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छत्तीसगढ़

शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम

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 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम
 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम
 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम
 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम
 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम

शिवरीनारायण। छत्तीसगढ़ की पावन धरती अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों और धार्मिक आस्थाओं के लिए देशभर में विशेष पहचान रखती है। इन्हीं पवित्र स्थलों में एक नाम अत्यंत श्रद्धा और गौरव के साथ लिया जाता है, शिवरीनारायण। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के त्रिवेणी संगम पर बसा यह नगर केवल एक धार्मिक तीर्थ ही नहीं, बल्कि संस्कृति, स्थापत्य कला, इतिहास और पर्यटन का अद्भुत केंद्र भी है। सदियों से यह स्थान वैष्णव परंपरा, रामायणकालीन मान्यताओं और लोक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है।

शिवरीनारायण का उल्लेख छत्तीसगढ़ की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान के रूप में किया जाता है। यह नगर विभिन्न राजवंशों की कला, स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं को अपने भीतर समेटे हुए है। यहां के मंदिरों की भव्यता, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और धार्मिक मान्यताएं देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

रामायणकालीन आस्था से जुड़ा शिवरीनारायण

 शिवरीनारायण का संबंध रामायणकालीन घटनाओं से भी माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार यह वही पावन भूमि है जहां माता शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेमपूर्वक जूठे बेर खिलाए थे। कहा जाता है कि शबरी की तपोभूमि होने के कारण इस स्थान का नाम शबरीनारायण पड़ा, जो समय के साथ शिवरीनारायण के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यहां स्थित शबरी देवी मंदिर आज भी भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है। इस पावन स्थल की विशेषता यह है कि यहां केवल वैष्णव परंपरा ही नहीं, बल्कि शैव, जैन और बौद्ध संस्कृतियों का भी अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। यही कारण है कि शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एकता और धार्मिक समरसता का जीवंत प्रतीक बन गया है।

नर नारायण मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण

 शिवरीनारायण का सबसे प्रमुख आकर्षण नर नारायण मंदिर है। लगभग बारहवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण राजा शबर ने करवाया था। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर की गई सूक्ष्म नक्काशी आज भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

 मंदिर के गर्भगृह में भगवान नारायण की अत्यंत सुंदर प्रतिमा स्थापित है, जो खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी। इसके समीप लक्ष्मण की प्रतिमा भी स्थापित है। भगवान विष्णु के दस अवतारों, नवग्रहों तथा विभिन्न देवी-देवताओं का अत्यंत आकर्षक चित्रण मंदिर की कला को विशिष्ट बनाता है। प्रवेश द्वार पर गंगा, यमुना और सरस्वती की मूर्तियों के साथ नाग, कच्छप और मगर जैसे प्रतीकों का अंकन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक दर्शन को दर्शाता है। मंदिर परिसर में स्थित स्तंभों पर की गई कलाकारी मध्यकालीन शिल्पकला की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती है। यही कारण है कि नर नारायण मंदिर इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और कला प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

केशव नारायण मंदिर की भव्यता

नर नारायण मंदिर के सामने स्थित केशव नारायण मंदिर भी अपनी भव्यता और प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है। बारहवीं शताब्दी के इस मंदिर में भगवान विष्णु की अत्यंत प्राचीन और दिव्य प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की संरचना, स्तंभों पर उकेरी गई चित्रकारी तथा पत्थरों पर की गई नक्काशी इसकी कलात्मक समृद्धि को दर्शाती है। मंदिर में भगवान विष्णु के दशावतारों का सुंदर चित्रण किया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल धार्मिक शांति का अनुभव करते हैं, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला की महान परंपरा से भी परिचित होते हैं।

शबरी देवी मंदिर – भक्ति और समर्पण का प्रतीक

 भगवान विष्णु के चरणों के समीप जिस स्त्री की प्रतिमा अंकित है, उसे माता शबरी का स्वरूप माना जाता है। पंचरत्न शैली में निर्मित यह मंदिर ईंटों से बना एक सुंदर और प्राचीन मंदिर है। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर विष्णु के चौबीस अवतारों का चित्रण इसकी धार्मिक महत्ता को दर्शाता है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और निष्कपट प्रेम का प्रतीक भी है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु माता शबरी की अटूट भक्ति को स्मरण कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।

