छत्तीसगढ़
रायपुर : विशेष लेख : राष्ट्रीय राजमार्ग पर संजीवनी बना डायल 1033
- कमलेश साहू


कल्पना कीजिए, आप एक खूबसूरत सफर पर हैं। चारों तरफ फैली खुली शानदार सड़क, रफ्तार पकड़ती गाड़ी और गुनगुनाता सुहाना मौसम। सब कुछ एकदम मुकम्मल लगता है। लेकिन अचानक, अगले ही मोड़ पर कोई अनहोनी हो जाए…। कई बार हाइवे पर हुआ एक अनचाहा हादसा पल भर में जिंदगी की खुशियों को मातम में बदल देता है। ऐसे किसी अनजान और सुनसान सफर पर, जहां दूर-दूर तक कोई अस्पताल या मदद नजर नहीं आती, वहां मोबाइल की स्क्रीन पर चमकता एक नंबर उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनकर उभरता है- 1033। आज देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर यह चार अंकों का नंबर महज एक हेल्पलाइन नहीं, बल्कि हजारों-लाखों मुसाफिरों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है।


संकट के समय फरिश्ता बनती है एक कॉल
हाइवे पर दुर्घटना होने के बाद जो सबसे पहला घंटा होता है, उसे चिकित्सा विज्ञान में गोल्डन ऑवर (Golden Hour) कहा जाता है। इस एक घंटे के भीतर अगर घायल को सही इलाज मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना 80 फीसदी तक बढ़ जाती है। 1033 इसी गोल्डन ऑवर का रक्षक है।

जैसे ही कोई इस नंबर पर डायल करता है, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का कॉल सेंटर तुरंत हरकत में आ जाता है। जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग के जरिए हादसे की सटीक लोकेशन ट्रेस की जाती है और चंद मिनटों के भीतर एम्बुलेंस मौके पर पहुंचती है। घायलों को नजदीकी ट्रॉमा सेंटर या अस्पताल पहुंचाया जाता है। साथ ही रास्ता साफ करने के लिए क्रेन और पेट्रोलिंग गाड़ियां तैनात हो जाती हैं।
महज 7 से 10 मिनट में आ गई एम्बुलेंस
एनएचएआई के 1033 सेवा का लाभ लेने वाले नितिन वर्मा बताते हैं, “मैं रायपुर से बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में सफ़र कर रहा था। दोपहर 2 बजे के करीब हाइवे पर मेरी गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ, मोबाइल में नेटवर्क भी कम था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं कहां हूं? मैंने 1033 लगाया, और महज 7 से 10 मिनट में एम्बुलेंस मेरे सामने थी। वो नंबर नहीं, मेरे लिए संजीवनी से कम नहीं था।”
सिर्फ हादसा नहीं, हर मुश्किल का हल है 1033
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि यह नंबर सिर्फ एक्सीडेंट के समय काम आता है, लेकिन असल में यह हाइवे पर आपका सबसे भरोसेमंद साथी है। आप कई विपरीत स्थितियों में भी इसकी मदद ले सकते हैं। रात के सन्नाटे में अगर गाड़ी का टायर पंचर हो जाए या इंजन फेल हो जाए, हाइवे पर कोई पेड़ गिर गया हो, मवेशी आ गए हों या कोई भारी मलबा पड़ा हो, यात्रा के दौरान अगर अचानक किसी सहयात्री की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ जाए, टोल प्लाजा या फास्टैग संबंधी कोई समस्या हो या हाइवे पर असुरक्षा महसूस हो रही हो… तो भी 1033 सेवा का लाभ लिया जा सकता है।
अनुभवों की जुबानी, संजीवनी की कहानी
रात के सन्नाटे में भारी ट्रक का टायर फटा, 1033 ने दी राहत
ट्रक ड्राइवर गुरदीप सिंह अपने अनुभव साझा करते हैं, “बात रात के करीब 09:45 बजे की है। मैं अपना भारी-भरकम ट्रक लेकर रायपुर से बिलासपुर की ओर बढ़ रहे था। अचानक एक जोरदार आवाज के साथ ट्रक का टायर फट गया। भारी वाहन और ऊपर से रात का सन्नाटा… ऐसी स्थिति में हाइवे के किनारे ट्रक खड़ा करना और मदद ढूंढना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। मैने बिना वक्त गंवाए 1033 पर कॉल किया। एनएचएआई की टीम ने तुरंत मेरी लोकेशन ट्रेस की और हाईवे पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंच गई। टीम ने न सिर्फ क्रेन और तकनीकी मदद का इंतजाम किया, बल्कि जब तक काम पूरा नहीं हुआ, वहां सुरक्षा सुनिश्चित की, ताकि कोई और बड़ा हादसा न हो।”
जब जाम हो गया चक्का तो पेट्रोलिंग टीम ने बढ़ाया मदद का हाथ
