Connect with us

छत्तीसगढ़

रायपुर : विशेष लेख : मियावकी वन तकनीक से हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम

Published

on

’कम समय में घने जंगल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को मिल रही नई दिशा’

  •   धनंजय राठौर ,  संयुक्त संचालक 
  •  अशोक कुमार चंद्रवंशी,  सहायक जनसंपर्क अधिकारी 
मियावकी वन तकनीक से हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम

वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावाकी तकनीक एक बेहद प्रभावी और लोकप्रिय विधि बन गई है। जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक केवल 2-3 वर्षों में बंजर भूमि को घने, आत्मनिर्भर सूक्ष्म वनों में बदल देती है। पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में यह विधि 10 गुना तेजी से बढ़ती है और 30 गुना अधिक घने जंगल बनाती है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।
         छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावकी वन तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है। राज्य में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा इस तकनीक के जरिए शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की जा रही है। मियावकी पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व में लगाया जाता है, जिससे मात्र 3 से 5 वर्षों में घना जंगल तैयार हो जाता है।

’राज्य में तेजी से बढ़ रहा सघन वनीकरण’
       छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 से मियावकी पद्धति के तहत लगातार वृक्षारोपण किया जा रहा है। वर्ष 2022 में कोटा मण्डल में एनटीपीसी लिमिटेड के सहयोग से 1 हेक्टेयर क्षेत्र में 23 हजार पौधे तथा 0.3 हेक्टेयर में 7 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2023 में कोटा के भिल्मी क्षेत्र में 6.4 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधों का रोपण किया गया। वहीं गेवरा क्षेत्र में 2 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2024 में कोटा के उच्चभट्टी क्षेत्र में 3.2 हेक्टेयर में 32 हजार पौधे लगाए गए। इसके अलावा रायगढ़ मण्डल के तिलईपाली और छाल क्षेत्रों में कुल 3.75 हेक्टेयर भूमि पर 37 हजार 500 पौधों का सफल रोपण किया गया।
’वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जारी’
         वर्तमान में राज्य के कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य तेजी से जारी है। बारनवापारा मण्डल में ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत 6 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। कोरबा और रायगढ़ क्षेत्रों में साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के सहयोग से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। वहीं विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत महानदीकोलफील्ड लिमिटेड द्वारा 1.9 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अरपा नदी के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरित क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।

’पर्यावरण संरक्षण में मिल रहे बहुआयामी लाभ’
         विशेषज्ञों के अनुसार मियावकी वन सामान्य जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। यह तकनीक वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने, भू-जल स्तर सुधारने और मिट्टी संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन वनों की शुरुआती वर्षों में देखभाल की जाती है, जिसके बाद ये जंगल स्वतः विकसित होने लगते हैं। इससे रखरखाव की लागत कम होती है और लंबे समय तक पर्यावरणीय लाभ मिलता है। 
’बंजर डंप क्षेत्र से हरित जंगल बनने की ओर गेवरा की प्रेरक पहल’
          छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र के 12.45 हेक्टेयर डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण किया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।

’जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां तैयार हो रहा जंगल’
        कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है और ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष तथा अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्रों में पौधों का उगना बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक पद्धति और सतत प्रयासों से इस बंजर भूमि को अब हरियाली में बदला जा रहा है।
’वैज्ञानिक तरीके से किया गया पौधारोपण’
         डंप क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग किया गया। जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए तथा 3 से 4 फीट ऊंचाई वाले स्वस्थ पौधों का रोपण किया गया। इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इससे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों और अन्य वन्य जीवों के लिए भी उपयुक्त आवास बन सकेगा।
निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता
        शुरुआती 2-3 वर्षों की देखभाल के बाद, यह वन पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाता है और इसे किसी उर्वरक या पानी की आवश्यकता नहीं होती है। रोपण के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, खाद, निंदाई-गुड़ाई, घास कटाई और सुरक्षा का कार्य लगातार किया जा रहा है। मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2025 से 2029 तक पांच वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड गेवरा को सौंपा जाएगा।
’हरित भविष्य की ओर मजबूत पहल’
       कम जगह में घने जंगल बनाकर शहरों में प्रदूषण (धूल और ध्वनि) को कम करने में सहायक होते हैं। ये वन पारंपरिक वनों की तुलना में 30 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं। गेवरा की यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर प्रयासों से बंजर और पत्थरीली भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र सघन हरित वन और जैव विविधता से भरपूर मानव निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।

