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छत्तीसगढ़

शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम

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 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम
 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम
 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम
 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम
 शिवरीनारायण: आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनुपम संगम

शिवरीनारायण। छत्तीसगढ़ की पावन धरती अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों और धार्मिक आस्थाओं के लिए देशभर में विशेष पहचान रखती है। इन्हीं पवित्र स्थलों में एक नाम अत्यंत श्रद्धा और गौरव के साथ लिया जाता है, शिवरीनारायण। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के त्रिवेणी संगम पर बसा यह नगर केवल एक धार्मिक तीर्थ ही नहीं, बल्कि संस्कृति, स्थापत्य कला, इतिहास और पर्यटन का अद्भुत केंद्र भी है। सदियों से यह स्थान वैष्णव परंपरा, रामायणकालीन मान्यताओं और लोक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है।

शिवरीनारायण का उल्लेख छत्तीसगढ़ की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान के रूप में किया जाता है। यह नगर विभिन्न राजवंशों की कला, स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं को अपने भीतर समेटे हुए है। यहां के मंदिरों की भव्यता, पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और धार्मिक मान्यताएं देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

रामायणकालीन आस्था से जुड़ा शिवरीनारायण

 शिवरीनारायण का संबंध रामायणकालीन घटनाओं से भी माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार यह वही पावन भूमि है जहां माता शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेमपूर्वक जूठे बेर खिलाए थे। कहा जाता है कि शबरी की तपोभूमि होने के कारण इस स्थान का नाम शबरीनारायण पड़ा, जो समय के साथ शिवरीनारायण के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यहां स्थित शबरी देवी मंदिर आज भी भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है। इस पावन स्थल की विशेषता यह है कि यहां केवल वैष्णव परंपरा ही नहीं, बल्कि शैव, जैन और बौद्ध संस्कृतियों का भी अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। यही कारण है कि शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एकता और धार्मिक समरसता का जीवंत प्रतीक बन गया है।

नर नारायण मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण

 शिवरीनारायण का सबसे प्रमुख आकर्षण नर नारायण मंदिर है। लगभग बारहवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण राजा शबर ने करवाया था। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर की गई सूक्ष्म नक्काशी आज भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

 मंदिर के गर्भगृह में भगवान नारायण की अत्यंत सुंदर प्रतिमा स्थापित है, जो खुदाई के दौरान प्राप्त हुई थी। इसके समीप लक्ष्मण की प्रतिमा भी स्थापित है। भगवान विष्णु के दस अवतारों, नवग्रहों तथा विभिन्न देवी-देवताओं का अत्यंत आकर्षक चित्रण मंदिर की कला को विशिष्ट बनाता है। प्रवेश द्वार पर गंगा, यमुना और सरस्वती की मूर्तियों के साथ नाग, कच्छप और मगर जैसे प्रतीकों का अंकन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक दर्शन को दर्शाता है। मंदिर परिसर में स्थित स्तंभों पर की गई कलाकारी मध्यकालीन शिल्पकला की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती है। यही कारण है कि नर नारायण मंदिर इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और कला प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

केशव नारायण मंदिर की भव्यता

नर नारायण मंदिर के सामने स्थित केशव नारायण मंदिर भी अपनी भव्यता और प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है। बारहवीं शताब्दी के इस मंदिर में भगवान विष्णु की अत्यंत प्राचीन और दिव्य प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की संरचना, स्तंभों पर उकेरी गई चित्रकारी तथा पत्थरों पर की गई नक्काशी इसकी कलात्मक समृद्धि को दर्शाती है। मंदिर में भगवान विष्णु के दशावतारों का सुंदर चित्रण किया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल धार्मिक शांति का अनुभव करते हैं, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला की महान परंपरा से भी परिचित होते हैं।

शबरी देवी मंदिर – भक्ति और समर्पण का प्रतीक

 भगवान विष्णु के चरणों के समीप जिस स्त्री की प्रतिमा अंकित है, उसे माता शबरी का स्वरूप माना जाता है। पंचरत्न शैली में निर्मित यह मंदिर ईंटों से बना एक सुंदर और प्राचीन मंदिर है। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर विष्णु के चौबीस अवतारों का चित्रण इसकी धार्मिक महत्ता को दर्शाता है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और निष्कपट प्रेम का प्रतीक भी है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु माता शबरी की अटूट भक्ति को स्मरण कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।