बिलासपुर-नागपुर रूट के मुसाफिर एस.पी. चौबे ने बताया, “हम अपनी कार से सफर कर रहे थे कि अचानक गाड़ी पंचर हो गई। जब स्टेपनी बदलने की बारी आई, तो एक नई मुसीबत खड़ी हो गई। बहुत दिनों से पहिया खुला नहीं था, इसलिए वह बुरी तरह जाम हो चुका था। मेरा ड्राइवर पसीने से तर-बतर होकर उसे खोलने की नाकाम कोशिश कर रहा था, लेकिन वह टस से मस नहीं हो रहा था। हाइवे के किनारे खड़ी हमारी गाड़ी और ड्राइवर की जद्दोजहद को वहां से गुजर रही 1033 की रूट पेट्रोलिंग व्हीकल (RPV) टीम ने खुद देख लिया।
टीम के जवान तुरंत हमारे पास रुके। उन्होंने न सिर्फ अपनी गाड़ी से जरूरी हैवी टूल्स (औजार) निकाले, बल्कि खुद आगे बढ़कर जाम हो चुके चक्के को खोला, टायर बदला और हमारी गाड़ी को रवाना किया। उनके इस अपनेपन और मुस्तैदी ने हमारा दिल जीत लिया।
भारी ट्रेलर का ब्रेक हुआ जाम, मुस्तैदी से टला बड़ा खतरा
हाइवे पर सुरक्षा सिर्फ छोटे वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारी-भरकम कमर्शियल वाहनों के लिए भी 1033 एक सुरक्षा कवच है। ऐसा ही एक मामला बिलासपुर से महासमुंद की ओर जा रहे विशाल ट्रेलर के ड्राइवर शिवम यादव के साथ हुआ। उनके ट्रेलर का ब्रेक अचानक जाम हो गया और गाड़ी में जरूरी एयर प्रेशर नहीं बन पा रहा था। बीच हाइवे पर इतने बड़े वाहन का इस तरह रुकना बेहद खतरनाक था।
सूचना मिलते ही 1033 की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। भारी ट्रेलर के पीछे से आ रही तेज रफ्तार गाड़ियों को सचेत करने के लिए टीम ने सेफ्टी कोन और चेवरॉन साइन बोर्ड लगाए, ताकि एक सुरक्षित बफर जोन बन सके। इस हाई-प्रोफेशनल ट्रैफिक मैनेजमेंट की वजह से न तो हाइवे पर जाम लगा और न ही कोई दुर्घटना हुई। ट्रेलर को सुरक्षित तरीके से सुधरवाने की व्यवस्था की गई।
सरल, आसान और सुविधाजनक
1033 की सबसे खास बात इसकी सरलता और गति है। यह सेवा 24 घंटे, सातों दिन काम करती है। इसमें भाषा की कोई दीवार नहीं है। स्थानीय भाषाओं से लेकर हिंदी और अंग्रेजी, हर भाषा में यहां मदद मिलती है। टोल-फ्री होने के कारण मोबाइल में बैलेंस न होने पर भी इस पर कॉल की जा सकती है।
बदलते भारत के साथ हमारे हाइवे आधुनिक और हाई-स्पीड हो रहे हैं, लेकिन रफ्तार के इस दौर में सुरक्षा सबसे अहम है। अगली बार जब आप किसी लंबे सफर पर निकलें, तो अपनी गाड़ी की डिक्की चेक करने के साथ-साथ अपने दिमाग और मोबाइल की स्पीड डायल लिस्ट में 1033 को जरूर सेव कर लें। क्योंकि जब हाइवे पर मुश्किलें रास्ता रोकती हैं, तो यही चार अंक संजीवनी बनकर जिंदगी की रफ्तार को थमने नहीं देते।
कोरबा
205.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज
कोरबा। कोरबा जिले में एक जून से 06 जुलाई तक कुल 205.6 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई।
अधीक्षक भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में जिले की तहसील कोरबा में 183.1 मिलीमीटर, अजगरबहार 147.7, भैंसमा, 220.9, करतला 137.3, बरपाली 207.8, कटघोरा 207.2, दीपका 271.6, दर्री 199.1, पाली 274.2, हरदीबाजार 212, पोंड़ी-उपरोड़ा 239.4, और पसान तहसील में 113.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
कोरबा
समसामयिक सलाह, अच्छी वर्षा का लाभ उठाकर खरीफ फसलों के कृषि कार्य समय पर पूर्ण करें
कोरबा। कृषि विज्ञान केंद्र, कोरबा ने जिले के किसानों से अपील की है कि हाल के दिनों में हो रही अच्छी वर्षा का अधिकतम लाभ उठाते हुए खरीफ मौसम से जुड़े सभी कृषि कार्य समय पर पूर्ण करें। जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है, वे खेत में पर्याप्त नमी का लाभ लेते हुए शीघ्र रोपाई करें। धान की रोपाई कतार पद्धति से करने, 20-21 दिन की पौध का उपयोग करने तथा अनुशंसित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है, ताकि पौधों की संख्या संतुलित रहे, खरपतवार नियंत्रण आसान हो और उत्पादन में वृद्धि हो। जिन किसानों ने अभी तक धान की बुवाई नहीं की है, वे वर्तमान मौसम को देखते हुए मिट्टी में अनुकृल नमी होने पर लेही विधि से बुवाई करें। प्रमाणित अथवा आधार श्रेणी के बीजों का एजोस्पाइरिलम एवं पीएसबी कल्चर से बीजोपचार करने की भी सलाह दी गई है। साथ ही, अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग तथा समय पर नाइट्रोजन का छिड़काव करने पर विशेष जोर दिया गया है।