Continue Reading

कोरबा

सेवा संकल्प अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति गठित

Published

on

कोरबा, 10 सितम्बर 2026। जिले में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन, कार्ययोजना तैयार करने तथा प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति का गठन किया गया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत समिति के अध्यक्ष होंगे, जबकि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोरबा को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
जिला स्तरीय समिति में पुलिस अधीक्षक, वन मंडलाधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, खाद्य अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग, कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग, कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जिला परिवहन अधिकारी, सहायक संचालक जनसंपर्क तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद कोरबा को सदस्य बनाया गया है।
अभियान के अंतर्गत जिले में विभिन्न जनभागीदारी एवं सेवा गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अभियान के दौरान ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट’, ‘नमो सेवा गाथा’ नुक्कड़ नाटक, ‘सेवा ज्योति यात्रा’ और ‘जल जन सेवा संकल्प’ जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के सफल संचालन के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शासकीय अमले एवं उपलब्ध संसाधनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
अभियान के दौरान आयोजित होने वाली प्रत्येक गतिविधि का फोटो एवं वीडियो अभिलेखीकरण करते हुए जिलेवार प्रगति प्रतिवेदन नियमित रूप से राज्य स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। प्रचार-प्रसार एवं सोशल मीडिया गतिविधियों में शासन द्वारा निर्धारित हैशटैग, फ्रेम एवं लोगो का ही उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी आयोजनों में वित्तीय मितव्ययिता बरतते हुए उपलब्ध शासकीय संसाधनों एवं अधोसंरचना का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति अभियान की गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागों के बीच समन्वय तथा निर्धारित कार्यक्रमों की सतत मॉनिटरिंग करेगी। अभियान का उद्देश्य जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए जनभागीदारी के माध्यम से सेवा एवं विकास गतिविधियों को प्रभावी रूप से जन-जन तक पहुंचाना है।

Continue Reading

कोरबा

इलेक्टोरल लिट्रेसी क्लब के युवा छात्र-छात्राएं रीजनल कॉन्फ्रेस रायपुर में होंगे सम्मिलित

Published

on

कोरबा 10 सितंबर 2026। भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के निर्देशन में 8 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर में इलेक्टोरल लिट्रेसी क्लब के अंतर्गत रीजनल कॉन्फ्रेस ऑन ईएलसी एंड ईसीआईनेट का आयोजन  किया जा रहा है।
भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार आयोजित उक्त कार्यक्रम के पूर्व तैयारी हेतु दिनांक 10.09.2026 को कार्यालय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ के उच्च अधिकारियों द्वारा वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित की गई।
उक्त वीडियो कांफ्रेंस में श्रीमती माधुरी सोम ठाकुर अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी, सतीश प्रकाश सिंह सहायक जिला स्वीप नोडल अधिकारी एवं  विधानसभा स्तरीय ईएलसी नोडल अधिकारी सहायक प्राध्यापकगण,स्वीप नोडल अधिकारी, सामान्य निर्वाचन कार्यालय के कर्मचारी उपस्थित हुए।
उक्ताशय की जानकारी देते हुए सहायक जिला स्वीप नोडल अधिकारी सतीश प्रकाश सिंह ने बताया कि राज्य स्तरीय वीडियो कांफ्रेंस में 8 अक्टूबर 2026 के रीजनल कॉन्फ्रेस की समुचित तैयारी तथा समस्त जिलों के स्कूलों, कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटी में गठित इलेक्टोरल लिट्रेसी क्लब के गठन एवं ईसीआई नेट पर ऑनबोर्डिंग की स्थिति की समीक्षा की गई।
सहायक जिला स्वीप नोडल अधिकारी श्री सिंह ने बताया कि राजधानी रायपुर में आयोजित किए जा रहे रीजनल कॉन्फ्रेस ऑन ईएलसी के कार्यक्रम में कोरबा जिले से प्रत्येक विधानसभा से भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार चिन्हांकित शासकीय-अशासकीय महाविद्यालयों, हाई स्कूल हायर सेकेंडरी, उच्च शिक्षण संस्थानों से चयनित किए जाने वाले युवा छात्र-छात्राये, ईएलसी के प्रभारी नोडल अधिकारी, विधान सभा इलेक्टोरल लिट्रेसी क्लब म्स्ब् के प्रभारी नोडल अधिकारी कोऑर्डिनेटर आदि सम्मिलित होंगे। उन्होंने बताया कि इलेक्टोरल लिट्रेसी क्लब म्स्ब् के गठन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और युवा नागरिकों को लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी प्रक्रियाओं तथा भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका व कार्यप्रणाली से परिचित कराना हैं। इलेक्टोरल लिट्रेसी क्लब के गठन का उद्देश्य हर युवा भारतीय नागरिक को भारत की चुनावी प्रणाली प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार बनाना हैं।