चंद्रचूड़ महादेव और जगन्नाथ मंदिर

नर नारायण मंदिर के समीप स्थित चंद्रचूड़ महादेव मंदिर शिव भक्ति का प्रमुख केंद्र है। चेदि संवत 919 में निर्मित यह मंदिर क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। यहां प्राप्त कलचुरी कालीन शिलालेख इतिहास और संस्कृति के शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं। वहीं वर्ष 1927 में निर्मित जगन्नाथ मंदिर अपनी विशिष्ट संरचना और धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के समीप स्थित विशाल वटवृक्ष को ‘कल्पवट’ या ‘माधव कटोरा’ कहा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि इसके पत्ते दोने के आकार के दिखाई देते हैं। माघ पूर्णिमा के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जो लगभग पंद्रह दिनों तक चलता है। इस दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

त्रिवेणी संगम: प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम दृश्य

 शिवरीनारायण की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां का त्रिवेणी संगम। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों का संगम इस नगर को आध्यात्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से विशेष महत्व प्रदान करता है। संगम का स्वच्छ और शांत वातावरण पर्यटकों को अत्यंत आकर्षित करता है। नदियों के किनारे फैले खेत, हरियाली और शांत परिवेश प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं। सूर्याेदय और सूर्यास्त के समय संगम का दृश्य अत्यंत मनोहारी दिखाई देता है। धार्मिक स्नान, पूजा-अर्चना और नौकायन जैसी गतिविधियां यहां के पर्यटन को और अधिक आकर्षक बनाती हैं।

लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर: आस्था का प्राचीन केंद्र
    
     शिवरीनारायण में स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का मंदिर है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सिरपुर के सोमवंशी राजाओं ने करवाया था। मंदिर में प्राप्त शिलालेखों में तत्कालीन शासकों का उल्लेख मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को और अधिक बढ़ाते हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित अद्भुत शिवलिंग को लेकर अनेक धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। लोककथाओं के अनुसार लंका विजय के बाद अयोध्या लौटते समय लक्ष्मण किसी रोग से पीड़ित हो गए थे। तब उन्होंने यहां भगवान शंकर की आराधना कर सवा लाख शिवलिंग स्थापित किए और रोगमुक्त हुए। आज भी श्रद्धालु यहां सवा लाख चावल के दाने अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। महाशिवरात्रि और अन्य पर्वों के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।

आसपास के धार्मिक स्थल

 शिवरीनारायण के आसपास का प्राचीन शिव मंदिर भी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां भगवान शिव की विशाल प्रतिमा की पूजा ‘दूल्हादेव’ के रूप में की जाती है। शिव के साथ शक्ति और कंकालिन देवी की पूजा ग्राम देवी के रूप में होती है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में स्थित अनेक छोटे-बड़े मंदिर और ऐतिहासिक स्थल इस पूरे क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं रखते हैं।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा
     
शिवरीनारायण केवल धार्मिक महत्व का केंद्र नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन विकास का भी महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, परिवहन और रोजगार को नई गति मिलती है। धार्मिक मेलों और उत्सवों के दौरान क्षेत्र की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलती है, जिससे लोककला और लोकसंस्कृति को भी संरक्षण मिलता है।

सांस्कृतिक विरासत एवं समानता का जीवंत प्रतीक

 शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, धार्मिक आस्था और स्थापत्य वैभव का अद्भुत संगम है। यहां की प्राचीन परंपराएं, मंदिरों की भव्यता, त्रिवेणी संगम का शांत वातावरण और रामायणकालीन मान्यताएं इस स्थल को विशेष बनाती हैं। यह केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और अध्यात्म की जीवंत विरासत है। शिवरीनारायण आने वाला प्रत्येक व्यक्ति यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक गौरव और प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत हुए बिना नहीं रह सकता। यही कारण है कि शिवरीनारायण आज भी छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : जल संरक्षण और हर घर तक स्वच्छ पेयजल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को मिशन मोड में करें पूरा – मुख्यमंत्री साय

मार्च 2028 तक सभी जल संरचनाओं को पूर्ण करने के निर्देश, गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर

जल जीवन मिशन की जिलेवार नियमित समीक्षा करें कलेक्टर, बाधाओं का तत्काल करें समाधान

पूर्ण हो चुके कार्यों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश

कोरिया, धमतरी और राजनांदगांव सहित अन्य जिलों के बेहतर प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना

जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को मिशन मोड में करें पूरा - मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 10 सितंबर 2026। जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रदेश में जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हो और प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिले, इस लक्ष्य के साथ राज्य सरकार जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की जिलेवार प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में काम किया जाए।

जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण को केवल शासकीय कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाना चाहिए। वर्ष 2025-26 में प्रदेश के अनेक जिलों ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब सभी जिलों को अपने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर बेहतर परिणाम के लिए प्रयास करना होगा।