धान एवं मक्का की फसलों में अंकुरण पूर्व तथा अंकुरण पश्चात खरपतवारनाशी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं, मक्का की फसल में आवश्यकता अनुसार निराई-गुड़ाई एवं मिट्टी चढ़ाने का कार्य भी समय पर करें।
वर्तमान मौसम को ध्यान मे रखते हुए 10‘- 15 दिन पश्चात् दलहनी फसलों जैसे अरहर, उड़द एवं मूंग की शीघ्र/कम अवघि की उन्नतशील किस्में तथा उच्चहन भूमि में तिलहनी फसल विशेषकर तिल एवं मूंगफली की अनुशंसित बीज दर, निश्चित कतार दूरी एवं बीजोपचार के साथ बुवाई करने की सलाह दी गई है। किसानों से आग्रह है कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरको का संतुलित उपयोग करें।
खरीफ मौसम में लौकी, कद्दू, करेला, तोरई, भिंडी, बरबटी, मिर्च, बैंगन सहित अन्य मौसमी सब्जियों की समय पर बुवाई करने तथा तैयार नर्सरी वाली मिर्च, बैंगन एवं फूलगोभी की रोपाई शुरू करने की अपील की गई है। अदरक, हल्दी, भिंडी एवं बरबटी की फसलों में समय-समय पर निराई-गुड़ाई तथा अधिक वर्षा की स्थिति में जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है।
वर्तमान समय को आम, अमरूद, नींबू, कटहल, सहजन एवं केले सहित अन्य फलदार पौधों के रोपण के लिए भी उपयुक्त बताया गया है। पौधरोपण के समय अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद एवं अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करने तथा पौधों की नियमित देखभाल करने की सलाह दी गई है।
वर्षा जल एक प्राकृतिक संसाधन है और इसके संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है जिसके लिए किसान अपने खेत की मेड़ों को मजबूत रखे, खेत तालाब, डबरी, मेड़बंदी एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करें, संरक्षित जल का उपयोग वर्षा के अंतराल के दौरान सिंचाई के लिए किया जा सकता है। साथ ही खेत में नमी बनाए रखने के लिए उचित जल प्रबंधन, एवं मल्चिंग अपनाने की सलाह दी गई है।
कोरबा
खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर, सीपेट स्याहीमुड़ी में डिप्लोमा पाठ्यक्रमों हेतु आवेदन आमंत्रित
कोरबा। जिला प्रशासन द्वारा जिले के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से सीपेट स्याहीमुड़ी, कोरबा में संचालित डिप्लोमा इन प्लास्टिक्स टेक्नोलॉजी एवं डिप्लोमा इन प्लास्टिक्स मोल्ड टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। योजना के अंतर्गत कोरबा जिले के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्रों के निवासी 10 मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों के लिए डिप्लोमा पाठ्यक्रम की संपूर्ण अवधि का शिक्षण शुल्क तथा हॉस्टल एवं मेस शुल्क जिला प्रशासन द्वारा वहन किया जाएगा।
इच्छुक अभ्यर्थी आवश्यक दस्तावेजों सहित 20 जुलाई 2026 को सायं 5ः00 बजे तक लाईवलीहुड कॉलेज, आईटीआई रामपुर परिसर, रोजगार कार्यालय के पीछे, कोरबा में उपस्थित होकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रवेश हेतु सीटों की संख्या सीमित है। निर्धारित संख्या से अधिक आवेदन प्राप्त होने की स्थिति में विद्यार्थियों का चयन मेरिट सूची एवं कोरबा जिले के लिए निर्धारित आरक्षण रोस्टर के अनुसार किया जाएगा। पाठ्यक्रम, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तथा आरक्षण रोस्टर के अनुसार रिक्त सीटों का विस्तृत विवरण आवेदन स्थल पर उपलब्ध रहेगा।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन आवेदकों के माता या पिता किसी भी प्रकार की शासकीय सेवा में कार्यरत हैं, वे छात्रवृत्ति के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसे आवेदकों को आवेदन के साथ इस आशय का प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा।
अधिक जानकारी के लिए इच्छुक अभ्यर्थी अरुणेन्द्र कुमार मिश्रा, प्राचार्य, लाईवलीहुड कॉलेज से मोबाइल नंबर 9589583878 पर संपर्क कर सकते हैं।
आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 सायं 5ः00 बजे निर्धारित की गई है।
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