चंद्रचूड़ महादेव और जगन्नाथ मंदिर

नर नारायण मंदिर के समीप स्थित चंद्रचूड़ महादेव मंदिर शिव भक्ति का प्रमुख केंद्र है। चेदि संवत 919 में निर्मित यह मंदिर क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है। यहां प्राप्त कलचुरी कालीन शिलालेख इतिहास और संस्कृति के शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं। वहीं वर्ष 1927 में निर्मित जगन्नाथ मंदिर अपनी विशिष्ट संरचना और धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के समीप स्थित विशाल वटवृक्ष को ‘कल्पवट’ या ‘माधव कटोरा’ कहा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि इसके पत्ते दोने के आकार के दिखाई देते हैं। माघ पूर्णिमा के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जो लगभग पंद्रह दिनों तक चलता है। इस दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

त्रिवेणी संगम: प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम दृश्य

 शिवरीनारायण की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां का त्रिवेणी संगम। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों का संगम इस नगर को आध्यात्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से विशेष महत्व प्रदान करता है। संगम का स्वच्छ और शांत वातावरण पर्यटकों को अत्यंत आकर्षित करता है। नदियों के किनारे फैले खेत, हरियाली और शांत परिवेश प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं। सूर्याेदय और सूर्यास्त के समय संगम का दृश्य अत्यंत मनोहारी दिखाई देता है। धार्मिक स्नान, पूजा-अर्चना और नौकायन जैसी गतिविधियां यहां के पर्यटन को और अधिक आकर्षक बनाती हैं।

लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर: आस्था का प्राचीन केंद्र
    
     शिवरीनारायण में स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का मंदिर है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सिरपुर के सोमवंशी राजाओं ने करवाया था। मंदिर में प्राप्त शिलालेखों में तत्कालीन शासकों का उल्लेख मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को और अधिक बढ़ाते हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित अद्भुत शिवलिंग को लेकर अनेक धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। लोककथाओं के अनुसार लंका विजय के बाद अयोध्या लौटते समय लक्ष्मण किसी रोग से पीड़ित हो गए थे। तब उन्होंने यहां भगवान शंकर की आराधना कर सवा लाख शिवलिंग स्थापित किए और रोगमुक्त हुए। आज भी श्रद्धालु यहां सवा लाख चावल के दाने अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। महाशिवरात्रि और अन्य पर्वों के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।

आसपास के धार्मिक स्थल

 शिवरीनारायण के आसपास का प्राचीन शिव मंदिर भी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां भगवान शिव की विशाल प्रतिमा की पूजा ‘दूल्हादेव’ के रूप में की जाती है। शिव के साथ शक्ति और कंकालिन देवी की पूजा ग्राम देवी के रूप में होती है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में स्थित अनेक छोटे-बड़े मंदिर और ऐतिहासिक स्थल इस पूरे क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं रखते हैं।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा
     
शिवरीनारायण केवल धार्मिक महत्व का केंद्र नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन विकास का भी महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, परिवहन और रोजगार को नई गति मिलती है। धार्मिक मेलों और उत्सवों के दौरान क्षेत्र की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलती है, जिससे लोककला और लोकसंस्कृति को भी संरक्षण मिलता है।

सांस्कृतिक विरासत एवं समानता का जीवंत प्रतीक

 शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना, धार्मिक आस्था और स्थापत्य वैभव का अद्भुत संगम है। यहां की प्राचीन परंपराएं, मंदिरों की भव्यता, त्रिवेणी संगम का शांत वातावरण और रामायणकालीन मान्यताएं इस स्थल को विशेष बनाती हैं। यह केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और अध्यात्म की जीवंत विरासत है। शिवरीनारायण आने वाला प्रत्येक व्यक्ति यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक गौरव और प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत हुए बिना नहीं रह सकता। यही कारण है कि शिवरीनारायण आज भी छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

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छत्तीसगढ़

बेमेतरा: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जन समस्या निवारण शिविर में सुनीं नागरिकों की समस्याएं

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आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : अरुण साव

आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : श्री अरुण साव
आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : श्री अरुण साव
आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : श्री अरुण साव
आमजनों के हितों के लिए सरकार प्रतिबद्ध : श्री अरुण साव

