टीम भाग हिस्सा लेता है, तो उसे छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ और दुर्ग जिला कबड्डी संघ के किसी भी फेडरेशन गेम या किसी भी कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लेने नहीं दिया जाएगा। निलंबित किया जाएगा। इस मैसेज के बाद कई बालिका खिलाड़ी असमंजस में जिले के करीब 300 से ज्यादा खिलाड़ी ट्रॉयल देने नहीं पहुंचे।
अध्यक्ष-सचिव को भी मैसेज- खिलाड़ियों को हिस्सा लेने से रोकें
इसके बाद एक मैसेज सभी जिले के अध्यक्ष और सचिव को छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के महासचिव के नाम से वॉट्सऐप पर भेजा गया। जिसमें कहा गया कि, सभी अपने इकाई के पंजीकृत खिलाड़ियों को सूचना दे दें कि वे इस प्रतियोगिता में भाग लेते हैं, तो उन्हें छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के राज्य कबड्डी चैम्पियनशिप और उससे अनुमति प्राप्त प्रतियोगिता में हिस्सा लेने नहीं दिया जाएगा। उन्हें निलंबित किया जाएगा।
7 सितंबर को बालक वर्ग का ट्रॉयल, असमंजस में खिलाड़ी
बालिका वर्ग के ट्रॉयल में धमकी भरे मैसेज के बाद ज्यादातर खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया। अब 7 सितंबर रविवार को इसी नेशनल टूर्नामेंट के लिए बालक वर्ग का ट्रॉयल रखा गया है। ऐसे में खिलाड़ियों को इसका डर सता रहा है कि कहीं हम इस ट्रॉयल में हिस्सा लेंगे तो कहीं हमारा आगे खेल प्रभावित न हो।
2021 में भी निकाला था बेतुका आदेश
दरअसल, खेल संघ की लड़ाई लंबे समय से चल रही है। इसकी वजह से सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों को हो रहा है। साल 2021 में भी दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ जिला दुर्ग के सचिव ने आदेश निकालकर शहरी खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से रोक दिया था।
इतना ही एक क्लब की संबद्धता भी रद्द कर दी थी। इसके पीछे सचिव ने यह तर्क दिया था कि दुर्ग ग्रामीण से खिलाड़ी बहुत हैं, इसलिए क्लब की संबद्धता रद्द की जाती है। जबकि जानकारों का कहना है कि जिला संगठन में ग्रामीण और शहरी दोनों ही खिलाड़ी हिस्सा ले सकते हैं।
खेल विभाग ने भी माना- सचिव ने किया पक्षपात, संघ को मान्यता भी नहीं
शहरी खिलाड़ियों को हिस्सा न देने के मामले की शिकायत खेल एवं युवा कल्याण विभाग दुर्ग में की गई थी। इसके बाद विभाग के सहायक संचालक विलियम लकड़ा ने जांच की थी। विभागीय जांच में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि जिला संघ होने की वजह से शहर के खिलाड़ी भी हिस्सा ले सकते हैं।
संघ के सचिव पीलाराम पारकर ने शहरी खिलाड़ियों को लेने से साफ मना किया, यह पूरी तरह पक्षपात है। साथ ही शासन स्तर से दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ को खेल एवं युवा कल्याण विभाग से मान्यता नहीं दिया गया। विभाग के सहायक संचालक ने संघ के सचिव खिलाफ कार्रवाई करने सचिव पद से हटाने की अनुशंसा की थी। लेकिन उसके बाद भी आज तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दोनों संघ के अलग-अलग दावे
एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों का कहना है कि, दिल्ली में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हमने जो लेटर भेजा है, वे लेटरपैड में हस्ताक्षर के साथ है। लेकिन दूसरे संघ के लोग बिना लेटरपैड के ऐसे ही मैसेज भेज रहे हैं।
इसका मतलब उन्हें कोई मान्यता नहीं है। अगर वे सही हैं तो नियमानुसार लेटरपैड से निर्देश जारी करें। जिससे उस निर्देश के खिलाफ कोई कोर्ट या फोरम में जाकर चैलेंज कर सके।
वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के पदाधिकारी का कहना है कि, वो पहले के पदाधिकारी थे तो उन्होंने पहले ऐसा क्यों नहीं किया कि खिलाड़ियों के लिए ओपन ट्रॉयल रखते। पहले वे अलग-अलग खिलाड़ियों को कॉल करके बुलाते थे।
इससे कई ग्रामीण खिलाड़ी छूट जाते थे। मैं जब सचिव बना तो मैंने ग्रामीण बच्चों को उठाने का काफी प्रयास किया है। आज यहां सब कुछ सही तरीके से चल रहा है। आज वे माहौल खराब कर रहे हैं और पॉलिटिक्स कर रहे हैं।
नेशनल स्तर पर खेलने का मौका आया, तो संघों ने रास्ता रोका- खिलाड़ी
ग्रामीण और छोटे कस्बों से आए कई खिलाड़ियों ने बताया कि, उन्होंने कठिन परिश्रम और आर्थिक तंगी झेलकर यहां तक सफर तय किया है। अब जब उनके सामने नेशनल स्तर पर खेलने का मौका आया, तो संघों की राजनीति ने रास्ता रोक दिया।
खिलाड़ियों का कहना है कि अगर सरकार और खेल विभाग ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो छत्तीसगढ़ के कई होनहार खिलाड़ी इस बार नेशनल टूर्नामेंट से वंचित रह जाएंगे।

एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी प्रकाश राव।
सभी खिलाड़ी आते तो बनती अच्छी टीम, डर की वजह से नहीं पहुंचे
एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी प्रकाश राव ने कहा कि, एकेएफआई ने दिल्ली में राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता के लिए छग की टीम का ट्रॉयल रखा था। इसमें राजनांदगांव, महासमुंद, दुर्ग, बिलासपुर के खिलाड़ी आए थे। दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ के सचिव पीला राम पारकर के मैसेज की वजह से कई खिलाड़ी नहीं आए।
अगर वे सभी खिलाड़ी आते तो प्रदेश की बहुत अच्छी कबड्डी टीम तैयार होती। खिलाड़ियों को हर जगह वे खेलने से रोक रहे हैं। हमारा कहना है कि आप खिलाड़ियों को क्यों रोक रहे हैं। अगर उन्हें आपत्ति है तो वे लिखित में लेटरपैड में आदेश जारी करें, ताकि हम उसे चैलेंज कर सकें। खिलाड़ियों को धमकी देकर रोकना गलत है।
कबड्डी के राष्ट्रीय अंपायर बोले- खिलाड़ियों के हित में बारे में नहीं सोच रहे लोग
इस मामले में कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय अंपायर केशव सेठ ने कहा कि, अभी जो संघ ट्रॉयल ले रहा है। उसे सुप्रीम कोर्ट से मान्यता मिली है। उसी के आधार पर ट्रॉयल रखा गया है। लेकिन दूसरे गुट के लोग वॉट्सऐप पर मैसेज जारी कर खिलाड़ियों को धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। वे खिलाड़ियों के हित के बारे में भी नहीं सोच रहे हैं।
जबकि पहले वे फर्जी खिलाड़ियों को खिलाते थे। हरियाणा समेत दूसरे प्रदेश क बच्चों को खिलाकर छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की उपेक्षा की है। इन्हीं सब कारणों की वजह से प्रदेश में कबड्डी के दो गुट हो गए। जो सचिव बच्चों को धमका रहे हैं उन्हें खुद छग खेल एवं युवा कल्याण विभाग से मान्यता नहीं है।

कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय अंपायर केशव सेठ।
अनुशासन में रहे खिलाड़ी इसलिए निकाला ऐसा आदेश
दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ के सचिव पीला राम पारकर ने कहा कि, आपसी कुछ विवाद के बाद उन्होंने अलग फेडरेशन बनाया है। उनके फेडरेशन को भी मान्यता है। शुरू से बॉडी चली आ रही है उससे जुड़े हुए हैं। हमने ऐसा इसलिए कहा है कि खिलाड़ी अनुशासन में रहे। खिलाड़ी अलग-अलग फेडरेशन में खेलेंगे तो फेडरेशन की वैल्यू ही नहीं रह जाएगी। आज कल टूर्नामेंट पैसे वाले होने लगे हैं।
पैसे के चक्कर में खिलाड़ी भागा-दौड़ी कर रहे हैं। पैसे के चक्कर की वजह से खिलाड़ी फेडरेशन में खेलना पसंद नहीं कर रहे हैं। हमने ऐसा मैसेज इसलिए किया, ताकि खिलाड़ी एक ही जगह से खेलें। हमारे संघ ने भी यह क्लियर कर दिया है कि नई बॉडी में कोई भी खिलाड़ी हिस्सा न लें। दोनों फेडरेशन का केस चल रहा है। रही बात वॉट्सऐप पर मैसेज भेजने की तो मैं ऐसे ही सूचना जारी करता हूं, लेकिन रजिस्टर पर अलग से इंट्री करता हूं।

खेल
87वीं इंटर स्टेट जुनियर एवं यूथ नेशनल प्रतियोगिता हेतु छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस टीम घोषित
रायपुर। भारतीय टेबल टेनिस महासंघ के तत्वावधान में उत्तराखंड टेबल टेनिस संघ द्वारा देहरादून (उत्तराखंड) में दिनांक 15 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक “UTT 87वीं इंटर स्टेट जुनियर एवं यूथ नेशनल टेबल टेनिस प्रतियोगिता 2025” आयोजित की जा रही है जिसमें दिनांक 15/04/2026 से 18/04/2026 तक जुनियर बालिका (एकल/युगल) एवं यूथ बालिका (टीम/एकल/युगल) वर्ग तथा दिनांक 20/04/2026 से 23/04/2026 तक जुनियर बालक (एकल/युगल) एवं यूथ बालक (टीम/एकल/युगल) वर्ग की प्रतियोगिता होगी ।

उक्त प्रतियोगिता हेतु छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के जुनियर एवं यूथ (बालक एवं बालिका) टीम की घोषणा की गयी। इस अवसर पर विशेष अतिथि महामाया स्टील इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश अग्रवाल, पदाधिकारी विनय बैसवाड़े, प्रदीप जोशी, प्रवीण निरापुरे सहित सभी पदाधिकारियो ने टीम को शुभकामनाए दी एवं अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जतायी।
प्रतियोगिता हेतु छत्तीसगढ़ टीम के स्पोर्ट्स किट के प्रायोजक स्टेग ग्लोबल (STAG GLOBAL) है। प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु छत्तीसगढ़ राज्य कि जुनियर एवं यूथ बालिका टीम आज दिनाक 13 अप्रैल 2026 को रवाना हुयी है तथा जुनियर एवं यूथ बालक टीम दिनाक 17 अप्रैल 2026 को रवाना होगी।
टीम के कोच पी.एस. हरीश (दुर्ग) हैं एवं मेनेजर श्रीमती गीतांजली पाठक (दुर्ग) है। छत्तीसगढ़ से प्रतियोगिता में अंपायरिंग के लिए तर्राष्ट्रीय अंपायर अजीत बेनर्जी (रायपुर) को चुना गया है ।
टीम इस प्रकार है:-
यूथ बालक (UNDER-19) :- अर्जुन मल्होत्रा (रायपुर), एंड्र्यू टी विलियम्स (रायपुर), यशवंत डेकाटे (रायपुर), दीक्षांत कुमार जांगड़े (बिलासपुर)।
यूथ बालिका (UNDER-19) :- समाया पांडे (रायपुर), प्रज्ञा पाठक (दुर्ग), लावण्या पांडे (रायपुर), सिया मेघानी (बिलासपुर) ।
जुनियर बालक (UNDER-17) :- अर्जुन मल्होत्रा (रायपुर), आर्यन कुमार सिंह (रायपुर), दीक्षांत कुमार जांगड़े (बिलासपुर), रेयांश पाहवा (बिलासपुर)।
जुनियर बालिका (UNDER-17):- समाया पांडे (रायपुर), वेदी कछवाहा (रायपुर), लावण्या पांडे (रायपुर), सिया मेघानी (बिलासपुर) ।
उपरोक्त जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ के उपाध्यक्ष विनय बैसवाड़े ने दी।