मुख्यमंत्री ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान की जिलेवार प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कोरिया, धमतरी राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में जल संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अनुभव और कार्यप्रणाली का लाभ अन्य जिलों को भी मिलना चाहिए, ताकि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को समान गति मिल सके।

जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश कुमार टोप्पो ने बैठक में बताया कि जल संचय जन भागीदारी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के साथ उससे बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास तभी दीर्घकालिक परिणाम देंगे, जब शासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। जनभागीदारी की इसी शक्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थायी रूप से स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत सभी जिलों के नोटिफाइड नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अभियान की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जाए तथा जहां भी कमियां सामने आएं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे हों।

हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाना हमारा लक्ष्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। प्रदेश के प्रत्येक घर तक पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में इसकी नियमित समीक्षा करें और जहां भी प्रशासनिक, तकनीकी अथवा क्रियान्वयन संबंधी बाधाएं आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराएं।
उन्होंने कहा कि केवल अधोसंरचना निर्माण ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ परिवारों तक पहुंचे और लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाए।

पूर्ण कार्यों के भुगतान में न हो अनावश्यक विलंब

मुख्यमंत्री श्री साय ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों को निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता के अनुरूप पूर्ण किया जा चुका है, उनका भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर मिशन की नियमित समीक्षा करते हुए प्रेजेंटेशन में सामने आई कमियों और समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। योजना से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय से शेष कार्यों को गति दी जाए।

हर जिले की प्राथमिकता बने जल सुरक्षा

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों में जल संरक्षण और हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्थानीय परिस्थितियों और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए तथा जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संचय जन भागीदारी अभियान और जल जीवन मिशन सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े हैं। इन प्रयासों के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां वर्तमान में लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलेगी, वहीं भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार होगी।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने का अवसर है। इसके लिए शासन-प्रशासन के साथ जनभागीदारी को और मजबूत करते हुए प्रत्येक जिले को अपनी पूरी क्षमता से कार्य करना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां जल का बेहतर संरक्षण हो, जल स्रोत सुरक्षित और समृद्ध हों तथा प्रत्येक परिवार को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो।

बैठक में मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, जल संसाधन विभाग के सचिव आर. एस. टोप्पो, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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कोरबा

सतरेगा पर्यटन रिसॉर्ट के इलेक्ट्रिक सर्किट बोर्ड में किंग कोबरा घुस कर बैठा, जितेंद्र सारथी ने किया खतरनाक रेस्क्यु

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कोरबा। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतरेगा पिकनिक स्पॉट के रिसॉर्ट में सुबह उस वक्त पर्यटनों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया, जब विद्युत मीटर बोर्ड के पीछे करीब 8 फीट लंबा किंग कोबरा छिपकर बैठा मिला। किंग कोबरा की जानकारी मिलते ही रेस्ट हाउस के मैनेजर इस्तीखार खान ने तत्काल वन विभाग एवं नोवा नेचर संस्था के सदस्य जितेंद्र सारथी को सूचना दिया, जिसके बाद सारथी ने अपने अजगर बहार के स्थानीय टीम के सदस्य कमलेश, देवेंद्र, राम, गौतम, दिल ,नरेश, देव मरावी को तत्काल सतरेगा के लिए रवाना कर साथ ही इसकी जानकारी कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय दिया एवं उनके निर्देशानुसार उपवनमण्डलाधिकारी रामसिंह राठिया उत्तर के मार्गदर्शन एवं बालकों रेंजर जयंत सरकार के नेतृत्व में जितेंद्र सारथी एवं सिद्धांत जैन कोरबा से रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंच कर सर्वप्रथम विद्युत विभाग को सूचना देकर बिजली को बंद करवाया गया, फिर पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, किंग कोबरा सर्किट बोर्ड के पीछे बेहद संकरी जगह में छिपा हुआ था, जिसके कारण उसे बाहर निकालना टीम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे किंग कोबरा को सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

रेस्क्यू के दौरान किंग कोबरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ लग गई, इतने फुर्तीले और लंबे सांप को देख कर लोग जिज्ञासा वश फोन से वीडियो बनाने से नहीं चुके, साथ ही मौजूद लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, सफल रेस्क्यू के बाद पंचनामा के पश्चात किंग कोबरा को उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।