Continue Reading

कोरबा

समय पर मिली स्वास्थ्य सुविधा, गर्भवती महिला श्रीमती माधुरी तिर्की की स्थिति सामान्य

Published

on

गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सुविधा से नहीं किया गया वंचित

कोरबा, 10 सितम्बर 2026। कोरबा विकासखण्ड के ग्राम राजाडाही निवासी गर्भवती महिला श्रीमती माधुरी तिर्की को जांच के दौरान पेट में दर्द की शिकायत थी। सूचना प्राप्त होने पर मितानिन द्वारा महिला को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की कार्यवाही की गई। महिला को दिनांक 07 सितम्बर 2026 को लगभग प्रातः 9.30 बजे उप स्वास्थ्य केन्द्र बासिन ले जाया गया, जहां पदस्थ एएनएम श्रीमती पॉलिना तिर्की द्वारा आवश्यक जांच की गई तथा चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार प्रदान किया गया।
जांच के समय तत्काल प्रसव की स्थिति अथवा आपातकालीन प्रसव पीड़ा के स्पष्ट लक्षण नहीं पाए गए। जांच की सभी रिपोर्ट सामान्य पाई गईं। आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा मिलने के बाद महिला को चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार निगरानी में रखा गया है। वर्तमान में श्रीमती माधुरी तिर्की स्वस्थ हैं।
श्रीमती तिर्की की प्रसव की अनुमानित तिथि 23 सितम्बर 2026 निर्धारित है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर उपचार तथा प्रसव पूर्व आवश्यक परामर्श एवं निगरानी सुनिश्चित करने के लिए मैदानी स्वास्थ्य अमले के माध्यम से लगातार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सुविधा से वंचित नहीं किया गया। महिला के घर से मुख्य मार्ग तक की कुछ ही मीटर का रास्ता अत्यंत खराब एवं दलदली होने के कारण उक्त दूरी महिला को खाट के सहारे तय कराई गई। यह परिस्थिति स्थानीय मार्ग की भौगोलिक स्थिति के कारण उत्पन्न हुई, न कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं कराने के कारण।
गर्भवती महिला को अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर मितानिन द्वारा तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने की कार्यवाही की गई तथा उप स्वास्थ्य केन्द्र में आवश्यक जांच, उपचार एवं चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया गया। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन में राजाडाही के मार्ग के मरम्मत एवं सीसी रोड निर्माण स्थल हेतु पंचायत विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार किया जा है। यथाशीघ्र राशि आबंटन की कार्यवाही पूर्ण कर निर्माण प्रारंभ किया जाएगा। साथ ही राजाडाही बस्ती को पक्के मार्ग से जोड़ने हेतु प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग को भी निरीक्षण करके आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चत करने के निर्देश दिए गए हैं।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677