कोरबा
बचपन की टिकट:अशोक वाटिका में 10,000 से अधिक महिलाएं बचपन की यादों में खोईं
भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पाण्डेय की अनुपम और अनोखी पहल से खेलों के माध्यम से महिलाओं को गुदगुदाया, घंटों तक रोमांच की दुनिया का कराया सफर
सरोज पाण्डेय ने कहा-धन्यवाद कोरबा, अपेक्षा से अधिक कार्यक्रम को बनाया सफल

कोरबा। 12 अप्रैल का दिन कोरबा के लिए एक ऐतिहासिक दिन था। भाजपा के दो धु्रवों के बीच एक तरह से शक्ति प्रदर्शन था। एक तरफ मंत्री लखनलाल देवांगन के जन्मदिन पर जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित था, तो दूसरी ओर कोरबा लोकसभा की भाजपा प्रत्याशी, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय का अशोक वाटिका में बपचन की टिकट का अद्भूत कार्यक्रम आयोजित था।

बचपन की टिकट कोरबा की महिलाओं के लिए एक अद्भूत अनुभव साबित हुआ। कोरबा के लिए ऐसा प्रथम बार कार्यक्रम महिलाओं के लिए आयोजित था, जिसमें 10,000 से अधिक महिलाओं ने अपनी भागीदारी निभाई।
सबसे अद्भूत और रोमांच का दृश्य उस समय देखने को मिला जब कोरबा की महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत और उनकी टीम वर्सेस बिलासपुर की महापौर श्रीमती पूजा विधानी और उनकी टीम के बीच कबड्डी खेली गई। रोमांच चरम पर था और तालियों की गड़गड़ाहट और हौसला के बीच कोरबा महापौर बिलासपुर की टीम को समेटने के लिए मैदान में उतरीं और कबड्डी…कबड्डी बोलते-बोलते बिलासपुर टीम के पाले में गई, लेकिन खुद पटकनी खा गईं।
बिलासपुर महापौर जब मैदान में कुदीं तो वे बैरंग लौट गईं। महिला पार्षदों ने दमखम दिखाया और दोनों टीम अपनी खेल प्रतिभा से एक-दूसरे पर भारी दिख रहे थे, लेकिन बाद में जजों ने दोनों को संयुक्त विजेता घोषित कर दिया, लेकिन बिलासपुर महापौर और उनकी टीम ने रोमांचक हंगामा किया और कहा-जीत हमारी हुई।
उपविजेता के रूप में नितेश कुमार मेमोरियल लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा की टीम रही।


छत्तीसगढ़ी खेलों ने गुदगुदाया:बचपन की यादों में खोईं महिलाएं


सुश्री सरोज पाण्डेय की इस अद्भूत पहल से संध्या 5.00 बजे से रात्रि 8.30 बजे तक अशोक वाटिका महिलाओं की भीड़ से आबाद रहा। ऐसा दृश्य कोरबा में पहली बार देखने को मिला। अलग-अलग खेलों के लिए जोन में बांटा गया था, जहां कबड्डी, खो-खो, जलेबी दौड़, फूगड़ी, बोरा दौड़, हौजी, सुआ नृत्य, रस्सी खींच, कुर्सी दौड़, गोटा, बिल्लस सहित कई रोमांचित छत्तीसगढ़ी खेलों में महिलाएं व्यस्त रहीं और अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर रही थीं। चारों तरफ उल्लास और उमंग का माहौल था। घर की जिम्मेदारियां, महिलाओं की व्यस्तता के बीच तीन घंटे सुकून के पल अशोक वाटिका में महिलाओं सहित युवतियां खेलों के माध्यम से बिताया और महिलाओं ने इसे रोमांच का अद्भूत उदाहरण बताया और सुश्री सरोज पाण्डेय को इस तरह के आयोजन के लिए हृदय से धन्यवाद दिया।
कई हस्तियां पहुंची थीं