कोरबा जिले के लेमरू, बालको , पसरखेत , करतला, कुदमुरा एवं आसपास के वन क्षेत्रों से पिछले कुछ समय से छोटे आकार के किंग कोबरा लगातार सामने आ रहे हैं, छोटे किंग कोबरा का बार-बार मिलना इस क्षेत्र में इनके प्राकृतिक प्रजनन और अनुकूल आवास की उपलब्धता का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, साथ ही यह बात भी सिद्ध करता हैं कि एक ही सांप बार बार रेस्क्यु नहीं हो रहे बल्कि सभी किंग कोबरा दूसरे से भिन्न हैं। हालांकि, क्षेत्र में इनकी वास्तविक संख्या और आबादी की स्थिति निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्थानीय लोगों में भी किंग कोबरा और अन्य वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ रही है। आज किसी क्षेत्र में किंग कोबरा दिखाई देने पर लोग उसे मारने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देते हैं। सूचना का समय पर मिलना और सांप का सुरक्षित रेस्क्यू होकर पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।

वन विभाग एवं नोवा नेचर ने आम लोगों से अपील की है कि किंग कोबरा या किसी भी सांप के दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखें और स्वयं पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें, तत्काल प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

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छत्तीसगढ़

कांग्रेस बोली-छत्तीसगढ़ की खदान कौड़ियों के भाव बेच रही बीजेपी…:हसदेव-अरण्य में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर सवाल,जयराम रमेश-विकास उपाध्याय ने सरकार को घेरा

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर हसदेव के जंगल और खनिज संसाधन निजी कंपनियों को सौंपने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने नीलामी को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- ‘छत्तीसगढ़ की खदान कौड़ियों के भाव बेची जा रही हैं।’ कांग्रेस नेता ने वीडियो जारी कर सरकार से इस फैसले पर जवाब मांगा है।

कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।

कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।

तारा कोल ब्लॉक की नीलामी में सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड विजेता बनी है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, यह कंपनी मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।

कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।

कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।

विधानसभा ने नई खदानों के खिलाफ पारित किया था प्रस्ताव

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव-अरण्य में किसी नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया था।

इसके बाद 16 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि हसदेव-अरण्य में किसी नई खदान के आवंटन या विकास की जरूरत नहीं है।

कांग्रेस का दावा है कि 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉक्स को नीलामी प्रक्रिया से डीनोटिफाई कर दिया था। इसके बावजूद अब तारा ब्लॉक की दोबारा नीलामी की गई है। इसका नाम बदलकर तारा (रिवाइज्ड) किया गया है।

कांग्रेस पूर्व विधायक विकास उपाध्याय।

कांग्रेस पूर्व विधायक विकास उपाध्याय।

विकास उपाध्याय का बीजेपी सरकार पर हमला

कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बीजेपी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि लगातार छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को बेचने का काम बीजेपी पार्टी कर रही है। फिर से 9 ब्लॉको का आवंटन कर दिया गया और टेंडर प्रक्रिया चालू कर दी गई।

बीजेपी सरकार को छत्तीसगढ़ के लोगों से कोई लेना देना नहीं है। कौड़ियों के दाम पर जमीन को बेचा जा रहा है। कांग्रेस पार्टी पूर्व में भी विरोध किया। स्थानीय आदिवासी लगातार विरोध कर रहे है। इसके बाद भी कीमती खदानों को भारतीय जनता पार्टी को चंदा देने वालों को मामूली कीमत में दिया जा रहा है।

तारा कोल ब्लॉम में 4 हजार एकड़ से ज्यादा घना जंगल होने का दावा किया गया है।

तारा कोल ब्लॉम में 4 हजार एकड़ से ज्यादा घना जंगल होने का दावा किया गया है।

5 हजार एकड़ में ब्लॉक, 4 हजार एकड़ से ज्यादा जंगल

तारा कोल ब्लॉक करीब 5 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसमें 4 हजार एकड़ से ज्यादा घना जंगल होने का दावा किया गया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक खनन शुरू होने पर 10 लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई का खतरा है। उनका कहना है कि इसका असर जंगल पर निर्भर आदिवासी समुदाय और उनकी रोजमर्रा की आजीविका पर पड़ेगा।

लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास खनन पर सवाल

कांग्रेस ने लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास खनन को लेकर भी चिंता जताई है। नेताओं का कहना है कि इससे हाथियों की आवाजाही का रास्ता प्रभावित हो सकता है। साथ ही दूसरी वन्य प्रजातियों के सामने भी खतरा बढ़ सकता है।

हसदेव के जंगलों को बचाने के लिए स्थानीय आदिवासी समुदाय करीब 15 वर्षों से ग्राम सभा प्रस्ताव, धरना, जन अभियान और विरोध मार्च के जरिए आवाज उठाता रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्राकृतिक जंगल काटकर कहीं और पौधे लगाने से पुराने जंगल की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की भरपाई नहीं की जा सकती।

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