बेमेतरा। उप मुख्यमंत्री तथा बेमेतरा जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव आज बेरला विकासखण्ड के आनंदगांव में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में शामिल हुए। उन्होंने इस दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, मांगों एवं शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने जन समस्या निवारण शिविर में कहा कि लोगों को अपने जायज कार्यों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, यह प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवेदनशीलता एवं सुशासन सरकार की कार्यशैली का प्रमुख आधार है तथा आमजनों के हितों की रक्षा के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिकों ने राजस्व, पेयजल, सड़क, बिजली तथा विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि हर आवेदन को गंभीरता से लेते हुए त्वरित निराकरण किया जाए।

गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार

शिविर को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रदेश सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सरकार का मुख्य उद्देश्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश में चौमुखी विकास हो रहा है। सरकार द्वारा जनता के हित में लगातार बड़े निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

सरकार जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का कर रही समाधान

बेमेतरा विधायक दीपेश साहू ने कहा कि सरकार जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनने और उनका निराकरण करने का कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

विभिन्न योजनाओं के हितग्राही हुए लाभान्वित

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शिविर में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित किया। महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत नोनी सुरक्षा योजना के तहत 5 बालिकाओं को पंजीयन पत्र प्रदान किए गए। इसके अलावा 8 गर्भवती माताओं की गोदभराई तथा 5 बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। टीबी उन्मूलन अभियान के अंतर्गत 3 हितग्राहियों को सुपोषण किट वितरित की गई तथा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास पूर्ण होने पर 5 हितग्राहियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी गईं।

पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने हाई स्कूल उपकेंद्र परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के दौर में पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है तथा यह आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से पौधारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

बीज पुंसवन अभियान का किया शुभारंभ

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए बीज पुंसवन अभियान का शुभारंभ किया। इस विशेष बीज पुंसवन को मिट्टी, गोबर एवं गोमूत्र के मिश्रण से तैयार किया गया है, जिसके भीतर बीज रखा गया है। बरसात के मौसम में इसे लगाने पर पौधा अंकुरित होगा। इस पहल से व्यापक स्तर पर पौधारोपण को बढ़ावा मिलेगा।

बेमेतरा की कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई, एसएसपी रामकृष्ण साहू, छत्तीसगढ़ विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद रजक और जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती कल्पना योगेश तिवारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में कार्यक्रम में उपस्थित थे।

18.65 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन

उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने अपने एक दिवसीय बेमेतरा प्रवास के दौरान गोश्वारा क्षेत्र में विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 18 करोड़ 65 लाख 07 हजार रुपए की लागत के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग अंतर्गत 46.22 लाख रुपए की लागत से निर्मित 3 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत 12 करोड़ 87 लाख 80 हजार रुपए की लागत से निर्मित एक कार्य का लोकार्पण किया गया।

इसी प्रकार जनपद पंचायत बेरला अंतर्गत 4 करोड़ 53 लाख 54 हजार रुपए की लागत से 4 कार्यों का भूमिपूजन तथा 77.51 लाख रुपए की लागत से 4 कार्यों का लोकार्पण किया गया। इस प्रकार कुल 7 कार्यों का भूमिपूजन एवं 5 कार्यों का लोकार्पण किया गया। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र में पेयजल, आधारभूत संरचना एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा तथा आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के लिए बड़ी सौगात

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं विधायक दीपेश साहू की मांग पर विभिन्न विकास कार्यों हेतु राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने जामगांव एवं लावातरा में सीसी रोड निर्माण के लिए 10-10 लाख रुपए स्वीकृत किए। इसके अतिरिक्त ग्राम चेट में सीसी रोड निर्माण हेतु 5 लाख रुपए, बारगांव में सीसी रोड निर्माण हेतु 5 लाख रुपए, बारगांव में मुक्तिधाम निर्माण हेतु 6.25 लाख रुपए, सुरहोली में व्यवसायिक परिसर निर्माण हेतु 4.95 लाख रुपए तथा जमघट में सीसी रोड निर्माण हेतु 5 लाख रुपए स्वीकृत करने की घोषणा की। इनके साथ ही उप मुख्यमंत्री श्री साव ने नगरीय निकाय भिंभौरी, बेरला एवं कुसमी में विकास कार्यों के लिए 1-1 करोड़ रुपए स्वीकृत करने की घोषणा की। इन घोषणाओं से क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास को नई गति मिलेगी तथा ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में जनसुविधाओं का विस्तार होगा।