कोरबा के लिए इस ऐतिहासिक और अनोखा कार्यक्रम -बपचन की टिकट को अनुभव करने, खेलने छत्तीसगढ़ की कई प्रतिभाएं यहां मौजूद थीं। सुश्री सरोज पाण्डेय के अलावा कोरबा महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत, बिलासपुर महापौर श्रीमती पूजा विधानी, महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती हर्षिता पाण्डेय सहित कई महिला प्रतिभाएं यहां रोमांच का अनुभव लिया और खुद बचपन में खो गईं।

पूजा विधानी ने कहा-महिलाओं के लिए सराहनीय कार्यक्रम

बिलासपुर महापौर ने कबड्डी में अपनी और टीम की प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरोज दीदी की सोच काफी प्रशंसनीय रहती है। बचपन की टिकट-कार्यक्रम का अनुभव वाकई में रोमांच पैदा कर गया। ऐसा आयोजन महिलाओं के लिए होते रहना चाहिए।
महिलाओं के बीच महिलाओं का प्रदर्शन नया अनुभव दे गया- कोरबा महापौर संजूदेवी राजपूत

कोरबा महापौर संजूदेवी राजपूत ने कबड्डी में टीम के साथ अपनी प्रतिभाएं दिखाईं। उन्होंने पत्रकारों से रू ब रू होकर कहा कि महिलाओं के बीच महिलाओं का खेल प्रदर्शन अद्भूत और अनोखा अनुभव दे गया। हमारी भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज दीदी का यह कार्यक्रम कोरबा के लिए ऐतिहासिक अनुभव दे गया। महिलाओं की अपार भीड़ के बीच खेलों ने हमें गुदगुदाया और सुकून दे गया। ऐसा कार्यक्रम महिलाओं के लिए होते रहना चाहिए। यह अनुभव महिलाओं के लिए खास रहा और घंटों तक हमारी महिलाएं जीवन की आपाधापी से दूर कुछ पल अपनों के साथ बीताया, बचपन की यादों में खोई रहीं।
अपेक्षा से कहीं अधिक सफल रहा कार्यक्रम, धन्यवाद कोरबा-सुश्री सरोज पाण्डेय

कार्यक्रम की संयोजिका सुश्री सरोज पाण्डेय ने बचपन की टिकट-कार्यक्रम में महिलाओं की इतनी बड़ी भागीदारी से काफी रोमांचित हुईं और मंच पर कहा- धन्यवाद कोरबा! इस कार्यक्रम को आपकी उपस्थिति ने अपेक्षा से अधिक सफल बनाया, हम कृतार्थ हैं।

बचपन की टिकट-एक कार्यक्रम ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, छत्तीसगढ़ी खेलों के प्रति पुनर्जागरण का संदेश था, महिलाओं के जीवन में आपाधापी के बीच सुकून के पल बिताने का अवसर था।
घर से निकलकर अपने लिए महिलाओं को जीने का सुअवसर प्रदान करना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था, जिसमें हम सफल हुए। कोरबा ने बता दिया कि हम इस तरह के कार्यक्रम को और आगे बढ़ाते रहें। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सहयोगियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। सखी-सहेली महिला समूह छत्तीसगढ़ के बैनर तले सरोज पाण्डेय के इस कार्यक्रम को सभी ने सराहा…।


टीम के सदस्यों से रू ब रू होते सरोज पाण्डेय

टीम के सदस्यों से रू ब रू होते भाजपा नेता
मशाल जलाकर प्रतियोगिता का शुभारंभ

खेल प्रतियोगिता का शुभारंभ मशाल जलाकर किया गया और मशाल रैली में मंत्री लखनलाल देवांगन, सुश्री सरोज पाण्डेय, भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी, व्यापारी प्रकोष्ठ के पूर्व जिला संयोजक विकास अग्रवाल, कोरबा महापौर संजूदेवी राजपूत, बिलासपुर महापौर पूजा विधानी, महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष हर्षिता पाण्डेय, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष प्रीति स्वर्णकार सहित कई हस्तियां शामिल हुईं।

पुरूस्कारों से विजेता टीमों के खिले चेहरे


इस अनुपम और अनोखी खेल प्रतियोगिता के समापन के बाद अतिथियों ने सभी विजेता टीम, खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। विजेताओं के चेहरों पर मुस्कान बिखर रही थी। एक ओर बचपन की यादें और दूसरी ओर जीत की खुशी चेहरों पर झलक रही थीं।





खेल
सचिन तेंदुलकर परिवार का सीक्रेट बिलासपुर दौरा:अचानकमार के आदिवासी गांव पहुंचे, पत्नी अंजलि, बेटी सारा और बहू सानिया ने बच्चों संग बिताया समय
बिलासपुर/मुंगेली,एजेंसी। भारत रत्न और पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का परिवार मंगलवार सुबह साढ़े 5 बजे बिलासपुर पहुंचा। यह दौरा पूरी तरह गोपनीय रखा गया, जिससे परिवार ने बिना किसी सार्वजनिक सूचना के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया। सचिन की पत्नी डॉ. अंजलि तेंदुलकर, बेटी सारा और बहू सानिया चंडोक तेंदुलकर ग्रामीणों से मिलीं।

दोपहर में उनका काफिला लोरमी स्थित अचानकमार क्षेत्र के छपरवा-बम्हनी गांव पहुंचा। यहां तीनों ने पैदल भ्रमण कर ग्रामीणों से बातचीत की और उनके जीवन को करीब से समझने का प्रयास किया।
गांव में नवजात शिशु को गोद में लेकर स्नेह जताना, बच्चों के साथ सहज बातचीत करना और स्थानीय माहौल में घुलना-मिलना इस दौरे की खास झलक रही। परिवार ने सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के तहत चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया।



बच्चों के साथ समय, ग्रामीण जीवन को समझने की कोशिश
परिवार ने बच्चों को खिलौने दिए और उनके साथ समय बिताया। ग्रामीणों से बातचीत के दौरान जीवनशैली, जरूरतों और समस्याओं को समझने पर खास फोकस रहा। इससे यह दौरा सिर्फ औपचारिक न रहकर जमीनी जुड़ाव का प्रयास नजर आया।

जन स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण, डॉक्टरों से चर्चा
बुधवार सुबह नाश्ते के बाद तीनों गनियारी प्राइमरी हेल्थ सेंटर पहुंचीं। यहां स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया गया और फुलवारी केंद्र का निरीक्षण किया गया। डॉक्टरों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
ग्रामीणों ने बताया कि, गनियारी जन स्वास्थ्य समिति वनांचल के विभिन्न गांवों में निःशुल्क स्वास्थ्य और शिक्षा कार्यक्रम संचालित करती है। तेंदुलकर परिवार ने समिति की तरफ से संचालित फुलवारी केंद्र का अवलोकन किया।
उन्होंने ग्राम बम्हनी में जनस्वास्थ्य उपकेंद्र और बालवाड़ी में वनक्षेत्र के गरीब बच्चों के रहन-सहन और उपस्वास्थ्य केंद्र के संचालन को करीब से देखा। फुलवारी केंद्र में बैगा बच्चों के पोषण और शिक्षा की स्थिति के बारे में जानकारी ली। समिति की चिकित्सकीय टीम ने उन्हें स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में बताया।

ग्रामीणों की जीवन शैली और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी जुटाई
इस दौरान ग्रामीण महिलाओं ने पुष्पगुच्छ भेंटकर उनका स्वागत किया। ग्रामीणों ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। तेंदुलकर परिवार ने वनांचल में ग्रामीणों की जीवन शैली और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी भी जुटाई। इस दौरान सारा तेंदुलकर ने एक आदिवासी बच्चे को गोद में लेकर प्यार और दुलार करती हुई भी नज़र आई।

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