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छत्तीसगढ़

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने शिक्षा विभाग दफ्तर घेरा:गेट पर ताला लगाकर जताया विरोध, सरकारी स्कूलों की बढ़ी फीस वापस लेने की मांग

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रायपुर, एजेंसी। रायपुर में सरकारी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने बैरन बाजार स्थित शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय का घेराव किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने किया। कांग्रेस नेताओं ने कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगाकर विरोध जताया और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

रायपुर में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन

रायपुर में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन

महंगाई के बीच फीस बढ़ाना गलत

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले से महंगाई से परेशान जनता पर अब स्कूल फीस बढ़ाकर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल, गैस, बिजली और राशन की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार को फीस बढ़ाने की बजाय राहत देनी चाहिए थी।

कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर विभिन्न मदों में फीस बढ़ा दी है। खेलकूद, प्रायोगिक परीक्षा, लैब, स्काउट-गाइड और निजी परीक्षा शुल्क में भी वृद्धि की गई है।

फीस माफी की मांग

शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने मांग की कि इस साल सरकारी स्कूलों की पूरी फीस माफ की जाए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कोरोना काल में फीस माफ की थी और स्वामी आत्मानंद स्कूल जैसे मॉडल शुरू किए थे।

शिक्षा व्यवस्था बदहाल

पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया। वहीं पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार बढ़ने का दावा करते हुए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिक्षा विभाग कार्यालय के बाहर धरना दिया और फीस वृद्धि वापस लेने की मांग की।

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कोरबा

कोरबा में मिली लाश का खुलासा:पुलिस हत्या मान रही थी, फोरेंसिक जांच में आत्महत्या निकली, मानसिक रूप से परेशान था मृतक

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कोरबा। कोरबा के सीएसईबी चौकी क्षेत्र स्थित कोहड़िया में 10 मई को सड़क किनारे मिली खून से सनी लाश के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जिस मामले की जांच हत्या मानकर कर रही थी, वह पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद आत्महत्या निकला।

बसंत पटेल (37) की रक्तरंजित लाश सड़क किनारे झाड़ियों में मिली थी। घटनास्थल पर खून के धब्बे और शव घसीटने जैसे निशान मिलने से हत्या की आशंका जताई गई थी।

लाश मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी

लाश मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी

टूटी बीयर बोतल से खुद पर किया हमला

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने फोरेंसिक और डॉग स्क्वायड टीम को मौके पर बुलाया था। घटनास्थल से एक टूटी हुई बीयर की बोतल भी बरामद हुई थी।

सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि पीएम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच में हत्या के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। जांच में सामने आया कि मृतक ने टूटी बीयर बोतल के धारदार कांच से खुद पर हमला किया था।

डॉक्टरों और फोरेंसिक टीम ने चोटों की जांच के बाद पुष्टि की कि सभी घाव स्वयं पहुंचाए गए थे।

आवश्यक कार्रवाई करते हुए पुलिसकर्मी

आवश्यक कार्रवाई करते हुए पुलिसकर्मी

मानसिक रूप से परेशान था मृतक

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि बसंत पटेल मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उनका इलाज चल रहा था। घटना के बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई, लेकिन किसी संदिग्ध व्यक्ति की मौजूदगी नहीं मिली। इससे आत्महत्या की आशंका और मजबूत हुई।

फैक्ट्री कर्मचारी था मृतक

बसंत पटेल मूल रूप से मस्तूरी के सोनसरी गांव के निवासी थे। पिछले तीन वर्षों से वे सर्वमंगला बरमपुर में किराए के मकान में रह रहे थे और इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री में काम करते थे।

9 मई की सुबह वे काम पर जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन रात तक वापस नहीं लौटे। अगले दिन 10 मई की सुबह उनकी लाश कोहड़िया इलाके में मिली थी।

मृतक शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे हैं। बताया जा रहा है कि घटना से दो दिन पहले ही वे अपने छोटे भाई की शादी में शामिल होकर गांव से कोरबा लौटे थे।

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